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23वां दिन अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी... मनरेगा राज्य कर्मचारी संघ अपने लंबित मांगों को लेकर 23 वां दिन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं ज्ञात हो कि मनरेगाकर्मी विगत कई वर्षों से अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार तथा विभाग को अवगत करा चुके। जबकि मनरेगा कर्मियों से सरकार के सभी गतिविधियों में शामिल कर काम लिया जाता है। लेकिन उनका हक की बात होती है तो किसी का शुध नहीं।

3 hrs ago
user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
BaरKaट्ठा Ki आwaज
Court reporter बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
3 hrs ago

23वां दिन अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी... मनरेगा राज्य कर्मचारी संघ अपने लंबित मांगों को लेकर 23 वां दिन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं ज्ञात हो कि मनरेगाकर्मी विगत कई वर्षों से अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार तथा विभाग को अवगत करा चुके। जबकि मनरेगा कर्मियों से सरकार के सभी गतिविधियों में शामिल कर काम लिया जाता है। लेकिन उनका हक की बात होती है तो किसी का शुध नहीं।

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  • Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज
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    Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
    1 hr ago
  • Post by Update news 24
    2
    Post by Update news 24
    user_Update news 24
    Update news 24
    Photographer बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
    1 hr ago
  • हजारीबाग हजारीबाग स्थित आरोग्यम कुणाल महिला एवं शिशु अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक बार फिर अपनी दक्षता का परिचय देते हुए तीन गंभीर रूप से बीमार बच्चों को नया जीवन दिया है। शिशु एवं नवजात रोग विशेषज्ञ डॉ. हीरालाल राम ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल के दिनों में अस्पताल में लगातार तीन अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां सामने आईं, जिनका सफल उपचार कर अब बच्चों को स्वस्थ अवस्था में घर भेजा जा रहा है। पहली परिस्थिति में एक मासूम बच्चा गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में अस्पताल लाया गया। बताया गया कि वह गर्म पदार्थ में गिर गया था, जिससे उसके शरीर का निचला हिस्सा, विशेषकर नाभि के नीचे का भाग और निजी अंग बुरी तरह प्रभावित हो गए थे। यह द्वितीय स्तर की जलन थी। डॉक्टरों ने निरंतर पट्टी, आवश्यक दवाइयों और जीवाणुरोधी उपचार के माध्यम से उसकी स्थिति में सुधार किया। लगातार निगरानी और उपचार के बाद अब बच्चा काफी हद तक स्वस्थ हो चुका है और स्थिर अवस्था में उसे छुट्टी दे दी गई है, साथ ही आगे भी नियमित पट्टी जारी रखने की सलाह दी गई है। दूसरी स्थिति में एक बच्चा अत्यधिक तेज बुखार के साथ अस्पताल पहुंचा, जिसका तापमान 104 से 105 डिग्री तक था। बच्चा अचेत अवस्था के करीब था और उसकी मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो चुकी थी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वह स्क्रब टाइफस संक्रमण से ग्रसित है। डॉक्टरों ने बिना देर किए उपचार शुरू किया और मात्र तीन दिनों के भीतर उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। अब बच्चा पूरी तरह सामान्य है, स्वयं भोजन कर रहा है और स्वस्थ होकर घर लौट गया हैतीसरी स्थिति एक सड़क दुर्घटना से जुड़ी थी, जिसमें एक बच्चा अपने पिता के साथ मोटरसाइकिल पर सवार था और दुर्घटना का शिकार हो गया। अस्पताल पहुंचने के समय उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी। वह बेहोश था, अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था और रक्तचाप भी माप में नहीं आ रहा था। उसकी चेतना स्तर भी बेहद कम थी। डॉक्टरों ने तुरंत रक्त चढ़ाकर गहन चिकित्सा कक्ष में इलाज शुरू किया। लगातार प्रयास, सतत निगरानी और समर्पित देखभाल के परिणामस्वरूप अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है और अगले एक से दो दिनों में उसे भी अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। डॉ. हीरालाल राम ने बताया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक समर्पित टीम निरंतर गंभीर रोगियों की देखभाल में जुटी रहती है। इस टीम में डॉ. प्रकाश, डॉ. सुरभि, डॉ. शक्ति और डॉ. आमिर के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ शामिल हैं, जो हर परिस्थिति में बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अस्पताल के निदेशक हर्ष अजमेरा ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि मरीजों को भरोसा और सुरक्षा का अहसास देना भी है। हम लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत कर रहे हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को और सशक्त बना रहे हैं, ताकि हजारीबाग और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों जैसी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं यहीं उपलब्ध हो सकें। हमारा प्रयास है कि किसी भी गंभीर स्थिति में मरीज को बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े और समय पर सही उपचार मिल सके। वहीं अस्पताल की प्रशासक जया सिंह ने कहा कि संस्थान में प्रत्येक मरीज की देखभाल सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ की जाती है। हम न केवल चिकित्सा सुविधाओं को उन्नत बना रहे हैं, बल्कि प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से सेवा की गुणवत्ता को लगातार बेहतर कर रहे हैं। हमारी पूरी टीम दिन-रात समर्पण के साथ काम कर रही है, ताकि हर मरीज को सुरक्षित, प्रभावी और संतोषजनक इलाज मिल सके और अस्पताल पर लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो।
    1
    हजारीबाग
हजारीबाग स्थित आरोग्यम कुणाल महिला एवं शिशु अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक बार फिर अपनी दक्षता का परिचय देते हुए तीन गंभीर रूप से बीमार बच्चों को नया जीवन दिया है। शिशु एवं नवजात रोग विशेषज्ञ डॉ. हीरालाल राम ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल के दिनों में अस्पताल में लगातार तीन अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां सामने आईं, जिनका सफल उपचार कर अब बच्चों को स्वस्थ अवस्था में घर भेजा जा रहा है। पहली परिस्थिति में एक मासूम बच्चा गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में अस्पताल लाया गया। बताया गया कि वह गर्म पदार्थ में गिर गया था, जिससे उसके शरीर का निचला हिस्सा, विशेषकर नाभि के नीचे का भाग और निजी अंग बुरी तरह प्रभावित हो गए थे। यह द्वितीय स्तर की जलन थी। डॉक्टरों ने निरंतर पट्टी, आवश्यक दवाइयों और जीवाणुरोधी उपचार के माध्यम से उसकी स्थिति में सुधार किया। लगातार निगरानी और उपचार के बाद अब बच्चा काफी हद तक स्वस्थ हो चुका है और स्थिर अवस्था में उसे छुट्टी दे दी गई है, साथ ही आगे भी नियमित पट्टी जारी रखने की सलाह दी गई है। दूसरी स्थिति में एक बच्चा अत्यधिक तेज बुखार के साथ अस्पताल पहुंचा, जिसका तापमान 104 से 105 डिग्री तक था। बच्चा अचेत अवस्था के करीब था और उसकी मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो चुकी थी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वह स्क्रब टाइफस संक्रमण से ग्रसित है। डॉक्टरों ने बिना देर किए उपचार शुरू किया और मात्र तीन दिनों के भीतर उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। अब बच्चा पूरी तरह सामान्य है, स्वयं भोजन कर रहा है और स्वस्थ होकर घर लौट गया हैतीसरी स्थिति एक सड़क दुर्घटना से जुड़ी थी, जिसमें एक बच्चा अपने पिता के साथ मोटरसाइकिल पर सवार था और दुर्घटना का शिकार हो गया। अस्पताल पहुंचने के समय उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी। वह बेहोश था, अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था और रक्तचाप भी माप में नहीं आ रहा था। उसकी चेतना स्तर भी बेहद कम थी। डॉक्टरों ने तुरंत रक्त चढ़ाकर गहन चिकित्सा कक्ष में इलाज शुरू किया। लगातार प्रयास, सतत निगरानी और समर्पित देखभाल के परिणामस्वरूप अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है और अगले एक से दो दिनों में उसे भी अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। डॉ. हीरालाल राम ने बताया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक समर्पित टीम निरंतर गंभीर रोगियों की देखभाल में जुटी रहती है। इस टीम में डॉ. प्रकाश, डॉ. सुरभि, डॉ. शक्ति और डॉ. आमिर के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ शामिल हैं, जो हर परिस्थिति में बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अस्पताल के निदेशक हर्ष अजमेरा ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि मरीजों को भरोसा और सुरक्षा का अहसास देना भी है। हम लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत कर रहे हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को और सशक्त बना रहे हैं, ताकि हजारीबाग और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों जैसी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं यहीं उपलब्ध हो सकें। हमारा प्रयास है कि किसी भी गंभीर स्थिति में मरीज को बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े और समय पर सही उपचार मिल सके। वहीं अस्पताल की प्रशासक जया सिंह ने कहा कि संस्थान में प्रत्येक मरीज की देखभाल सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ की जाती है। हम न केवल चिकित्सा सुविधाओं को उन्नत बना रहे हैं, बल्कि प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से सेवा की गुणवत्ता को लगातार बेहतर कर रहे हैं। हमारी पूरी टीम दिन-रात समर्पण के साथ काम कर रही है, ताकि हर मरीज को सुरक्षित, प्रभावी और संतोषजनक इलाज मिल सके और अस्पताल पर लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो।
    user_Kashif Adib
    Kashif Adib
    Local News Reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    1 hr ago
  • अंधविश्वास में नाबालिग की हत्या, मां समेत तीन गिरफ्तार हजारीबाग। विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुम्बा गांव में 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची की हत्या के मामले का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर अंजाम दी गई इस जघन्य घटना में पुलिस ने मृतका की मां समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया था, जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे मामले का खुलासा किया।
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    अंधविश्वास में नाबालिग की हत्या, मां समेत तीन गिरफ्तार
हजारीबाग। विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुम्बा गांव में 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची की हत्या के मामले का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर अंजाम दी गई इस जघन्य घटना में पुलिस ने मृतका की मां समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया था, जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे मामले का खुलासा किया।
    user_SB Live Hindi
    SB Live Hindi
    Local News Reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    5 hrs ago
  • हजारीबाग के इमली कोठी चौक पर हुई सड़क दुर्घटना मोटरसाइकिल सवार घायल लोग सड़क पर उतरे
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    हजारीबाग के इमली कोठी चौक पर हुई सड़क दुर्घटना मोटरसाइकिल सवार घायल लोग सड़क पर उतरे
    user_News Xpose ( Jishan Raj)
    News Xpose ( Jishan Raj)
    Press Azad Mahalla, Hazaribagh•
    6 hrs ago
  • जिसने हत्या की, वही मीडिया में न्याय की मांग करता रहा। तांत्रिक और बच्ची की मां के साथ मिलकर जघन्य अपराध किया। अब कानून के तहत सख्त सजा का इंतजार है।
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    जिसने हत्या की, वही मीडिया में न्याय की मांग करता रहा। तांत्रिक और बच्ची की मां के साथ मिलकर जघन्य अपराध किया। अब कानून के तहत सख्त सजा का इंतजार है।
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    8 hrs ago
  • विष्णुगढ़ नरबलि कांड का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा: मां के अवैध संबंध और अंधविश्वास की वेदी पर चढ़ी मासूम की बलि डीजीपी तदासा मिश्रा ने खुद संभाली जांच की कमान; मां, प्रेमी और तांत्रिक महिला सहित 3 गिरफ्तार हजारीबाग (विष्णुगढ़): हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कुसुम्भा गांव में पिछले 24 मार्च (मंगला जुलूस की रात) को हुई 13 वर्षीय किशोरी की नृशंस हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। यह मामला न केवल अंधविश्वास की पराकाष्ठा है, बल्कि इसमें अवैध संबंधों और मानवीय क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गई हैं। नॉर्थ रेंज के डीआईजी अंजनी कुमार झा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि एक मां ने अपने ही प्रेमी और एक तांत्रिक महिला के साथ मिलकर अपनी मासूम बेटी की 'नरबलि' दे दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीजीपी तदासा मिश्रा 1 अप्रैल 2026 को खुद हजारीबाग मुख्यालय पहुंचीं। अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक के बाद उन्होंने विष्णुगढ़ का दौरा किया और नामजद अभियुक्तों से कड़ी पूछताछ की, जिसके बाद इस काले सच का पर्दाफाश हुआ। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मृतिका की मां रेशमी देवी का गांव के ही भीम राम (45 वर्ष) के साथ पिछले 10 वर्षों से अवैध संबंध है। भीम राम ही रेशमी के घर का पूरा प्रबंधन संभालता था। बीमार बेटे के लिए रची गई 'नरबलि' की साजिश रेशमी देवी का छोटा भाई अक्सर बीमार रहता था। उसे ठीक करने के लिए वह गांव की ही 'नाया-गुणी' (तांत्रिक) शांति देवी उर्फ भगतिनी (55 वर्ष) के संपर्क में आई। तांत्रिक ने सुझाव दिया कि यदि वह अपनी कुंवारी बेटी की बलि देती है, तो उसका बेटा हमेशा के लिए ठीक हो जाएगा। हत्याकांड का खौफनाक घटनाक्रम: • बहला-फुसलाकर ले जाना: अष्टमी की रात करीब 8 बजे रेशमी देवी अपनी बेटी को लेकर तांत्रिक के घर पहुंची। वहां बच्ची को सिंदूर का टीका, काजल लगाया गया और प्रसाद के रूप में इलायची दाना खिलाकर विश्वास में लिया गया। • बलि की प्रक्रिया: तांत्रिक ने कहा कि 'देवास' (दैवीय शक्ति) आने पर बलि देनी होगी और इसके लिए एक पुरुष की जरूरत है। रेशमी ने अपने प्रेमी भीम राम को बुलाया। • नृशंस हत्या: रात करीब 9:30 बजे बांसवाड़ी में ले जाकर बच्ची को लिटाया गया। तांत्रिक के इशारे पर मां ने अपनी ही लाडली के पैर पकड़े और भीम राम ने गला घोंटकर उसकी जान ले ली। • बर्बरता की हदें: हत्या के बाद तांत्रिक ने 'कॉलिंग स्टिक' (बांस की छड़ी) को मृतिका के गुप्तांग में प्रवेश कराया गया #Hazaribag #hazaribagpolice #breakingnews #viral #reelit
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    विष्णुगढ़ नरबलि कांड का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा: मां के अवैध संबंध और अंधविश्वास की वेदी पर चढ़ी मासूम की बलि
डीजीपी तदासा मिश्रा ने खुद संभाली जांच की कमान; मां, प्रेमी और तांत्रिक महिला सहित 3 गिरफ्तार
हजारीबाग (विष्णुगढ़): हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कुसुम्भा गांव में पिछले 24 मार्च (मंगला जुलूस की रात) को हुई 13 वर्षीय किशोरी की नृशंस हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। यह मामला न केवल अंधविश्वास की पराकाष्ठा है, बल्कि इसमें अवैध संबंधों और मानवीय क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गई हैं। नॉर्थ रेंज के डीआईजी अंजनी कुमार झा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि एक मां ने अपने ही प्रेमी और एक तांत्रिक महिला के साथ मिलकर अपनी मासूम बेटी की 'नरबलि' दे दी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीजीपी तदासा मिश्रा 1 अप्रैल 2026 को खुद हजारीबाग मुख्यालय पहुंचीं। अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक के बाद उन्होंने विष्णुगढ़ का दौरा किया और नामजद अभियुक्तों से कड़ी पूछताछ की, जिसके बाद इस काले सच का पर्दाफाश हुआ।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मृतिका की मां रेशमी देवी का गांव के ही भीम राम (45 वर्ष) के साथ पिछले 10 वर्षों से अवैध संबंध है। भीम राम ही रेशमी के घर का पूरा प्रबंधन संभालता था।
बीमार बेटे के लिए रची गई 'नरबलि' की साजिश
रेशमी देवी का छोटा भाई अक्सर बीमार रहता था। उसे ठीक करने के लिए वह गांव की ही 'नाया-गुणी' (तांत्रिक) शांति देवी उर्फ भगतिनी (55 वर्ष) के संपर्क में आई। तांत्रिक ने सुझाव दिया कि यदि वह अपनी कुंवारी बेटी की बलि देती है, तो उसका बेटा हमेशा के लिए ठीक हो जाएगा।
हत्याकांड का खौफनाक घटनाक्रम:
• बहला-फुसलाकर ले जाना: अष्टमी की रात करीब 8 बजे रेशमी देवी अपनी बेटी को लेकर तांत्रिक के घर पहुंची। वहां बच्ची को सिंदूर का टीका, काजल लगाया गया और प्रसाद के रूप में इलायची दाना खिलाकर विश्वास में लिया गया।
• बलि की प्रक्रिया: तांत्रिक ने कहा कि 'देवास' (दैवीय शक्ति) आने पर बलि देनी होगी और इसके लिए एक पुरुष की जरूरत है। रेशमी ने अपने प्रेमी भीम राम को बुलाया।
• नृशंस हत्या: रात करीब 9:30 बजे बांसवाड़ी में ले जाकर बच्ची को लिटाया गया। तांत्रिक के इशारे पर मां ने अपनी ही लाडली के पैर पकड़े और भीम राम ने गला घोंटकर उसकी जान ले ली।
• बर्बरता की हदें: हत्या के बाद तांत्रिक ने 'कॉलिंग स्टिक' (बांस की छड़ी) को मृतिका के गुप्तांग में प्रवेश कराया गया 
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#viral 
#reelit
    user_Hazaribag Today🇮🇳
    Hazaribag Today🇮🇳
    हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    8 hrs ago
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    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter बरकठा, हजारीबाग, झारखंड•
    2 hrs ago
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