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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सारंगढ़-बिलाईगढ़ आना तय हो गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री का उड़नखटोला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के यहीं उतरेगा।

5 hrs ago
user_पत्रकारिकता
पत्रकारिकता
Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
5 hrs ago

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सारंगढ़-बिलाईगढ़ आना तय हो गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री का उड़नखटोला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के यहीं उतरेगा।

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  • प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी 26वीं जन चौपाल के तहत सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र स्थित भिखमपुरा गांव का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान सबसे पहले सफेरा बस्ती पहुंचकर निर्माणाधीन नए आवासीय घरों का जायजा लिया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री जन चौपाल स्थल पर पहुंचे, जहाँ सैकड़ों की संख्या में जनता उपस्थित थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी दी और जनता से सीधे बातचीत कर सरकार के कामकाज के प्रति उनके विचारों को जाना। इसी चौपाल में उन्होंने गांव के लिए चार घोषणाएं कीं, जिनमें सीसी सड़क का निर्माण, तालाब का सौंदर्यीकरण, एक सामुदायिक भवन का निर्माण, और एक प्राथमिक शाला का नामकरण वहां लंबे समय से सेवा देने वाले शिक्षक पांडेग्राही के नाम पर करने का ऐलान शामिल है।
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    प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी 26वीं जन चौपाल के तहत सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र स्थित भिखमपुरा गांव का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान सबसे पहले सफेरा बस्ती पहुंचकर निर्माणाधीन नए आवासीय घरों का जायजा लिया।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री जन चौपाल स्थल पर पहुंचे, जहाँ सैकड़ों की संख्या में जनता उपस्थित थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी दी और जनता से सीधे बातचीत कर सरकार के कामकाज के प्रति उनके विचारों को जाना। इसी चौपाल में उन्होंने गांव के लिए चार घोषणाएं कीं, जिनमें सीसी सड़क का निर्माण, तालाब का सौंदर्यीकरण, एक सामुदायिक भवन का निर्माण, और एक प्राथमिक शाला का नामकरण वहां लंबे समय से सेवा देने वाले शिक्षक पांडेग्राही के नाम पर करने का ऐलान शामिल है।
    user_पत्रकारिकता
    पत्रकारिकता
    Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • बिलासपुर में NEET पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस और एनएसयूआई ने केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसद तोखन साहू के निवास का घेराव किया। इस विरोध प्रदर्शन का मकसद युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर सरकार को घेरना था, लेकिन मौके पर जो नज़ारा दिखा, उससे कई लोगों ने इसे आंदोलन की बजाय सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स का कोई मेगा इवेंट बताया। सड़क पर नारे लग रहे थे और पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई, पर सबसे ज्यादा सक्रिय मोबाइल कैमरे थे, जहां हर तरफ फोन ऑन थे और कैमरे रिकॉर्डिंग मोड में थे। कई प्रदर्शनकारियों को वीडियो में अपनी सही एंट्री की चिंता थी। जब प्रदर्शन में शामिल कुछ कार्यकर्ताओं से मुद्दे को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें “भैया ने बुलाया था”। इस जवाब ने आंदोलन की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि कुछ को यह भी पता नहीं था कि वे किस मुद्दे पर नारे लगा रहे हैं। आंदोलन का पोस्टर NEET के नाम पर था, लेकिन जिन छात्रों के भविष्य के लिए लड़ने का दावा किया जा रहा था, वे कहीं नहीं दिखे। न तो कोचिंग संस्थानों की भागीदारी नज़र आई और न ही शिक्षक वर्ग की कोई बड़ी मौजूदगी, जिससे यह लगा कि NEET का मुद्दा पीछे छूट गया है और राजनीति सामने आ गई है। पूरे कार्यक्रम के दौरान, आसमान में ड्रोन मंडराते रहे और नीचे मोबाइल कैमरे लगातार चालू रहे। कुछ कार्यकर्ता नारे लगाने से पहले कैमरे की दिशा देखते रहे, वहीं कई पुलिस बैरिकेड के सामने अपना ‘परफेक्ट शॉट’ लेने में व्यस्त दिखे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह एक आंदोलन कम और रील शूटिंग ज्यादा लग रहा था। इस दौरान एक वाक्य “भैया, मेरा वीडियो शूट होने दो प्लीज…” चर्चा का विषय बना रहा, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह आंदोलन को मजबूत करने के लिए था या इंस्टाग्राम की स्टोरी मजबूत करने के लिए। जब प्रदर्शन उग्र हुआ तो पुलिस ने वाटर कैनन और बल प्रयोग किया, जिससे कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और कुछ को चोटें भी आईं। लेकिन प्रदर्शन खत्म होने के बाद सबसे तेज़ कार्रवाई सोशल मीडिया पर देखने को मिली, जहाँ कुछ ही घंटों में फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर वीडियो, रील और फोटो की बाढ़ आ गई। ऐसा लगा मानो मैदान में संघर्ष कम और कंटेंट कलेक्शन ज्यादा हुआ हो। NEET पेपर लीक निश्चित रूप से एक गंभीर मुद्दा है और लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है, लेकिन बिलासपुर के इस प्रदर्शन ने एक अलग बहस छेड़ दी है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या आज के राजनीतिक आंदोलन जनता तक संदेश पहुंचाने के माध्यम हैं, या फिर सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का मंच बन रहे हैं? क्योंकि इस प्रदर्शन के बाद शहर में पेपर लीक की चर्चा कम और रील लीक की चर्चा ज्यादा हो रही है।
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    बिलासपुर में NEET पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस और एनएसयूआई ने केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसद तोखन साहू के निवास का घेराव किया। इस विरोध प्रदर्शन का मकसद युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर सरकार को घेरना था, लेकिन मौके पर जो नज़ारा दिखा, उससे कई लोगों ने इसे आंदोलन की बजाय सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स का कोई मेगा इवेंट बताया। सड़क पर नारे लग रहे थे और पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई, पर सबसे ज्यादा सक्रिय मोबाइल कैमरे थे, जहां हर तरफ फोन ऑन थे और कैमरे रिकॉर्डिंग मोड में थे। कई प्रदर्शनकारियों को वीडियो में अपनी सही एंट्री की चिंता थी।

जब प्रदर्शन में शामिल कुछ कार्यकर्ताओं से मुद्दे को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें “भैया ने बुलाया था”। इस जवाब ने आंदोलन की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि कुछ को यह भी पता नहीं था कि वे किस मुद्दे पर नारे लगा रहे हैं। आंदोलन का पोस्टर NEET के नाम पर था, लेकिन जिन छात्रों के भविष्य के लिए लड़ने का दावा किया जा रहा था, वे कहीं नहीं दिखे। न तो कोचिंग संस्थानों की भागीदारी नज़र आई और न ही शिक्षक वर्ग की कोई बड़ी मौजूदगी, जिससे यह लगा कि NEET का मुद्दा पीछे छूट गया है और राजनीति सामने आ गई है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान, आसमान में ड्रोन मंडराते रहे और नीचे मोबाइल कैमरे लगातार चालू रहे। कुछ कार्यकर्ता नारे लगाने से पहले कैमरे की दिशा देखते रहे, वहीं कई पुलिस बैरिकेड के सामने अपना ‘परफेक्ट शॉट’ लेने में व्यस्त दिखे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह एक आंदोलन कम और रील शूटिंग ज्यादा लग रहा था। इस दौरान एक वाक्य “भैया, मेरा वीडियो शूट होने दो प्लीज…” चर्चा का विषय बना रहा, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह आंदोलन को मजबूत करने के लिए था या इंस्टाग्राम की स्टोरी मजबूत करने के लिए।

जब प्रदर्शन उग्र हुआ तो पुलिस ने वाटर कैनन और बल प्रयोग किया, जिससे कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और कुछ को चोटें भी आईं। लेकिन प्रदर्शन खत्म होने के बाद सबसे तेज़ कार्रवाई सोशल मीडिया पर देखने को मिली, जहाँ कुछ ही घंटों में फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर वीडियो, रील और फोटो की बाढ़ आ गई। ऐसा लगा मानो मैदान में संघर्ष कम और कंटेंट कलेक्शन ज्यादा हुआ हो।

NEET पेपर लीक निश्चित रूप से एक गंभीर मुद्दा है और लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है, लेकिन बिलासपुर के इस प्रदर्शन ने एक अलग बहस छेड़ दी है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या आज के राजनीतिक आंदोलन जनता तक संदेश पहुंचाने के माध्यम हैं, या फिर सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का मंच बन रहे हैं? क्योंकि इस प्रदर्शन के बाद शहर में पेपर लीक की चर्चा कम और रील लीक की चर्चा ज्यादा हो रही है।
    user_नरेश शर्मा जिला रायगढ़
    नरेश शर्मा जिला रायगढ़
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • रायगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज के सोनोग्राफी विभाग में मरीजों को 'धीमी रफ्तार' के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि मरीजों को सुबह 9 बजे विभाग पहुंचने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टर करीब 11 बजे आते हैं, और वास्तविक जांच कार्य 11:15 बजे के आसपास ही शुरू हो पाता है। इस लंबी प्रतीक्षा के बावजूद, यह एक बड़ी विडंबना है कि सभी मरीजों की जांच नहीं हो पाती। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग में प्रतिदिन केवल लगभग 30 मरीजों की ही सोनोग्राफी की जाती है और दोपहर 1:30 बजे के आसपास जांच कार्य बंद कर दिया जाता है, जबकि कई मरीज अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है, जिससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को यात्रा खर्च और समय दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी देरी से मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ सकता है, और कई सरकारी अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा तथा सीमित जांच सुविधाओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। मरीज सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्हें 9 बजे बुलाया जाता है, तो जांच 11 बजे के बाद क्यों शुरू होती है? साथ ही, प्रतिदिन केवल 30 मरीजों की सोनोग्राफी की सीमा किस आधार पर तय की गई है और दोपहर 1:30 बजे जांच बंद करने के पीछे क्या कारण है? लोग यह भी जानना चाहते हैं कि घंटों लाइन में लगे मरीजों की जिम्मेदारी कौन लेगा। अब यह देखना होगा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और मरीजों की इस समस्या का समाधान कब तक होता है।
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    रायगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज के सोनोग्राफी विभाग में मरीजों को 'धीमी रफ्तार' के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि मरीजों को सुबह 9 बजे विभाग पहुंचने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टर करीब 11 बजे आते हैं, और वास्तविक जांच कार्य 11:15 बजे के आसपास ही शुरू हो पाता है।

इस लंबी प्रतीक्षा के बावजूद, यह एक बड़ी विडंबना है कि सभी मरीजों की जांच नहीं हो पाती। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग में प्रतिदिन केवल लगभग 30 मरीजों की ही सोनोग्राफी की जाती है और दोपहर 1:30 बजे के आसपास जांच कार्य बंद कर दिया जाता है, जबकि कई मरीज अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है, जिससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को यात्रा खर्च और समय दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी देरी से मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ सकता है, और कई सरकारी अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा तथा सीमित जांच सुविधाओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं।

मरीज सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्हें 9 बजे बुलाया जाता है, तो जांच 11 बजे के बाद क्यों शुरू होती है? साथ ही, प्रतिदिन केवल 30 मरीजों की सोनोग्राफी की सीमा किस आधार पर तय की गई है और दोपहर 1:30 बजे जांच बंद करने के पीछे क्या कारण है? लोग यह भी जानना चाहते हैं कि घंटों लाइन में लगे मरीजों की जिम्मेदारी कौन लेगा। अब यह देखना होगा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और मरीजों की इस समस्या का समाधान कब तक होता है।
    user_HERAMB CHAND YADAW
    HERAMB CHAND YADAW
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    12 hrs ago
  • जिले में खरीफ सीजन 2026-27 के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगातार निगरानी की जा रही है।
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    जिले में खरीफ सीजन 2026-27 के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगातार निगरानी की जा रही है।
    user_Bhupendra lahare
    Bhupendra lahare
    Farmer मलखरोदा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    12 hrs ago
  • एक भयानक खराब रास्ता पिछले सात सालों से लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है, जिससे इसकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है और यह राहगीरों के लिए बड़े खतरों का स्रोत बन गया है। इस जर्जर सड़क की बदहाली पर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है, और विशेष रूप से किसी भी नेता ने इस समस्या को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। स्थानीय लोग इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सहयोग और समर्थन की मांग कर रहे हैं।
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    एक भयानक खराब रास्ता पिछले सात सालों से लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है, जिससे इसकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है और यह राहगीरों के लिए बड़े खतरों का स्रोत बन गया है।

इस जर्जर सड़क की बदहाली पर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है, और विशेष रूप से किसी भी नेता ने इस समस्या को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। स्थानीय लोग इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सहयोग और समर्थन की मांग कर रहे हैं।
    user_Boss ji
    Boss ji
    सोनाखान, बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़•
    4 hrs ago
  • चांपा में थाना चौक अब ‘अखाड़ा और मयखाना’ में तब्दील हो चुका है। इस स्थिति के कारण चांपा पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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    चांपा में थाना चौक अब ‘अखाड़ा और मयखाना’ में तब्दील हो चुका है। इस स्थिति के कारण चांपा पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
    user_Bhupendra Dewangan
    Bhupendra Dewangan
    Local News Reporter चंपा, जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सारंगढ़-बिलाईगढ़ आना तय हो गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री का उड़नखटोला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के यहीं उतरेगा।
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    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सारंगढ़-बिलाईगढ़ आना तय हो गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री का उड़नखटोला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के यहीं उतरेगा।
    user_पत्रकारिकता
    पत्रकारिकता
    Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • सक्ती जिले के बाराद्वार क्षेत्र में मंगलवार को नेशनल हाईवे 49 पर एक भीषण सड़क दुर्घटना सामने आई। तेज रफ्तार कार और ट्रैक्टर के बीच आमने-सामने हुई जोरदार टक्कर में कार सवार पिता सहित उनके दो बच्चे घायल हो गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, कार में सवार पिता अपने बेटे और बेटी के साथ सक्ती की ओर से आ रहे थे, तभी बाराद्वार की तरफ से आ रहे एक ट्रैक्टर से उनकी कार की जबरदस्त भिड़ंत हो गई। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि कार और ट्रैक्टर दोनों के परखच्चे उड़ गए। इस हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायलों की मदद की। सूचना मिलने पर पुलिस टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को नेशनल हाईवे 49 से हटाकर यातायात को बहाल कराया। फिलहाल, घायलों का उपचार जारी है और पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।
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    सक्ती जिले के बाराद्वार क्षेत्र में मंगलवार को नेशनल हाईवे 49 पर एक भीषण सड़क दुर्घटना सामने आई। तेज रफ्तार कार और ट्रैक्टर के बीच आमने-सामने हुई जोरदार टक्कर में कार सवार पिता सहित उनके दो बच्चे घायल हो गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, कार में सवार पिता अपने बेटे और बेटी के साथ सक्ती की ओर से आ रहे थे, तभी बाराद्वार की तरफ से आ रहे एक ट्रैक्टर से उनकी कार की जबरदस्त भिड़ंत हो गई। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि कार और ट्रैक्टर दोनों के परखच्चे उड़ गए।

इस हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायलों की मदद की। सूचना मिलने पर पुलिस टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को नेशनल हाईवे 49 से हटाकर यातायात को बहाल कराया। फिलहाल, घायलों का उपचार जारी है और पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।
    user_Lala upadhyay
    Lala upadhyay
    Local News Reporter Sakti, Chhattisgarh•
    5 hrs ago
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