20 सालों से सामाजिक बहिष्कार का दंस झेल रहा परिवार.... छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है… जहां एक परिवार पिछले 20 सालों से सामाजिक बहिष्कार का दर्द झेल रहा है। वजह सिर्फ इतनी कि उन्होंने कथित तौर पर ढाई सौ रुपए का सामाजिक जुर्माना नहीं भरा। अब हालात ऐसे हैं कि परिवार के बच्चों की शादी तक नहीं हो पा रही है। वीओ,01 ये मामला शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के आमगांव का है… जहां रहने वाला महाबीर प्रसाद गुप्ता का परिवार बीते दो दशकों से समाज से अलग-थलग कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि एक सामाजिक बैठक में शामिल न होने पर परिवार पर 250 रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया था… जिसे न चुकाने पर पूरे परिवार का बहिष्कार कर दिया गया। वीओ,02 समय बीतता गया… लेकिन बहिष्कार खत्म नहीं हुआ। अब इस फैसले का असर परिवार की नई पीढ़ी पर पड़ रहा है। बच्चे बड़े हो चुके हैं… लेकिन उनकी शादी की बात जहां भी चलती है, समाज से बहिष्कृत होने की खबर पहले ही पहुंच जाती है… और रिश्ते टूट जाते हैं। बाइट- महाबीर प्रसाद गुप्ता, पीड़ित बाइट-पुत्री, पीड़िता बाइट-पुत्र, पीड़ित वीओ, 03 गाँव वाले भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि इन्हें समाज से बहिष्कृत किया गया है, पूरा परिवार 20 सालो से इस बहिष्कार का दंस झेल रहे है, पीड़ित परिवार ने समाज से विनती भी की समाज के बैठक में भी शामिल हुए पर बैठक में मोबाइल बंद कर दिया गया और उन्हें बाहर निकाल दिया गया पीड़ित द्वारा उसे दौरान का वीडियो भी बना लिया है, बाइट, रामा शंकर राम पैकरा, ग्रामीण पीड़ित परिवार ने इस मामले की शिकायत थाने में भी की… लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब परिवार न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। कानून के जानकारों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना गैरकानूनी माना जा सकता है… और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में प्रशासन को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी चाहिए। सवाल यह है कि आखिर 250 रुपए के विवाद ने कैसे एक पूरे परिवार की जिंदगी पर 20 साल का ग्रहण लगा दिया… और कब मिलेगा इस परिवार को न्याय? फिलहाल देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है… और क्या इस परिवार को समाज में दोबारा सम्मान के साथ जगह मिल पाएगी या नहीं।
20 सालों से सामाजिक बहिष्कार का दंस झेल रहा परिवार.... छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है… जहां एक परिवार पिछले 20 सालों से सामाजिक बहिष्कार का दर्द झेल रहा है। वजह सिर्फ इतनी कि उन्होंने कथित तौर पर ढाई सौ रुपए का सामाजिक जुर्माना नहीं भरा। अब हालात ऐसे हैं कि परिवार के बच्चों की शादी तक नहीं हो पा रही है। वीओ,01 ये मामला शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के आमगांव का है… जहां रहने वाला महाबीर प्रसाद गुप्ता का परिवार बीते दो दशकों से समाज से अलग-थलग कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि एक सामाजिक बैठक में शामिल न होने पर परिवार पर 250 रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया था… जिसे न चुकाने पर पूरे परिवार का बहिष्कार कर दिया गया। वीओ,02 समय बीतता गया… लेकिन बहिष्कार खत्म नहीं हुआ। अब इस फैसले का असर परिवार की नई पीढ़ी पर पड़ रहा है। बच्चे बड़े हो चुके हैं… लेकिन उनकी शादी की बात जहां भी चलती है, समाज से बहिष्कृत होने की खबर पहले ही पहुंच जाती है… और रिश्ते टूट जाते हैं। बाइट- महाबीर प्रसाद गुप्ता, पीड़ित बाइट-पुत्री, पीड़िता बाइट-पुत्र, पीड़ित वीओ, 03 गाँव वाले भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि इन्हें समाज से बहिष्कृत किया गया है, पूरा परिवार 20 सालो से इस बहिष्कार का दंस झेल रहे है, पीड़ित परिवार ने समाज से विनती भी की समाज के बैठक में भी शामिल हुए पर बैठक में मोबाइल बंद कर दिया गया और उन्हें बाहर निकाल दिया गया पीड़ित द्वारा उसे दौरान का वीडियो भी बना लिया है, बाइट, रामा शंकर राम पैकरा, ग्रामीण पीड़ित परिवार ने इस मामले की शिकायत थाने में भी की… लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब परिवार न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। कानून के जानकारों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना गैरकानूनी माना जा सकता है… और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में प्रशासन को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी चाहिए। सवाल यह है कि आखिर 250 रुपए के विवाद ने कैसे एक पूरे परिवार की जिंदगी पर 20 साल का ग्रहण लगा दिया… और कब मिलेगा इस परिवार को न्याय? फिलहाल देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है… और क्या इस परिवार को समाज में दोबारा सम्मान के साथ जगह मिल पाएगी या नहीं।
- Sudhar Singh Tekamप्रतापपुर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़😤2 hrs ago
- Sudhar Singh Tekamप्रतापपुर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़👏2 hrs ago
- User6289Rajpur, Balrampur👏4 hrs ago
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- ब्रेकिंग बलरामपुर बलरामपुर के विकासखंड रामचंद्रपुर में भीषण आग पण्डो परिवार का आशियाना जलकर राख ग्राम चूना पत्थर में बीती रात पुरनलाल पण्डो के घर में लगी आग, बाल-बाल बचे पाँच सदस्य। शॉर्ट सर्किट की आशंका घर के साथ 10 बोरी धान, 8 बोरी गेहूं और सरसों का भंडार जलकर स्वाहा हुआ सोते समय बिस्तर पर अंगारे गिरने से खुली नींद ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित निकाले गए बच्चे और परिजन... पिता के साये के बिना बड़ी मुश्किल से बनाया था घर, अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हुआ परिवार.. पूरा मामला बलरामपुर जिले के चूना पत्थर गांव का है1
- छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है… जहां एक परिवार पिछले 20 सालों से सामाजिक बहिष्कार का दर्द झेल रहा है। वजह सिर्फ इतनी कि उन्होंने कथित तौर पर ढाई सौ रुपए का सामाजिक जुर्माना नहीं भरा। अब हालात ऐसे हैं कि परिवार के बच्चों की शादी तक नहीं हो पा रही है। वीओ,01 ये मामला शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के आमगांव का है… जहां रहने वाला महाबीर प्रसाद गुप्ता का परिवार बीते दो दशकों से समाज से अलग-थलग कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि एक सामाजिक बैठक में शामिल न होने पर परिवार पर 250 रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया था… जिसे न चुकाने पर पूरे परिवार का बहिष्कार कर दिया गया। वीओ,02 समय बीतता गया… लेकिन बहिष्कार खत्म नहीं हुआ। अब इस फैसले का असर परिवार की नई पीढ़ी पर पड़ रहा है। बच्चे बड़े हो चुके हैं… लेकिन उनकी शादी की बात जहां भी चलती है, समाज से बहिष्कृत होने की खबर पहले ही पहुंच जाती है… और रिश्ते टूट जाते हैं। बाइट- महाबीर प्रसाद गुप्ता, पीड़ित बाइट-पुत्री, पीड़िता बाइट-पुत्र, पीड़ित वीओ, 03 गाँव वाले भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि इन्हें समाज से बहिष्कृत किया गया है, पूरा परिवार 20 सालो से इस बहिष्कार का दंस झेल रहे है, पीड़ित परिवार ने समाज से विनती भी की समाज के बैठक में भी शामिल हुए पर बैठक में मोबाइल बंद कर दिया गया और उन्हें बाहर निकाल दिया गया पीड़ित द्वारा उसे दौरान का वीडियो भी बना लिया है, बाइट, रामा शंकर राम पैकरा, ग्रामीण पीड़ित परिवार ने इस मामले की शिकायत थाने में भी की… लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब परिवार न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। कानून के जानकारों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना गैरकानूनी माना जा सकता है… और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में प्रशासन को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी चाहिए। सवाल यह है कि आखिर 250 रुपए के विवाद ने कैसे एक पूरे परिवार की जिंदगी पर 20 साल का ग्रहण लगा दिया… और कब मिलेगा इस परिवार को न्याय? फिलहाल देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है… और क्या इस परिवार को समाज में दोबारा सम्मान के साथ जगह मिल पाएगी या नहीं।1
- ब्रेकिंग- बलरामपुर (छत्तीसगढ़) मो: 6266672741 शादी में पुलिस सायरन का 'भौकाल' कानून की उड़ी धज्जियां बलरामपुर के चलगली थाना क्षेत्र में शादी की गाड़ी पर पुलिस सायरन बजाकर धौंस जमाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। बारातियों द्वारा खुलेआम सायरन का दुरुपयोग कर ग्रामीणों को डराने की कोशिश की गई। लेकिन स्थानीय पुलिस घंटों तक गहरी नींद में सोई रही ग्रामीणों की शिकायत पर एसपी के निर्देश के बाद मौके पर पहुंची चलगली थाना प्रभारी कार्रवाई करने के बजाय दूल्हा-दुल्हन के सामने हाथ जोड़ते नगर आए कानूनन अपराध होने के बावजूद सायरन बजाने वालों पर कोई एक्शन न लेना और पुलिस का नरम रवैया प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो और पुलिस की सुस्त कार्रवाई को देख लोग पूछ रहे हैं क्या रसूखदारों के आगे नतमस्तक हो गया है कानून अब देखने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में जिले के पुलिस कप्तान वैभव बैंक कर किस प्रकार कार्यवाही करते हैं। पूरा मामला बलरामपुर जिले के चलगली थाना क्षेत्र का है।2
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- चिनिया से हेमंत कुमार की रिपोर्ट दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में एक महिला की मौके पर दर्दनाक मौत चार गंभीर रूप से घायल सभी गढ़वा रेफर1
- 25 अप्रैल 2026 की रात (या उसके आसपास) डालटनगंज (मेदिनीनगर) में ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण NH-139 पर भीषण सड़क दुर्घटना रही। पड़वा थाना क्षेत्र के पास एक तेज रफ्तार एसयूवी (SUV) और मोटरसाइकिल के बीच आमने-सामने की टक्कर के कारण वाहनों का लंबा जाम लग गया। जाम के मुख्य कारण: सड़क दुर्घटना: 25 अप्रैल 2026 की देर रात तक, पुलिस और स्थानीय लोगों को वाहनों को हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक घंटों रेंगता रहा।4
- गढ़वा पुरानी बाजार अस्मशान घाट के पास एक गाड़ी में उसे वक्त आग लग गई जिस समय गाड़ी मालिक गाड़ी खड़ा कर पुरानी बाजार स्थित कुछ सामान लेने गए थे आज काफी खतरनाक स्थिति में था थर्ड विकेट की गाड़ी आकर आग पर काबू पा लिया गया है आसपास के लोगों में हड़कंप मचा हुआ है1
- अली खान बलरामपुर mo 9754053874.6260596117 लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत होती है, लेकिन जब यहीं के जिम्मेदार भक्षक बन जाएं, तो विकास की उम्मीदें दम तोड़ने लगती हैं। मामला बलरामपुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बरदर का है जहां भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। यहां के सचिव पर आरोप है कि उन्होंने घर बैठे-बैठे ही पंचों के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी खजाने पर हाथ साफ कर दिया है बलरामपुर के बरदर पंचायत में इन दिनों विकास की बयार नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की दुर्गंध फैल रही है। आरोप सीधे पंचायत सचिव विष्णुपद मण्डल पर हैं। वार्ड क्रमांक 8 के निर्वाचित पंच सुदामा नागवंशी ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए उच्चाधिकारियों के पास मोर्चा खोल दिया है पंच सुदामा का आरोप है कि अगस्त 2025 में ज्वाइनिंग के बाद से सचिव महोदय ने नियम-कानूनों को ताक पर रख दिया है। पंचायत राज के नियमों के मुताबिक हर माह सूचना पंजी के माध्यम से बैठक अनिवार्य है लेकिन बरदर में सचिव की अपनी ही समानांतर सरकार चल रही है। आरोप है कि शुरुआती एक बैठक के बाद आज तक कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई, लेकिन कागजों पर सारे प्रस्ताव पास होते रहे। आखिर कैसे आरोप है कि सचिव साहब घर बैठे ही पंचों के फर्जी हस्ताक्षर कर प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं और सरकारी राशि का आहरण कर रहे हैं। भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना मां चण्डी के धाम में देखने को मिला। 15वें वित्त की राशि से यहां एक सबमर्सिबल पंप लगाने के नाम पर 96,000 रुपये की मोटी रकम ऑनलाइन निकाल ली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कार्य और भुगतान की भनक तक निर्वाचित पंचों को नहीं लगने दी गई। पंचों का सीधा आरोप है कि यह जनता की गाढ़ी कमाई का "बंदरबांट" है, जिसे गुपचुप तरीके से अंजाम दिया गया। जब इस गंभीर मामले की गूँज जनपद सीईओ दीपराज कांत के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने सख्त रुख अपनाने का दावा किया है। सीईओ का कहना है कि उन्हें शिकायत प्राप्त हो चुकी है और इसके लिए एक विशेष जांच टीम गठित की जा रही है1