चित्तौड़गढ़ के भूपालसागर स्थित अनोपपुरा ग्राम पंचायत में हिंदुस्तान जिंक संयंत्र द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देने, विकास कार्य करवाने और पर्यावरण को हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर प्रशासक कमलेश चौधरी ने उपखण्ड अधिकारी महेश गगोरिया को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया गया है कि अनोपपुरा में स्थित हिंदुस्तान जिंक का लेड प्लांट सुरक्षा मानकों के अनुसार 25 से 30 किलोमीटर दूर होने के बजाय आबादी क्षेत्र से महज 1 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है, और इसके निर्माण के समय ग्राम पंचायत से कोई एनओसी भी नहीं ली गई थी। प्रशासक कमलेश चौधरी के अनुसार, लेड प्लांट के कारण आसपास के कुएं और जमीनें पूरी तरह केमिकल युक्त हो चुकी हैं, जिससे किसानों को अपनी जमीनें छोड़नी पड़ी हैं और पीने का पानी दूषित हो गया है। इसके बावजूद कंपनी ने नियमानुसार ग्राम पंचायत को दिया जाने वाला वार्षिक टैक्स जमा नहीं कराया है। पूर्व में हुए आंदोलन के समय कंपनी अधिकारियों ने भर्ती में स्थानीय युवाओं को 60% रोजगार देने और 60% CSR फंड पंचायत के विकास में खर्च करने का भरोसा दिया था, लेकिन प्रबंधन इन वादों की अनदेखी कर टाल-मटोल कर रहा है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि हिंदुस्तान जिंक पर कानूनी कार्रवाई कर लिखित आश्वासन लिया जाए, हालिया भर्तियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए, स्वास्थ्य, शिक्षा व पेयजल व्यवस्था में सुधार हो और प्रभावित किसानों को मुआवजा मिले। प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो अनोपपुरा के ग्रामीण भूख-हड़ताल करने पर मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी हिंदुस्तान जिंक प्रबंधन की होगी।
चित्तौड़गढ़ के भूपालसागर स्थित अनोपपुरा ग्राम पंचायत में हिंदुस्तान जिंक संयंत्र द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देने, विकास कार्य करवाने और पर्यावरण को हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर प्रशासक कमलेश चौधरी ने उपखण्ड अधिकारी महेश गगोरिया को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया गया है कि अनोपपुरा में स्थित हिंदुस्तान जिंक का लेड प्लांट सुरक्षा मानकों के अनुसार 25 से 30 किलोमीटर दूर होने के बजाय आबादी क्षेत्र से महज 1 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है, और इसके निर्माण के समय ग्राम पंचायत से कोई एनओसी भी नहीं ली गई थी। प्रशासक कमलेश चौधरी के अनुसार, लेड प्लांट के कारण आसपास के कुएं और जमीनें पूरी तरह केमिकल युक्त हो चुकी हैं, जिससे किसानों को अपनी जमीनें छोड़नी पड़ी हैं और पीने का पानी दूषित हो गया है। इसके बावजूद कंपनी ने नियमानुसार ग्राम पंचायत को दिया जाने वाला वार्षिक टैक्स जमा नहीं कराया है। पूर्व में हुए आंदोलन के समय कंपनी अधिकारियों ने भर्ती में स्थानीय युवाओं को 60% रोजगार देने और 60% CSR फंड पंचायत के विकास में खर्च करने का भरोसा दिया था, लेकिन प्रबंधन इन वादों की अनदेखी कर टाल-मटोल कर रहा है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि हिंदुस्तान जिंक पर कानूनी कार्रवाई कर लिखित आश्वासन लिया जाए, हालिया भर्तियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए, स्वास्थ्य, शिक्षा व पेयजल व्यवस्था में सुधार हो और प्रभावित किसानों को मुआवजा मिले। प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो अनोपपुरा के ग्रामीण भूख-हड़ताल करने पर मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी हिंदुस्तान जिंक प्रबंधन की होगी।
- चित्तौड़गढ़ जिले के अरनिया पंथ में स्थित स्लीपर प्लांट के बाहर सर्विस रोड पर खड़ी गाड़ियों और अव्यवस्थित यातायात के कारण राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। यह स्लीपर प्लांट पहले भी विवादों से घिरा रहा है। पूर्व में अवैध बजरी के स्टॉक और गीली लकड़ियों से भरे ट्रैक्टरों के आने पर ग्रामीणों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया था, लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन कुम्भकर्णी नींद में सोया रहा। प्लांट के बाहर सड़कों पर बने इस खतरे की तरफ ना तो स्लीपर प्लांट प्रबंधन कोई ध्यान दे रहा है और ना ही प्रशासन ध्यान दे रहा है। लगातार हो रही इस अनदेखी से परेशान ग्रामीणों ने जल्द से जल्द व्यवस्थाओं में सुधार की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति को शीघ्र नहीं सुधारा गया तो वे प्लांट के बाहर धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।1
- अखिल भारतीय लोधा महासभा, राजस्थान के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें आगामी 29 जुलाई बुधवार को जयपुर में आयोजित होने वाले प्रदेश कार्यकारिणी शपथग्रहण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का निमंत्रण दिया। इसके साथ ही, राजस्थान में ओबीसी वर्ग के तहत आने वाले लोधा समाज के जाति प्रमाण पत्र और जनगणना अभिलेखों में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए एक ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में अवगत कराया गया कि राजस्थान की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची, जाति प्रमाण पत्र और जनगणना अभिलेखों में वर्तमान में 'लोधी (लोधा)' अंकित है, जबकि देश के विभिन्न राज्यों में लोधा, लोधी और लोध तीनों नाम प्रचलित हैं। राजस्थान में इस समाज को केवल 'लोधा' नाम से ही जाना जाता है। इस विसंगति के कारण समाज के लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने, शैक्षणिक प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि इस प्रविष्टि में संशोधन कर इसे 'लोधा' के रूप में दर्ज किया जाए और 'लोधा' शब्द को कोष्ठक में न लिखा जाए, ताकि समाज को समान प्रशासनिक सुविधा मिल सके। महासभा के प्रदेशाध्यक्ष किशन लाल लोधा ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने जयपुर आने के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समाजहित से जुड़े इन विषयों पर सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया। इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष किशनलाल लोधा, राष्ट्रीय महामंत्री अजय लोधा (कोटा), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवलाल लोधा (चित्तौड़गढ़), राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री भंवरलाल लोधा (झालावाड़), प्रदेश उपाध्यक्ष मेवाराम लोधा (अजमेर), ब्रजमोहन लोधा (रामगंजमंडी, कोटा), रामधन लोधा (जयपुर), प्रदेश उपाध्यक्ष शिवप्रकाश लोधा (चित्तौड़गढ़), प्रदेश कोषाध्यक्ष बुद्धिप्रकाश लोधा (जयपुर), प्रदेश मंत्री भरत लोधा (झालावाड़), प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी राजकपूर लोधा (जयपुर) और देवीलाल लोधा (अजमेर) उपस्थित रहे।3
- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक छात्रा ने अपने वोट के अधिकार का प्रदर्शन किया है। अपने इस अधिकार को दिखाने के साथ ही छात्रा ने BJP पर जमकर ताना कसा।1
- चितौड़गढ़ के गांधी नगर स्थित आकाशवाणी चौराहा पर मौजूद आयुष हॉस्पिटल में हुए सफल इलाज की कहानी खुद की जुबानी सुनिए। इस संबंध में अधिक जानकारी या संपर्क के लिए मोबाइल नंबर 8302083835 भी उपलब्ध कराया गया है।1
- भीलवाड़ा शहर के उपनगर सांगानेर स्थित एक वेस्टेज गोदाम में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब वहाँ एक मादा कब्र बिज्जू अपने चार नवजात बच्चों के साथ दिखाई दी। सूचना मिलते ही वन्यजीव रक्षक कुलदीप सिंह राणावत और वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने मादा कब्र बिज्जू और उसके चारों नवजात शावकों का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। रेस्क्यू के बाद पूरे परिवार को वन विभाग की अभिरक्षा में सौंप दिया गया है, जिन्हें फिलहाल वन विभाग की नर्सरी में रखा जाएगा। डीएफओ के निर्देशानुसार उनकी निगरानी की जाएगी और बाद में सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा। वन्यजीव रक्षक कुलदीप सिंह राणावत ने बताया कि यह पहला मामला है जब किसी कब्र बिज्जू ने आबादी क्षेत्र में बच्चों को जन्म दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लगातार घटते वन क्षेत्र और बढ़ती आबादी के कारण वन्यजीव अब आबादी वाले इलाकों की ओर आने लगे हैं। वन्यजीव टीम ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई वन्यजीव या हिंसक जीव आबादी क्षेत्र में दिखाई दे तो उसे पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें। इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस, वन विभाग या वन्यजीव रेस्क्यू टीम को दें, ताकि समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ा जा सके।1
- चित्तौड़गढ़ के भूपालसागर स्थित अनोपपुरा ग्राम पंचायत में हिंदुस्तान जिंक संयंत्र द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देने, विकास कार्य करवाने और पर्यावरण को हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर प्रशासक कमलेश चौधरी ने उपखण्ड अधिकारी महेश गगोरिया को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया गया है कि अनोपपुरा में स्थित हिंदुस्तान जिंक का लेड प्लांट सुरक्षा मानकों के अनुसार 25 से 30 किलोमीटर दूर होने के बजाय आबादी क्षेत्र से महज 1 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है, और इसके निर्माण के समय ग्राम पंचायत से कोई एनओसी भी नहीं ली गई थी। प्रशासक कमलेश चौधरी के अनुसार, लेड प्लांट के कारण आसपास के कुएं और जमीनें पूरी तरह केमिकल युक्त हो चुकी हैं, जिससे किसानों को अपनी जमीनें छोड़नी पड़ी हैं और पीने का पानी दूषित हो गया है। इसके बावजूद कंपनी ने नियमानुसार ग्राम पंचायत को दिया जाने वाला वार्षिक टैक्स जमा नहीं कराया है। पूर्व में हुए आंदोलन के समय कंपनी अधिकारियों ने भर्ती में स्थानीय युवाओं को 60% रोजगार देने और 60% CSR फंड पंचायत के विकास में खर्च करने का भरोसा दिया था, लेकिन प्रबंधन इन वादों की अनदेखी कर टाल-मटोल कर रहा है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि हिंदुस्तान जिंक पर कानूनी कार्रवाई कर लिखित आश्वासन लिया जाए, हालिया भर्तियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए, स्वास्थ्य, शिक्षा व पेयजल व्यवस्था में सुधार हो और प्रभावित किसानों को मुआवजा मिले। प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो अनोपपुरा के ग्रामीण भूख-हड़ताल करने पर मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी हिंदुस्तान जिंक प्रबंधन की होगी।1
- दिल्ली में 57 सेकंड का एक वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर वहां क्या हुआ था। इस वीडियो के जरिए यह सवाल उठाया गया है कि घटना में आखिर गलती किसकी है—प्रदर्शनकारियों की, पुलिस की या फिर सरकार की।1