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झारखंड में मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बीच पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड विकास पदाधिकारी सह पांकी प्रभारी अंचल अधिकारी मारवाड़ी साहु नागपुरी भाषा में जागरूकता गीत गाकर पूरे राज्य में लोकप्रिय हो गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मतदाताओं को जागरूक करने के इस अनोखे प्रयास में गाया गया उनका यह गीत प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है तथा इसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत नागफेनी गांव के रहने वाले मारवाड़ी साहु पहले एक शिक्षक थे। अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के बल पर वह उप समाहर्ता बने और वर्तमान में पलामू के रामगढ़ में अपनी सेवा दे रहे हैं। नागपुरी गीत के जरिए राज्य भर में मिली इस लोकप्रियता के बाद उनके कार्यालय कक्ष में उनसे मुलाकात करने के लिए ग्रामीण महिला और पुरुषों की भारी भीड़ पहुंच रही है।

4 hrs ago
user_कृष्णा कुमार साहु
कृष्णा कुमार साहु
रिपोर्टर सिसई, गुमला, झारखंड•
4 hrs ago

झारखंड में मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बीच पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड विकास पदाधिकारी सह पांकी प्रभारी अंचल अधिकारी मारवाड़ी साहु नागपुरी भाषा में जागरूकता गीत गाकर पूरे राज्य में लोकप्रिय हो गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मतदाताओं को जागरूक करने के इस अनोखे प्रयास में गाया गया उनका यह गीत प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है तथा इसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत नागफेनी गांव के रहने वाले मारवाड़ी साहु पहले एक शिक्षक थे। अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के बल पर वह उप समाहर्ता बने और वर्तमान में पलामू के रामगढ़ में अपनी सेवा दे रहे हैं। नागपुरी गीत के जरिए राज्य भर में मिली इस लोकप्रियता के बाद उनके कार्यालय कक्ष में उनसे मुलाकात करने के लिए ग्रामीण महिला और पुरुषों की भारी भीड़ पहुंच रही है।

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  • झारखंड में मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बीच पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड विकास पदाधिकारी सह पांकी प्रभारी अंचल अधिकारी मारवाड़ी साहु नागपुरी भाषा में जागरूकता गीत गाकर पूरे राज्य में लोकप्रिय हो गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मतदाताओं को जागरूक करने के इस अनोखे प्रयास में गाया गया उनका यह गीत प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है तथा इसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत नागफेनी गांव के रहने वाले मारवाड़ी साहु पहले एक शिक्षक थे। अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के बल पर वह उप समाहर्ता बने और वर्तमान में पलामू के रामगढ़ में अपनी सेवा दे रहे हैं। नागपुरी गीत के जरिए राज्य भर में मिली इस लोकप्रियता के बाद उनके कार्यालय कक्ष में उनसे मुलाकात करने के लिए ग्रामीण महिला और पुरुषों की भारी भीड़ पहुंच रही है।
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    झारखंड में मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बीच पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड विकास पदाधिकारी सह पांकी प्रभारी अंचल अधिकारी मारवाड़ी साहु नागपुरी भाषा में जागरूकता गीत गाकर पूरे राज्य में लोकप्रिय हो गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मतदाताओं को जागरूक करने के इस अनोखे प्रयास में गाया गया उनका यह गीत प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है तथा इसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं।

गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत नागफेनी गांव के रहने वाले मारवाड़ी साहु पहले एक शिक्षक थे। अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के बल पर वह उप समाहर्ता बने और वर्तमान में पलामू के रामगढ़ में अपनी सेवा दे रहे हैं। नागपुरी गीत के जरिए राज्य भर में मिली इस लोकप्रियता के बाद उनके कार्यालय कक्ष में उनसे मुलाकात करने के लिए ग्रामीण महिला और पुरुषों की भारी भीड़ पहुंच रही है।
    user_कृष्णा कुमार साहु
    कृष्णा कुमार साहु
    रिपोर्टर सिसई, गुमला, झारखंड•
    4 hrs ago
  • सिमडेगा जिला के लचरागढ़ निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट एवं भ्रष्टाचार निरोधक जांच विभाग के सक्रिय सदस्य विष्णु साहू ने राज्य स्तर पर धर्मांतरण और भूमि कब्जे के मामलों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने 'डॉक्ट्रिन ऑफ क्रिश्चियन डिस्कवरी' के सिद्धांत का हवाला देते हुए बताया कि करीब 500 वर्ष पहले 15वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों के बीच बनी सहमति और ईसाइयों के धर्मगुरु पोप के समर्थन के तहत गैर-ईसाई देशों पर कब्जे और धर्मांतरण की छूट दी गई थी। सन 1493 में पोप एलेकजेंडर 6वें द्वारा दुनिया को दो हिस्सों में बांटने, 1498 में वास्कोडिगामा के आगमन, 1770 में जेम्स कुक के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने और अमेरिका, न्यूजीलैंड, कनाडा तथा भारत पर कब्जे के इतिहास का उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने 1510 ईस्वी में गोवा पर अल्बुकर्क के कब्जे, मंदिर तोड़ने और 1543 के गोवा एक्विजिशन के दमनकारी इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि आजादी के बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' चलाकर 36 घंटे में ही उन्हें वहां से खदेड़ा था। विष्णु साहू ने आरोप लगाया कि वर्तमान में प्रार्थना सभाओं और चंगाई सभाओं के जरिए बीमारियों को ठीक करने के नाम पर अंधविश्वास फैलाकर और लालच देकर धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। झारखंड में इसी गुप्त षड्यंत्र के तहत सीएनटी एक्ट को ताक पर रखकर खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में गरीब आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर मिशनरी स्कूलों व चर्च का निर्माण कराया गया। जिन आदिवासियों की जमीनें ली गईं, वे आज भूमिहीन होकर प्रवासी मजदूर के रूप में जीवन यापन करने के लिए राज्य से बाहर जाने पर मजबूर हैं। इसके अलावा सरकारी और गैर-मजरुआ भूमि तथा जंगलों को काटकर भी मिशनरी संस्थाओं ने जमीनों पर कब्जा किया है। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणी छोटा नागपुर के प्रायः हर सरकारी विभाग में क्रिश्चियन समुदाय के लोग काबिज हैं, जिससे गैर-ईसाई आदिवासियों और आम लोगों को अपने कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पादरियों द्वारा विभिन्न शोषणों के फरमान जारी करने और झूठे एससी-एसटी मुकदमों का डर दिखाकर नफरत फैलाने के काम किए जा रहे हैं। इसी नीति के तहत मेघालय में लगभग 75% और मिजोरम तथा नागालैंड में 87% से 90% तक ईसाई आबादी हो चुकी है। उन्होंने झारखंड के नागरिकों से किसी भी लालच या अंधविश्वास में न पड़ने का अनुरोध किया और राज्य व केंद्र सरकार से देश की एकता, अखंडता और समरसता बनाए रखने के लिए ठोस रणनीति बनाकर कार्रवाई करने का आग्रह किया।
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    सिमडेगा जिला के लचरागढ़ निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट एवं भ्रष्टाचार निरोधक जांच विभाग के सक्रिय सदस्य विष्णु साहू ने राज्य स्तर पर धर्मांतरण और भूमि कब्जे के मामलों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने 'डॉक्ट्रिन ऑफ क्रिश्चियन डिस्कवरी' के सिद्धांत का हवाला देते हुए बताया कि करीब 500 वर्ष पहले 15वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों के बीच बनी सहमति और ईसाइयों के धर्मगुरु पोप के समर्थन के तहत गैर-ईसाई देशों पर कब्जे और धर्मांतरण की छूट दी गई थी। सन 1493 में पोप एलेकजेंडर 6वें द्वारा दुनिया को दो हिस्सों में बांटने, 1498 में वास्कोडिगामा के आगमन, 1770 में जेम्स कुक के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने और अमेरिका, न्यूजीलैंड, कनाडा तथा भारत पर कब्जे के इतिहास का उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने 1510 ईस्वी में गोवा पर अल्बुकर्क के कब्जे, मंदिर तोड़ने और 1543 के गोवा एक्विजिशन के दमनकारी इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि आजादी के बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' चलाकर 36 घंटे में ही उन्हें वहां से खदेड़ा था।

विष्णु साहू ने आरोप लगाया कि वर्तमान में प्रार्थना सभाओं और चंगाई सभाओं के जरिए बीमारियों को ठीक करने के नाम पर अंधविश्वास फैलाकर और लालच देकर धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। झारखंड में इसी गुप्त षड्यंत्र के तहत सीएनटी एक्ट को ताक पर रखकर खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में गरीब आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर मिशनरी स्कूलों व चर्च का निर्माण कराया गया। जिन आदिवासियों की जमीनें ली गईं, वे आज भूमिहीन होकर प्रवासी मजदूर के रूप में जीवन यापन करने के लिए राज्य से बाहर जाने पर मजबूर हैं। इसके अलावा सरकारी और गैर-मजरुआ भूमि तथा जंगलों को काटकर भी मिशनरी संस्थाओं ने जमीनों पर कब्जा किया है।

उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणी छोटा नागपुर के प्रायः हर सरकारी विभाग में क्रिश्चियन समुदाय के लोग काबिज हैं, जिससे गैर-ईसाई आदिवासियों और आम लोगों को अपने कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पादरियों द्वारा विभिन्न शोषणों के फरमान जारी करने और झूठे एससी-एसटी मुकदमों का डर दिखाकर नफरत फैलाने के काम किए जा रहे हैं। इसी नीति के तहत मेघालय में लगभग 75% और मिजोरम तथा नागालैंड में 87% से 90% तक ईसाई आबादी हो चुकी है। उन्होंने झारखंड के नागरिकों से किसी भी लालच या अंधविश्वास में न पड़ने का अनुरोध किया और राज्य व केंद्र सरकार से देश की एकता, अखंडता और समरसता बनाए रखने के लिए ठोस रणनीति बनाकर कार्रवाई करने का आग्रह किया।
    user_SHAMBHU. S. CHAUHAN
    SHAMBHU. S. CHAUHAN
    Business Networking Company सिसई, गुमला, झारखंड•
    19 hrs ago
  • +91 7667913218 address angrabari bichna khunti pin code 835210 jharkhand
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    +91 7667913218
address angrabari bichna khunti pin code 835210 jharkhand
    user_Rishi Kisan Machine
    Rishi Kisan Machine
    Farmer Gumla, Jharkhand•
    9 hrs ago
  • लोहरदगा के कसारा से जुड़ी खबरों और अपडेट्स को आप सभी तक निरंतर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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    लोहरदगा के कसारा से जुड़ी खबरों और अपडेट्स को आप सभी तक निरंतर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    8 min ago
  • नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और संसद मार्ग पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गुरुवार को खूंटी के भगत सिंह चौक पर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका प्रतीकात्मक पुतला दहन कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए झामुमो के जिलाध्यक्ष जुबेर अहमद ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है और परीक्षा प्रणाली में आ रही अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भरोसा तोड़ा है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो", "छात्रों पर जुल्म करना बंद करो", "तानाशाही सरकार नहीं चलेगी" और "युवा विरोधी सरकार जवाब दो" जैसे नारे लगाकर अपना विरोध जताया। इस अवसर पर महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सुशांति कोनगाड़ी, जिला प्रवक्ता सह विधायक प्रतिनिधि मनोज मंडल, केंद्रीय सदस्य मकसूद अंसारी, भोलानाथ लाल, शंकर सिंह मुंडा, प्रकाश नाग मुंडा, कमलेश महतो, तनवीर खान, सनिका बोदरा, जगदीश मुंडा और दीनू प्रमाणिक सहित बड़ी संख्या में झामुमो के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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    नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और संसद मार्ग पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गुरुवार को खूंटी के भगत सिंह चौक पर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका प्रतीकात्मक पुतला दहन कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।

प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए झामुमो के जिलाध्यक्ष जुबेर अहमद ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है और परीक्षा प्रणाली में आ रही अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भरोसा तोड़ा है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो", "छात्रों पर जुल्म करना बंद करो", "तानाशाही सरकार नहीं चलेगी" और "युवा विरोधी सरकार जवाब दो" जैसे नारे लगाकर अपना विरोध जताया।

इस अवसर पर महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सुशांति कोनगाड़ी, जिला प्रवक्ता सह विधायक प्रतिनिधि मनोज मंडल, केंद्रीय सदस्य मकसूद अंसारी, भोलानाथ लाल, शंकर सिंह मुंडा, प्रकाश नाग मुंडा, कमलेश महतो, तनवीर खान, सनिका बोदरा, जगदीश मुंडा और दीनू प्रमाणिक सहित बड़ी संख्या में झामुमो के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    user_Durga Baraik
    Durga Baraik
    Local News Reporter कर्रा, खूंटी, झारखंड•
    39 min ago
  • लोहरदगा में हो रहे तमाम जमीन विवादों को उजागर करने और उन्हें दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। क्षेत्र में चल रहे ऐसे सभी मामलों को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
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    लोहरदगा में हो रहे तमाम जमीन विवादों को उजागर करने और उन्हें दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। क्षेत्र में चल रहे ऐसे सभी मामलों को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • रांची के हरमू बायपास रोड पर JPSC और NEET जैसे मुद्दों के नाम पर कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और शक्ति प्रदर्शन का ढोंग रचा, जिसके कारण घंटों तक पूरा शहर थमा रहा, यातायात ठप हो गया और आम जनता भीषण जाम में फंसी रही। इस प्रदर्शन के चलते सड़क पर कई एम्बुलेंस सायरन बजा-बजाकर फंसी रहीं, जिनके अंदर मरीज जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे थे और बाहर परिजन बिलख रहे थे। इसके बावजूद राजनीतिक झंडे लहरा रहे कार्यकर्ताओं ने उनकी चीखों पर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं छुट्टी के बाद घर लौटने की आस में बैठे मासूम बच्चे बिना पानी और किसी राहत के गाड़ियों के धुएं के बीच स्कूल बसों में घंटों कैद रहे। घटना को लेकर प्रशासन की घोर लापरवाही पर सवाल उठाए गए हैं कि दो बड़े दलों के आमने-सामने आने की जानकारी के बावजूद ट्रैफिक पुलिस निष्क्रिय रही और रूट डायवर्जन नहीं किया गया। परीक्षा में धांधली पर गुस्सा जायज है, लेकिन आम नागरिकों, बीमार मरीजों और बच्चों को परेशान करके किए जाने वाले इस विरोध को 'जनहित' नहीं बल्कि 'सार्वजनिक उत्पीड़न' करार दिया गया है। जनता की मांग है कि विरोध प्रदर्शन तय जगहों पर ही हों और हरमू बायपास जैसे संवेदनशील रास्तों को तुरंत 'नो-प्रोटेस्ट ज़ोन' घोषित किया जाए।
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    रांची के हरमू बायपास रोड पर JPSC और NEET जैसे मुद्दों के नाम पर कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और शक्ति प्रदर्शन का ढोंग रचा, जिसके कारण घंटों तक पूरा शहर थमा रहा, यातायात ठप हो गया और आम जनता भीषण जाम में फंसी रही।

इस प्रदर्शन के चलते सड़क पर कई एम्बुलेंस सायरन बजा-बजाकर फंसी रहीं, जिनके अंदर मरीज जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे थे और बाहर परिजन बिलख रहे थे। इसके बावजूद राजनीतिक झंडे लहरा रहे कार्यकर्ताओं ने उनकी चीखों पर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं छुट्टी के बाद घर लौटने की आस में बैठे मासूम बच्चे बिना पानी और किसी राहत के गाड़ियों के धुएं के बीच स्कूल बसों में घंटों कैद रहे।

घटना को लेकर प्रशासन की घोर लापरवाही पर सवाल उठाए गए हैं कि दो बड़े दलों के आमने-सामने आने की जानकारी के बावजूद ट्रैफिक पुलिस निष्क्रिय रही और रूट डायवर्जन नहीं किया गया। परीक्षा में धांधली पर गुस्सा जायज है, लेकिन आम नागरिकों, बीमार मरीजों और बच्चों को परेशान करके किए जाने वाले इस विरोध को 'जनहित' नहीं बल्कि 'सार्वजनिक उत्पीड़न' करार दिया गया है। जनता की मांग है कि विरोध प्रदर्शन तय जगहों पर ही हों और हरमू बायपास जैसे संवेदनशील रास्तों को तुरंत 'नो-प्रोटेस्ट ज़ोन' घोषित किया जाए।
    user_Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
    Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
    Insurance Agent लापुंग, रांची, झारखंड•
    18 hrs ago
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