नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और संसद मार्ग पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गुरुवार को खूंटी के भगत सिंह चौक पर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका प्रतीकात्मक पुतला दहन कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए झामुमो के जिलाध्यक्ष जुबेर अहमद ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है और परीक्षा प्रणाली में आ रही अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भरोसा तोड़ा है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो", "छात्रों पर जुल्म करना बंद करो", "तानाशाही सरकार नहीं चलेगी" और "युवा विरोधी सरकार जवाब दो" जैसे नारे लगाकर अपना विरोध जताया। इस अवसर पर महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सुशांति कोनगाड़ी, जिला प्रवक्ता सह विधायक प्रतिनिधि मनोज मंडल, केंद्रीय सदस्य मकसूद अंसारी, भोलानाथ लाल, शंकर सिंह मुंडा, प्रकाश नाग मुंडा, कमलेश महतो, तनवीर खान, सनिका बोदरा, जगदीश मुंडा और दीनू प्रमाणिक सहित बड़ी संख्या में झामुमो के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और संसद मार्ग पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गुरुवार को खूंटी के भगत सिंह चौक पर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका प्रतीकात्मक पुतला दहन कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए झामुमो के जिलाध्यक्ष जुबेर अहमद ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है और परीक्षा प्रणाली में आ रही अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भरोसा तोड़ा है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो", "छात्रों पर जुल्म करना बंद करो", "तानाशाही सरकार नहीं चलेगी" और "युवा विरोधी सरकार जवाब दो" जैसे नारे लगाकर अपना विरोध जताया। इस अवसर पर महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सुशांति कोनगाड़ी, जिला प्रवक्ता सह विधायक प्रतिनिधि मनोज मंडल, केंद्रीय सदस्य मकसूद अंसारी, भोलानाथ लाल, शंकर सिंह मुंडा, प्रकाश नाग मुंडा, कमलेश महतो, तनवीर खान, सनिका बोदरा, जगदीश मुंडा और दीनू प्रमाणिक सहित बड़ी संख्या में झामुमो के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
- संसद सत्र के बाद संसद भवन के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के पक्ष में बड़ा बयान दिया है। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों की तीन प्रमुख मांगों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा है। राहुल गांधी के अनुसार, छात्रों की पहली मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। दूसरी मांग में छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई है, जबकि तीसरी मांग के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों से माफी मांगने को कहा गया है।1
- NEET पेपर लीक के मुद्दे पर क्रांतिकारी दिलीप का बयान सामने आया है। इस विषय को लेकर लगातार चर्चा की जा रही है।1
- रांची में गेल गैस लिमिटेड और सीएसआरएल की साझेदारी से संचालित सुपर-30 रेजिडेंशियल नीट कोचिंग सेंटर का दौरा गेल इंडिया के निदेशक (एचआर) आयुष गुप्ता ने किया। यह सीएसआर पहल आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को मुफ्त रेजिडेंशियल कोचिंग, रहने की व्यवस्था, अध्ययन सामग्री, भोजन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को डॉक्टर और इंजीनियर बनने के उनके सपने को पूरा करने में सक्षम बनाना और शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।1
- झारखंड में मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बीच पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड विकास पदाधिकारी सह पांकी प्रभारी अंचल अधिकारी मारवाड़ी साहु नागपुरी भाषा में जागरूकता गीत गाकर पूरे राज्य में लोकप्रिय हो गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मतदाताओं को जागरूक करने के इस अनोखे प्रयास में गाया गया उनका यह गीत प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है तथा इसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत नागफेनी गांव के रहने वाले मारवाड़ी साहु पहले एक शिक्षक थे। अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के बल पर वह उप समाहर्ता बने और वर्तमान में पलामू के रामगढ़ में अपनी सेवा दे रहे हैं। नागपुरी गीत के जरिए राज्य भर में मिली इस लोकप्रियता के बाद उनके कार्यालय कक्ष में उनसे मुलाकात करने के लिए ग्रामीण महिला और पुरुषों की भारी भीड़ पहुंच रही है।1
- खूंटी जिले के तोरपा थाना क्षेत्र में हुई ज्वेलरी दुकान और शराब दुकान चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए जमशेदपुर से चार शातिर अपराधियों को दबोच लिया है। गिरफ्तार अपराधियों के पास से चोरी किए गए आभूषण, शराब की बोतलें, ताला काटने के औजार और अन्य सामान बरामद किए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी गुरुवार दोपहर 1:00 बजे एसपी ऋषभ गर्ग ने प्रेस वार्ता आयोजित करके दी।1
- सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों का आमरण अनशन समाप्त कर दिया है। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने बताया कि वांगचुक ने यह अनशन खत्म करने का फैसला सरकार की ओर से दो प्रमुख आश्वासन मिलने के बाद लिया है। गीतांजलि के अनुसार, पहली शर्त यह थी कि सरकार यह भरोसा दे कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई या पुलिस बल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। वहीं दूसरी शर्त यह थी कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और परीक्षा संबंधी मुद्दों को संसद में गंभीरता से उठाया जाएगा तथा इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। इन मांगों के बीच केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर सरकार की ओर से आधिकारिक आश्वासन दिया, जिसके बाद सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपना अनशन समाप्त किया। हालांकि, वांगचुक ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के मूल मुद्दे अभी समाप्त नहीं हुए हैं और उन्होंने सभी लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठाने की अपील की है।1
- रांची के हरमू बायपास रोड पर JPSC और NEET जैसे मुद्दों के नाम पर कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और शक्ति प्रदर्शन का ढोंग रचा, जिसके कारण घंटों तक पूरा शहर थमा रहा, यातायात ठप हो गया और आम जनता भीषण जाम में फंसी रही। इस प्रदर्शन के चलते सड़क पर कई एम्बुलेंस सायरन बजा-बजाकर फंसी रहीं, जिनके अंदर मरीज जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे थे और बाहर परिजन बिलख रहे थे। इसके बावजूद राजनीतिक झंडे लहरा रहे कार्यकर्ताओं ने उनकी चीखों पर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं छुट्टी के बाद घर लौटने की आस में बैठे मासूम बच्चे बिना पानी और किसी राहत के गाड़ियों के धुएं के बीच स्कूल बसों में घंटों कैद रहे। घटना को लेकर प्रशासन की घोर लापरवाही पर सवाल उठाए गए हैं कि दो बड़े दलों के आमने-सामने आने की जानकारी के बावजूद ट्रैफिक पुलिस निष्क्रिय रही और रूट डायवर्जन नहीं किया गया। परीक्षा में धांधली पर गुस्सा जायज है, लेकिन आम नागरिकों, बीमार मरीजों और बच्चों को परेशान करके किए जाने वाले इस विरोध को 'जनहित' नहीं बल्कि 'सार्वजनिक उत्पीड़न' करार दिया गया है। जनता की मांग है कि विरोध प्रदर्शन तय जगहों पर ही हों और हरमू बायपास जैसे संवेदनशील रास्तों को तुरंत 'नो-प्रोटेस्ट ज़ोन' घोषित किया जाए।1