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कदौरा-नाका-मरगया मार्ग बना मुसीबत का रास्ता! दैनिक भद्रावती टाइम्स यूपी हेड रानू मंसूरी रिपोर्ट विजय शर्मा सड़क जर्जर या हादसे का इंतजार? जिम्मेदारों की चुप्पी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल कदौरा। कदौरा से नाका होकर मरगया जाने वाले मार्ग की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क लंबे समय से खराब हालत में है और जगह-जगह गड्ढों व टूटे हिस्सों के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। किया विधायक महोदय संसद महोदय खाली वोट के लिए सड़क खराब हो या आदमी चले जायेंगे बच्चों की समस्या और कोई अधिकारी जाँच करने नहीं गया बच्चों के जान के साथ हो रहा खिलवाड़ कब तक यू ही चलता रहेगा लगभग 2 साल भी नहीं हुआ और रोड की हालत खराब खाली लीपापोती कर रहे अधिकारी मरीज को लेकर जाने में बहुत दिक्कत है इसमें किया कोई अधिकारी जाँच करने नहीं जाएगा सबसे गंभीर सवाल स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। रोजाना इसी मार्ग से बच्चे और ग्रामीण आवागमन करते हैं। ऐसे में खराब सड़क पर किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का सीधा सवाल—आखिर कब जागेगा प्रशासन? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बची हुई है? यदि सड़क वास्तव में इतनी खराब है तो स्थलीय निरीक्षण कराकर मरम्मत या निर्माण की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि कदौरा से नाका होकर मरगया मार्ग का मौके पर निरीक्षण कराया जाए, सड़क की तकनीकी स्थिति की जांच हो और आवश्यकतानुसार निर्माण/मरम्मत का कार्य जल्द शुरू कराया जाए। बच्चों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल ग्रामीणों का कहना है कि विकास की बात तब पूरी होगी जब गांवों को जोड़ने वाली सड़कें सुरक्षित और चलने लायक हों। सवाल यह भी है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद टूटेगी? ग्रामीणों ने चेतावनी नहीं बल्कि अपनी समस्या के समाधान की मांग करते हुए कहा कि सड़क की समस्या को गंभीरता से लिया जाए और जिम्मेदार विभाग तत्काल मौके पर पहुंचे। इन ग्रामीणों ने उठाई आवाज नाका निवासी कल्लू प्रधान, लतीफ खां, रज्जाक, बाबू, हनीफ, मेंबर मुताज अली, मुबीन तथा मरगया निवासी विकास कुमार, शैलेंद्र, बृजेश, सोनू, रज्जू, विवेक, धर्मेंद्र लम्बरदार, रामकरण कुशवाहा, पंकज ठाकुर और अमित समेत अन्य ग्रामीणों ने सड़क की हालत पर चिंता जताते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की। अब जवाबदेही का वक्त! क्या संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर सड़क की हकीकत देखेगा? क्या स्कूल के बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी? क्या जर्जर सड़क का स्थायी समाधान होगा? या फिर ग्रामीण इसी बदहाल रास्ते पर चलने को मजबूर रहेंगे?

14 hrs ago
user_विजय राज शर्मा भद्रावती टाइम्स
विजय राज शर्मा भद्रावती टाइम्स
Newspaper publisher जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
14 hrs ago

कदौरा-नाका-मरगया मार्ग बना मुसीबत का रास्ता! दैनिक भद्रावती टाइम्स यूपी हेड रानू मंसूरी रिपोर्ट विजय शर्मा सड़क जर्जर या हादसे का इंतजार? जिम्मेदारों की चुप्पी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल कदौरा। कदौरा से नाका होकर मरगया जाने वाले मार्ग की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क लंबे समय से खराब हालत में है और जगह-जगह गड्ढों व टूटे हिस्सों के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। किया विधायक महोदय संसद महोदय खाली वोट के लिए सड़क खराब हो या आदमी चले जायेंगे बच्चों की समस्या और कोई अधिकारी जाँच करने नहीं गया बच्चों के जान के साथ हो रहा खिलवाड़ कब तक यू ही चलता रहेगा लगभग 2 साल भी नहीं हुआ और रोड की हालत खराब खाली लीपापोती कर रहे अधिकारी मरीज को लेकर जाने में बहुत दिक्कत है इसमें किया कोई अधिकारी

जाँच करने नहीं जाएगा सबसे गंभीर सवाल स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। रोजाना इसी मार्ग से बच्चे और ग्रामीण आवागमन करते हैं। ऐसे में खराब सड़क पर किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का सीधा सवाल—आखिर कब जागेगा प्रशासन? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बची हुई है? यदि सड़क वास्तव में इतनी खराब है तो स्थलीय निरीक्षण कराकर मरम्मत या निर्माण की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि कदौरा से नाका होकर मरगया मार्ग का मौके पर निरीक्षण कराया जाए, सड़क की तकनीकी स्थिति की जांच हो और आवश्यकतानुसार निर्माण/मरम्मत का कार्य जल्द शुरू कराया जाए। बच्चों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल ग्रामीणों का कहना है कि विकास की बात तब पूरी होगी जब गांवों को

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जोड़ने वाली सड़कें सुरक्षित और चलने लायक हों। सवाल यह भी है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद टूटेगी? ग्रामीणों ने चेतावनी नहीं बल्कि अपनी समस्या के समाधान की मांग करते हुए कहा कि सड़क की समस्या को गंभीरता से लिया जाए और जिम्मेदार विभाग तत्काल मौके पर पहुंचे। इन ग्रामीणों ने उठाई आवाज नाका निवासी कल्लू प्रधान, लतीफ खां, रज्जाक, बाबू, हनीफ, मेंबर मुताज अली, मुबीन तथा मरगया निवासी विकास कुमार, शैलेंद्र, बृजेश, सोनू, रज्जू, विवेक, धर्मेंद्र लम्बरदार, रामकरण कुशवाहा, पंकज ठाकुर और अमित समेत अन्य ग्रामीणों ने सड़क की हालत पर चिंता जताते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की। अब जवाबदेही का वक्त! क्या संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर सड़क की हकीकत देखेगा? क्या स्कूल के बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी? क्या जर्जर सड़क का स्थायी समाधान होगा? या फिर ग्रामीण इसी बदहाल रास्ते पर चलने को मजबूर रहेंगे?

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  • पांच दिन से लापता अधेड़ का मलंगा नाले में झाड़ियों में फंसा मिला शव जालौन में पांच दिन से लापता 49 वर्षीय अधेड़ का शव मलंगा नाले की झाड़ियों में फंसा मिला। शव दिखाई देने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने एसडीआरएफ टीम को बुलाया, जिसके बाद टीम व स्थानीय व्यक्ति,नगर पालिका कर्मचारी ने कड़ी मशक्कत कर शव को नाले से बाहर निकाला। अधेड़ के शव की बरामदगी के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। मामला कोंच कोतवाली क्षेत्र के सिंहवाहिनी मंदिर के पास स्थित मलंगा नाले का है। बताया जा रहा है कि 49 वर्षीय मंगल सिंह पिछले पांच दिनों से लापता था। परिजनों ने उसके लापता होने के बाद कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसी बीच नाले की झाड़ियों में शव फंसा दिखाई देने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एसडीआरएफ टीम को बुलाया। एसडीआरएफ की टीम ने नाले में उतरकर झाड़ियों में फंसे शव को बाहर निकाला। शव मिलने के बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। बाइट-ब्रजेश कुमार, BC, एसडीआरएफ टीम
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    पांच दिन से लापता अधेड़ का मलंगा नाले में झाड़ियों में फंसा मिला शव
जालौन में पांच दिन से लापता 49 वर्षीय अधेड़ का शव मलंगा नाले की झाड़ियों में फंसा मिला। शव दिखाई देने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने एसडीआरएफ टीम को बुलाया, जिसके बाद टीम व स्थानीय व्यक्ति,नगर पालिका कर्मचारी ने कड़ी मशक्कत कर शव को नाले से बाहर निकाला। अधेड़ के शव की बरामदगी के बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
मामला कोंच कोतवाली क्षेत्र के सिंहवाहिनी मंदिर के पास स्थित मलंगा नाले का है। बताया जा रहा है कि 49 वर्षीय मंगल सिंह पिछले पांच दिनों से लापता था। परिजनों ने उसके लापता होने के बाद कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
इसी बीच नाले की झाड़ियों में शव फंसा दिखाई देने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एसडीआरएफ टीम को बुलाया। एसडीआरएफ की टीम ने नाले में उतरकर झाड़ियों में फंसे शव को बाहर निकाला। शव मिलने के बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
बाइट-ब्रजेश कुमार, BC, एसडीआरएफ टीम
    user_Sanjay kumar Pattakar
    Sanjay kumar Pattakar
    Local News Reporter जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • जालौन। इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए इंसानियत ग्रुप के सदस्यों ने गंभीर रूप से घायल और बेहोश पड़े एक बंदर की जान बचाई। बताया गया कि सुबह करीब 7 बजे से एक बंदर घायल अवस्था में सड़क किनारे पड़ा था और उसके शरीर से काफी खून निकल रहा था। शाम करीब 6 बजे प्रत्यक्ष नाम के युवक ने इंसानियत ग्रुप से संपर्क कर घटना की जानकारी दी। युवक ने बताया कि बंदर की हालत बेहद गंभीर है और यदि समय रहते उसकी मदद नहीं की गई तो उसकी जान जा सकती है। सूचना मिलते ही इंसानियत ग्रुप के सदस्य ध्रुव शिवहरे ने तत्काल टीम को जानकारी दी। टीम डॉक्टर के साथ करीब 10 मिनट के अंदर मौके पर पहुंच गई। घायल बंदर का उपचार किया गया और उसे भोजन-पानी भी दिया गया, जिससे उसकी हालत में सुधार हुआ। इसके बाद वन विभाग की टीम को सूचना देकर मौके पर बुलाया गया और बंदर को सुरक्षित रूप से वन विभाग की टीम के सुपुर्द कर दिया गया। इंसानियत ग्रुप के सदस्यों ने कहा कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बेजुबान जीवों की मदद करना भी हमारा कर्तव्य है। लोगों ने टीम के इस कार्य की सराहना की। लोगों का कहना है कि ईश्वर की कृपा और हनुमान जी के स्वरूप माने जाने वाले इस बेजुबान जीव की जान बचाकर टीम ने सराहनीय और पुण्य कार्य किया है।
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    जालौन। इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए इंसानियत ग्रुप के सदस्यों ने गंभीर रूप से घायल और बेहोश पड़े एक बंदर की जान बचाई। बताया गया कि सुबह करीब 7 बजे से एक बंदर घायल अवस्था में सड़क किनारे पड़ा था और उसके शरीर से काफी खून निकल रहा था।
शाम करीब 6 बजे प्रत्यक्ष नाम के युवक ने इंसानियत ग्रुप से संपर्क कर घटना की जानकारी दी। युवक ने बताया कि बंदर की हालत बेहद गंभीर है और यदि समय रहते उसकी मदद नहीं की गई तो उसकी जान जा सकती है।
सूचना मिलते ही इंसानियत ग्रुप के सदस्य ध्रुव शिवहरे ने तत्काल टीम को जानकारी दी। टीम डॉक्टर के साथ करीब 10 मिनट के अंदर मौके पर पहुंच गई। घायल बंदर का उपचार किया गया और उसे भोजन-पानी भी दिया गया, जिससे उसकी हालत में सुधार हुआ।
इसके बाद वन विभाग की टीम को सूचना देकर मौके पर बुलाया गया और बंदर को सुरक्षित रूप से वन विभाग की टीम के सुपुर्द कर दिया गया।
इंसानियत ग्रुप के सदस्यों ने कहा कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बेजुबान जीवों की मदद करना भी हमारा कर्तव्य है। लोगों ने टीम के इस कार्य की सराहना की।
लोगों का कहना है कि ईश्वर की कृपा और हनुमान जी के स्वरूप माने जाने वाले इस बेजुबान जीव की जान बचाकर टीम ने सराहनीय और पुण्य कार्य किया है।
    user_Bheem rajawat 9628800458
    Bheem rajawat 9628800458
    पत्रकार जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • जालौन में 11 साल पुराने मामले में न्यायालय का बड़ा फैसला आया 11 साल पुराने जमीनी विवाद में किसान के पक्ष में कोर्ट ने सुनाया फैसला, प्रतिवादी पक्ष का बैनामा निरस्त* कोर्ट ने किसान को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाने का दिया आदेश उरई। डकोर कोतवाली क्षेत्र के डकोर गांव निवासी किसान रघुवीर यादव के करीब 11 साल पुराने जमीन विवाद में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रत्यूष प्रकाश की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवादित भूमि से संबंधित किए गए बैनामे को निरस्त करने तथा किसान को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया है। मामले के अनुसार डकोर गांव निवासी रघुवीर यादव ने 7 जुलाई 2015 को न्यायालय में वाद दायर कर बताया था कि आराजी संख्या 1935 की भूमि पर दूसरे पक्ष द्वारा उसके अधिकार वाली जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। वादी का आरोप था कि लालाराम ने अपने हिस्से से अधिक रकबा बैनामा कर दिया, जिसके चलते उसकी जमीन भी बैनामे में शामिल हो गई और संबंधित लोगों ने उस पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में दोनों पक्षों की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। करीब 11 वर्षों तक चले ट्रायल के दौरान वादी प्रतिवादी पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए गए। न्यायालय के आदेश पर वादी को स्थगन आदेश भी प्राप्त हुआ था। आरोप है कि इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया और विवादित भूमि के अतिरिक्त हिस्से पर भी कब्जा कर लिया। बुधवार को सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रत्यूष प्रकाश की अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों और तथ्यों को रखा। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने वादी रघुवीर यादव के पक्ष में फैसला सुनाया। न्यायालय ने विवादित भूमि के संबंध में प्रतिवादी पक्ष द्वारा किए गए बैनामे को निरस्त करते हुए वादी को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाए जाने का आदेश दिया। फैसले के बाद किसान पक्ष में खुशी का माहौल है। लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में न्यायालय के निर्णय को किसान के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
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    जालौन में 11 साल पुराने मामले में न्यायालय का बड़ा फैसला आया 
11 साल पुराने जमीनी विवाद में किसान के पक्ष में कोर्ट ने सुनाया फैसला, प्रतिवादी पक्ष का बैनामा निरस्त*
कोर्ट ने किसान को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाने का दिया आदेश
उरई। डकोर कोतवाली क्षेत्र के डकोर गांव निवासी किसान रघुवीर यादव के करीब 11 साल पुराने जमीन विवाद में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रत्यूष प्रकाश की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवादित भूमि से संबंधित किए गए बैनामे को निरस्त करने तथा किसान को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया है।
मामले के अनुसार डकोर गांव निवासी रघुवीर यादव ने 7 जुलाई 2015 को न्यायालय में वाद दायर कर बताया था कि आराजी संख्या 1935 की भूमि पर दूसरे पक्ष द्वारा उसके अधिकार वाली जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। वादी का आरोप था कि लालाराम ने अपने हिस्से से अधिक रकबा बैनामा कर दिया, जिसके चलते उसकी जमीन भी बैनामे में शामिल हो गई और संबंधित लोगों ने उस पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में दोनों पक्षों की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। करीब 11 वर्षों तक चले ट्रायल के दौरान वादी प्रतिवादी पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए गए। न्यायालय के आदेश पर वादी को स्थगन आदेश भी प्राप्त हुआ था। आरोप है कि इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया और विवादित भूमि के अतिरिक्त हिस्से पर भी कब्जा कर लिया।
बुधवार को सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रत्यूष प्रकाश की अदालत में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं।  न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों और तथ्यों को रखा। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने वादी रघुवीर यादव के पक्ष में फैसला सुनाया।
न्यायालय ने विवादित भूमि के संबंध में प्रतिवादी पक्ष द्वारा किए गए बैनामे को निरस्त करते हुए वादी को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाए जाने का आदेश दिया। फैसले के बाद किसान पक्ष में खुशी का माहौल है। लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में न्यायालय के निर्णय को किसान के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
    user_Deves Swarnkar  द न्यूज जालौन
    Deves Swarnkar द न्यूज जालौन
    जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • कदौरा-नाका-मरगया मार्ग बना मुसीबत का रास्ता! दैनिक भद्रावती टाइम्स यूपी हेड रानू मंसूरी रिपोर्ट विजय शर्मा सड़क जर्जर या हादसे का इंतजार? जिम्मेदारों की चुप्पी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल कदौरा। कदौरा से नाका होकर मरगया जाने वाले मार्ग की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क लंबे समय से खराब हालत में है और जगह-जगह गड्ढों व टूटे हिस्सों के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। किया विधायक महोदय संसद महोदय खाली वोट के लिए सड़क खराब हो या आदमी चले जायेंगे बच्चों की समस्या और कोई अधिकारी जाँच करने नहीं गया बच्चों के जान के साथ हो रहा खिलवाड़ कब तक यू ही चलता रहेगा लगभग 2 साल भी नहीं हुआ और रोड की हालत खराब खाली लीपापोती कर रहे अधिकारी मरीज को लेकर जाने में बहुत दिक्कत है इसमें किया कोई अधिकारी जाँच करने नहीं जाएगा सबसे गंभीर सवाल स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। रोजाना इसी मार्ग से बच्चे और ग्रामीण आवागमन करते हैं। ऐसे में खराब सड़क पर किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का सीधा सवाल—आखिर कब जागेगा प्रशासन? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बची हुई है? यदि सड़क वास्तव में इतनी खराब है तो स्थलीय निरीक्षण कराकर मरम्मत या निर्माण की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि कदौरा से नाका होकर मरगया मार्ग का मौके पर निरीक्षण कराया जाए, सड़क की तकनीकी स्थिति की जांच हो और आवश्यकतानुसार निर्माण/मरम्मत का कार्य जल्द शुरू कराया जाए। बच्चों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल ग्रामीणों का कहना है कि विकास की बात तब पूरी होगी जब गांवों को जोड़ने वाली सड़कें सुरक्षित और चलने लायक हों। सवाल यह भी है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद टूटेगी? ग्रामीणों ने चेतावनी नहीं बल्कि अपनी समस्या के समाधान की मांग करते हुए कहा कि सड़क की समस्या को गंभीरता से लिया जाए और जिम्मेदार विभाग तत्काल मौके पर पहुंचे। इन ग्रामीणों ने उठाई आवाज नाका निवासी कल्लू प्रधान, लतीफ खां, रज्जाक, बाबू, हनीफ, मेंबर मुताज अली, मुबीन तथा मरगया निवासी विकास कुमार, शैलेंद्र, बृजेश, सोनू, रज्जू, विवेक, धर्मेंद्र लम्बरदार, रामकरण कुशवाहा, पंकज ठाकुर और अमित समेत अन्य ग्रामीणों ने सड़क की हालत पर चिंता जताते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की। अब जवाबदेही का वक्त! क्या संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर सड़क की हकीकत देखेगा? क्या स्कूल के बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी? क्या जर्जर सड़क का स्थायी समाधान होगा? या फिर ग्रामीण इसी बदहाल रास्ते पर चलने को मजबूर रहेंगे?
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    कदौरा-नाका-मरगया मार्ग बना मुसीबत का रास्ता!
दैनिक भद्रावती टाइम्स 
यूपी हेड रानू मंसूरी 
रिपोर्ट विजय शर्मा 
सड़क जर्जर या हादसे का इंतजार? जिम्मेदारों की चुप्पी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
कदौरा। कदौरा से नाका होकर मरगया जाने वाले मार्ग की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क लंबे समय से खराब हालत में है और जगह-जगह गड्ढों व टूटे हिस्सों के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है।
किया विधायक महोदय संसद महोदय खाली वोट के लिए सड़क खराब हो या आदमी चले जायेंगे बच्चों की समस्या और कोई अधिकारी जाँच करने नहीं गया बच्चों के जान के साथ हो रहा खिलवाड़ कब तक यू ही चलता रहेगा लगभग 2 साल भी नहीं हुआ और रोड की हालत खराब खाली लीपापोती कर रहे अधिकारी मरीज को लेकर जाने में बहुत दिक्कत है इसमें किया 
कोई अधिकारी जाँच करने नहीं जाएगा 
सबसे गंभीर सवाल स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। रोजाना इसी मार्ग से बच्चे और ग्रामीण आवागमन करते हैं। ऐसे में खराब सड़क पर किसी भी समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों का सीधा सवाल—आखिर कब जागेगा प्रशासन?
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बची हुई है? यदि सड़क वास्तव में इतनी खराब है तो स्थलीय निरीक्षण कराकर मरम्मत या निर्माण की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि कदौरा से नाका होकर मरगया मार्ग का मौके पर निरीक्षण कराया जाए, सड़क की तकनीकी स्थिति की जांच हो और आवश्यकतानुसार निर्माण/मरम्मत का कार्य जल्द शुरू कराया जाए।
बच्चों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि विकास की बात तब पूरी होगी जब गांवों को जोड़ने वाली सड़कें सुरक्षित और चलने लायक हों। सवाल यह भी है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद टूटेगी?
ग्रामीणों ने चेतावनी नहीं बल्कि अपनी समस्या के समाधान की मांग करते हुए कहा कि सड़क की समस्या को गंभीरता से लिया जाए और जिम्मेदार विभाग तत्काल मौके पर पहुंचे।
इन ग्रामीणों ने उठाई आवाज
नाका निवासी कल्लू प्रधान, लतीफ खां, रज्जाक, बाबू, हनीफ, मेंबर मुताज अली, मुबीन तथा मरगया निवासी विकास कुमार, शैलेंद्र, बृजेश, सोनू, रज्जू, विवेक, धर्मेंद्र लम्बरदार, रामकरण कुशवाहा, पंकज ठाकुर और अमित समेत अन्य ग्रामीणों ने सड़क की हालत पर चिंता जताते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की।
अब जवाबदेही का वक्त!
क्या संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर सड़क की हकीकत देखेगा?
क्या स्कूल के बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी?
क्या जर्जर सड़क का स्थायी समाधान होगा?
या फिर ग्रामीण इसी बदहाल रास्ते पर चलने को मजबूर रहेंगे?
    user_विजय राज शर्मा भद्रावती टाइम्स
    विजय राज शर्मा भद्रावती टाइम्स
    Newspaper publisher जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • उरई का होप हॉस्पिटल या मौत का कुआँ'? पेट की नसें काटीं, ₹20 हजार में सौदा और जबरन लगवाया अंगूठा उरई का होप हॉस्पिटल या मौत का कुआँ'? पेट की नसें काटीं, ₹20 हजार में सौदा और जबरन लगवाया अंगूठा—पढ़िए इस अस्पताल की खौफनाक काली करतूत की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट! उरई शहर में कालपी रोड पर संचालित होप हॉस्पिटल का नाम अब इलाज नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ का दूसरा नाम बन चुका है। मध्य प्रदेश के भिंड से उरई पहुँची एक बेहद गरीब और बेबस महिला शिव कुमारी के साथ जो हुआ, उसने उरई के प्राइवेट मेडिकल सिंडिकेट की सबसे बदसूरत और खौफनाक तस्वीर पेश कर दी है। आरोप हैं कि डॉक्टर आदिल अंसारी ने ऑपरेशन के दौरान लापरवाही की सारी सीमाएं लांघते हुए महिला की पेशाब की थैली और नसों को बुरी तरह काट डाला—और जब मामला हाथ से निकलने लगा, तो उसे दबाने के लिए खेला गया प्रशासनिक व वित्तीय साजिश का घिनौना खेल! 1. सर्जिकल ब्लेड का कहर: बच्चेदानी के नाम पर शरीर को कर दिया छलनी पीड़िता शिव कुमारी ने गत 4 जुलाई 2026 को होप हॉस्पिटल में बच्चेदानी (Hysterectomy) का ऑपरेशन करवाया था। लापरवाही की इंतहा: आरोप है कि डॉ. आदिल अंसारी ने घोर लापरवाही में सर्जिकल ब्लेड से पीड़िता के यूरेन ब्लेडर (Pessab Ki Thaili) और उससे जुड़ी संवेदनशील नसों में दो गंभीर कट लगा दिए। इन्फेक्शन और रिसाव: ऑपरेशन के तुरंत बाद से ही महिला का अपने पेशाब पर नियंत्रण खत्म हो गया। शरीर के भीतर लगातार एसिडिक रिसाव होने से पेट के अंदर भयंकर इन्फेक्शन फैल गया और मरीज तड़पने के लिए मजबूर हो गई। 2. ₹20 हजार का लालच, गुर्गों की धमकी और सहमति पत्र का मास्टरमाइंड जाल जब 2 अगस्त 2026 को मरीज की स्थिति जीवन और मौत के बीच झूलने लगी, तो परिजन बदहवास होकर डॉक्टर के पास पहुंचे। यहाँ शुरू हुआ असली कातिलाना खेल: ₹20 हजार में जिंदगी का सौदा: आरोप है कि डॉ. आदिल अंसारी ने अपनी गलती छुपाने के लिए परिजनों के हाथ में ₹20,000 थमाए और मामले को वहीं दफन करने की कोशिश की। गुर्गों से घेरकर लगवाया अंगूठा: मरीज मध्य प्रदेश का था और आर्थिक व सामाजिक रूप से बेहद कमजोर (धोबी समाज) था। आरोप है कि डॉक्टर ने अपने गुर्गों को बुलाकर परिजनों को डरा-धमकाकर और घेरकर जबरन राजीनामे के कागजों पर अंगूठा व हस्ताक्षर करवा लिए। प्री-प्रिंटेड लीगल जाल: अस्पताल प्रशासन ने पहले ही एक ऐसा कंसेंट फॉर्म (सहमति पत्र) छपवा रखा था, जिसमें पहले से लिखा होता है कि ऑपरेशन के दौरान नली/थैली कटने या इन्फेक्शन होने की जिम्मेदारी स्वयं मरीज की होगी। यह साबित करता है कि अस्पताल कानूनी शिकंजे से बचने का पूरा प्लान पहले से बनाकर मरीजों को टेबल पर लिटाता है। 3. ग्वालियर के डॉक्टरों के उड़े होश: 6 घंटे का जटिल ऑपरेशन ही बचा सकता है जान उरई से निराश होकर जब परिजन महिला को ग्वालियर के अपोलो और सिंह हॉस्पिटल ले गए, तो वहां के विशेषज्ञ डॉक्टरों की रिपोर्ट ने सबको सन्न कर दिया। 2 जगहों से पूरी तरह कटी नसें: Scans और इन्फेक्शन जांच से खुलासा हुआ कि यूरेन ब्लेडर की नसें दो जगहों से बुरी तरह कटी हुई हैं। जिंदगी और मौत की जंग: ग्वालियर के डॉक्टरों के अनुसार अब महिला को 6 घंटे लंबे एक अति-जटिल और जोखिम भरे ऑपरेशन से गुजरना होगा। गरीब परिवार अब तक ₹2 लाख से ज्यादा लुटा चुका है और कर्ज के बोझ तले पूरी तरह टूट चुका है। 4. सरकारी की आड़ में प्राइवेट लूट': जानिए डॉ. आदिल अंसारी का पूरा इतिहास सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, डॉ. आदिल अंसारी और उनकी पत्नी डॉ. फातिमा अंसारी का यह पहला कारनामा नहीं है: सरकारी अस्पताल से प्राइवेट का रैकेट: ये दोनों पहले उरई के जिला सरकारी अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में पदस्थ थे। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में आने वाले भोले-भाले गरीब मरीजों को फुसलाकर अपने प्राइवेट होप हॉस्पिटल लाया जाता था और उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। पुरानी आदत: लगभग एक साल पहले पिपराया निवासी एक मरीज के साथ भी ऐसा ही हुआ था—मोटी रकम ऐंठने के बाद जब केस बिगड़ गया तो मरीज को तुरंत रेफर कर पल्ला झाड़ लिया गया। धर्म देखकर इलाज और पैसों का रसूख: सूत्रों का यह भी दावा है कि अस्पताल में मरीजों से धर्म देखकर व्यवहार और इलाज किया जाता है। दर्जनों मरीजों की जिंदगी से खेलना इनका पुराना खेल है, लेकिन पैसों की चमक और चंद दलालों की बदौलत यह डॉक्टर हर बार बच निकलता रहा। जल्द होगा अगला बड़ा पर्दाफाश! अधिनियम और कानून को जेब में लेकर घूमने वाले ऐसे डॉक्टरों और अस्पतालों की उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है। गलत काम करने वाले चाहे जितनी पैंतरेबाजी कर लें, कर्मों का हिसाब एक न एक दिन भुगतना ही पड़ता है। आपकी क्या राय है? क्या ऐसे गैर-जिम्मेदार अस्पतालों पर बुलडोजर चलना चाहिए या इनका लाइसेंस तुरंत रद्द होना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि कोई और गरीब इस जाल में न फंसे! वैधानिक चेतावनी / अस्वीकरण (Disclaimer) यह विस्तृत समाचार रिपोर्ट पीड़ित परिवार द्वारा जालौन के जिलाधिकारी (DM) को दिए गए लिखित शिकायती पत्र, पीड़िता के पति अशोक कुमार के दूरभाषीय बयानों एवं स्थानीय सूत्रों/प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें लगाए गए सभी आरोप प्राथमिक शिकायत पर आधारित हैं। मामले की निष्पक्ष सत्यता, डॉक्टरी लापरवाही के तकनीकी पहलुओं और वैधानिक स्थिति की पुष्टि शासन-प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सिद्ध हो सकेगी। #HopeHospitalOrai #DrAdilAnsari #MedicalNegligence #JusticeForShivKumari #OraiNews #JalaunNews #UPHealthScam #DMJalaun #JalaunPolice #MedicalMalpractice
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    उरई का होप हॉस्पिटल या मौत का कुआँ'?
पेट की नसें काटीं, ₹20 हजार में सौदा और जबरन लगवाया अंगूठा
उरई का होप हॉस्पिटल या मौत का कुआँ'? 
पेट की नसें काटीं, ₹20 हजार में सौदा और जबरन लगवाया अंगूठा—पढ़िए इस अस्पताल की खौफनाक काली करतूत की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट!
उरई शहर में कालपी रोड पर संचालित होप हॉस्पिटल का नाम अब इलाज नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ का दूसरा नाम बन चुका है। 
मध्य प्रदेश के भिंड से उरई पहुँची एक बेहद गरीब और बेबस महिला शिव कुमारी के साथ जो हुआ, उसने उरई के प्राइवेट मेडिकल सिंडिकेट की सबसे बदसूरत और खौफनाक तस्वीर पेश कर दी है। 
आरोप हैं कि डॉक्टर आदिल अंसारी ने ऑपरेशन के दौरान लापरवाही की सारी सीमाएं लांघते हुए महिला की पेशाब की थैली और नसों को बुरी तरह काट डाला—और जब मामला हाथ से निकलने लगा, तो उसे दबाने के लिए खेला गया प्रशासनिक व वित्तीय साजिश का घिनौना खेल!
1. सर्जिकल ब्लेड का कहर: बच्चेदानी के नाम पर शरीर को कर दिया छलनी
पीड़िता शिव कुमारी ने गत 4 जुलाई 2026 को होप हॉस्पिटल में बच्चेदानी (Hysterectomy) का ऑपरेशन करवाया था।
लापरवाही की इंतहा:
आरोप है कि डॉ. आदिल अंसारी ने घोर लापरवाही में सर्जिकल ब्लेड से पीड़िता के यूरेन ब्लेडर (Pessab Ki Thaili) और उससे जुड़ी संवेदनशील नसों में दो गंभीर कट लगा दिए।
इन्फेक्शन और रिसाव:
ऑपरेशन के तुरंत बाद से ही महिला का अपने पेशाब पर नियंत्रण खत्म हो गया। 
शरीर के भीतर लगातार एसिडिक रिसाव होने से पेट के अंदर भयंकर इन्फेक्शन फैल गया और मरीज तड़पने के लिए मजबूर हो गई।
2. ₹20 हजार का लालच, गुर्गों की धमकी और सहमति पत्र का मास्टरमाइंड जाल
जब 2 अगस्त 2026 को मरीज की स्थिति जीवन और मौत के बीच झूलने लगी, तो परिजन बदहवास होकर डॉक्टर के पास पहुंचे। 
यहाँ शुरू हुआ असली कातिलाना खेल:
₹20 हजार में जिंदगी का सौदा: 
आरोप है कि डॉ. आदिल अंसारी ने अपनी गलती छुपाने के लिए परिजनों के हाथ में ₹20,000 थमाए और मामले को वहीं दफन करने की कोशिश की।
गुर्गों से घेरकर लगवाया अंगूठा: मरीज मध्य प्रदेश का था और आर्थिक व सामाजिक रूप से बेहद कमजोर (धोबी समाज) था। 
आरोप है कि डॉक्टर ने अपने गुर्गों को बुलाकर परिजनों को डरा-धमकाकर और घेरकर जबरन राजीनामे के कागजों पर अंगूठा व हस्ताक्षर करवा लिए।
प्री-प्रिंटेड लीगल जाल: अस्पताल प्रशासन ने पहले ही एक ऐसा कंसेंट फॉर्म (सहमति पत्र) छपवा रखा था, जिसमें पहले से लिखा होता है कि ऑपरेशन के दौरान नली/थैली कटने या इन्फेक्शन होने की जिम्मेदारी स्वयं मरीज की होगी।
यह साबित करता है कि अस्पताल कानूनी शिकंजे से बचने का पूरा प्लान पहले से बनाकर मरीजों को टेबल पर लिटाता है।
3. ग्वालियर के डॉक्टरों के उड़े होश: 
6 घंटे का जटिल ऑपरेशन ही बचा सकता है जान
उरई से निराश होकर जब परिजन महिला को ग्वालियर के अपोलो और सिंह हॉस्पिटल ले गए, तो वहां के विशेषज्ञ डॉक्टरों की रिपोर्ट ने सबको सन्न कर दिया।
2 जगहों से पूरी तरह कटी नसें: Scans और इन्फेक्शन जांच से खुलासा हुआ कि यूरेन ब्लेडर की नसें दो जगहों से बुरी तरह कटी हुई हैं।
जिंदगी और मौत की जंग: ग्वालियर के डॉक्टरों के अनुसार अब महिला को 6 घंटे लंबे एक अति-जटिल और जोखिम भरे ऑपरेशन से गुजरना होगा। गरीब परिवार अब तक ₹2 लाख से ज्यादा लुटा चुका है और कर्ज के बोझ तले पूरी तरह टूट चुका है।
4. सरकारी की आड़ में प्राइवेट लूट': 
जानिए डॉ. आदिल अंसारी का पूरा इतिहास
सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, डॉ. आदिल अंसारी और उनकी पत्नी डॉ. फातिमा अंसारी का यह पहला कारनामा नहीं है:
सरकारी अस्पताल से प्राइवेट का रैकेट: 
ये दोनों पहले उरई के जिला सरकारी अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में पदस्थ थे। 
आरोप है कि सरकारी अस्पताल में आने वाले भोले-भाले गरीब मरीजों को फुसलाकर अपने प्राइवेट होप हॉस्पिटल लाया जाता था और उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।
पुरानी आदत: लगभग एक साल पहले पिपराया निवासी एक मरीज के साथ भी ऐसा ही हुआ था—मोटी रकम ऐंठने के बाद जब केस बिगड़ गया तो मरीज को तुरंत रेफर कर पल्ला झाड़ लिया गया।
धर्म देखकर इलाज और पैसों का रसूख: 
सूत्रों का यह भी दावा है कि अस्पताल में मरीजों से धर्म देखकर व्यवहार और इलाज किया जाता है। 
दर्जनों मरीजों की जिंदगी से खेलना इनका पुराना खेल है, लेकिन पैसों की चमक और चंद दलालों की बदौलत यह डॉक्टर हर बार बच निकलता रहा।
जल्द होगा अगला बड़ा पर्दाफाश!
अधिनियम और कानून को जेब में लेकर घूमने वाले ऐसे डॉक्टरों और अस्पतालों की उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है। 
गलत काम करने वाले चाहे जितनी पैंतरेबाजी कर लें, कर्मों का हिसाब एक न एक दिन भुगतना ही पड़ता है। 
आपकी क्या राय है?
क्या ऐसे गैर-जिम्मेदार अस्पतालों पर बुलडोजर चलना चाहिए या इनका लाइसेंस तुरंत रद्द होना चाहिए? 
अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि कोई और गरीब इस जाल में न फंसे!
वैधानिक चेतावनी / अस्वीकरण (Disclaimer)
यह विस्तृत समाचार रिपोर्ट पीड़ित परिवार द्वारा जालौन के जिलाधिकारी (DM) को दिए गए लिखित शिकायती पत्र, पीड़िता के पति अशोक कुमार के दूरभाषीय बयानों एवं स्थानीय सूत्रों/प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें लगाए गए सभी आरोप प्राथमिक शिकायत पर आधारित हैं।
मामले की निष्पक्ष सत्यता, डॉक्टरी लापरवाही के तकनीकी पहलुओं और वैधानिक स्थिति की पुष्टि शासन-प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सिद्ध हो सकेगी।
#HopeHospitalOrai #DrAdilAnsari #MedicalNegligence #JusticeForShivKumari #OraiNews #JalaunNews #UPHealthScam #DMJalaun #JalaunPolice #MedicalMalpractice
    user_RC Rajpoot पत्रकार
    RC Rajpoot पत्रकार
    Local News Reporter उरई, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    9 min ago
  • 2027 की जीत की हैट्रिक के लिए तैयार सीएम योगी, 44 जिलों का दौरा पूरा लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री अब तक प्रदेश के 44 जिलों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों के दौरान जहां उन्होंने करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, वहीं जनसभाओं और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जनता से सीधा संवाद भी स्थापित किया। मुख्यमंत्री के जिलावार दौरों में विकास, कानून-व्यवस्था, रोजगार, निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं पर विशेष फोकस दिखाई दे रहा है। सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ ही स्थानीय स्तर की समस्याओं और विकास कार्यों की प्रगति पर भी नजर रखी जा रही है। राजनीतिक तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार जिलों के दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को आधार बनाकर जनता के बीच संपर्क बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के दौरों में बड़ी परियोजनाओं की सौगात के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम जनता से संवाद का सिलसिला भी जारी है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी मुख्यमंत्री के दौरे और जनसंपर्क कार्यक्रम तेज हो सकते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रियता ने प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों को भी तेज कर दिया है।
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    2027 की जीत की हैट्रिक के लिए तैयार सीएम योगी, 44 जिलों का दौरा पूरा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री अब तक प्रदेश के 44 जिलों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों के दौरान जहां उन्होंने करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, वहीं जनसभाओं और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जनता से सीधा संवाद भी स्थापित किया। मुख्यमंत्री के जिलावार दौरों में विकास, कानून-व्यवस्था, रोजगार, निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं पर विशेष फोकस दिखाई दे रहा है। सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ ही स्थानीय स्तर की समस्याओं और विकास कार्यों की प्रगति पर भी नजर रखी जा रही है।
राजनीतिक तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार जिलों के दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को आधार बनाकर जनता के बीच संपर्क बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के दौरों में बड़ी परियोजनाओं की सौगात के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम जनता से संवाद का सिलसिला भी जारी है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी मुख्यमंत्री के दौरे और जनसंपर्क कार्यक्रम तेज हो सकते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रियता ने प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों को भी तेज कर दिया है।
    user_Pankaj Gupta
    Pankaj Gupta
    Media and information sciences faculty उरई, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    51 min ago
  • कोंच,पांच दिन से लापता अधेड़ का शव मलंगा नाले में मिला परिजनों ने जताई थी नाले में बहने की आशंका, एनडीआरएफ की टीम ने झाड़ियों में फंसा शव निकाला जालौन के कोंच में दिन गुरुवार को शाम 6 बजे पांच दिन से लापता कस्बे के गांधी नगर निवासी अधेड़ का शव गुरुवार शाम मलंगा नाले में झाड़ियों में फंसा मिलने से हड़कंप मच गया। परिजनों ने उसके नाले में बहने की आशंका जताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को बुलाकर तलाश शुरू कराई थी। कई घंटे की तलाश के बाद टीम को एसआरपी इंटर कॉलेज के पीछे नर्सरी के पास नाले की झाड़ियों में शव फंसा दिखाई दिया। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला। मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव की शिनाख्त मंगल सिंह के रूप में की। जानकारी के अनुसार गांधी नगर निवासी मंगल सिंह (49) बीती 5 सितंबर की दोपहर से लापता थे। काफी तलाश के बाद भी उनका कोई पता नहीं चलने पर उनके पुत्र अरुण रजक ने कोतवाली पुलिस को गुमशुदगी की तहरीर दी थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज की जांच करते हुए पुलिस मलंगा नाले तक पहुंची, लेकिन इसके आगे मंगल सिंह की कोई लोकेशन नहीं मिल सकी। परिजनों ने आशंका जताई थी कि वह मलंगा नाले में बह गए होंगे। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को बुलाया। गुरुवार दोपहर टीम ने नाले में तलाश अभियान शुरू किया। टीम ने नाले के विभिन्न हिस्सों में खोजबीन की। शाम के समय एसआरपी इंटर कॉलेज के पीछे नर्सरी के पास झाड़ियों में मंगल सिंह का शव फंसा मिला। शव बाहर निकलते ही मौके पर मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया। बताया गया कि मंगल सिंह के परिवार में एक पुत्र और चार पुत्रियां हैं। वह सागर चौकी के पास कपड़ों पर प्रेस करने का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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    कोंच,पांच दिन से लापता अधेड़ का शव मलंगा नाले में मिला
परिजनों ने जताई थी नाले में बहने की आशंका, एनडीआरएफ की टीम ने झाड़ियों में फंसा शव निकाला
जालौन के कोंच में दिन गुरुवार को शाम 6 बजे पांच दिन से लापता कस्बे के गांधी नगर निवासी अधेड़ का शव गुरुवार शाम मलंगा नाले में झाड़ियों में फंसा मिलने से हड़कंप मच गया। परिजनों ने उसके नाले में बहने की आशंका जताई थी, जिसके बाद प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को बुलाकर तलाश शुरू कराई थी।
कई घंटे की तलाश के बाद टीम को एसआरपी इंटर कॉलेज के पीछे नर्सरी के पास नाले की झाड़ियों में शव फंसा दिखाई दिया। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला। मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव की शिनाख्त मंगल सिंह के रूप में की।
जानकारी के अनुसार गांधी नगर निवासी मंगल सिंह (49) बीती 5 सितंबर की दोपहर से लापता थे। काफी तलाश के बाद भी उनका कोई पता नहीं चलने पर उनके पुत्र अरुण रजक ने कोतवाली पुलिस को गुमशुदगी की तहरीर दी थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज की जांच करते हुए पुलिस मलंगा नाले तक पहुंची, लेकिन इसके आगे मंगल सिंह की कोई लोकेशन नहीं मिल सकी।
परिजनों ने आशंका जताई थी कि वह मलंगा नाले में बह गए होंगे। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को बुलाया। गुरुवार दोपहर टीम ने नाले में तलाश अभियान शुरू किया। टीम ने नाले के विभिन्न हिस्सों में खोजबीन की। शाम के समय एसआरपी इंटर कॉलेज के पीछे नर्सरी के पास झाड़ियों में मंगल सिंह का शव फंसा मिला। शव बाहर निकलते ही मौके पर मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया।
बताया गया कि मंगल सिंह के परिवार में एक पुत्र और चार पुत्रियां हैं। वह सागर चौकी के पास कपड़ों पर प्रेस करने का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
    user_Vivek Dwivedi public news
    Vivek Dwivedi public news
    पत्रकार Konch, Jalaun•
    3 hrs ago
  • कोंच, पांच दिन से लापता अधेड़ का शव मलंगा नाले में मिला परिजनों ने जताई थी नाले में बहने की आशंका, एनडीआरएफ की टीम ने झाड़ियों में फंसा शव निकाला
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    कोंच, पांच दिन से लापता अधेड़ का शव

मलंगा नाले में मिला परिजनों ने जताई थी नाले में बहने की आशंका, एनडीआरएफ की टीम ने झाड़ियों में फंसा शव निकाला
    user_Bheem rajawat 9628800458
    Bheem rajawat 9628800458
    पत्रकार जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
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