भैंस को ट्रेन से बचाने के प्रयास में वृद्ध की दर्दनाक मौत भैंस को ट्रेन से बचाने के प्रयास में वृद्ध की दर्दनाक मौत वाराणसी।जंसा थाना क्षेत्र के सजोई गांव के समीप शुक्रवार की शाम करीब 5:30 बजे रेलवे ट्रैक के किनारे भैंस चरा रहे 61 वर्षीय वृद्ध की ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। मिली जानकारी के अनुसार, सजोई गांव निवासी रामसागर (61) प्रतिदिन की तरह शुक्रवार को रेलवे ट्रैक के किनारे अपनी भैंस चरा रहे थे। इसी दौरान उनकी एक भैंस रेलवे ट्रैक पर चली गई। भैंस को ट्रैक से हटाने और बचाने के प्रयास में रामसागर भी रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। इसी बीच तेज गति से आ रही ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा इतना भीषण था कि उनकी एवं भैंस की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही जंसा पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस घटना की आवश्यक कार्रवाई में जुटी है।
भैंस को ट्रेन से बचाने के प्रयास में वृद्ध की दर्दनाक मौत भैंस को ट्रेन से बचाने के प्रयास में वृद्ध की दर्दनाक मौत वाराणसी।जंसा थाना क्षेत्र के सजोई गांव के समीप शुक्रवार की शाम करीब 5:30 बजे रेलवे ट्रैक के किनारे भैंस चरा रहे 61 वर्षीय वृद्ध की ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। मिली जानकारी के अनुसार, सजोई गांव निवासी रामसागर (61) प्रतिदिन की तरह शुक्रवार को रेलवे ट्रैक के किनारे अपनी भैंस चरा रहे थे। इसी दौरान उनकी एक भैंस रेलवे ट्रैक पर चली गई। भैंस को ट्रैक से हटाने और बचाने के प्रयास में रामसागर भी रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। इसी बीच तेज गति से आ रही ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा इतना भीषण था कि उनकी एवं भैंस की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही जंसा पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस घटना की आवश्यक कार्रवाई में जुटी है।
- भैंस को ट्रेन से बचाने के प्रयास में वृद्ध की दर्दनाक मौत भैंस को ट्रेन से बचाने के प्रयास में वृद्ध की दर्दनाक मौत वाराणसी।जंसा थाना क्षेत्र के सजोई गांव के समीप शुक्रवार की शाम करीब 5:30 बजे रेलवे ट्रैक के किनारे भैंस चरा रहे 61 वर्षीय वृद्ध की ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। मिली जानकारी के अनुसार, सजोई गांव निवासी रामसागर (61) प्रतिदिन की तरह शुक्रवार को रेलवे ट्रैक के किनारे अपनी भैंस चरा रहे थे। इसी दौरान उनकी एक भैंस रेलवे ट्रैक पर चली गई। भैंस को ट्रैक से हटाने और बचाने के प्रयास में रामसागर भी रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। इसी बीच तेज गति से आ रही ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा इतना भीषण था कि उनकी एवं भैंस की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही जंसा पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस घटना की आवश्यक कार्रवाई में जुटी है।1
- कलाई पर राखी, आंखों में प्यार और दिल में दुआ—रक्षाबंधन ने फिर जोड़े भाई-बहन के दिल जनता न्यूज़ टीवी संवाददाता आशीष कुमार मिश्रा वाराणसी वाराणसी। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व शुक्रवार को वाराणसी सहित आसपास के क्षेत्रों में हर्षोल्लास और भावनात्मक माहौल में मनाया गया। सुबह से ही घर-घर में पर्व की रौनक देखने को मिली। बहनों ने पूजा की थाली सजाकर भाइयों की आरती उतारी, माथे पर तिलक लगाया और उनकी कलाई पर राखी बांधकर सुख, समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना की। राखी बांधने के दौरान कई बहनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर उनके सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहने तथा उनके सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लिया। इस दौरान भाई-बहनों के बीच बचपन की यादें भी ताजा हो गईं। दूर रहने वाले भाई-बहनों ने फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। वहीं, बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों, मिठाइयों और उपहारों की दुकानों पर दिनभर चहल-पहल बनी रही। रक्षाबंधन केवल राखी बांधने की परंपरा नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और अपनत्व की मजबूत डोर का प्रतीक है। पर्व ने एक बार फिर संदेश दिया कि समय और दूरियां चाहे कितनी भी बढ़ जाएं, भाई-बहन का रिश्ता हमेशा दिलों को जोड़े रखता है।1
- कलम की तेज धार से अयोध्या जिला अस्पताल में मानवता शर्मसार: मौत के बाद भी नहीं मिला शव वाहन, ठेले पर शव ले जाने को मजबूर हुए परिजन अयोध्या। कहते हैं सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर करोड़ों खर्च कर रही है, बड़े-बड़े दावे हैं। लेकिन अयोध्या जिला चिकित्सालय की हकीकत ने इन दावों की पोल खोल दी। यहां एक मरीज की मौत के बाद सिस्टम इतना लाचार निकला कि उसके परिजनों को शव को कंधा तो दूर, ठेले पर लादकर ले जाना पड़ा। घंटों तड़पते रहे परिजन, स्टाफ बोला - ड्राइवर का नंबर ही नहीं है! इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान मरीज ने दम तोड़ दिया। टूटे हुए परिजनों ने अस्पताल स्टाफ से हाथ जोड़कर एक शव वाहन की मांग की। आरोप है कि उन्हें घंटों इधर से उधर दौड़ाया गया। जब थक-हारकर वार्ड की महिला स्टाफ से पूछा तो गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला - "ड्राइवर का नंबर उपलब्ध नहीं है।" सोचिए, जिला अस्पताल जैसा बड़ा संस्थान, जहां हर रोज मौतें होती हैं, वहां शव वाहन के ड्राइवर का नंबर तक मौजूद नहीं! यह लापरवाही नहीं तो और क्या है? सवाल तो बनता है साहब... 1. प्राइवेट एंबुलेंस का धंधा परिजनों का सीधा आरोप है कि अस्पताल में शव वाहन होते हुए भी नहीं दिया जाता ताकि बाहर खड़ी प्राइवेट एंबुलेंस वालों का धंधा चलता रहे। क्या अस्पताल परिसर में शुल्क लेकर चल रही निजी एंबुलेंस सेवा और स्टाफ की मिलीभगत है? 2. कहां गई संवेदनशीलता? क्या जिला अस्पताल प्रशासन इतना संवेदनहीन हो गया है कि एक लाश को भी सम्मान नहीं दे सकता? 3. जांच कौन करेगा? अगर जिला अस्पताल में ही यह हाल है तो ग्रामीण क्षेत्रों की क्या दुर्दशा होगी? यह घटना सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर तमाचा है। जब शासन-प्रशासन बड़े-बड़े आयोजन और वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त है, तब आम आदमी को ठेले पर अपने अपनों की लाश ढोनी पड़ रही है। कलम की धार मांग करती है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषी स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई हो और शव वाहन की व्यवस्था को 24x7 सुनिश्चित किया जाए। वरना यह मान लिया जाए कि अयोध्या का जिला अस्पताल सिर्फ बिल्डिंग है, व्यवस्था नहीं।3
- रक्षाबंधन का त्योहार केवल रेशम के धागे और उपहारों का लेन-देन नहीं है। सनातन परंपरा में इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक, रक्षाबंधन का त्योहार केवल रेशम के धागे और उपहारों का लेन-देन नहीं है। सनातन परंपरा में इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य छिपे हैं।जब हम इन पौराणिक कथाओं की परतों को खोलते हैं, तो हमें जीवन जीने के अनमोल सूत्र मिलते हैं।पौराणिक ग्रंथों (जैसे भविष्य पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण) में रक्षाबंधन की शुरुआत से जुड़ी ऐसी कथाएं मिलती हैं, जो इस त्योहार को केवल इंसानों का नहीं, बल्कि देवताओं, दानवों और स्वयं त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का त्योहार बनाती हैं।उत्तर प्रदेश के सुराना, बेनीपुर चक और भीखमपुर जगत पुरवा गांवों में रक्षाबंधन न मनाने के पीछे सदियों पुरानी ऐतिहासिक और दर्दनाक कहानियां छिपी हैं। इन गांवों के लोग आज भी रक्षाबंधन को उत्सव के बजाय एक शोक या खौफनाक दिन के रूप में देखते हैं।1
- लखनऊ: रक्षाबंधन के मौके पर CM योगी आदित्यनाथ को स्कूली बच्चियों ने बांधी राखी, मुख्यमंत्री ने दिया उपहार न्यूज़ टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट लखनऊ। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर उत्सव का माहौल रहा। स्कूली बच्चियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राखी बांधी। इस दौरान बच्चियों ने मुख्यमंत्री को तिलक लगाकर आरती उतारी और कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री योगी ने भी बच्चियों को स्नेह दिया और उन्हें चॉकलेट, गिफ्ट और मिठाई देकर आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। सरकार बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मौके पर मुख्यमंत्री आवास पर बड़ी संख्या में स्कूली बच्चियां और अधिकारी मौजूद रहे। बच्चियों ने मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं, वहीं मुख्यमंत्री ने भी सभी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की बधाई दी।1
- भंदहा में स्वास्थ्य सेवा की पहल, आरजे शंकरा हॉस्पिटल ने लगाया नेत्र शिविर1
- उत्तर प्रदेश मे योगी आदित्यनाथ जी महाराज का दावा हवा हवाई रक्षाबंधन पर योगी आदित्यनाथ जी महाराज का आदेश महिलाओं के लिए फ्री बस का दावा हवा हवाई ही साबित हुआ। पेश है रिपोर्ट Varanasi Breking News1
- पंचकोसी मार्ग पर बने गड्ढे दे रहे हादसे को न्योता, राहगीर परेशान पंचकोसी मार्ग पर बने गड्ढे दे रहे हादसे को न्योता, राहगीर परेशान सेवापुरी। पंचकोसी परिक्रमा के तीसरे पड़ाव रामेश्वर बाजार स्थित पोस्ट ऑफिस के समीप पंचकोसी मार्ग की हालत इन दिनों बेहद खराब हो गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन जाने से राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, थोड़ी सी बारिश होते ही सड़क के गड्ढों में पानी भर जाता है। पानी भरने के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे बाइक सवार कई बार अनियंत्रित होकर गिर जाते हैं और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देते। पंचकोसी परिक्रमा मार्ग होने के कारण इस सड़क से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण और अन्य राहगीर आवागमन करते हैं। ऐसे में सड़क की बदहाल स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए सड़क के गड्ढों को जल्द से जल्द भरवाकर मार्ग की मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सड़क की मरम्मत करा दी जाए तो संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।1