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30 rs ki chaye महंगाई जोरों से बढ़ रही है क्या करें आम आदमी क्या करें
Neeraj kumar
30 rs ki chaye महंगाई जोरों से बढ़ रही है क्या करें आम आदमी क्या करें
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- महंगाई जोरों से बढ़ रही है क्या करें आम आदमी क्या करें1
- शाहबाद में दिनदहाड़े 19 वर्षा युवती संदिग्ध परिस्थितियों में लापता4
- Post by IndiaNews 9Live1
- इन्द्री विजय कांबोज।। भारत नवनिमार्ण सेना की ओर से हर साल की तरह इस बार भी क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद का बलिदान दिवस बड़ी श्रद्धा से मनाया गया। इस मौके पर पहले पवित्र हवन यज्ञ किया गया ओर उसके बाद देश पर अपनी जान कुर्बान करने वाले शहीदों के चित्रों के समक्ष दीप प्रजवल्लित कर नमन किया गया। इस अवसर पर सभी उपस्थित लोगों को कन्या भ्रूण हत्या ना करने व नशों से दूर रहने संबधी शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर भानसे के प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल1
- कस्बा गंगोह में इन दिनों गोश्त (मीट) के दामों में हुई बढ़ोतरी को लेकर खुलकर चर्चा हो रही है। बाजारों, चौराहों, मस्जिदों के बाहर और चाय की दुकानों तक हर जगह लोग इसी मुद्दे पर बात करते दिखाई दे रहे हैं लोगों का कहना है कि पहले 280 से 300 रुपये प्रति किलो बिकने वाला गोश्त अब रमजान आते ही 320 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। वहीं फलों में तरबूज, अनार, केला, अमरूद, पपीता, सेब और किन्नू के दाम भी आसमान छू रहे हैं। अचानक से गोश्त में 20 से 40 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी ने आम लोगों को हैरान और परेशान कर दिया है जिससे रमजान का महीना शुरू होते ही दाम बढ़ने से रोजेदार परिवारों का बजट बिगड़ गया है। कई लोगों का कहना है कि त्योहार के समय जरूरत की चीजों के दाम बढ़ाना ठीक नहीं है। मध्यम और गरीब वर्ग के लोगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि पहले ही महंगाई ने कमर तोड़ रखी है, ऐसे में इस बढ़ोतरी ने और परेशानी बढ़ा दी है दूसरी ओर गोश्त (मीट) विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें फैक्ट्री तथा सप्लायर से ही माल महंगा मिल रहा है। उनका दावा है कि जब ऊपर से रेट बढ़ा दिया गया है, तो उन्हें भी मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़े हैं। हालांकि ग्राहकों का कहना है कि हर बार दाम बढ़ाने की यही वजह बताई जाती है, लेकिन असली कारण कोई साफ नहीं करता नगर व आसपास के क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर माहौल गर्म है। रिपोर्टर: अमन खान गंगोह3
- नारायणगढ़, 27 फरवरी (नारायणगढ़ की आवाज) नगर पालिका हाउस की हाल ही में आयोजित बैठक ने स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैठक में वॉइस चेयरपर्सन को छोड़कर अधिकांश महिला पार्षद स्वयं उपस्थित नहीं रहीं। उनकी अनुपस्थिति में उनके परिवारजनों द्वारा बैठक में भाग लेना चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में प्रत्यक्ष, सक्रिय और प्रभावी भागीदारी प्रदान करना है। किंतु यदि निर्वाचित प्रतिनिधि स्वयं बैठकों में भाग न लेकर अपने परिजनों को भेजें, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और महिला सशक्तिकरण की भावना के साथ न्याय नहीं माना जा सकता। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मत है कि यह प्रवृत्ति न केवल महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करती है, बल्कि जनता के विश्वास को भी आहत करती है। जनप्रतिनिधि का दायित्व व्यक्तिगत रूप से बैठकों में उपस्थित रहकर जनता के मुद्दों को उठाना और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाना होता है। यह विषय केवल एक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक सोच को दर्शाता है, जिसमें महिला प्रतिनिधित्व को औपचारिकता तक सीमित कर दिया जाता है। यदि इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो महिला आरक्षण का मूल उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। नगरपालिका अधिकारियों से अपेक्षा है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, "जब प्रतिनिधित्व वास्तविक हो, प्रतीकात्मक नहीं।1
- यमुनानगर से सहवारनपुर रोड पर ट्रक ने स्कू्टी सवार को बुरी तरह से कुच*ला, महिला अपने ससुर के साथ जा रही थी, उसकी मौके पर मौत ट्रक ड्राइवर फरार1
- ICOPJournalist Janata ki Awaaz Vishal Sharma journalist ✍🏻 देश की राजधानी से लेकर देश के गांव देहात हरियाणा हो या अप हो हर जगह एडमिनिस्ट्रेटर व्यवस्था का इस तरह का जनता के साथ रूखा व्यवहार दर्शाता है कि देश की बागडोर संभालने वाले न्यायपालिका को चलाने वाले हम उच्च अधिकारी ही देश के कार्य प्रणाली को धूमिल कर रहे हैं बाकियों की तो बात ही छोड़े देखिए इन सब का रवैया यह देश की राजधानी के हालात है तो पूरे देश के हालात क्या होंगे अंधा कानून सर चढ़कर बोल रहा हर ग्राम सभा में ग्राउंड जीरो मीडिया सर्वे रिपोर्ट अगर ये हाल दिल्ली के SDM साहब का हे तो यह अति विचारणीय हे कि जब इन लोगों का तबादला किसी गांव या कस्बे वाले क्षेत्र में होता होगा तो इनका स्वभाव जनता के प्रति कैसा रहता होगा. ?1