राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह का हुआ सम्मान बूढ़नपुर। तहसील क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर में मंगलवार को शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह के राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रमुख प्रतिनिधि संतोष यादव ने माला पहनाकर प्रदीप कुमार सिंह का स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि महाप्रधान प्रतिनिधि अंकित गुप्ता ने भी उन्हें सम्मानित कर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक एवं प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह ने की। सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर में वर्तमान में करीब 690 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जब अधिकांश परिषदीय विद्यालय छात्र संख्या की चुनौती से जूझ रहे हैं, वहीं इस विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विद्यालय के दो विद्यार्थियों ने जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है। वहीं राष्ट्रीय आय आधारित छात्रवृत्ति योजना के तहत 22 विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर कक्षा नौ से इंटरमीडिएट तक छात्रवृत्ति पाने का रास्ता साफ किया है। उन्होंने दावा किया कि जिले में इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति परीक्षा में सफल होने वाला यह पहला विद्यालय है। उन्होंने कहा कि विद्यालय के शिक्षक बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नियमित रूप से तैयार करते हैं। विद्यालय का समय सुबह आठ बजे से है, लेकिन शिक्षक सुबह सात बजे ही पहुंचकर बच्चों को अतिरिक्त समय देकर पढ़ाते हैं। इसका परिणाम विद्यालय की बेहतर छात्र संख्या और विद्यार्थियों की उपलब्धियों के रूप में सामने आ रहा है। खेल प्रतियोगिताओं में भी विद्यालय के विद्यार्थी प्रदेश स्तर पर आजमगढ़ का नाम रोशन कर चुके हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यालय के बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना निजी विद्यालयों के शिक्षक भी करते हैं। उन्होंने बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर के चार शिक्षक अब तक राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। वर्ष 1976 में रामलखन सिंह, 2015 में रासमनि सिंह और 2019 में सुरेंद्र प्रताप सिंह को राज्यपाल पुरस्कार मिल चुका है। अब वर्ष 2026 में शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह के चयन से विद्यालय की उपलब्धियों में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि विद्यालय के शिक्षकों के अनुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन के कारण भैरोपुर विद्यालय ने क्षेत्र ही नहीं, बल्कि जिले में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस विद्यालय के शिक्षक राज्यपाल और राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित होकर विद्यालय का गौरव बढ़ाएंगे। इस अवसर पर लेखा अधिकारी संध्या अग्रहरि, विश्वनाथ राम, सतिराम वर्मा, चंद्रशेखर विश्वकर्मा, अजय पांडेय, सीताराम पांडेय, पवन जायसवाल, हरिराम वर्मा, हरेंद्र, सुनील प्रकाश, वंदना, तृषा, सोनी, सविता, चंद्रावती समेत अनेक शिक्षक, शुभचिंतक और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह का हुआ सम्मान बूढ़नपुर। तहसील क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर में मंगलवार को शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह के राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रमुख प्रतिनिधि संतोष यादव ने माला पहनाकर प्रदीप कुमार सिंह का स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि महाप्रधान प्रतिनिधि अंकित गुप्ता ने भी उन्हें सम्मानित कर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक एवं प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह ने की। सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर में वर्तमान में करीब 690 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जब अधिकांश परिषदीय विद्यालय छात्र संख्या की चुनौती से जूझ रहे हैं, वहीं इस विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विद्यालय के दो विद्यार्थियों ने जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है। वहीं राष्ट्रीय आय आधारित छात्रवृत्ति योजना के तहत 22 विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर कक्षा नौ से इंटरमीडिएट तक छात्रवृत्ति पाने का रास्ता साफ किया है। उन्होंने दावा किया कि जिले में इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति परीक्षा में सफल होने वाला यह पहला विद्यालय है। उन्होंने कहा कि विद्यालय के शिक्षक बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नियमित रूप से तैयार करते हैं। विद्यालय का समय सुबह आठ बजे से है, लेकिन शिक्षक सुबह सात बजे ही पहुंचकर बच्चों को अतिरिक्त समय देकर पढ़ाते हैं। इसका परिणाम विद्यालय की बेहतर छात्र संख्या और विद्यार्थियों की उपलब्धियों के रूप में सामने आ रहा है। खेल प्रतियोगिताओं में भी विद्यालय के विद्यार्थी प्रदेश स्तर पर आजमगढ़ का नाम रोशन कर चुके हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यालय के बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना निजी विद्यालयों के शिक्षक भी करते हैं। उन्होंने बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर के चार शिक्षक अब तक राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। वर्ष 1976 में रामलखन सिंह, 2015 में रासमनि सिंह और 2019 में सुरेंद्र प्रताप सिंह को राज्यपाल पुरस्कार मिल चुका है। अब वर्ष 2026 में शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह के चयन से विद्यालय की उपलब्धियों में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि विद्यालय के शिक्षकों के अनुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन के कारण भैरोपुर विद्यालय ने क्षेत्र ही नहीं, बल्कि जिले में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस विद्यालय के शिक्षक राज्यपाल और राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित होकर विद्यालय का गौरव बढ़ाएंगे। इस अवसर पर लेखा अधिकारी संध्या अग्रहरि, विश्वनाथ राम, सतिराम वर्मा, चंद्रशेखर विश्वकर्मा, अजय पांडेय, सीताराम पांडेय, पवन जायसवाल, हरिराम वर्मा, हरेंद्र, सुनील प्रकाश, वंदना, तृषा, सोनी, सविता, चंद्रावती समेत अनेक शिक्षक, शुभचिंतक और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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- बेजुबानों को दाना खिलाकर यूजीसी के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन, गूंजा ‘यूजीसी गो बैक आजमगढ़। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नीतियों के विरोध में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया गया। ‘देश बचाओ, भविष्य बनाओ’ बैनर के तहत जुटे लोगों ने पहले बेजुबान जीवों को भोजन कराया। इसके बाद ‘यूजीसी गो बैक’ के नारे लगाकर शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। सेवा कार्य के माध्यम से विरोध दर्ज कराने का यह तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। आलोक सिंह ने कहा कि बेजुबान जीवों को भोजन कराने के माध्यम से समाज को संदेश देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि एक आवाज पर सैकड़ों बेजुबान भोजन के लिए एकत्र हो जाते हैं, लेकिन शिक्षा और भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों पर समाज को अभी और जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने नागरिकों से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और जवाबदेह बनाने के लिए अपनी आवाज उठाने की अपील की। समाजसेवी डीएन सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखना केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक नागरिक की भी इसमें भूमिका है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना उद्देश्य नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखना है। मीना राय ने कहा कि सेवा और जनजागरूकता को जोड़कर विरोध दर्ज कराने का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहने तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का आह्वान किया। प्रदर्शन में देवनाथ सिंह, आलोक सिंह, ओंकार पाठक, मीना राय, माधुरी त्रिपाठी, वर्षम सिंह, संतोष सिंह, युवराज सिंह, राहुल सिंह, अवनीश, गुलाब चौरसिया, अनूप सिंह और ओमशी बरनवाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।4
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- सवाल पूछना पड़ा भारी? महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी का मामला गरमाया, पुलिस के दावे पर भी उठे सवाल! बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ | नई दिल्ली सवाल पूछना पड़ा भारी? महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी का मामला गरमाया, पुलिस के दावे पर भी उठे सवाल! साकेत, नई दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के कार्यक्रम की कवरेज करने पहुंचीं दो महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के बाद उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया और पुलिस स्टेशन में उनके साथ कथित मारपीट व दुर्व्यवहार किया गया। पत्रकारों की ओर से सामने आए वीडियो में चोट के निशान दिखाए जाने का दावा किया गया है। मामले को लेकर पत्रकार संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि महिला पत्रकारों को VVIP रूट बाधित करने और पुलिस के निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण थाने ले जाया गया था। पुलिस ने सवाल पूछने पर मारपीट के आरोपों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। सबसे बड़ा सवाल—क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना पत्रकार का अधिकार है? अगर आरोप सही हैं तो जिम्मेदार कौन? और अगर पुलिस के दावे सही हैं तो पूरे घटनाक्रम की सच्चाई क्या है? मामले की निष्पक्ष जांच से ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।1