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सरगुजा जिले के परसा में इस समय झमाझम बारिश हो रही है, जो किसान भाइयों के लिए बहुत ही अच्छी खबर लेकर आई है। इस बारिश के बाद अब किसान चैन की सांस लेने लगेंगे। पानी दिखाई देने और लगातार हो रही इस बारिश के बाद किसान अब अपनी फसलों को बहुत जल्दी-जल्दी लगा सकेंगे, जिससे वे जल्द ही इस काम से फ्री भी हो जाएंगे।

15 hrs ago
user_Hira Ratan Sarthi
Hira Ratan Sarthi
Driver उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
15 hrs ago

सरगुजा जिले के परसा में इस समय झमाझम बारिश हो रही है, जो किसान भाइयों के लिए बहुत ही अच्छी खबर लेकर आई है। इस बारिश के बाद अब किसान चैन की सांस लेने लगेंगे। पानी दिखाई देने और लगातार हो रही इस बारिश के बाद किसान अब अपनी फसलों को बहुत जल्दी-जल्दी लगा सकेंगे, जिससे वे जल्द ही इस काम से फ्री भी हो जाएंगे।

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  • छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के उदयपुर क्षेत्र में मौसम ने अपनी चाल बदल ली है और अब ऐसा लग रहा है कि लगातार हो रही बारिश थमने का नाम नहीं लेगी। मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए अब झमाझम बारिश होने के पूरे आसार बने हुए हैं। यहाँ दिन और रात लगातार पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। बारिश ने अपना पूरा माहौल बना लिया है और लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है, जिसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
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    छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के उदयपुर क्षेत्र में मौसम ने अपनी चाल बदल ली है और अब ऐसा लग रहा है कि लगातार हो रही बारिश थमने का नाम नहीं लेगी। मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए अब झमाझम बारिश होने के पूरे आसार बने हुए हैं। यहाँ दिन और रात लगातार पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। बारिश ने अपना पूरा माहौल बना लिया है और लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है, जिसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
    user_Hira Ratan Sarthi
    Hira Ratan Sarthi
    Driver उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक घोटाले को लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा रही है। इस पेपर लीक घोटाले के संबंध में प्रदर्शन के दौरान क्या बातें कही गई हैं, उसे वीडियो में देखा जा सकता है।
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    दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक घोटाले को लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा रही है। इस पेपर लीक घोटाले के संबंध में प्रदर्शन के दौरान क्या बातें कही गई हैं, उसे वीडियो में देखा जा सकता है।
    user_Santlal Urre
    Santlal Urre
    Voice of people सूरजपुर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा में औद्योगिक दुर्घटना के मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला, जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए जवाब मांगा है। सदन में वेदांता हादसे की गूंज सुनाई दी, जिसके बाद से सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। भूपेश बघेल ने साफ तौर पर कहा कि ऐसी गंभीर दुर्घटनाओं के मामले में केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी उद्योग की लापरवाही से लोगों की जान जाती है, तो कंपनी के शीर्ष प्रबंधन की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की पुरजोर मांग की है।
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    छत्तीसगढ़ विधानसभा में औद्योगिक दुर्घटना के मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला, जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए जवाब मांगा है। सदन में वेदांता हादसे की गूंज सुनाई दी, जिसके बाद से सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। भूपेश बघेल ने साफ तौर पर कहा कि ऐसी गंभीर दुर्घटनाओं के मामले में केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी उद्योग की लापरवाही से लोगों की जान जाती है, तो कंपनी के शीर्ष प्रबंधन की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की पुरजोर मांग की है।
    user_Pradesh Khabar News Network
    Pradesh Khabar News Network
    Media company अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के विरोध में पिछले 197 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है।
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    छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के विरोध में पिछले 197 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है।
    user_Lalji Boudh
    Lalji Boudh
    बिहारपुर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़•
    18 hrs ago
  • रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र से गुजर रही भारतमाला सड़क परियोजना अब प्रशासनिक पारदर्शिता, पर्यावरणीय अनुपालन और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का निर्माण स्वीकृत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) की सीमा से बाहर जाकर किया गया है। निर्माण के दौरान भारी मशीनों के उपयोग और ब्लास्टिंग के कारण स्वीकृत क्षेत्र के बाहर स्थित मंदिर परिसर, सार्वजनिक शौचालय, कुएं, जल स्रोत और अन्य शासकीय संपत्तियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके बाद निर्माण एजेंसी द्वारा मंदिर परिसर और कुछ सरकारी संपत्तियों के पुनर्निर्माण का लिखित आश्वासन देने की बात भी सामने आई है, जिससे नुकसान की पुष्टि और इसके आकलन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा, सिसरिंगा घाट क्षेत्र में सागौन सहित बड़ी संख्या में मूल्यवान पेड़ों को जड़ से उखाड़कर रहस्यमयी ढंग से गायब करने का आरोप है, जिसके निशान आज भी वहां मौजूद हैं। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों के बयान पूरी तरह विरोधाभासी हैं। एक ओर जहां एक अधिकारी ने पेड़ों की कटाई को विभागीय प्रक्रिया के तहत बताया, वहीं उत्पादन इकाई के रेंजर ने स्पष्ट किया कि परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई वर्षों पहले ही पूरी हो चुकी थी और हाल ही में किसी नई कटाई की अनुमति नहीं दी गई थी। इससे इन पेड़ों को हटाने और उनके निस्तारण के रिकॉर्ड की प्रामाणिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। इस पूरे घटनाक्रम में राजस्व, लोक निर्माण, वन, पंचायत और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसे संबंधित विभागों द्वारा किसी संयुक्त सर्वेक्षण या क्षति के आकलन की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरओडब्ल्यू से बाहर निर्माण, क्षतिग्रस्त धार्मिक व सरकारी संपत्तियां, गायब हुए पेड़ और अधिकारियों के परस्पर विरोधी दावे एक व्यापक, स्वतंत्र और दस्तावेज-आधारित जांच की मांग को बेहद मजबूत करते हैं। जब तक संबंधित विभाग इन सभी प्रश्नों के पारदर्शी और दस्तावेजी उत्तर सार्वजनिक नहीं करते, तब तक सुशासन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते रहेंगे।
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    रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र से गुजर रही भारतमाला सड़क परियोजना अब प्रशासनिक पारदर्शिता, पर्यावरणीय अनुपालन और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का निर्माण स्वीकृत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) की सीमा से बाहर जाकर किया गया है। निर्माण के दौरान भारी मशीनों के उपयोग और ब्लास्टिंग के कारण स्वीकृत क्षेत्र के बाहर स्थित मंदिर परिसर, सार्वजनिक शौचालय, कुएं, जल स्रोत और अन्य शासकीय संपत्तियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके बाद निर्माण एजेंसी द्वारा मंदिर परिसर और कुछ सरकारी संपत्तियों के पुनर्निर्माण का लिखित आश्वासन देने की बात भी सामने आई है, जिससे नुकसान की पुष्टि और इसके आकलन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

इसके अलावा, सिसरिंगा घाट क्षेत्र में सागौन सहित बड़ी संख्या में मूल्यवान पेड़ों को जड़ से उखाड़कर रहस्यमयी ढंग से गायब करने का आरोप है, जिसके निशान आज भी वहां मौजूद हैं। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों के बयान पूरी तरह विरोधाभासी हैं। एक ओर जहां एक अधिकारी ने पेड़ों की कटाई को विभागीय प्रक्रिया के तहत बताया, वहीं उत्पादन इकाई के रेंजर ने स्पष्ट किया कि परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई वर्षों पहले ही पूरी हो चुकी थी और हाल ही में किसी नई कटाई की अनुमति नहीं दी गई थी। इससे इन पेड़ों को हटाने और उनके निस्तारण के रिकॉर्ड की प्रामाणिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।

इस पूरे घटनाक्रम में राजस्व, लोक निर्माण, वन, पंचायत और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसे संबंधित विभागों द्वारा किसी संयुक्त सर्वेक्षण या क्षति के आकलन की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरओडब्ल्यू से बाहर निर्माण, क्षतिग्रस्त धार्मिक व सरकारी संपत्तियां, गायब हुए पेड़ और अधिकारियों के परस्पर विरोधी दावे एक व्यापक, स्वतंत्र और दस्तावेज-आधारित जांच की मांग को बेहद मजबूत करते हैं। जब तक संबंधित विभाग इन सभी प्रश्नों के पारदर्शी और दस्तावेजी उत्तर सार्वजनिक नहीं करते, तब तक सुशासन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते रहेंगे।
    user_ऋषभ तिवारी
    ऋषभ तिवारी
    पत्रकार Udaipur (Dharamjaigarh), Raigarh•
    5 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा में महतारी वंदन योजना से महिलाओं के नाम काटे जाने का मुद्दा उठा है। विपक्ष ने सरकार से सवाल पूछा है कि योजना से कितनी महिलाओं के नाम हटाए गए हैं और इसके पीछे क्या कारण हैं। सरकार ने इसके जवाब में पात्रता के आधार पर जांच और सत्यापन की प्रक्रिया का हवाला दिया है। इस संवेदनशील विषय पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा भी हुई। हालांकि, इस योजना से कुल कितनी महिलाओं के नाम हटाए गए हैं, इसकी कोई वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी है।
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    छत्तीसगढ़ विधानसभा में महतारी वंदन योजना से महिलाओं के नाम काटे जाने का मुद्दा उठा है। विपक्ष ने सरकार से सवाल पूछा है कि योजना से कितनी महिलाओं के नाम हटाए गए हैं और इसके पीछे क्या कारण हैं। सरकार ने इसके जवाब में पात्रता के आधार पर जांच और सत्यापन की प्रक्रिया का हवाला दिया है। इस संवेदनशील विषय पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा भी हुई। हालांकि, इस योजना से कुल कितनी महिलाओं के नाम हटाए गए हैं, इसकी कोई वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी है।
    user_रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    Advertising Photographer बैकुंठपुर, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • सरगुजा जिले के परसा में इस समय झमाझम बारिश हो रही है, जो किसान भाइयों के लिए बहुत ही अच्छी खबर लेकर आई है। इस बारिश के बाद अब किसान चैन की सांस लेने लगेंगे। पानी दिखाई देने और लगातार हो रही इस बारिश के बाद किसान अब अपनी फसलों को बहुत जल्दी-जल्दी लगा सकेंगे, जिससे वे जल्द ही इस काम से फ्री भी हो जाएंगे।
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    सरगुजा जिले के परसा में इस समय झमाझम बारिश हो रही है, जो किसान भाइयों के लिए बहुत ही अच्छी खबर लेकर आई है। इस बारिश के बाद अब किसान चैन की सांस लेने लगेंगे। पानी दिखाई देने और लगातार हो रही इस बारिश के बाद किसान अब अपनी फसलों को बहुत जल्दी-जल्दी लगा सकेंगे, जिससे वे जल्द ही इस काम से फ्री भी हो जाएंगे।
    user_Hira Ratan Sarthi
    Hira Ratan Sarthi
    Driver उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग अंतर्गत सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र स्थित बैजनपाठ गांव में आज आकाशीय बिजली गिरने से दो बैलों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब किसान अपने बैलों को चराने के लिए जंगल लेकर गया था, तभी अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। इस हादसे में दोनों बैलों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पीड़ित किसान को हजारों रुपयों का भारी नुकसान पहुंचा है। राहत की बात यह रही कि किसान बैलों से कुछ दूरी पर था, जिसके कारण उसकी जान बाल-बाल बच गई। इस दर्दनाक घटना के बाद से पीड़ित किसान गहरे सदमे में है।
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    छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग अंतर्गत सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र स्थित बैजनपाठ गांव में आज आकाशीय बिजली गिरने से दो बैलों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब किसान अपने बैलों को चराने के लिए जंगल लेकर गया था, तभी अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। इस हादसे में दोनों बैलों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पीड़ित किसान को हजारों रुपयों का भारी नुकसान पहुंचा है। राहत की बात यह रही कि किसान बैलों से कुछ दूरी पर था, जिसके कारण उसकी जान बाल-बाल बच गई। इस दर्दनाक घटना के बाद से पीड़ित किसान गहरे सदमे में है।
    user_प्रदेश उजाला
    प्रदेश उजाला
    अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
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