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रायगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज के सोनोग्राफी विभाग में मरीजों को 'धीमी रफ्तार' के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि मरीजों को सुबह 9 बजे विभाग पहुंचने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टर करीब 11 बजे आते हैं, और वास्तविक जांच कार्य 11:15 बजे के आसपास ही शुरू हो पाता है। इस लंबी प्रतीक्षा के बावजूद, यह एक बड़ी विडंबना है कि सभी मरीजों की जांच नहीं हो पाती। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग में प्रतिदिन केवल लगभग 30 मरीजों की ही सोनोग्राफी की जाती है और दोपहर 1:30 बजे के आसपास जांच कार्य बंद कर दिया जाता है, जबकि कई मरीज अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है, जिससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को यात्रा खर्च और समय दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी देरी से मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ सकता है, और कई सरकारी अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा तथा सीमित जांच सुविधाओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। मरीज सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्हें 9 बजे बुलाया जाता है, तो जांच 11 बजे के बाद क्यों शुरू होती है? साथ ही, प्रतिदिन केवल 30 मरीजों की सोनोग्राफी की सीमा किस आधार पर तय की गई है और दोपहर 1:30 बजे जांच बंद करने के पीछे क्या कारण है? लोग यह भी जानना चाहते हैं कि घंटों लाइन में लगे मरीजों की जिम्मेदारी कौन लेगा। अब यह देखना होगा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और मरीजों की इस समस्या का समाधान कब तक होता है।

4 hrs ago
user_HERAMB CHAND YADAW
HERAMB CHAND YADAW
रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
4 hrs ago

रायगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज के सोनोग्राफी विभाग में मरीजों को 'धीमी रफ्तार' के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि मरीजों को सुबह 9 बजे विभाग पहुंचने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टर करीब 11 बजे आते हैं, और वास्तविक जांच कार्य 11:15 बजे के आसपास ही शुरू हो पाता है। इस लंबी प्रतीक्षा के बावजूद, यह एक बड़ी विडंबना है कि सभी मरीजों की जांच नहीं हो पाती। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग में प्रतिदिन केवल लगभग 30 मरीजों की ही सोनोग्राफी की जाती है और दोपहर 1:30 बजे के आसपास जांच कार्य बंद कर दिया जाता है, जबकि कई मरीज अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है, जिससे दूर-दराज के

गांवों से आने वाले मरीजों को यात्रा खर्च और समय दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी देरी से मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ सकता है, और कई सरकारी अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा तथा सीमित जांच सुविधाओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। मरीज सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्हें 9 बजे बुलाया जाता है, तो जांच 11 बजे के बाद क्यों शुरू होती है? साथ ही, प्रतिदिन केवल 30 मरीजों की सोनोग्राफी की सीमा किस आधार पर तय की गई है और दोपहर 1:30 बजे जांच बंद करने के पीछे क्या कारण है? लोग यह भी जानना चाहते हैं कि घंटों लाइन में लगे मरीजों की जिम्मेदारी कौन लेगा। अब यह देखना होगा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और मरीजों की इस समस्या का समाधान कब तक होता है।

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  • रायगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज के सोनोग्राफी विभाग में मरीजों को 'धीमी रफ्तार' के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि मरीजों को सुबह 9 बजे विभाग पहुंचने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टर करीब 11 बजे आते हैं, और वास्तविक जांच कार्य 11:15 बजे के आसपास ही शुरू हो पाता है। इस लंबी प्रतीक्षा के बावजूद, यह एक बड़ी विडंबना है कि सभी मरीजों की जांच नहीं हो पाती। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग में प्रतिदिन केवल लगभग 30 मरीजों की ही सोनोग्राफी की जाती है और दोपहर 1:30 बजे के आसपास जांच कार्य बंद कर दिया जाता है, जबकि कई मरीज अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है, जिससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को यात्रा खर्च और समय दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी देरी से मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ सकता है, और कई सरकारी अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा तथा सीमित जांच सुविधाओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। मरीज सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्हें 9 बजे बुलाया जाता है, तो जांच 11 बजे के बाद क्यों शुरू होती है? साथ ही, प्रतिदिन केवल 30 मरीजों की सोनोग्राफी की सीमा किस आधार पर तय की गई है और दोपहर 1:30 बजे जांच बंद करने के पीछे क्या कारण है? लोग यह भी जानना चाहते हैं कि घंटों लाइन में लगे मरीजों की जिम्मेदारी कौन लेगा। अब यह देखना होगा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और मरीजों की इस समस्या का समाधान कब तक होता है।
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    रायगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज के सोनोग्राफी विभाग में मरीजों को 'धीमी रफ्तार' के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि मरीजों को सुबह 9 बजे विभाग पहुंचने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टर करीब 11 बजे आते हैं, और वास्तविक जांच कार्य 11:15 बजे के आसपास ही शुरू हो पाता है।

इस लंबी प्रतीक्षा के बावजूद, यह एक बड़ी विडंबना है कि सभी मरीजों की जांच नहीं हो पाती। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग में प्रतिदिन केवल लगभग 30 मरीजों की ही सोनोग्राफी की जाती है और दोपहर 1:30 बजे के आसपास जांच कार्य बंद कर दिया जाता है, जबकि कई मरीज अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है, जिससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को यात्रा खर्च और समय दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी देरी से मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ सकता है, और कई सरकारी अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा तथा सीमित जांच सुविधाओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं।

मरीज सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्हें 9 बजे बुलाया जाता है, तो जांच 11 बजे के बाद क्यों शुरू होती है? साथ ही, प्रतिदिन केवल 30 मरीजों की सोनोग्राफी की सीमा किस आधार पर तय की गई है और दोपहर 1:30 बजे जांच बंद करने के पीछे क्या कारण है? लोग यह भी जानना चाहते हैं कि घंटों लाइन में लगे मरीजों की जिम्मेदारी कौन लेगा। अब यह देखना होगा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और मरीजों की इस समस्या का समाधान कब तक होता है।
    user_HERAMB CHAND YADAW
    HERAMB CHAND YADAW
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    4 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सोमवार सुबह नेशनल हाईवे बायपास रोड पर एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने कहर बरपाया, जिससे एक भीषण सड़क हादसे में तीन बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। महाना फैब्रिकेशन के पास हुई इस घटना में एक घायल के सिर में गंभीर चोट आई है, जबकि दो अन्य के पैरों में फ्रैक्चर की जानकारी मिली है। यह पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, सुबह लगभग 9 बजे एक तेज गति से आ रहे ट्रैक्टर ने पहले सड़क पर चल रहे एक ट्रक के पिछले हिस्से में जोरदार टक्कर मारी। इस टक्कर के बाद चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, और अनियंत्रित ट्रैक्टर ने सामने से आ रही एक मोटरसाइकिल तथा बगल से गुजर रही दूसरी मोटरसाइकिल को अपनी चपेट में ले लिया। अंततः, ट्रैक्टर डिवाइडर से टकराकर रुका। इस हादसे में अमरनाथ साहू के सिर में गंभीर चोट लगी है, वहीं चंद्रशेखर सिदार और पूरन के पैरों में गंभीर चोटें और फ्रैक्चर आए हैं। घायलों की उम्र 22 से 30 वर्ष के बीच बताई गई है। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत सभी घायलों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद चंद्रशेखर सिदार को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। जबकि, अमरनाथ साहू और पूरन को उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। दिनदहाड़े हुए इस हादसे ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में दुर्घटना का मुख्य कारण ट्रैक्टर चालक की तेज रफ्तार और लापरवाही को ही माना जा रहा है। पुलिस ने घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिए हैं और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी चालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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    छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सोमवार सुबह नेशनल हाईवे बायपास रोड पर एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने कहर बरपाया, जिससे एक भीषण सड़क हादसे में तीन बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। महाना फैब्रिकेशन के पास हुई इस घटना में एक घायल के सिर में गंभीर चोट आई है, जबकि दो अन्य के पैरों में फ्रैक्चर की जानकारी मिली है। यह पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है।

प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, सुबह लगभग 9 बजे एक तेज गति से आ रहे ट्रैक्टर ने पहले सड़क पर चल रहे एक ट्रक के पिछले हिस्से में जोरदार टक्कर मारी। इस टक्कर के बाद चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, और अनियंत्रित ट्रैक्टर ने सामने से आ रही एक मोटरसाइकिल तथा बगल से गुजर रही दूसरी मोटरसाइकिल को अपनी चपेट में ले लिया। अंततः, ट्रैक्टर डिवाइडर से टकराकर रुका। इस हादसे में अमरनाथ साहू के सिर में गंभीर चोट लगी है, वहीं चंद्रशेखर सिदार और पूरन के पैरों में गंभीर चोटें और फ्रैक्चर आए हैं। घायलों की उम्र 22 से 30 वर्ष के बीच बताई गई है।

दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत सभी घायलों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद चंद्रशेखर सिदार को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। जबकि, अमरनाथ साहू और पूरन को उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। दिनदहाड़े हुए इस हादसे ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में दुर्घटना का मुख्य कारण ट्रैक्टर चालक की तेज रफ्तार और लापरवाही को ही माना जा रहा है। पुलिस ने घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिए हैं और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी चालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
    user_नरेश शर्मा जिला रायगढ़
    नरेश शर्मा जिला रायगढ़
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
  • जिले में खरीफ सीजन 2026-27 के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगातार निगरानी की जा रही है।
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    जिले में खरीफ सीजन 2026-27 के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगातार निगरानी की जा रही है।
    user_Bhupendra lahare
    Bhupendra lahare
    Farmer मलखरोदा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    4 hrs ago
  • सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सारंगढ़ स्थित जिला चिकित्सालय में 3 जून 2026 को अटल लैब का उद्घाटन किया गया, जिससे अब 136 प्रकार की जाँचें पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध होंगी। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय पाण्डेय, विधायक उत्तरी जांगड़े और गणमान्य नागरिक ज्योति पटेल मुख्य अतिथियों के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने उद्घाटन के दौरान लैब का विस्तृत अवलोकन किया और भगवान श्री गणेश के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर लैब का विधिवत शुभारम्भ किया। यह नया लैब जिला चिकित्सालय की सेवाओं में एक बड़ा बदलाव ला रहा है, क्योंकि इससे पहले अस्पताल में केवल 78 प्रकार की जाँचें ही निःशुल्क या न्यूनतम दरों पर प्रदान की जा रही थीं। इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव, सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल, और पूर्व पार्षद अविनाशपुरी गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में लैब कर्मी, मरीज और उनके परिजन उपस्थित थे। यह नई सुविधा सारंगढ़ के अस्पताल में एक सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है, जिससे क्षेत्र के निवासियों को अब 136 महत्वपूर्ण जाँचों के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा, जो निःसंदेह एक बड़ी राहत है।
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    सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सारंगढ़ स्थित जिला चिकित्सालय में 3 जून 2026 को अटल लैब का उद्घाटन किया गया, जिससे अब 136 प्रकार की जाँचें पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध होंगी। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय पाण्डेय, विधायक उत्तरी जांगड़े और गणमान्य नागरिक ज्योति पटेल मुख्य अतिथियों के रूप में उपस्थित रहे।

अतिथियों ने उद्घाटन के दौरान लैब का विस्तृत अवलोकन किया और भगवान श्री गणेश के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर लैब का विधिवत शुभारम्भ किया। यह नया लैब जिला चिकित्सालय की सेवाओं में एक बड़ा बदलाव ला रहा है, क्योंकि इससे पहले अस्पताल में केवल 78 प्रकार की जाँचें ही निःशुल्क या न्यूनतम दरों पर प्रदान की जा रही थीं।

इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव, सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल, और पूर्व पार्षद अविनाशपुरी गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में लैब कर्मी, मरीज और उनके परिजन उपस्थित थे। यह नई सुविधा सारंगढ़ के अस्पताल में एक सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है, जिससे क्षेत्र के निवासियों को अब 136 महत्वपूर्ण जाँचों के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा, जो निःसंदेह एक बड़ी राहत है।
    user_पत्रकारिकता
    पत्रकारिकता
    Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • सक्ती जिले के मालखरौद ब्लॉक के ग्राम सेदुरस में मंगलवार रात अज्ञात बदमाशों ने एक बुजुर्ग दंपत्ति की सिर कुचलकर हत्या कर दी। बुधवार सुबह इस जघन्य वारदात का खुलासा होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतकों की पहचान ग्राम सेदुरस निवासी 70 वर्षीय पुरुषोत्तम खूंटे और 55 वर्षीय गोहारिन बाई के रूप में हुई है। घटना का पता तब चला जब सुबह पड़ोस की एक महिला किसी काम से दंपत्ति के घर पहुंची और दोनों को मृत अवस्था में देखकर ग्रामीणों और फिर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल और एसडीओपी भुवनेश्वरी पैंकरा अपनी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी। साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वायड और एफएसएल की टीम को भी बुलाया गया। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए, जिसके बाद शवों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने पुष्टि की कि बुजुर्ग दंपत्ति की सिर कुचलकर हत्या की गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और संदिग्धों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा रही है।
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    सक्ती जिले के मालखरौद ब्लॉक के ग्राम सेदुरस में मंगलवार रात अज्ञात बदमाशों ने एक बुजुर्ग दंपत्ति की सिर कुचलकर हत्या कर दी। बुधवार सुबह इस जघन्य वारदात का खुलासा होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतकों की पहचान ग्राम सेदुरस निवासी 70 वर्षीय पुरुषोत्तम खूंटे और 55 वर्षीय गोहारिन बाई के रूप में हुई है। घटना का पता तब चला जब सुबह पड़ोस की एक महिला किसी काम से दंपत्ति के घर पहुंची और दोनों को मृत अवस्था में देखकर ग्रामीणों और फिर पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल और एसडीओपी भुवनेश्वरी पैंकरा अपनी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी। साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वायड और एफएसएल की टीम को भी बुलाया गया। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए, जिसके बाद शवों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने पुष्टि की कि बुजुर्ग दंपत्ति की सिर कुचलकर हत्या की गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और संदिग्धों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा रही है।
    user_Lala upadhyay
    Lala upadhyay
    Local News Reporter Sakti, Chhattisgarh•
    23 hrs ago
  • धरमजयगढ़ क्षेत्र की मांड नदी में अवैध रेत उत्खनन का सिलसिला बदस्तूर जारी है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप खतरे में पड़ गया है। जिम्मेदार विभागों की उदासीनता और लगातार हो रही अनदेखी का फायदा उठाकर रेत चोरी करने वाले अपना ठिकाना बदल-बदलकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। पहले धर्मजयगढ़ के केरा कोना में सक्रिय रहे अवैध उत्खननकर्ताओं ने अब आमादरहा एनीकट के आसपास नया केंद्र बना लिया है, जहाँ से लगातार रेत निकाले जाने की चर्चा है और मांड नदी दिन-ब-दिन अवैध उत्खननकर्ताओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बनती जा रही है। बीते दिनों केरा कोना में हुई कार्रवाई के बाद यह उम्मीद जगी थी कि अवैध उत्खनन पर रोक लगेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कारोबारियों के हौसले पस्त होने के बजाय उन्होंने सिर्फ अपना ठिकाना बदल लिया। जानकारी के अनुसार, खनन स्थल पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए कुछ लोगों ने अन्य ट्रैक्टरों की आवाजाही रोकने हेतु रास्तों पर बड़े पत्थर रखकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अवैध कारोबार को संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा है। इस अनियंत्रित रेत उत्खनन से पुल-पुलिया, एनीकट और नदी तटों जैसी सरकारी संरचनाओं की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है। इसके साथ ही, नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लगातार हो रहे खनन से तट कटाव, जलधारण क्षमता में कमी और संरचनात्मक क्षति जैसी गंभीर समस्याएं पैदा होने की आशंका बनी हुई है।
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    धरमजयगढ़ क्षेत्र की मांड नदी में अवैध रेत उत्खनन का सिलसिला बदस्तूर जारी है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप खतरे में पड़ गया है। जिम्मेदार विभागों की उदासीनता और लगातार हो रही अनदेखी का फायदा उठाकर रेत चोरी करने वाले अपना ठिकाना बदल-बदलकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। पहले धर्मजयगढ़ के केरा कोना में सक्रिय रहे अवैध उत्खननकर्ताओं ने अब आमादरहा एनीकट के आसपास नया केंद्र बना लिया है, जहाँ से लगातार रेत निकाले जाने की चर्चा है और मांड नदी दिन-ब-दिन अवैध उत्खननकर्ताओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बनती जा रही है।

बीते दिनों केरा कोना में हुई कार्रवाई के बाद यह उम्मीद जगी थी कि अवैध उत्खनन पर रोक लगेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कारोबारियों के हौसले पस्त होने के बजाय उन्होंने सिर्फ अपना ठिकाना बदल लिया। जानकारी के अनुसार, खनन स्थल पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए कुछ लोगों ने अन्य ट्रैक्टरों की आवाजाही रोकने हेतु रास्तों पर बड़े पत्थर रखकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अवैध कारोबार को संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा है।

इस अनियंत्रित रेत उत्खनन से पुल-पुलिया, एनीकट और नदी तटों जैसी सरकारी संरचनाओं की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है। इसके साथ ही, नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लगातार हो रहे खनन से तट कटाव, जलधारण क्षमता में कमी और संरचनात्मक क्षति जैसी गंभीर समस्याएं पैदा होने की आशंका बनी हुई है।
    user_Reporter sheikh Aalam Sheikh aalam
    Reporter sheikh Aalam Sheikh aalam
    उदयपुर (धरमजयगढ़), रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • कोरबा जिले से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चिर्रा श्यांग मार्ग का निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है।
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    कोरबा जिले से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चिर्रा श्यांग मार्ग का निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है।
    user_SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    Farmer बारपाली, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • तमिलनाडु में बंधक बनाए गए 41 मजदूरों और बच्चों सहित कुल 50 लोगों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया है। यह कार्रवाई एक शिकायत मिलने के बाद की गई, जिसके उपरांत कलेक्टर ने तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा की। बंधक बनाए गए इन मजदूरों को उचित मजदूरी नहीं दी जा रही थी, जिस कारण वे वहाँ फँसे हुए थे। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सभी बंधक मजदूरों और बच्चों को छुड़ाया गया और उन्हें ट्रेन में बिठाकर उनके घर के लिए रवाना कर दिया गया है।
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    तमिलनाडु में बंधक बनाए गए 41 मजदूरों और बच्चों सहित कुल 50 लोगों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया है। यह कार्रवाई एक शिकायत मिलने के बाद की गई, जिसके उपरांत कलेक्टर ने तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा की।

बंधक बनाए गए इन मजदूरों को उचित मजदूरी नहीं दी जा रही थी, जिस कारण वे वहाँ फँसे हुए थे। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सभी बंधक मजदूरों और बच्चों को छुड़ाया गया और उन्हें ट्रेन में बिठाकर उनके घर के लिए रवाना कर दिया गया है।
    user_Bhupendra lahare
    Bhupendra lahare
    Farmer मलखरोदा, सक्ती, छत्तीसगढ़•
    22 hrs ago
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