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2026 अप्रैल में ग्रहों की बड़ी हलचल...... पंकज झा शास्त्री 9576281913 मधुबनी। जन्म कुंडली बनवाने हेतु संपर्क कर सकते हैं 9576281913
पंकज झा शास्त्री
2026 अप्रैल में ग्रहों की बड़ी हलचल...... पंकज झा शास्त्री 9576281913 मधुबनी। जन्म कुंडली बनवाने हेतु संपर्क कर सकते हैं 9576281913
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- Post by Thakur Chandan Kumar1
- सतघारा में ग्रामीण के बरामदे पर चल रहा नया प्राइमरी स्कूल बारा बुनियादी सुविधाओं के अभाव में 71 बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित बाबूबरही 1- सतघारा बारा स्थित बरामदे में संचालित नया प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करते बच्चे व मौजूद शिक्षक बाबूबरही, प्रखंड क्षेत्र के सतघारा बारा स्थित नया प्राथमिक विद्यालय वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण के बरामदे पर संचालित हो रहा। यह विद्यालय ऐसा है जहां विद्यालय का न भवन है, न शौचालय, पेयजल आदि मूलभूत सुविधा। और तो स्कूल पक्की सड़क से नहीं जुड़ा हुआ है। इस सबके बावजूद 71 बच्चों की पढ़ाई चार शिक्षकों के भरोसे हो रही है। भवन नहीं रहने से विद्यालय की अधिकांश गतिविधियां ग्रामीण के दरवाजे के बरामदे, मवेशी घर और गली की सड़क पर ही पूरी की जा रही है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शमशा बेगम ने बताया कि वर्ष 2007 से ही यह विद्यालय बरामदे पर संचालित हो रहा। शुरुआती तीन वर्षों तक इसे प्राथमिक विद्यालय टिकुलिया में मर्ज किया गया था। पर बाद में ब्रह्मस्थान पर विवाद होने से स्कूल को अलग कर दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में नामांकन प्रक्रिया जारी है। ग्रामीणों के सहयोग से पूरी हो रही गतिविधि::: स्कूल भवन नहीं होने के कारण पठन पाठन से अभिभावक संगोष्ठी और अन्य सारी गतिविधियां ग्रामीणों के सहयोग से ही पूरी की जाती हैं। प्रधानाध्यापिका के अनुसार विद्यालय भवन के लिए मो. जैनुल आबेदीन के द्वारा जमीन उपलब्ध कराई गई है। पर अब तक भवन निर्माण की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। बारिश के दिनों में विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता और भी बदतर हो जाता है। जिससे बच्चों और शिक्षकों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। विद्यालय में शौचालय और पेयजल की असुविधा:: विद्यालय में शौचालय और पेयजल की असुविधा नहीं होने से छात्र-छात्राओं को काफी दिक्कत होती है। यह जानकारी देते हुए छात्र शमीम, असरफ, आदिल आदि ने बताया कि उनके जैसे और बच्चे घर से पानी लेकर आते हैं। या फिर प्यास लगने पर स्कूल से घर चले जाते हैं। वहीं शिक्षक आसपास के ग्रामीणों के शौचालय का उपयोग करने को मजबूर हैं। परीक्षा के समय बाहरी शिक्षक यहां आने से कतराते हैं। हालांकि इस संबंध में प्रभारी शिक्षा पदाधिकारी रिमझिम गुड़िया से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। पर संपर्क नहीं हो सका। पूर्व मुखिया जमील अख्तर सीओ, समाजसेवी सरोज मिश्रा, पंचायत समिति सदस्य मोद नारायण झा आदि ग्रामीणों ने जल्द विद्यालय भवन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।1
- पुर्वी चम्पारण एक महत्वपूर्ण इतिहास है जहां महात्मा गांधी 1917 में आंदोलन किया था चम्पारण सत्या ग्रहण भारत में पहली बार इस आंदोलन का शुरुआत किया गया था आज में चम्पारण पहुंचते हैं तो गर्भ होता है आज पहुंचकर मान खुश होता है इतना डेवलप्ड किया गया है बहुत अच्छा डिज़ाइन किया गया है1
- Post by पंकज झा शास्त्री1