जिला आयुर्वेद चिकित्सालय परिसर पाली में 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को पिलाई गई स्वर्ण प्राशन ड्रॉप पाली, आयुर्वेद विभाग के निर्देशानुसार एवं जिला कलेक्टर एल एन मंत्री की पहल पर बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने एवं मानसिक वृद्धि तथा शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए 28 मार्च शनिवार को स्थानीय धान मंडी स्थित राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय पाली में प्रातः आरोग्य के दाता भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना के साथ शनि पुख्य नक्षत्र के अवसर पर डॉ. शिवकुमार शर्मा डॉ. संजय श्रीवास्तव डॉ. हरिकृष्ण वैष्णव वरिष्ठ कंपाउंडर भगवान स्वरूप रोशन लाल एवं जिला चिकित्सालय आयुर्वेद पालीके स्टाफ की उपस्थिति में प्रातः 9.30 पर बच्चों को स्वर्ण प्राशन दवा पिलाना प्रारंभ किया गया जिसमें समय दोपहर 1:30 तक का रखा गया किंतु बच्चों की भीड़ व लंबी कतार को देखते हुए सायं 4:30 बजे तक का समय बढ़ाया गया जिसमें 127 बच्चों को स्वर्ण प्राशन दवा पिलाई गई! *आगामी स्वर्ण प्राशन की ड्रॉप* दिनांक 23 अप्रैल 2026 गुरु पुख्य नक्षत्र को 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को स्वर्ण प्राशन की ड्राप पिलाई जाएगी | स्वर्ण प्राशन हेतु बच्चों को बुखार खांसी दस्त गले में दर्द पेट से संबंधित कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए ,बच्चों को 30 मिनट पूर्व एवं स्वर्ण प्राशन के बाद 30 मिनट तक कोई खाद्य पदार्थ नहीं देना चाहिए |स्वर्ण प्राशन संस्कार आयुर्वेद में बताए गए 16 महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक है, यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक विधि है जिसमें बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बौद्धिक क्षमता और सर्वांगीण विकास को बढ़ाने के लिए प्राकृतिक टीकाकरण के रूप में माना जाता है|
जिला आयुर्वेद चिकित्सालय परिसर पाली में 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को पिलाई गई स्वर्ण प्राशन ड्रॉप पाली, आयुर्वेद विभाग के निर्देशानुसार एवं जिला कलेक्टर एल एन मंत्री की पहल पर बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने एवं मानसिक वृद्धि तथा शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए 28 मार्च शनिवार को स्थानीय धान मंडी स्थित राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय पाली में प्रातः आरोग्य के दाता भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना के साथ शनि पुख्य नक्षत्र के अवसर पर डॉ. शिवकुमार शर्मा डॉ. संजय श्रीवास्तव डॉ. हरिकृष्ण वैष्णव वरिष्ठ कंपाउंडर भगवान स्वरूप रोशन लाल एवं जिला चिकित्सालय आयुर्वेद पालीके स्टाफ की उपस्थिति में प्रातः 9.30 पर बच्चों को स्वर्ण प्राशन दवा पिलाना प्रारंभ किया गया जिसमें समय दोपहर 1:30 तक का रखा गया किंतु बच्चों की
भीड़ व लंबी कतार को देखते हुए सायं 4:30 बजे तक का समय बढ़ाया गया जिसमें 127 बच्चों को स्वर्ण प्राशन दवा पिलाई गई! *आगामी स्वर्ण प्राशन की ड्रॉप* दिनांक 23 अप्रैल 2026 गुरु पुख्य नक्षत्र को 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को स्वर्ण प्राशन की ड्राप पिलाई जाएगी | स्वर्ण प्राशन हेतु बच्चों को बुखार खांसी दस्त गले में दर्द पेट से संबंधित कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए ,बच्चों को 30 मिनट पूर्व एवं स्वर्ण प्राशन के बाद 30 मिनट तक कोई खाद्य पदार्थ नहीं देना चाहिए |स्वर्ण प्राशन संस्कार आयुर्वेद में बताए गए 16 महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक है, यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक विधि है जिसमें बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बौद्धिक क्षमता और सर्वांगीण विकास को बढ़ाने के लिए प्राकृतिक टीकाकरण के रूप में माना जाता है|
- पाली, आयुर्वेद विभाग के निर्देशानुसार एवं जिला कलेक्टर एल एन मंत्री की पहल पर बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने एवं मानसिक वृद्धि तथा शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए 28 मार्च शनिवार को स्थानीय धान मंडी स्थित राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय पाली में प्रातः आरोग्य के दाता भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना के साथ शनि पुख्य नक्षत्र के अवसर पर डॉ. शिवकुमार शर्मा डॉ. संजय श्रीवास्तव डॉ. हरिकृष्ण वैष्णव वरिष्ठ कंपाउंडर भगवान स्वरूप रोशन लाल एवं जिला चिकित्सालय आयुर्वेद पालीके स्टाफ की उपस्थिति में प्रातः 9.30 पर बच्चों को स्वर्ण प्राशन दवा पिलाना प्रारंभ किया गया जिसमें समय दोपहर 1:30 तक का रखा गया किंतु बच्चों की भीड़ व लंबी कतार को देखते हुए सायं 4:30 बजे तक का समय बढ़ाया गया जिसमें 127 बच्चों को स्वर्ण प्राशन दवा पिलाई गई! *आगामी स्वर्ण प्राशन की ड्रॉप* दिनांक 23 अप्रैल 2026 गुरु पुख्य नक्षत्र को 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को स्वर्ण प्राशन की ड्राप पिलाई जाएगी | स्वर्ण प्राशन हेतु बच्चों को बुखार खांसी दस्त गले में दर्द पेट से संबंधित कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए ,बच्चों को 30 मिनट पूर्व एवं स्वर्ण प्राशन के बाद 30 मिनट तक कोई खाद्य पदार्थ नहीं देना चाहिए |स्वर्ण प्राशन संस्कार आयुर्वेद में बताए गए 16 महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक है, यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक विधि है जिसमें बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बौद्धिक क्षमता और सर्वांगीण विकास को बढ़ाने के लिए प्राकृतिक टीकाकरण के रूप में माना जाता है|2
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- गिरी के शारदा विद्या मंदिर गिरी में मंत्री श्री अविनाश जी गहलोत का स्वागत... @Avinash Gehlot MLA1
- रायपुर (ब्यावर) पत्रकार श्याम सैनी महावीर जन्म कल्याणक पर सेवा कार्य: 1151 किलो लापसी व हरे चारे का ट्रक गायों-कबूतरों को समर्पित ब्यावर में भगवान महावीर जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में श्री लोकाशाह जैन नवयुवक मंडल के तत्वावधान में सेवा कार्य आयोजित किया गया। इस अवसर पर 1151 किलो लापसी, एक हरे चारे से भरा ट्रक तथा 101 किलो मक्की व बाजरा गायों एवं कबूतरों को डाला गया। भगवान महावीर का संदेश जीवों के प्रति दया, करुणा और अहिंसा के भाव को दर्शाता है। इसी संदेश को आत्मसात करते हुए श्री लोकाशाह जैन नवयुवक मंडल पिछले सात वर्षों से भामाशाहों के सहयोग से निरंतर सेवा कार्य करता आ रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ नवकार महामंत्र के जाप के साथ श्रद्धापूर्वक किया गया। मंडल अध्यक्ष राजूभाई सेठिया एवं मंत्री संजय चोरड़िया ने बताया कि यह सेवा कार्य प्रत्येक माह की 25 तारीख को नियमित रूप से आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन भाग लेते हैं। इस अवसर पर रमेश बाकलीवाल, हस्तीमल संचेती, मल संचेती, दुलीचंद मखाना, चेतन जेलमी मकाना, सुरेश मुणोत, संजय खटोड़, संजय चोरड़िया, जसवंत कोठारी, हेमचंद्र सिंघवी, सुरेंद्र लोढ़ा, अनिल-मुकेश बाफना, चंदेश नाहर, मुकेश मकाना, पप्पू भाई, राकेश बोहरा सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- Post by Jalampura AC morcha adhyaks D.1
- फालना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्थान सरकार के सहयोग से अलौकिक फाउंडेशन ट्रस्ट, उदयपुर के अंतर्गत संचालित एडवेंट कॉलेज ऑफ फार्मेसी, फालना ने शनिवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन “औषधि एवं बायोमेडिकल आविष्कारों की पेटेंट योग्यता पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव: आईपीआर फ्रेमवर्क में उभरती चुनौतियाँ और अवसर” विषय पर केंद्रित रहा। शुक्रवार सुबह 10:00 बजे शुरू हुए इस सम्मेलन में देशभर से शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, फार्मेसी विद्यार्थियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य औषधि तथा बायोमेडिकल आविष्कारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते प्रभाव और बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स) के क्षेत्र में उत्पन्न हो रही चुनौतियों एवं अवसरों पर विचार-विमर्श करना था।1
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