logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

अरसली (दक्षिणी) पंचायत में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, जिसके तहत मुख्य पथ को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान के बाद मुख्य पथ की चौड़ाई 24 फीट हो गई है।

1 hr ago
user_MD Ostaj Raza
MD Ostaj Raza
भवनथपुर, गढ़वा, झारखंड•
1 hr ago

अरसली (दक्षिणी) पंचायत में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, जिसके तहत मुख्य पथ को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान के बाद मुख्य पथ की चौड़ाई 24 फीट हो गई है।

More news from झारखंड and nearby areas
  • अरसली (दक्षिणी) पंचायत में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, जिसके तहत मुख्य पथ को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान के बाद मुख्य पथ की चौड़ाई 24 फीट हो गई है।
    1
    अरसली (दक्षिणी) पंचायत में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, जिसके तहत मुख्य पथ को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान के बाद मुख्य पथ की चौड़ाई 24 फीट हो गई है।
    user_MD Ostaj Raza
    MD Ostaj Raza
    भवनथपुर, गढ़वा, झारखंड•
    1 hr ago
  • झारखंड की राजस्व और आर्थिक भागीदारी में 32% से 72% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण खनिज संसाधनों का कुप्रबंधन, राजनीतिक अस्थिरता और भारी भ्रष्टाचार बताए गए हैं। राज्य में देश की 40% खनिज संपदा होने के बावजूद, स्थानीय स्तर पर औद्योगिक विकास, शिक्षा के अभाव और रोजगार न मिलने के कारण झारखंड आज भी पिछड़ा हुआ है। राज्य के अविकसित रहने के प्रमुख कारणों में राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार शामिल हैं। वर्ष 2000 में गठन के बाद से राज्य में बार-बार सरकारें बदलीं, जिससे दीर्घकालिक विकास नीतियां नहीं बन पाईं। कोयला और खनन घोटालों में कई नेताओं और अधिकारियों के नाम सामने आने से जनता का विश्वास और विकास के लिए आवंटित धन, दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 'संसाधन अभिशाप' भी एक बड़ी समस्या है, जहाँ झारखंड देश को सर्वाधिक खनिज (जैसे कोयला, लौह अयस्क, यूरेनियम) प्रदान करता है, लेकिन खदानों के कारण स्थानीय लोगों को विस्थापन, पर्यावरण को नुकसान और आदिवासी अधिकारों के हनन का सामना करना पड़ा है। उत्पादन का लाभ ज्यादातर बाहरी बड़ी कंपनियों को मिला है, जिससे स्थानीय आबादी गरीबी में ही फँसी रही है। कृषि क्षेत्र का पिछड़ापन भी राज्य के विकास में बाधक रहा है। अलग राज्य बनने के बाद भी सिंचाई का पर्याप्त विकास न होने से ग्रामीण गरीबी कम नहीं हो पाई है। इसके साथ ही, 1932 के खतियान (स्थानीय नीति) और आरक्षण को लेकर स्थानीय बनाम बाहरी (Domicile) विवाद भी लगातार बना हुआ है। इन मुद्दों ने मूल निवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का विषय तो उठाया, लेकिन राजनीतिक गतिरोध और अदालती मामलों के कारण सरकारी नियुक्तियों और अन्य नियुक्तियों में काफी देरी हुई है। झारखंड के आर्थिक सफर और बुनियादी समस्याओं को विस्तार से समझने के लिए एक संबंधित वीडियो देखने का सुझाव दिया गया है।
    1
    झारखंड की राजस्व और आर्थिक भागीदारी में 32% से 72% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण खनिज संसाधनों का कुप्रबंधन, राजनीतिक अस्थिरता और भारी भ्रष्टाचार बताए गए हैं। राज्य में देश की 40% खनिज संपदा होने के बावजूद, स्थानीय स्तर पर औद्योगिक विकास, शिक्षा के अभाव और रोजगार न मिलने के कारण झारखंड आज भी पिछड़ा हुआ है।

राज्य के अविकसित रहने के प्रमुख कारणों में राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार शामिल हैं। वर्ष 2000 में गठन के बाद से राज्य में बार-बार सरकारें बदलीं, जिससे दीर्घकालिक विकास नीतियां नहीं बन पाईं। कोयला और खनन घोटालों में कई नेताओं और अधिकारियों के नाम सामने आने से जनता का विश्वास और विकास के लिए आवंटित धन, दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 'संसाधन अभिशाप' भी एक बड़ी समस्या है, जहाँ झारखंड देश को सर्वाधिक खनिज (जैसे कोयला, लौह अयस्क, यूरेनियम) प्रदान करता है, लेकिन खदानों के कारण स्थानीय लोगों को विस्थापन, पर्यावरण को नुकसान और आदिवासी अधिकारों के हनन का सामना करना पड़ा है। उत्पादन का लाभ ज्यादातर बाहरी बड़ी कंपनियों को मिला है, जिससे स्थानीय आबादी गरीबी में ही फँसी रही है।

कृषि क्षेत्र का पिछड़ापन भी राज्य के विकास में बाधक रहा है। अलग राज्य बनने के बाद भी सिंचाई का पर्याप्त विकास न होने से ग्रामीण गरीबी कम नहीं हो पाई है। इसके साथ ही, 1932 के खतियान (स्थानीय नीति) और आरक्षण को लेकर स्थानीय बनाम बाहरी (Domicile) विवाद भी लगातार बना हुआ है। इन मुद्दों ने मूल निवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का विषय तो उठाया, लेकिन राजनीतिक गतिरोध और अदालती मामलों के कारण सरकारी नियुक्तियों और अन्य नियुक्तियों में काफी देरी हुई है। झारखंड के आर्थिक सफर और बुनियादी समस्याओं को विस्तार से समझने के लिए एक संबंधित वीडियो देखने का सुझाव दिया गया है।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    1 hr ago
  • भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सोनभद्र जिले में प्रथम आगमन पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। जिले भर में विभिन्न स्थानों पर पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं, पुष्पगुच्छों और अंगवस्त्रों के साथ उनका गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने भाजपा के समर्थन में जोरदार नारे लगाए, जिससे पूरे कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बना रहा। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए इस अभिवादन को स्वीकार करते हुए पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत करने तथा जनसंपर्क बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार विकास, सुशासन और जनसेवा के अपने संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है, और इस प्रक्रिया में प्रत्येक कार्यकर्ता पार्टी की सबसे बड़ी शक्ति है। यह पूरा कार्यक्रम अत्यंत उत्साह और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।
    1
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सोनभद्र जिले में प्रथम आगमन पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। जिले भर में विभिन्न स्थानों पर पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं, पुष्पगुच्छों और अंगवस्त्रों के साथ उनका गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने भाजपा के समर्थन में जोरदार नारे लगाए, जिससे पूरे कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बना रहा।

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए इस अभिवादन को स्वीकार करते हुए पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत करने तथा जनसंपर्क बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार विकास, सुशासन और जनसेवा के अपने संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है, और इस प्रक्रिया में प्रत्येक कार्यकर्ता पार्टी की सबसे बड़ी शक्ति है। यह पूरा कार्यक्रम अत्यंत उत्साह और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।
    user_Jitendr Prshad
    Jitendr Prshad
    Court reporter दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • अनंत प्रताप देव जी पर उनके विधानसभा क्षेत्र में चंदा इकट्ठा कर बनाई जा रही सड़क को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जनता ने सीधे तौर पर उनसे जवाब मांगा है कि आखिर वह इस मामले पर चुप क्यों हैं।
    1
    अनंत प्रताप देव जी पर उनके विधानसभा क्षेत्र में चंदा इकट्ठा कर बनाई जा रही सड़क को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जनता ने सीधे तौर पर उनसे जवाब मांगा है कि आखिर वह इस मामले पर चुप क्यों हैं।
    user_Active line News
    Active line News
    Court reporter गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    5 hrs ago
  • गढ़वा के भंडारीया में एक बैंक मैनेजर को रात के अंधेरे में एक विधवा महिला से मिलने पहुंचने पर ग्रामीणों ने वहां से भगा दिया। ग्रामीणों ने इस घटना को अनुचित मानते हुए बैंक मैनेजर का विरोध किया और उन्हें वापस जाने पर मजबूर कर दिया।
    1
    गढ़वा के भंडारीया में एक बैंक मैनेजर को रात के अंधेरे में एक विधवा महिला से मिलने पहुंचने पर ग्रामीणों ने वहां से भगा दिया। ग्रामीणों ने इस घटना को अनुचित मानते हुए बैंक मैनेजर का विरोध किया और उन्हें वापस जाने पर मजबूर कर दिया।
    user_Green Line News, Md Mostaque
    Green Line News, Md Mostaque
    पत्रकार गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    6 hrs ago
  • एक ग्रामीण ने सरकार से अपने गांव में एक पुस्तकालय (लाइब्रेरी) स्थापित करने की विनम्र अपील की है। उनका कहना है कि गांव में पुस्तकालय की सुविधा न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई अच्छी तरह से नहीं हो पा रही है। ग्रामीण ने सरकार से अनुरोध किया है कि बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके गांव में जल्द से जल्द एक लाइब्रेरी का निर्माण किया जाए, जिससे बच्चे वहां अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
    1
    एक ग्रामीण ने सरकार से अपने गांव में एक पुस्तकालय (लाइब्रेरी) स्थापित करने की विनम्र अपील की है। उनका कहना है कि गांव में पुस्तकालय की सुविधा न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई अच्छी तरह से नहीं हो पा रही है। ग्रामीण ने सरकार से अनुरोध किया है कि बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके गांव में जल्द से जल्द एक लाइब्रेरी का निर्माण किया जाए, जिससे बच्चे वहां अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
    user_Lavkush Yadav
    Lavkush Yadav
    Electrician दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • सहायक निर्वाची पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी राकेश तिवारी ने क्षेत्र में स्थित कई बीएलओ केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर कार्य की प्रगति का जायजा लिया। अंचलाधिकारी ने संबंधितों को यह कार्य समय पर पूरा करने का निर्देश भी दिया।
    1
    सहायक निर्वाची पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी राकेश तिवारी ने क्षेत्र में स्थित कई बीएलओ केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर कार्य की प्रगति का जायजा लिया। अंचलाधिकारी ने संबंधितों को यह कार्य समय पर पूरा करने का निर्देश भी दिया।
    user_पब्लिक लोकल न्यूज रिपोर्टर
    पब्लिक लोकल न्यूज रिपोर्टर
    विश्रामपुर, पलामू, झारखंड•
    7 hrs ago
  • झारखंड, देश की 40% खनिज संपदा का घर होने के बावजूद, आज भी एक पिछड़ा राज्य है। राज्य की राजस्व और आर्थिक भागीदारी में 32% से 72% तक की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण खनिज संसाधनों का कुप्रबंधन, राजनीतिक अस्थिरता और भारी भ्रष्टाचार बताया गया है। स्थानीय स्तर पर औद्योगिक विकास, शिक्षा की कमी और रोजगार के अवसर न मिलना भी इसकी प्रमुख वजहें हैं। राज्य के अविकसित रहने के कई कारण गिनाए गए हैं। वर्ष 2000 में गठन के बाद से झारखंड में लगातार सरकारें बदलती रहीं, जिससे दीर्घकालिक विकास नीतियां नहीं बन पाईं। कोयला और खनन घोटालों में कई नेताओं और अधिकारियों के नाम सामने आने से जनता का विश्वास टूटा और विकास के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग हुआ। इसके अतिरिक्त, राज्य "संसाधन अभिशाप" का भी शिकार है; जहां देश को कोयला, लौह अयस्क और यूरेनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज उपलब्ध कराने के बावजूद, खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय आदिवासियों को विस्थापन, पर्यावरण क्षति और उनके अधिकारों के हनन का सामना करना पड़ा है। इस उत्पादन का लाभ बाहरी बड़ी कंपनियों को अधिक मिलता रहा है, जिससे स्थानीय आबादी गरीबी में ही फंसी हुई है। कृषि क्षेत्र में भी पिछड़ापन हावी है, क्योंकि अलग राज्य बनने के बाद भी सिंचाई का पर्याप्त विकास नहीं हो सका है, जो ग्रामीण गरीबी का एक बड़ा कारण बना हुआ है। राज्य में 1932 के खतियान (स्थानीय नीति) और आरक्षण को लेकर लंबे समय से "स्थानीय बनाम बाहरी" विवाद चलता रहा है। इन मुद्दों ने भले ही मूल निवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की बात उठाई हो, लेकिन इसके परिणामस्वरूप राजनीतिक गतिरोध और अदालती मामले बढ़े हैं, जिससे सरकारी नियुक्तियों और पदों पर भर्तियां भारी देरी से हुई हैं।
    2
    झारखंड, देश की 40% खनिज संपदा का घर होने के बावजूद, आज भी एक पिछड़ा राज्य है। राज्य की राजस्व और आर्थिक भागीदारी में 32% से 72% तक की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण खनिज संसाधनों का कुप्रबंधन, राजनीतिक अस्थिरता और भारी भ्रष्टाचार बताया गया है। स्थानीय स्तर पर औद्योगिक विकास, शिक्षा की कमी और रोजगार के अवसर न मिलना भी इसकी प्रमुख वजहें हैं।

राज्य के अविकसित रहने के कई कारण गिनाए गए हैं। वर्ष 2000 में गठन के बाद से झारखंड में लगातार सरकारें बदलती रहीं, जिससे दीर्घकालिक विकास नीतियां नहीं बन पाईं। कोयला और खनन घोटालों में कई नेताओं और अधिकारियों के नाम सामने आने से जनता का विश्वास टूटा और विकास के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग हुआ। इसके अतिरिक्त, राज्य "संसाधन अभिशाप" का भी शिकार है; जहां देश को कोयला, लौह अयस्क और यूरेनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज उपलब्ध कराने के बावजूद, खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय आदिवासियों को विस्थापन, पर्यावरण क्षति और उनके अधिकारों के हनन का सामना करना पड़ा है। इस उत्पादन का लाभ बाहरी बड़ी कंपनियों को अधिक मिलता रहा है, जिससे स्थानीय आबादी गरीबी में ही फंसी हुई है। कृषि क्षेत्र में भी पिछड़ापन हावी है, क्योंकि अलग राज्य बनने के बाद भी सिंचाई का पर्याप्त विकास नहीं हो सका है, जो ग्रामीण गरीबी का एक बड़ा कारण बना हुआ है।

राज्य में 1932 के खतियान (स्थानीय नीति) और आरक्षण को लेकर लंबे समय से "स्थानीय बनाम बाहरी" विवाद चलता रहा है। इन मुद्दों ने भले ही मूल निवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की बात उठाई हो, लेकिन इसके परिणामस्वरूप राजनीतिक गतिरोध और अदालती मामले बढ़े हैं, जिससे सरकारी नियुक्तियों और पदों पर भर्तियां भारी देरी से हुई हैं।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    6 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.