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घटना का पूरा मामला: कानपुर–अलीगढ़ हाईवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ सड़क किनारे खड़ी मिनी ट्रक में पीछे से एक तेज रफ्तार बाइक टकरा गई बाइक अनियंत्रित हो गई और सीधी जाकर ट्रक में भिड़ गई 👨👦 कौन थे लोग? बाइक पर पिता और बेटा सवार थे पिता: कमलेश कुमार (52 वर्ष) बेटा: अंकुर (19 वर्ष) दोनों फतेपुर गांव (ककवन क्षेत्र) के रहने वाले थे ⚠️ क्या हुआ आगे? हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए पुलिस उन्हें अस्पताल (सीएचसी) लेकर गई डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया 📍 हादसा कैसे हुआ? पिता-पुत्र शादी समारोह से वापस लौट रहे थे रास्ते में बाइक तेज थी और कंट्रोल खो बैठी सामने खड़ी ट्रक से टकरा गई 😔 नतीजा: एक ही परिवार के दो लोगों की मौत घर में मातम का माहौल 👉 सीधी बात: यह एक तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुआ सड़क हादसा लगता है।
Sheetla Prasad
घटना का पूरा मामला: कानपुर–अलीगढ़ हाईवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ सड़क किनारे खड़ी मिनी ट्रक में पीछे से एक तेज रफ्तार बाइक टकरा गई बाइक अनियंत्रित हो गई और सीधी जाकर ट्रक में भिड़ गई 👨👦 कौन थे लोग? बाइक पर पिता और बेटा सवार थे पिता: कमलेश कुमार (52 वर्ष) बेटा: अंकुर (19 वर्ष) दोनों फतेपुर गांव (ककवन क्षेत्र) के रहने वाले थे ⚠️ क्या हुआ आगे? हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए पुलिस उन्हें अस्पताल (सीएचसी) लेकर गई डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया 📍 हादसा कैसे हुआ? पिता-पुत्र शादी समारोह से वापस लौट रहे थे रास्ते में बाइक तेज थी और कंट्रोल खो बैठी सामने खड़ी ट्रक से टकरा गई 😔 नतीजा: एक ही परिवार के दो लोगों की मौत घर में मातम का माहौल 👉 सीधी बात: यह एक तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुआ सड़क हादसा लगता है।
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- घटना का पूरा मामला: कानपुर–अलीगढ़ हाईवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ सड़क किनारे खड़ी मिनी ट्रक में पीछे से एक तेज रफ्तार बाइक टकरा गई बाइक अनियंत्रित हो गई और सीधी जाकर ट्रक में भिड़ गई 👨👦 कौन थे लोग? बाइक पर पिता और बेटा सवार थे पिता: कमलेश कुमार (52 वर्ष) बेटा: अंकुर (19 वर्ष) दोनों फतेपुर गांव (ककवन क्षेत्र) के रहने वाले थे ⚠️ क्या हुआ आगे? हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए पुलिस उन्हें अस्पताल (सीएचसी) लेकर गई डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया 📍 हादसा कैसे हुआ? पिता-पुत्र शादी समारोह से वापस लौट रहे थे रास्ते में बाइक तेज थी और कंट्रोल खो बैठी सामने खड़ी ट्रक से टकरा गई 😔 नतीजा: एक ही परिवार के दो लोगों की मौत घर में मातम का माहौल 👉 सीधी बात: यह एक तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुआ सड़क हादसा लगता है।1
- पट्टी तहसील क्षेत्र के परिहरा गांव निवासी अमित पाल सोमवार को करीब 1:00 बजे पैदल भदवछ आया था पीछे से आ रही बाइक ने इसे सड़क पर टक्कर मार दिए जिससे सड़क पर गिर पड़ा और लहूलुहान हो गया यह देख वहां लोगों के भीड़ जमा हो गई तत्काल इस सीएचसी पट्टी लाया गया जहां डॉक्टर प्राथमिक इलाज करने के बाद गंभीर हालत देखते हुए युवक को मेडिकल कॉलेज प्रतापगढ़ रेफर कर दिया। सीएससी पट्टी के डॉक्टर राकेश कुमार ने बताया उनके सर में गंभीर चोट आई है बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।1
- Post by Dharmendra Mishra1
- Post by नीरज पांडेय पत्रकार प्रतापगढ़1
- Post by अपना प्रतापगढ़ 🙏🙏1
- Post by PUBLIC TALK NEWS1
- लम्भुआ, सुल्तानपुर। लम्भुआ बाजार में लगने वाला रोज़ाना का जाम अब आम लोगों की नियति बन चुका है। “आम के आम, गुठलियों के दाम” वाली कहावत यहां चरितार्थ होती दिख रही है—जहां एक तरफ दुकानदार सड़क तक कब्जा कर मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राहगीर जाम और धूप में पिसने को मजबूर हैं।चौकिया मोड़, दियरा तिराहा और सर्वोदय चौराहा—इन प्रमुख स्थानों पर हालात यह हैं कि “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” की तर्ज पर पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। मोड़ के ठीक पास ऑटो, टैक्सी और बैटरी रिक्शा खड़े रहते हैं, जिससे सड़क संकरी हो जाती है और जाम लगना तय हो जाता है।पत्रकारों द्वारा कई बार खबरें प्रकाशित की गईं, लेकिन “ढाक के तीन पात” वाली स्थिति बनी हुई है—न कोई ठोस कार्रवाई, न ही कोई स्थायी समाधान।सड़क पर दुकान, जिम्मेदार कौन?करीब एक वर्ष पूर्व आदेश जारी हुआ था कि कोई भी दुकानदार नाली के आगे दुकान नहीं लगाएगा, अन्यथा चालान किया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी कार्रवाई भी नहीं हुई।एनएच-56 तक दुकानदारों ने अपना सामान फैला रखा है। स्थाई दुकानदार अपने कमरों से निकलकर सड़क तक कब्जा किए हुए हैं, और जो थोड़ी जगह बचती है, वहां ठेला-खुमचा वाले अपना जीवन यापन कर रहे हैं। *वसूली का खेल?* एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया—“हमसे नियमित वसूली होती है, इसलिए हम जहां चाहें दुकान लगा लेते हैं, कोई कुछ नहीं कहता।”इस बयान के बाद “चोर की दाढ़ी में तिनका” वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। स्थानीय हल्का दरोगा, सिपाही और कथित तौर पर एक व्यक्ति धीरज कुमार संदेह के घेरे में हैं।जनता त्रस्त, पुलिस गायब रविवार को सर्वोदय चौराहे से लेकर चौकिया रोड तक पूरे दिन जाम लगा रहा, लेकिन “नौ दिन चले अढ़ाई कोस” की तरह एक भी पुलिसकर्मी जाम खुलवाने नहीं पहुंचा। चिलचिलाती धूप में लोग घंटों फंसे रहे।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क पर कब्जा हटाने और वाहनों को व्यवस्थित खड़ा कराने से जाम खत्म हो सकता है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही लोगों ने यह भी कहा कि जिले की सख्त छवि वाली पुलिस अधीक्षक की व्यवस्था भी लम्भुआ में “बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद” जैसी साबित हो रही है।लम्भुआ का जाम अब सिर्फ यातायात की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल है। जब तक “लाठी भी न टूटे और सांप भी मर जाए” की मानसिकता से बाहर निकलकर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आम जनता यूं ही जाम में पिसती रहेगी।3
- Post by नीरज पांडेय पत्रकार प्रतापगढ़1