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Bapulal Ahari
- Hiralal BunkarGhatol, Banswara💣11 min ago
- Hiralal BunkarGhatol, Banswara💣11 min ago
More news from राजस्थान and nearby areas
- Post by Bapulal Ahari1
- भीलूड़ा में रामनवमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, रघुनाथ मंदिर में भव्य आयोजन डूंगरपुर जिले के भीलूड़ा गांव में रामनवमी का पर्व इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। वागड़ अयोध्या के नाम से प्रसिद्ध इस गांव के प्राचीन रघुनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। रामनवमी के पावन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। जैसे ही भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का समय आया, पूरा मंदिर परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। प्रभु श्री रघुनाथ जी की प्रतिमा का आकर्षक श्रृंगार किया गया, वहीं मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया था। दोपहर में महाआरती का आयोजन किया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। इस दौरान डूंगरपुर, बांसवाड़ा सहित पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीराम के दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर समिति और ग्रामवासियों के सहयोग से पूरे आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।1
- Post by एकता समाचार1
- छींच गांव के किसानों ने विभिन्न समस्याओं को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया। किसानों का आरोप है कि ब्रह्मा मंदिर विकास के लिए मिले बजट का पूरा उपयोग नहीं हो पाया, जिससे विकास कार्य अधूरे रह गए हैं। इसके साथ ही छींच-लक्ष्मीपुरा मार्ग का सड़क निर्माण कार्य पिछले एक साल से अधर में लटका हुआ है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने गांव में गेहूं खरीद केंद्र नहीं खोले जाने और गेहूं की तुलाई नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। किसान मानेंग डांगी और किसान नेता अर्जुन सिंह मसाणी ने कहा कि किसानों की समस्याओं की कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे आम आदमी भी परेशान है। उन्होंने जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।1
- परिवहन विभाग कर रहा हे वाहनों की संघन जाँच 300 के करीब वाहनों को किया जब्त1
- Post by Alpesh Bhuriya2
- बांसिया गांव में रावला परिसर में चल रही संगीतमय राम कथा के छठे दिन बुधवार को भरत मिलाप का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। कथा के दौरान राम वनवास, राजा दशरथ की मृत्यु और भरत के त्याग व समर्पण की कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। बांसिया में आयोजित संगीतमय राम कथा के छठे दिन व्यासपीठ से पूज्य श्याम महाराज ने रामायण के अत्यंत भावुक प्रसंग ‘भरत मिलाप’ का विस्तार से वर्णन किया। कथा में बताया गया कि जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के लिए अयोध्या से प्रस्थान करते हैं, तो उनके वियोग में अयोध्या नगरी शोक में डूब जाती है। इस दुःखद परिस्थिति में राजा दशरथ अपने प्रिय पुत्र राम के वियोग को सहन नहीं कर पाते और अंततः उनका देहांत हो जाता है। श्याम महाराज ने कहा कि जब भरत को इस घटना का पता चलता है, तो वे अत्यंत दुखी होकर राम को वापस अयोध्या लाने के लिए वन की ओर प्रस्थान करते हैं। भरत का अपने बड़े भाई के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण आज के समाज के लिए एक आदर्श उदाहरण है। कथा में आगे बताया गया कि भरत ने भगवान राम से अयोध्या लौटकर राज्य संभालने की विनती की, लेकिन भगवान राम ने पिता की आज्ञा और वचन पालन को सर्वोपरि मानते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय दोहराया। इस पर भरत ने राम की चरण पादुका मांगकर उन्हें अयोध्या की राजगद्दी पर स्थापित किया और स्वयं एक सेवक की भांति राज्य का संचालन किया। व्यासपीठ से श्याम महाराज ने बताया कि यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जीवन में कर्तव्य, वचनबद्धता और परिवार के प्रति समर्पण सबसे बड़ा धर्म है। आज के समय में जब रिश्तों में स्वार्थ बढ़ रहा है, ऐसे में भरत और राम का आदर्श जीवन हमें त्याग, प्रेम और मर्यादा का मार्ग दिखाता है। कथा के दौरान बीच-बीच में प्रस्तुत मधुर भजनों ने वातावरण को पूर्ण रूप से राममय बना दिया, जिससे श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। छठे दिन की कथा के यजमान महिपाल सिंह चौहान बनकोडा रहे, जिन्होंने अपनी धर्मपत्नी के साथ विधिवत व्यासपीठ की पूजा-अर्चना की। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से कथा का रसपान किया।1
- सागवाड़ा कचरा घाटी में भीषण आग, घंटों मशक्कत के बाद भी नहीं बुझी—नगर पालिका पर उठे सवाल Sagwara। नगर पालिका क्षेत्र की कचरा घाटी स्थित कचरा निस्तारण केंद्र पर गुरुवार सुबह भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी विकराल थी कि सुबह करीब 11 बजे तक चार फायर ब्रिगेड की टीम लगातार पानी की बौछार करती रही, लेकिन आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। आग से उठ रहे घने धुएं के कारण कचरा घाटी के पास आरा मार्ग से गुजरने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे बन गए कि सड़क पर चल रहे वाहन तक दिखाई नहीं दे रहे थे, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहा। इस घटना ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरा निस्तारण केंद्र पर लंबे समय से कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान नहीं किया जा रहा, जिससे कचरे के ढेर बढ़ते जा रहे हैं और इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहता है। वहीं, कचरा घाटी में सैकड़ों गौवंश के मौजूद होने की बात भी सामने आई है, जो यहां फैले कचरे में से पॉलिथीन खाकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। यह स्थिति नगर पालिका की लापरवाही को उजागर करती है। आग लगने के कारणों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। प्रारंभिक तौर पर आग कैसे लगी, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन मार्च माह के अंत में कचरा निस्तारण के ठेके की अवधि पूरी होने के चलते ठेकेदार की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। फिलहाल प्रशासन आग पर काबू पाने में जुटा हुआ है, लेकिन इस घटना ने कचरा प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब देखना होगा कि जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।1