रानीबाग–चित्रशिला धाम: देवभूमि उत्तराखण्ड का पौराणिक, आध्यात्मिक एवं अलौकिक तीर्थ वैभव काठगोदाम रानीबाग क्षेत्र में स्थित चित्रशिला घाट, गर्गाचल और भद्रवट तीर्थ की दिव्य महिमा का पौराणिक विस्तार हिमालय की पुण्य गोद में बसा रानीबाग क्षेत्र देवभूमि उत्तराखण्ड की ऐसी अनुपम आध्यात्मिक धरोहर है, जिसकी महिमा का वर्णन पुराणों, विशेषकर स्कन्द पुराण के मानसखण्ड में विस्तारपूर्वक मिलता है। यह पावन भूमि चित्रेश्वर महादेव, भद्रवट, चित्रशिला, पुष्पभद्रा, गर्गाचल एवं जियारानी की तपोभूमि जैसे अनेक पौराणिक स्थलों के कारण अत्यंत पवित्र मानी जाती है। काठगोदाम के समीप स्थित यह क्षेत्र गार्गी (गौला) नदी के रमणीय प्रवाह और पर्वतीय सौंदर्य के बीच स्थित होकर श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। यहाँ समय-समय पर लगने वाले मेले इस तीर्थ की सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्ता को और भी प्रबल करते हैं। पौराणिक उल्लेख और दिव्य गाथाएँ स्कन्द पुराण के मानसखण्ड में वर्णित है— “तत्र चित्रशिला दृष्ट्वा आरुरुहुः पर्वतोत्तमम्” अर्थात् इस क्षेत्र में स्थित चित्रशिला का दर्शन मात्र ही मनुष्य को दिव्यता की ओर अग्रसर कर देता है। गर्गाचल पर्वत, जहाँ ऋषि गर्ग ने कठोर तपस्या की थी, इसी क्षेत्र की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना गया है। मान्यताओं के अनुसार ऋषि गर्ग ने भगवान शिव की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। इस क्षेत्र में गार्गी और पुष्पभद्रा नदियों का पवित्र संगम तथा चित्रशिला शिला को त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—का वासस्थल माना गया है। पुष्पभद्रा और भद्रवट की महिमा पुराणों में वर्णित है कि पुष्पभद्रा नदी में स्नान और भद्रवट क्षेत्र में दर्शन मात्र से ही समस्त पापों का नाश हो जाता है। महर्षि वेदव्यास ने इस तीर्थ की महिमा को अन्य सभी तीर्थों से श्रेष्ठ बताया है। यह भी कहा गया है कि— यहाँ किया गया स्नान माघ स्नान, कुरुक्षेत्र स्नान तथा पुष्कर स्नान के समान फल देता है गया श्राद्ध और काशीवास के तुल्य पुण्य यहाँ सहज प्राप्त होता है इस भूमि पर किया गया दान अत्यंत फलदायी माना गया है चित्रशिला और तपोभूमि की कथा पुराणों के अनुसार सुतपा नामक महान ऋषि ने इस क्षेत्र में वटवृक्ष के नीचे वर्षों तक कठोर तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने उन्हें दिव्य ज्ञान प्रदान किया, जिससे वे मोक्ष के अधिकारी बने। इसी प्रकार यह भूमि गौरी, पद्मा, सावित्री, जया, तुष्टि आदि अनेक मातृ शक्तियों की भी तपोभूमि मानी जाती है। जियारानी गुफा और ऐतिहासिक लोकगाथा रानीबाग क्षेत्र की जियारानी गुफा भी अत्यंत प्रसिद्ध है। कत्यूर वंश की राजमाता जियारानी ने यहाँ भगवान शिव की कठोर आराधना की थी। लोक मान्यता के अनुसार इस गुफा से हरिद्वार तक गुप्त मार्ग का उल्लेख मिलता है, जो ऐतिहासिक शोध का विषय है। किंवदंती यह भी कहती है कि रानी जब पुष्पभद्रा में स्नान कर के अपने केश सुखा रही थीं, तभी असुरों ने उनका पीछा किया, परंतु शिव कृपा से वे सुरक्षित इस गुफा के मार्ग से लुप्त हो गईं। भद्रवट क्षेत्र का आध्यात्मिक संदेश भद्रवट को पाप नाशक क्षेत्र कहा गया है। यहाँ भगवान विष्णु के शयन स्थल का भी उल्लेख मिलता है। चित्रशिला शिला के दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा को मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होती है। वर्तमान स्थिति और चिंता जहाँ एक ओर यह क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा और पौराणिक महत्व से परिपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर चित्रशिला घाट एवं आसपास के क्षेत्र की अव्यवस्था, गंदगी एवं शवदाह घाट की असुविधाएँ चिंता का विषय हैं। स्थानीय जनमानस के अनुसार लकड़ी की कमी, अव्यवस्थित प्रबंधन एवं प्रदूषण जैसी समस्याएँ इस पवित्र तीर्थ की गरिमा को प्रभावित कर रही हैं। यह स्थिति न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करती है बल्कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं के अनुभव को भी कड़वा बनाती है। कुल मिलाकर रानीबाग–चित्रशिला–भद्रवट क्षेत्र केवल एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक आत्मा है। यह भूमि वेद, पुराण, तपस्या और लोक आस्था का अद्भुत संगम है। यह तीर्थ आज भी इस बात का साक्षी है कि हिमालय की गोद में स्थित यह पावन भूमि केवल इतिहास नहीं, बल्कि जीवंत आस्था और दिव्यता का प्रतीक है। “यह भूमि केवल दर्शन नहीं कराती, बल्कि आत्मा को भीतर तक पवित्र कर देती है।”
रानीबाग–चित्रशिला धाम: देवभूमि उत्तराखण्ड का पौराणिक, आध्यात्मिक एवं अलौकिक तीर्थ वैभव काठगोदाम रानीबाग क्षेत्र में स्थित चित्रशिला घाट, गर्गाचल और भद्रवट तीर्थ की दिव्य महिमा का पौराणिक विस्तार हिमालय की पुण्य गोद में बसा रानीबाग क्षेत्र देवभूमि उत्तराखण्ड की ऐसी अनुपम आध्यात्मिक धरोहर है, जिसकी महिमा का वर्णन पुराणों, विशेषकर स्कन्द पुराण के मानसखण्ड में विस्तारपूर्वक मिलता है। यह पावन भूमि चित्रेश्वर महादेव, भद्रवट, चित्रशिला, पुष्पभद्रा, गर्गाचल एवं जियारानी की तपोभूमि जैसे अनेक पौराणिक स्थलों के कारण अत्यंत पवित्र मानी जाती है। काठगोदाम के समीप स्थित यह क्षेत्र गार्गी (गौला) नदी के रमणीय प्रवाह और पर्वतीय सौंदर्य के बीच स्थित होकर श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। यहाँ समय-समय पर लगने वाले मेले इस तीर्थ की सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्ता को और भी प्रबल करते हैं। पौराणिक उल्लेख और दिव्य गाथाएँ स्कन्द पुराण के मानसखण्ड में वर्णित है— “तत्र चित्रशिला दृष्ट्वा आरुरुहुः पर्वतोत्तमम्” अर्थात् इस क्षेत्र में स्थित चित्रशिला का दर्शन मात्र ही मनुष्य को दिव्यता की ओर अग्रसर कर देता है। गर्गाचल पर्वत, जहाँ ऋषि गर्ग ने कठोर तपस्या की थी, इसी क्षेत्र की आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना गया है। मान्यताओं के अनुसार ऋषि गर्ग ने भगवान शिव की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। इस क्षेत्र में गार्गी और पुष्पभद्रा नदियों का पवित्र संगम तथा चित्रशिला शिला को त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—का वासस्थल माना गया है। पुष्पभद्रा और भद्रवट की महिमा पुराणों में वर्णित है कि पुष्पभद्रा नदी में स्नान और भद्रवट क्षेत्र में दर्शन मात्र से ही समस्त पापों का नाश हो जाता है। महर्षि वेदव्यास ने इस तीर्थ की महिमा को अन्य सभी तीर्थों से श्रेष्ठ बताया है। यह भी कहा गया है कि— यहाँ किया गया स्नान माघ स्नान, कुरुक्षेत्र स्नान तथा पुष्कर स्नान के समान फल देता है गया श्राद्ध और काशीवास के तुल्य पुण्य यहाँ सहज प्राप्त होता है इस भूमि पर किया गया दान अत्यंत फलदायी माना गया है चित्रशिला और तपोभूमि की कथा पुराणों के अनुसार सुतपा नामक महान ऋषि ने इस क्षेत्र में वटवृक्ष के नीचे वर्षों तक कठोर तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने उन्हें दिव्य ज्ञान प्रदान किया, जिससे वे मोक्ष के अधिकारी बने। इसी प्रकार यह भूमि गौरी, पद्मा, सावित्री, जया, तुष्टि आदि अनेक मातृ शक्तियों की भी तपोभूमि मानी जाती है। जियारानी गुफा और ऐतिहासिक लोकगाथा रानीबाग क्षेत्र की जियारानी गुफा भी अत्यंत प्रसिद्ध है। कत्यूर वंश की राजमाता जियारानी ने यहाँ भगवान शिव की कठोर आराधना की थी। लोक मान्यता के अनुसार इस गुफा से हरिद्वार तक गुप्त मार्ग का उल्लेख मिलता है, जो ऐतिहासिक शोध का विषय है। किंवदंती यह भी कहती है कि रानी जब पुष्पभद्रा में स्नान कर के अपने केश सुखा रही थीं, तभी असुरों ने उनका पीछा किया, परंतु शिव कृपा से वे सुरक्षित इस गुफा के मार्ग से लुप्त हो गईं। भद्रवट क्षेत्र का आध्यात्मिक संदेश भद्रवट को पाप नाशक क्षेत्र कहा गया है। यहाँ भगवान विष्णु के शयन स्थल का भी उल्लेख मिलता है। चित्रशिला शिला के दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा को मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होती है। वर्तमान स्थिति और चिंता जहाँ एक ओर यह क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा और पौराणिक महत्व से परिपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर चित्रशिला घाट एवं आसपास के क्षेत्र की अव्यवस्था, गंदगी एवं शवदाह घाट की असुविधाएँ चिंता का विषय हैं। स्थानीय जनमानस के अनुसार लकड़ी की कमी, अव्यवस्थित प्रबंधन एवं प्रदूषण जैसी समस्याएँ इस पवित्र तीर्थ की गरिमा को प्रभावित कर रही हैं। यह स्थिति न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करती है बल्कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं के अनुभव को भी कड़वा बनाती है। कुल मिलाकर रानीबाग–चित्रशिला–भद्रवट क्षेत्र केवल एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक आत्मा है। यह भूमि वेद, पुराण, तपस्या और लोक आस्था का अद्भुत संगम है। यह तीर्थ आज भी इस बात का साक्षी है कि हिमालय की गोद में स्थित यह पावन भूमि केवल इतिहास नहीं, बल्कि जीवंत आस्था और दिव्यता का प्रतीक है। “यह भूमि केवल दर्शन नहीं कराती, बल्कि आत्मा को भीतर तक पवित्र कर देती है।”
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- बिलासपुर में प्रशासन ने सोमवार तड़के बड़ी कार्रवाई करते हुए हाईवे चौड़ीकरण की जद में आ रहीं दोनों दरगाहों को बुलडोजरों से जमींदोज करवा दिया। इस दौरान हाईवे को दोनों तरफ से बंद रखा गया और भारी फोर्स तैनात रही। देर रात में हुईं तैयारियों के बाद अचानक किए गए इन दोनों ध्वस्तीकरणों का आम नागरिकों को तब पता चला, जब वह सोकर उठे। रामपुर के बिलासपुर में देर रात करीब तीन बजे नगरीय हाईवे पर ब्लॉक कार्यालय के सामने स्थित हजरत सादिक शाह मियां की दरगाह के सामने दो जेसीबी व खाली डंपर लाकर खड़े किए गए। इसके बाद मुख्य चौराहे व केमरी तिराहे पर यातायात रोक दिया गया और फोर्स तैनात हो गई। तड़के चार बजे बुलडोजरों ने दरगाह को ध्वस्त कर दिया। सड़क पर फैले मलबे को डंपरों में भर दिया गया। इसके तुरंत बाद मुख्य चौराहे से लेकर अहरो तिराहे वाले हिस्से का यातायात रोका गया और विशारदनगर स्थित हजरत साहू शाह मियां की दरगाह पर बुलडोजर चलाया गया। यहां भी मलबे को डंपर में भरवाकर सड़क साफ करा दी गई। इस कार्रवाई के दौरान उप जिलाधिकारी अरुण कुमार, तहसीलदार शिवकुमार शर्मा,पुलिस क्षेत्राधिकारी हर्षिता सिंह, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राजीव गंगवार, नायब तहसीलदार अंकुर अंतल व कोतवाल जीत सिंह सहित राजस्व, पीडब्ल्यूडी व पुलिस के कई अधिकारी मौजूद रहे। निकट थानों की फोर्स भी तैनात की गई थी।हाल ही में राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने नगर के भीतर से गुजर रहे आंतरिक हाईवे के चौड़ीकरण के लिए शासन से करोड़ों का प्रस्ताव स्वीकृत कराया था।चौड़ीकरण के लिए सड़क की जद में आ रहे निर्माणों पर 'लाल निशान' लगाए गए थे। चिन्हित स्थानों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू हो गई है।पीडब्ल्यूडी के एई राजीव गंगवार ने बताया कि चिन्हीकरण के अनुसार दोनों दरगाहों को हटाने का निर्णय लिया गया था।अन्य चिन्हित स्थानों के बारे में उनका कहना था कि जैसा निर्णय होगा, वैसी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।उप जिलाधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि यह पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई है। प्रशासन शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग कर रहा है।1
- नैनीताल के समीपवर्ती गेठिया के जंगल रविवार को धधकने शुरू हो गए। आग पर देर रात तक काबू नहीं पाया जा सका था।4
- दिनांक *18/04/2026* को वादी मेजर अजय पाठक पुत्र पूरन चन्द्र पाठक निवासी म0न0-1087/L, वार्ड नं0-6, गीतांजली गली, शीशमहल काठगोदाम द्वारा वॉकवे मॉल के पास एक व्यक्ति को सेना की वर्दी पहने हुए संदिग्ध अवस्था में देखा गया। उक्त व्यक्ति स्वयं को आर्मी में “मेजर” बताते हुए अपना नाम मेजर अमन बता रहा था। मेजर अजय पाठक को उक्त व्यक्ति की वर्दी धारण करने की शैली एवं गतिविधियाँ संदिग्ध प्रतीत होने पर उन्होंने तत्काल क्षेत्र में मौजूद *पीसी-4 पुलिस टीम को सूचना* दी। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस टीम द्वारा मौके पर पहुँचकर उक्त व्यक्ति से पूछताछ की गई, किन्तु वह अपने संबंध में कोई ठोस एवं सत्य जानकारी उपलब्ध नहीं करा सका। *पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही:-* *डॉ० मंजूनाथ टीसी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल* उक्त सूचना प्राप्त होने पर उक्त व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल आवश्यक कार्यवाही किए जाने हेतु निर्देश दिए गए। उक्त निर्देशों के क्रम में *श्री मनोज कुमार कत्याल, पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी* के मार्गदर्शन एवं *श्री अमित कुमार सैनी, क्षेत्राधिकारी* हल्द्वानी के पर्यवेक्षण में संदिग्ध व्यक्ति को पूछताछ हेतु थाना काठगोदाम लाया गया। प्रथम दृष्टया *सेना की वर्दी का दुरुपयोग एवं संदिग्ध गतिविधियों* को दृष्टिगत रखते हुए, वादी मेजर अजय पाठक द्वारा दी गई लिखित तहरीर के आधार पर *श्री विमल मिश्रा, थानाध्यक्ष काठगोदाम* के द्वारा थाना काठगोदाम में *FIR NO-54/26 धारा 168 BNS* के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराया गया। *पूछताछ का विवरण:-* पूछताछ के दौरान उक्त व्यक्ति ने अपना नाम अमन उर्फ अमन रोमसन पुत्र क्रिस्टोफर मसीह निवासी नौषर नसर, खटीमा, जनपद ऊधमसिंहनगर, उम्र 24 वर्ष बताया। वर्तमान में वह *सुचेतना समाज सेवा केन्द्र, निर्मला कान्वेंट स्कूल के पास, थाना काठगोदाम* क्षेत्र में कार्यरत है। पूछताछ में यह भी प्रकाश में आया कि उसे सेना के प्रति अत्यधिक आकर्षण है तथा सेना में भर्ती होने की तीव्र इच्छा थी, किन्तु भर्ती में असफल होने के कारण उसने सेना की वर्दी धारण की। प्रकरण में अग्रिम आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। उक्त व्यक्ति से आर्मी *इंटेलिजेंस यूनिट एवं सी0एम0पी0* द्वारा भी पूछताछ की जा रही है। *पुलिस टीम:-* उ0नि0 केदार सिंह राणा का0 चालक दीपक कुंवर1
- विडियो देखें- बांदा (उत्तर प्रदेश) यह मामला बांदा जिले के बड़ोखर खुर्द ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय बजरंग पुरवा का है। पुलिस ने भाजपा के सेक्टर प्रभारी सतानंद (सत्यानंद यादव) और उनके दो अज्ञात साथियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपी सतानंद पर आरोप है कि उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को शराब के नशे में स्कूल परिसर में घुसकर शिक्षकों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। जब शिक्षकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने स्कूल की पत्रावली (रिकॉर्ड) भी फाड़ दी। इस मारपीट में शिक्षक विवेक दीक्षित को गंभीर चोटें आईं और उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और शिक्षक संगठनों के भारी विरोध के बाद, शहर कोतवाली पुलिस ने प्रधानाचार्य बृजेंद्र कुमार सिंह की तहरीर पर मामला दर्ज किया है। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भाजपा नेताओं की चुप्पी और आरोपी द्वारा गिरफ्तारी से बचने की कोशिशों की खबरें भी चर्चा में हैं। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे स्कूल बंद कर आंदोलन करेंगे।1
- पीलीभीत। जनपद में स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ता परेशान हैं स्मार्ट मीटर के खिलाफ महिलाओं ने बिजली घर पहुंच कर जमकर खरी खोटी सुनाई। वीडियो वायरल।1
- अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर रविवार को भगवान परशुराम की भव्य शोभायात्रा बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ निकाली गई। शोभायात्रा में ब्राह्मण समाज के लोगों की भारी भागीदारी रही, जिससे पूरे शहर का माहौल भक्तिमय हो गया। शोभायात्रा का शुभारंभ शहर के त्रिलोकी नाथ मंदिर से हुआ, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद भगवान परशुराम की झांकी को रवाना किया गया। यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर पुनः मंदिर परिसर में संपन्न हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान ब्राह्मण समाज के लोगों ने भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाने और समाज में एकता, धर्म और संस्कृति को बनाए रखने का संदेश दिया। शोभायात्रा में शामिल लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला और जयकारों से पूरा नगर गूंज उठा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।1
- रविवार को खूबसूरत शुक्र ग्रह और चंद्रमा एक दूसरे के करीब पहुंच गए। यह नजारा बेहद खूबसूरत था।4