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Manish Parmar
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- नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन में लग रही भक्तों की भीड़ नीलकंठ महादेव मंदिर के नीचे गोल चक्र में बिल पत्र डालने से होती है मनते पूरी , यहा पर देश ओर विदेशी भी श्रद्धा से झुकाते हैं सिर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन में लग रही भक्तों की भीड़ नीलकंठ महादेव मंदिर के नीचे गोल चक्र में बिल पत्र डालने से होती है मनते पूरी , यहा पर देश ओर विदेशी भी श्रद्धा से झुकाते हैं सिर राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/नीलकंठ मंदिर मांडू शहर का एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। इस मंदिर को नीलकंठेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर प्राचीन काल में अकबर के द्वारा शिकार घर बनवाया था जिसमें बाजीराव के द्वारा मांडू के सोनगढ़ किले को बनवाया वही सोनगढ़ किले से थोड़ी आगे जहां नीलकंठ मंदिर वहां पर बाजीराव के द्वारा भगवान शिव को भी स्थापित क्या बताया जाता है बाजीराव भगवान शिव के परम भक्त थे वह जहां भी जाते थे तो भगवान भोलेनाथ का मंदिर स्थापित करते थे । यह मंदिर मांडू की सुंदर वादियों के बीच में बना हुआ है। मंदिर में झरना भी देखने के लिए मिलता है। यहां पर शिवलिंग पर 24 घंटे पानी गिरता रहता है। यहां का दृश्य बहुत ही जबरदस्त है। मंदिर में जलकुंड है। इस जलकुंड के पास ही में एक प्राचीन गोल आकृति देखने के लिए मिलती है। यह आकृति गोलाकार है यहां पर भक्त अगर भगवान शिव के ऊपर का बिल पत्र उसमें छोड़ कर जो भी मनत मांगते भगवान शिव उनकी सारी मनोकामना पूरी करते है। गोलाकार आकृति में जल बहता है। यह बहुत ही अद्भुत लगती है यहां नीलकंठ महल अकबर के द्वारा शिकार घर के रूप में बनवाया गया था। वही बाजीराव के द्वारा भगवान महादेव स्थापित कर नीलकंठ महादेव मंदिर बनाया गया ऐतिहासिक नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में पूरे सावन में कांवड़ यात्रा आती है वही दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए देश के अनेक भागों से आते हैं। मांडू की वास्तुकला के सन्दर्भ में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के लिए 1929 में अध्ययन कर चुके प्रमुख पुरातत्वशास्त्री जीएस यजदानी के अनुसार मांडू में स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर जिसके निर्माणकाल का कोई शिलालेख तो नहीं मिलता लेकिन यह मंदिर भी मांडू के प्राचीन हिन्दू परमार राजवंश की जलयन्त्र संग्रह के आयामों को अपनी अद्भुत जल निकासी की तकनीक से सिद्ध करता है। इसके प्रवेश मार्ग पर ही एक छोटा जलाशय स्थित है जिसमें बरसात का पानी संग्रहित होता है। जलकुंड से पानी भूमिगत मार्गो से होता हुआ सीधे भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर मस्तकाभिषेक करता है। जो मंदिर के ही अंदर से गुजरता हुआ सामने के छोटे कुंड में संग्रह होता है और फिर इसमें से आगे बढ़कर एक चक्रीय नहरनुमा संरचना से गोल घूमकर इस मंदिर के समीप स्थित खाई में गिरकर एक झरने का रूप लेता है। मध्ययुग में मुगल बादशाह जहांगीर ने इसे मांडू का सबसे सुन्दर स्थान बताया था, तो वहीं अकबर ने इस स्थान पर अपने लिए शिकार घर खानदेश बनवाया था उसका उल्लेख किया गया। यह मंदिर देश के उन मंदिरों में से एक है, जहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं और महादेव का आशीर्वाद भी लेते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर सच्चे दिल से अगर कोई कुछ मांगता है तो भोलेनाथ उसे जरूर पूरा करते हैं। यह मंदिर मांडू के मांडवगढ़ किले में स्थित है। यह मंदिर महल के अंदर बना है, जो एक गहरी खाई के पास स्थित तो है लेकिन इसके लिए आपको 60 सीढ़ियां नीचे उतरने पड़ती है।4
- आदिवासी डांडिया मामा की प्रतिमा पर माल अर्पण किया एवं बड़ी रैली निकाली गई जिसमें हजारों की तादाद में आदिवासी अपने ढोल नगाड़े और हथियारों के साथ देश निकले डीजे की थाप पर डांस किया तरह-तरह की आदिवासी राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष में आज इंदौर में डांडिया मामा बिल की प्रतिमा पर हिमालय अर्पण किया और रंगारंग झांकियां निकाली गई जिसमें लाखों की तादाद में आदिवासी उपलब्ध से जो अपनी भेज दो ढोल तमाशा डीजे1
- गुरु पर श्रद्धा ,विश्वास, निष्ठा ,रखने वाले व आत्मसात करने वालो का भाग्य गुरु के हाथ में होता है -संत श्री गोपालराम विश्व जागृति मिशन का गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से संपन्न* गुरु पर श्रद्धा ,विश्वास, निष्ठा ,रखने वाले व आत्मसात करने वालो का भाग्य गुरु के हाथ में होता है -संत श्री गोपालराम इंदौर । *लोक विख्यात संत आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज द्वारा स्थापित विश्व जागृति मिशन इंदौर मंडल के तत्वाधान में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से संपन्न* *विश्व जागृति मिशन इंदौर मंडल के महामंत्री श्री कृष्ण मुरारी शर्मा के द्वारा बताया गया कि गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन रामद्वारा उषा नगर में ब्यावर राजस्थान से चातुर्मास हेतु पधारे संत श्री गोपाल राम जी महाराज तथा बाल संत श्री गोविंद राम जी महाराज के uआतिथ्य में मनाया गया है* *संत श्री गोपालराम जी महाराज ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सदगुरुदेव पर श्रद्धा विश्वास और निष्ठा रखने वाले तथा सदगुरु के बताए मार्ग को आत्मसात करने वाले भक्तों का भाग्य हमेशा गुरु के हाथ में होता है, इसके अतिरिक्त संत श्री ने यह भी कहा कि जिस प्रकार लकड़ी के अन्दर जलने का गुण होता है किंतु उसे जलाने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है, समझ लीजिए की गुरु ही वह अग्नि है जो आपके ज्ञान को प्रकाशित करता है इसलिए जीवन में गुरु का होना अत्यावश्यक है* *बाल संत श्री गोविंद राम जी महाराज के द्वारा गुरु के लिए बहुत ही कारण प्रिय भजन "आनंद ही आनंद बरस रहा गुरुदेव तुम्हारे चरणों में" से वहां बड़ी संख्या में उपस्थित गुरु भक्तों को मंत्र मुग्ध कर दिया, आपके द्वारा हमारे सनातनी संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए संस्कार आज की सबसे बड़ी आवश्यकता प्रतिपादित किया कार्यक्रम में राजेंद्र अग्रवाल (टाइगर टॉर्च) दिलीप बडोले, ओमप्रकाश सोलंकी, अनिल शर्मा, पीतांबर मंगलानी,गोविंद गंगराड़े, सत्यनारायण मारू, अजय बैंडवाल,अजय कानूनगो, नवीनचंद्र भुसारी, श्रीमती आशालता डाबर, स्वीटी शर्मा, शोभा जोशी, शोभा सोलंकी, कुसुम ओसवाल, मधुकान्ता आदि के द्वारा आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है* *1
- भील कॉलोनी के स्कूली बच्चों को बांटी शैक्षणिक सामग्री, नशामुक्ति का दिया संदेश1
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