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कुछ लफगें कावंड़िया बन कर उत्तराखण्ड में आ कर न केवल माहौल खराब करते हैं बल्कि आम लोगों से भारपीट और हंगामा कर ते हैं और सभी कांवा कांवडियों को बदनाम कारे हैं। इनको सही सबक सिखाया । उम्मीद है अन्य लफंगे भी सबक लेगें.....
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कुछ लफगें कावंड़िया बन कर उत्तराखण्ड में आ कर न केवल माहौल खराब करते हैं बल्कि आम लोगों से भारपीट और हंगामा कर ते हैं और सभी कांवा कांवडियों को बदनाम कारे हैं। इनको सही सबक सिखाया । उम्मीद है अन्य लफंगे भी सबक लेगें.....
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- दिल्ली की एक ऑटो ड्राइवर की समस्या हुई गाड़ी ठीक अपने मंजिल तक पहुंचा ड्राइवर ड्राइवर ने सभी ड्राइवर को बताया की क्या करना चाहिए1
- दिल्ली में दर्दनाक हादसा... मां की दुनिया था साहिल, घर की दीवारों पर हाथ से लिखे थे सपने, यूके जाने की थी तैयारी साहिल सिर्फ एक बेटा नहीं, अपनी 'सिंगल मदर' इन्ना माकन की पूरी दुनिया था. साहिल बीबीए (BBA) कर रहा था और उसका लक्ष्य था विदेश जाकर मास्टर्स करना. वह अपनी मां पर बोझ नहीं बनना चाहता था। नई दिल्ली (द्वारका): दिल्ली में द्वारका की सड़कों पर बिखरा वह खून सिर्फ एक हादसे का निशान नहीं, बल्कि एक मां के उन तमाम सपनों की आहुति है जिसे उसने 23 साल तक सींचा था. एक रईसजादे की रफ्तार और सोशल मीडिया पर रील बनाने की सनक ने 23 वर्षीय साहिल धनेश्रा की जिंदगी छीन ली.1
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- ननद का ज़्यादा दखल… क्या सीधे जेल? भाई-भाभी की ज़िंदगी में रोज़ का कलेश अगर हद पार कर जाए, तो मामला सिर्फ़ घर तक सीमित नहीं रहता। कानून भी बीच में आता है। लगातार मानसिक प्रताड़ना, धमकी, झूठे आरोप या घरेलू शांति भंग करना IPC की धाराओं और घरेलू हिंसा कानून के दायरे में आ सकता है। अगर ननद का हस्तक्षेप पति-पत्नी के रिश्ते को तोड़ने, डराने या नुकसान पहुँचाने की नीयत से हो—तो पुलिस केस, नोटिस और ज़मानत तक की नौबत आ सकती है। हालाँकि हर झगड़ा जेल नहीं पहुँचाता, लेकिन सबूत और गंभीरता बढ़े तो कानून सख़्त हो जाता है। घर का मामला कब बन जाता है कानूनी मामला—जानिए इस वीडियो में।1
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