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रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र से गुजर रही भारतमाला सड़क परियोजना अब प्रशासनिक पारदर्शिता, पर्यावरणीय अनुपालन और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का निर्माण स्वीकृत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) की सीमा से बाहर जाकर किया गया है। निर्माण के दौरान भारी मशीनों के उपयोग और ब्लास्टिंग के कारण स्वीकृत क्षेत्र के बाहर स्थित मंदिर परिसर, सार्वजनिक शौचालय, कुएं, जल स्रोत और अन्य शासकीय संपत्तियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके बाद निर्माण एजेंसी द्वारा मंदिर परिसर और कुछ सरकारी संपत्तियों के पुनर्निर्माण का लिखित आश्वासन देने की बात भी सामने आई है, जिससे नुकसान की पुष्टि और इसके आकलन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा, सिसरिंगा घाट क्षेत्र में सागौन सहित बड़ी संख्या में मूल्यवान पेड़ों को जड़ से उखाड़कर रहस्यमयी ढंग से गायब करने का आरोप है, जिसके निशान आज भी वहां मौजूद हैं। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों के बयान पूरी तरह विरोधाभासी हैं। एक ओर जहां एक अधिकारी ने पेड़ों की कटाई को विभागीय प्रक्रिया के तहत बताया, वहीं उत्पादन इकाई के रेंजर ने स्पष्ट किया कि परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई वर्षों पहले ही पूरी हो चुकी थी और हाल ही में किसी नई कटाई की अनुमति नहीं दी गई थी। इससे इन पेड़ों को हटाने और उनके निस्तारण के रिकॉर्ड की प्रामाणिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। इस पूरे घटनाक्रम में राजस्व, लोक निर्माण, वन, पंचायत और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसे संबंधित विभागों द्वारा किसी संयुक्त सर्वेक्षण या क्षति के आकलन की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरओडब्ल्यू से बाहर निर्माण, क्षतिग्रस्त धार्मिक व सरकारी संपत्तियां, गायब हुए पेड़ और अधिकारियों के परस्पर विरोधी दावे एक व्यापक, स्वतंत्र और दस्तावेज-आधारित जांच की मांग को बेहद मजबूत करते हैं। जब तक संबंधित विभाग इन सभी प्रश्नों के पारदर्शी और दस्तावेजी उत्तर सार्वजनिक नहीं करते, तब तक सुशासन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते रहेंगे।

6 hrs ago
user_ऋषभ तिवारी
ऋषभ तिवारी
पत्रकार Udaipur (Dharamjaigarh), Raigarh•
6 hrs ago

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र से गुजर रही भारतमाला सड़क परियोजना अब प्रशासनिक पारदर्शिता, पर्यावरणीय अनुपालन और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का निर्माण स्वीकृत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) की सीमा से बाहर जाकर किया गया है। निर्माण के दौरान भारी मशीनों के उपयोग और ब्लास्टिंग के कारण स्वीकृत क्षेत्र के बाहर स्थित मंदिर परिसर, सार्वजनिक शौचालय, कुएं, जल स्रोत और अन्य शासकीय संपत्तियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके बाद निर्माण एजेंसी द्वारा मंदिर परिसर और कुछ सरकारी संपत्तियों के पुनर्निर्माण का लिखित आश्वासन देने की बात भी सामने आई है, जिससे नुकसान की पुष्टि और इसके आकलन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा, सिसरिंगा घाट क्षेत्र में सागौन सहित बड़ी संख्या में मूल्यवान पेड़ों को जड़ से उखाड़कर रहस्यमयी ढंग से गायब करने का आरोप है, जिसके निशान आज भी वहां मौजूद हैं। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों के

बयान पूरी तरह विरोधाभासी हैं। एक ओर जहां एक अधिकारी ने पेड़ों की कटाई को विभागीय प्रक्रिया के तहत बताया, वहीं उत्पादन इकाई के रेंजर ने स्पष्ट किया कि परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई वर्षों पहले ही पूरी हो चुकी थी और हाल ही में किसी नई कटाई की अनुमति नहीं दी गई थी। इससे इन पेड़ों को हटाने और उनके निस्तारण के रिकॉर्ड की प्रामाणिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। इस पूरे घटनाक्रम में राजस्व, लोक निर्माण, वन, पंचायत और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसे संबंधित विभागों द्वारा किसी संयुक्त सर्वेक्षण या क्षति के आकलन की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरओडब्ल्यू से बाहर निर्माण, क्षतिग्रस्त धार्मिक व सरकारी संपत्तियां, गायब हुए पेड़ और अधिकारियों के परस्पर विरोधी दावे एक व्यापक, स्वतंत्र और दस्तावेज-आधारित जांच की मांग को बेहद मजबूत करते हैं। जब तक संबंधित विभाग इन सभी प्रश्नों के पारदर्शी और दस्तावेजी उत्तर सार्वजनिक नहीं करते, तब तक सुशासन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते रहेंगे।

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  • रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र से गुजर रही भारतमाला सड़क परियोजना अब प्रशासनिक पारदर्शिता, पर्यावरणीय अनुपालन और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का निर्माण स्वीकृत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) की सीमा से बाहर जाकर किया गया है। निर्माण के दौरान भारी मशीनों के उपयोग और ब्लास्टिंग के कारण स्वीकृत क्षेत्र के बाहर स्थित मंदिर परिसर, सार्वजनिक शौचालय, कुएं, जल स्रोत और अन्य शासकीय संपत्तियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके बाद निर्माण एजेंसी द्वारा मंदिर परिसर और कुछ सरकारी संपत्तियों के पुनर्निर्माण का लिखित आश्वासन देने की बात भी सामने आई है, जिससे नुकसान की पुष्टि और इसके आकलन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा, सिसरिंगा घाट क्षेत्र में सागौन सहित बड़ी संख्या में मूल्यवान पेड़ों को जड़ से उखाड़कर रहस्यमयी ढंग से गायब करने का आरोप है, जिसके निशान आज भी वहां मौजूद हैं। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों के बयान पूरी तरह विरोधाभासी हैं। एक ओर जहां एक अधिकारी ने पेड़ों की कटाई को विभागीय प्रक्रिया के तहत बताया, वहीं उत्पादन इकाई के रेंजर ने स्पष्ट किया कि परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई वर्षों पहले ही पूरी हो चुकी थी और हाल ही में किसी नई कटाई की अनुमति नहीं दी गई थी। इससे इन पेड़ों को हटाने और उनके निस्तारण के रिकॉर्ड की प्रामाणिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। इस पूरे घटनाक्रम में राजस्व, लोक निर्माण, वन, पंचायत और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसे संबंधित विभागों द्वारा किसी संयुक्त सर्वेक्षण या क्षति के आकलन की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरओडब्ल्यू से बाहर निर्माण, क्षतिग्रस्त धार्मिक व सरकारी संपत्तियां, गायब हुए पेड़ और अधिकारियों के परस्पर विरोधी दावे एक व्यापक, स्वतंत्र और दस्तावेज-आधारित जांच की मांग को बेहद मजबूत करते हैं। जब तक संबंधित विभाग इन सभी प्रश्नों के पारदर्शी और दस्तावेजी उत्तर सार्वजनिक नहीं करते, तब तक सुशासन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते रहेंगे।
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    रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र से गुजर रही भारतमाला सड़क परियोजना अब प्रशासनिक पारदर्शिता, पर्यावरणीय अनुपालन और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर विवादों में घिर गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का निर्माण स्वीकृत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) की सीमा से बाहर जाकर किया गया है। निर्माण के दौरान भारी मशीनों के उपयोग और ब्लास्टिंग के कारण स्वीकृत क्षेत्र के बाहर स्थित मंदिर परिसर, सार्वजनिक शौचालय, कुएं, जल स्रोत और अन्य शासकीय संपत्तियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके बाद निर्माण एजेंसी द्वारा मंदिर परिसर और कुछ सरकारी संपत्तियों के पुनर्निर्माण का लिखित आश्वासन देने की बात भी सामने आई है, जिससे नुकसान की पुष्टि और इसके आकलन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

इसके अलावा, सिसरिंगा घाट क्षेत्र में सागौन सहित बड़ी संख्या में मूल्यवान पेड़ों को जड़ से उखाड़कर रहस्यमयी ढंग से गायब करने का आरोप है, जिसके निशान आज भी वहां मौजूद हैं। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों के बयान पूरी तरह विरोधाभासी हैं। एक ओर जहां एक अधिकारी ने पेड़ों की कटाई को विभागीय प्रक्रिया के तहत बताया, वहीं उत्पादन इकाई के रेंजर ने स्पष्ट किया कि परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई वर्षों पहले ही पूरी हो चुकी थी और हाल ही में किसी नई कटाई की अनुमति नहीं दी गई थी। इससे इन पेड़ों को हटाने और उनके निस्तारण के रिकॉर्ड की प्रामाणिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।

इस पूरे घटनाक्रम में राजस्व, लोक निर्माण, वन, पंचायत और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसे संबंधित विभागों द्वारा किसी संयुक्त सर्वेक्षण या क्षति के आकलन की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरओडब्ल्यू से बाहर निर्माण, क्षतिग्रस्त धार्मिक व सरकारी संपत्तियां, गायब हुए पेड़ और अधिकारियों के परस्पर विरोधी दावे एक व्यापक, स्वतंत्र और दस्तावेज-आधारित जांच की मांग को बेहद मजबूत करते हैं। जब तक संबंधित विभाग इन सभी प्रश्नों के पारदर्शी और दस्तावेजी उत्तर सार्वजनिक नहीं करते, तब तक सुशासन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते रहेंगे।
    user_ऋषभ तिवारी
    ऋषभ तिवारी
    पत्रकार Udaipur (Dharamjaigarh), Raigarh•
    6 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में साइबर ठगी के एक महत्वपूर्ण मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जशपुर पुलिस ने पैन कार्ड अपडेट कराने का झांसा देकर ₹3.25 लाख की ऑनलाइन ठगी करने वाले एक आरोपी को झारखंड से गिरफ्तार किया है। यह मामला वर्ष 2022 का है, जिसमें आरोपी पिछले लगभग चार वर्षों से फरार चल रहा था। गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम नीलकंठ दास (उम्र 24 वर्ष) है, जो ग्राम गोपाल गंज, थाना निरसा, जिला धनबाद, झारखंड का निवासी है। आरोपी के विरुद्ध थाना सिटी कोतवाली जशपुर में अपराध क्रमांक 429/2022 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज है। इस मामले में प्रार्थी श्री रामलोचन गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 9 और 10 अक्टूबर 2022 को एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर उन्हें पैन कार्ड अपडेट करने और नेट बैंकिंग चालू कराने का झांसा दिया था। इसके बाद आरोपी ने उनके बैंक खाते से धोखाधड़ी कर कुल ₹3,25,000 की राशि निकाल ली। जशपुर के डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शनों की गहन जांच की। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की राशि फिनो पेमेंट बैंक सहित विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी नीलकंठ दास को धनबाद से हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने साइबर ठगी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। आरोपी ने बताया कि उसने अपने नाम से फिनो पेमेंट बैंक में खाता खुलवाया था, जिसमें ठगी की राशि में से ₹25,000 जमा हुए थे। इस राशि को उसने एटीएम कार्ड के जरिए चार बार में निकालकर अपने निजी कामों में खर्च कर दिया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ठगी में प्रयुक्त एटीएम कार्ड, बैंक खाते से लिंक सिम कार्ड और पैन कार्ड विधिवत जब्त कर लिए हैं। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है और मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। डीआईजी डॉ लाल उमेद सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने वाले किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ ओटीपी, सीवीवी, एटीएम पिन या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
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    छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में साइबर ठगी के एक महत्वपूर्ण मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जशपुर पुलिस ने पैन कार्ड अपडेट कराने का झांसा देकर ₹3.25 लाख की ऑनलाइन ठगी करने वाले एक आरोपी को झारखंड से गिरफ्तार किया है। यह मामला वर्ष 2022 का है, जिसमें आरोपी पिछले लगभग चार वर्षों से फरार चल रहा था। गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम नीलकंठ दास (उम्र 24 वर्ष) है, जो ग्राम गोपाल गंज, थाना निरसा, जिला धनबाद, झारखंड का निवासी है। आरोपी के विरुद्ध थाना सिटी कोतवाली जशपुर में अपराध क्रमांक 429/2022 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज है।

इस मामले में प्रार्थी श्री रामलोचन गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 9 और 10 अक्टूबर 2022 को एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर उन्हें पैन कार्ड अपडेट करने और नेट बैंकिंग चालू कराने का झांसा दिया था। इसके बाद आरोपी ने उनके बैंक खाते से धोखाधड़ी कर कुल ₹3,25,000 की राशि निकाल ली। जशपुर के डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शनों की गहन जांच की। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की राशि फिनो पेमेंट बैंक सहित विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी नीलकंठ दास को धनबाद से हिरासत में लिया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने साइबर ठगी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। आरोपी ने बताया कि उसने अपने नाम से फिनो पेमेंट बैंक में खाता खुलवाया था, जिसमें ठगी की राशि में से ₹25,000 जमा हुए थे। इस राशि को उसने एटीएम कार्ड के जरिए चार बार में निकालकर अपने निजी कामों में खर्च कर दिया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ठगी में प्रयुक्त एटीएम कार्ड, बैंक खाते से लिंक सिम कार्ड और पैन कार्ड विधिवत जब्त कर लिए हैं। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है और मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। डीआईजी डॉ लाल उमेद सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने वाले किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ ओटीपी, सीवीवी, एटीएम पिन या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
    user_Ajit gupta
    Ajit gupta
    Local News Reporter पत्थलगाँव, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    23 hrs ago
  • कोरबा के तरदा में एक तरफ जहां कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बेखौफ होकर रेत का खेल खेला जा रहा है। दावों के उलट धरातल पर लगातार जारी इस गतिविधि को लेकर अब यह तीखा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे?
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    कोरबा के तरदा में एक तरफ जहां कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बेखौफ होकर रेत का खेल खेला जा रहा है। दावों के उलट धरातल पर लगातार जारी इस गतिविधि को लेकर अब यह तीखा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे?
    user_Dhananajy jangde
    Dhananajy jangde
    Advertising agency करतला, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • सरगुजा पुलिस ने अंबिकापुर में संदीप अग्रवाल को आत्महत्या के लिए उकसाने और कर्जा एक्ट के मामले में आरोपी पंकज चौधरी (50 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर मृतक संदीप अग्रवाल को अत्यधिक ब्याज पर रकम देकर, मूल और ब्याज की वसूली के लिए लगातार जान से मारने की धमकी देने और प्रताड़ित करने का आरोप है। पुलिस को मर्ग जांच के दौरान मिले सुसाइड नोट, परिजनों व गवाहों के बयान, बैंक लेनदेन और तकनीकी जांच से आरोपी पंकज चौधरी की इस अपराध में संलिप्तता का पता चला। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी की इसी प्रताड़ना से परेशान होकर संदीप अग्रवाल ने आत्महत्या की थी। इसके बाद कोतवाली थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108, 351(3) और कर्जा एक्ट की धारा 4 के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल भी जब्त कर लिया है और उसे न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस की टीम द्वारा की गई।
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    सरगुजा पुलिस ने अंबिकापुर में संदीप अग्रवाल को आत्महत्या के लिए उकसाने और कर्जा एक्ट के मामले में आरोपी पंकज चौधरी (50 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर मृतक संदीप अग्रवाल को अत्यधिक ब्याज पर रकम देकर, मूल और ब्याज की वसूली के लिए लगातार जान से मारने की धमकी देने और प्रताड़ित करने का आरोप है।

पुलिस को मर्ग जांच के दौरान मिले सुसाइड नोट, परिजनों व गवाहों के बयान, बैंक लेनदेन और तकनीकी जांच से आरोपी पंकज चौधरी की इस अपराध में संलिप्तता का पता चला। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी की इसी प्रताड़ना से परेशान होकर संदीप अग्रवाल ने आत्महत्या की थी। इसके बाद कोतवाली थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108, 351(3) और कर्जा एक्ट की धारा 4 के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया।

पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल भी जब्त कर लिया है और उसे न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस की टीम द्वारा की गई।
    user_Sunil Gupta
    Sunil Gupta
    Advertising agency सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    8 hrs ago
  • कोरबा के ददारखुर्द में आस्था के महापर्व के अवसर पर भगवान जगन्नाथ की 126वीं भव्य रथयात्रा बेहद धूमधाम के साथ निकाली गई है।
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    कोरबा के ददारखुर्द में आस्था के महापर्व के अवसर पर भगवान जगन्नाथ की 126वीं भव्य रथयात्रा बेहद धूमधाम के साथ निकाली गई है।
    user_Durgesh maravi
    Durgesh maravi
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
  • सक्ती के सिंघनसरा बैकुंठपुर मोहल्ले में सरपंच की लापरवाही के कारण हैंडपंप के बोर की स्थिति बेहद खराब हो गई है। हैंडपंप के पास जमा होने वाले पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से वहां भरा हुआ गंदा पानी वापस सीधे बोर के अंदर ही जा रहा है। सरपंच द्वारा जल निकासी का कोई इंतजाम नहीं किए जाने के कारण यह दूषित पानी लगातार वापस बोर में मिल रहा है।
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    सक्ती के सिंघनसरा बैकुंठपुर मोहल्ले में सरपंच की लापरवाही के कारण हैंडपंप के बोर की स्थिति बेहद खराब हो गई है। हैंडपंप के पास जमा होने वाले पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से वहां भरा हुआ गंदा पानी वापस सीधे बोर के अंदर ही जा रहा है। सरपंच द्वारा जल निकासी का कोई इंतजाम नहीं किए जाने के कारण यह दूषित पानी लगातार वापस बोर में मिल रहा है।
    user_Ramcharan Divya
    Ramcharan Divya
    Labour club सक्ती, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    11 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के कोरबा में शुरू ऐप की खबर का बड़ा असर हुआ है, जिसके बाद PWD विभाग महज 48 घंटे के भीतर हरकत में आ गया है। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अहिरन नदी पुल की टूटी रेलिंग पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया है।
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    छत्तीसगढ़ के कोरबा में शुरू ऐप की खबर का बड़ा असर हुआ है, जिसके बाद PWD विभाग महज 48 घंटे के भीतर हरकत में आ गया है। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अहिरन नदी पुल की टूटी रेलिंग पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया है।
    user_Durgesh maravi
    Durgesh maravi
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    23 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में महज़ 15 घंटे की मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने के नाम पर करोड़ों रुपये फूंकने वाले प्रशासन की विफलता के कारण पूरा शहर 'जलपुर' में तब्दील हो चुका है। शहर की रफ्तार पूरी तरह थम गई है और जिन सड़कों पर रोजाना गाड़ियां दौड़ती थीं, वहां अब प्रशासनिक नाकामी के चलते रेस्क्यू और फ्लोटिंग नावें तैरती नजर आ रही हैं। घटिया ड्रेनेज सिस्टम और बंद नालों के कारण पानी की निकासी के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए, जिससे प्रमुख रिहायशी इलाकों और मुख्य सड़कों पर घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया है। नालियों की समय पर सफाई न होने से बारिश का गंदा पानी बैक मारकर लोगों के ड्राइंग रूम और किचन तक में घुस गया है, जिससे लाखों लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। ड्रेनेज फेल होने के कारण पॉश और निचली कॉलोनियों के लोग अपने ही घरों में कैद हो गए हैं और उनके सामने खाने-पीने व जरूरी सामानों की भारी किल्लत पैदा हो गई है। कागजों पर दिखाई गई प्री-मानसून तैयारियां हकीकत के धरातल पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई हैं। इस नरकीय स्थिति से आक्रोशित जनता सीधे नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए सवाल पूछ रही है। लोगों का सीधा सवाल है कि आखिर हर साल मानसून तैयारियों के नाम पर पास होने वाला करोड़ों का बजट किसकी जेब में जाता है? क्या अधिकारियों को 15 घंटे की बारिश झेलने लायक ड्रेनेज सिस्टम बनाने की सुध नहीं थी, और क्या प्रशासन लोगों के नुकसान व मानसिक प्रताड़ना की जिम्मेदारी लेगा या हर बार की तरह इसे 'प्राकृतिक आपदा' बताकर पल्ला झाड़ लेगा? बिलासपुर की यह बदहाली साफ बयां कर रही है कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि घोर प्रशासनिक लापरवाही और कुप्रबंधन का नतीजा है, जिस पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी बेहद जरूरी है।
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    छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में महज़ 15 घंटे की मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने के नाम पर करोड़ों रुपये फूंकने वाले प्रशासन की विफलता के कारण पूरा शहर 'जलपुर' में तब्दील हो चुका है। शहर की रफ्तार पूरी तरह थम गई है और जिन सड़कों पर रोजाना गाड़ियां दौड़ती थीं, वहां अब प्रशासनिक नाकामी के चलते रेस्क्यू और फ्लोटिंग नावें तैरती नजर आ रही हैं।

घटिया ड्रेनेज सिस्टम और बंद नालों के कारण पानी की निकासी के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए, जिससे प्रमुख रिहायशी इलाकों और मुख्य सड़कों पर घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया है। नालियों की समय पर सफाई न होने से बारिश का गंदा पानी बैक मारकर लोगों के ड्राइंग रूम और किचन तक में घुस गया है, जिससे लाखों लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। ड्रेनेज फेल होने के कारण पॉश और निचली कॉलोनियों के लोग अपने ही घरों में कैद हो गए हैं और उनके सामने खाने-पीने व जरूरी सामानों की भारी किल्लत पैदा हो गई है। कागजों पर दिखाई गई प्री-मानसून तैयारियां हकीकत के धरातल पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई हैं।

इस नरकीय स्थिति से आक्रोशित जनता सीधे नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए सवाल पूछ रही है। लोगों का सीधा सवाल है कि आखिर हर साल मानसून तैयारियों के नाम पर पास होने वाला करोड़ों का बजट किसकी जेब में जाता है? क्या अधिकारियों को 15 घंटे की बारिश झेलने लायक ड्रेनेज सिस्टम बनाने की सुध नहीं थी, और क्या प्रशासन लोगों के नुकसान व मानसिक प्रताड़ना की जिम्मेदारी लेगा या हर बार की तरह इसे 'प्राकृतिक आपदा' बताकर पल्ला झाड़ लेगा? बिलासपुर की यह बदहाली साफ बयां कर रही है कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि घोर प्रशासनिक लापरवाही और कुप्रबंधन का नतीजा है, जिस पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी बेहद जरूरी है।
    user_Manoj
    Manoj
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
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