नगर पालिका हाउस की बैठक में महिला सशक्तिकरण पर गंभीर प्रश्नचिह्न नारायणगढ़, 27 फरवरी (नारायणगढ़ की आवाज) नगर पालिका हाउस की हाल ही में आयोजित बैठक ने स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैठक में वॉइस चेयरपर्सन को छोड़कर अधिकांश महिला पार्षद स्वयं उपस्थित नहीं रहीं। उनकी अनुपस्थिति में उनके परिवारजनों द्वारा बैठक में भाग लेना चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में प्रत्यक्ष, सक्रिय और प्रभावी भागीदारी प्रदान करना है। किंतु यदि निर्वाचित प्रतिनिधि स्वयं बैठकों में भाग न लेकर अपने परिजनों को भेजें, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और महिला सशक्तिकरण की भावना के साथ न्याय नहीं माना जा सकता। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मत है कि यह प्रवृत्ति न केवल महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करती है, बल्कि जनता के विश्वास को भी आहत करती है। जनप्रतिनिधि का दायित्व व्यक्तिगत रूप से बैठकों में उपस्थित रहकर जनता के मुद्दों को उठाना और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाना होता है। यह विषय केवल एक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक सोच को दर्शाता है, जिसमें महिला प्रतिनिधित्व को औपचारिकता तक सीमित कर दिया जाता है। यदि इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो महिला आरक्षण का मूल उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। नगरपालिका अधिकारियों से अपेक्षा है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, "जब प्रतिनिधित्व वास्तविक हो, प्रतीकात्मक नहीं।
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- नारायणगढ़, 27 फरवरी (नारायणगढ़ की आवाज) नगर पालिका हाउस की हाल ही में आयोजित बैठक ने स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैठक में वॉइस चेयरपर्सन को छोड़कर अधिकांश महिला पार्षद स्वयं उपस्थित नहीं रहीं। उनकी अनुपस्थिति में उनके परिवारजनों द्वारा बैठक में भाग लेना चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में प्रत्यक्ष, सक्रिय और प्रभावी भागीदारी प्रदान करना है। किंतु यदि निर्वाचित प्रतिनिधि स्वयं बैठकों में भाग न लेकर अपने परिजनों को भेजें, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और महिला सशक्तिकरण की भावना के साथ न्याय नहीं माना जा सकता। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मत है कि यह प्रवृत्ति न केवल महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करती है, बल्कि जनता के विश्वास को भी आहत करती है। जनप्रतिनिधि का दायित्व व्यक्तिगत रूप से बैठकों में उपस्थित रहकर जनता के मुद्दों को उठाना और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाना होता है। यह विषय केवल एक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक सोच को दर्शाता है, जिसमें महिला प्रतिनिधित्व को औपचारिकता तक सीमित कर दिया जाता है। यदि इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो महिला आरक्षण का मूल उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। नगरपालिका अधिकारियों से अपेक्षा है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, "जब प्रतिनिधित्व वास्तविक हो, प्रतीकात्मक नहीं।1
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- Post by User12321
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