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नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन में लग रही भक्तों की भीड़ नीलकंठ महादेव मंदिर के नीचे गोल चक्र में बिल पत्र डालने से होती है मनते पूरी , यहा पर देश ओर विदेशी भी श्रद्धा से झुकाते हैं सिर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन में लग रही भक्तों की भीड़ नीलकंठ महादेव मंदिर के नीचे गोल चक्र में बिल पत्र डालने से होती है मनते पूरी , यहा पर देश ओर विदेशी भी श्रद्धा से झुकाते हैं सिर राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/नीलकंठ मंदिर मांडू शहर का एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। इस मंदिर को नीलकंठेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर प्राचीन काल में अकबर के द्वारा शिकार घर बनवाया था जिसमें बाजीराव के द्वारा मांडू के सोनगढ़ किले को बनवाया वही सोनगढ़ किले से थोड़ी आगे जहां नीलकंठ मंदिर वहां पर बाजीराव के द्वारा भगवान शिव को भी स्थापित क्या बताया जाता है बाजीराव भगवान शिव के परम भक्त थे वह जहां भी जाते थे तो भगवान भोलेनाथ का मंदिर स्थापित करते थे । यह मंदिर मांडू की सुंदर वादियों के बीच में बना हुआ है। मंदिर में झरना भी देखने के लिए मिलता है। यहां पर शिवलिंग पर 24 घंटे पानी गिरता रहता है। यहां का दृश्य बहुत ही जबरदस्त है। मंदिर में जलकुंड है। इस जलकुंड के पास ही में एक प्राचीन गोल आकृति देखने के लिए मिलती है। यह आकृति गोलाकार है यहां पर भक्त अगर भगवान शिव के ऊपर का बिल पत्र उसमें छोड़ कर जो भी मनत मांगते भगवान शिव उनकी सारी मनोकामना पूरी करते है। गोलाकार आकृति में जल बहता है। यह बहुत ही अद्भुत लगती है यहां नीलकंठ महल अकबर के द्वारा शिकार घर के रूप में बनवाया गया था। वही बाजीराव के द्वारा भगवान महादेव स्थापित कर नीलकंठ महादेव मंदिर बनाया गया ऐतिहासिक नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में पूरे सावन में कांवड़ यात्रा आती है वही दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए देश के अनेक भागों से आते हैं। मांडू की वास्तुकला के सन्दर्भ में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के लिए 1929 में अध्ययन कर चुके प्रमुख पुरातत्वशास्त्री जीएस यजदानी के अनुसार मांडू में स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर जिसके निर्माणकाल का कोई शिलालेख तो नहीं मिलता लेकिन यह मंदिर भी मांडू के प्राचीन हिन्दू परमार राजवंश की जलयन्त्र संग्रह के आयामों को अपनी अद्भुत जल निकासी की तकनीक से सिद्ध करता है। इसके प्रवेश मार्ग पर ही एक छोटा जलाशय स्थित है जिसमें बरसात का पानी संग्रहित होता है। जलकुंड से पानी भूमिगत मार्गो से होता हुआ सीधे भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर मस्तकाभिषेक करता है। जो मंदिर के ही अंदर से गुजरता हुआ सामने के छोटे कुंड में संग्रह होता है और फिर इसमें से आगे बढ़कर एक चक्रीय नहरनुमा संरचना से गोल घूमकर इस मंदिर के समीप स्थित खाई में गिरकर एक झरने का रूप लेता है। मध्ययुग में मुगल बादशाह जहांगीर ने इसे मांडू का सबसे सुन्दर स्थान बताया था, तो वहीं अकबर ने इस स्थान पर अपने लिए शिकार घर खानदेश बनवाया था उसका उल्लेख किया गया। यह मंदिर देश के उन मंदिरों में से एक है, जहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं और महादेव का आशीर्वाद भी लेते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर सच्चे दिल से अगर कोई कुछ मांगता है तो भोलेनाथ उसे जरूर पूरा करते हैं। यह मंदिर मांडू के मांडवगढ़ किले में स्थित है। यह मंदिर महल के अंदर बना है, जो एक गहरी खाई के पास स्थित तो है लेकिन इसके लिए आपको 60 सीढ़ियां नीचे उतरने पड़ती है।

2 hrs ago
user_राहुल सेन मांडव
राहुल सेन मांडव
Barber Dhar, Madhya Pradesh•
2 hrs ago
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नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन में लग रही भक्तों की भीड़ नीलकंठ महादेव मंदिर के नीचे गोल चक्र में बिल पत्र डालने से होती है मनते पूरी , यहा पर देश ओर विदेशी भी श्रद्धा से झुकाते हैं सिर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन में लग रही भक्तों की भीड़ नीलकंठ महादेव मंदिर के नीचे गोल चक्र में बिल पत्र डालने से होती है मनते पूरी , यहा पर देश ओर विदेशी भी श्रद्धा से झुकाते हैं सिर राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/नीलकंठ मंदिर मांडू शहर का एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। इस मंदिर को नीलकंठेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर प्राचीन काल में अकबर के द्वारा शिकार घर बनवाया था जिसमें बाजीराव के द्वारा मांडू के सोनगढ़ किले को बनवाया वही सोनगढ़ किले से थोड़ी आगे जहां नीलकंठ मंदिर वहां पर

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बाजीराव के द्वारा भगवान शिव को भी स्थापित क्या बताया जाता है बाजीराव भगवान शिव के परम भक्त थे वह जहां भी जाते थे तो भगवान भोलेनाथ का मंदिर स्थापित करते थे । यह मंदिर मांडू की सुंदर वादियों के बीच में बना हुआ है। मंदिर में झरना भी देखने के लिए मिलता है। यहां पर शिवलिंग पर 24 घंटे पानी गिरता रहता है। यहां का दृश्य बहुत ही जबरदस्त है। मंदिर में जलकुंड है। इस जलकुंड के पास ही में एक प्राचीन गोल आकृति देखने के लिए मिलती है। यह आकृति गोलाकार है यहां पर भक्त अगर भगवान शिव के ऊपर का बिल पत्र उसमें छोड़ कर जो भी मनत मांगते भगवान शिव उनकी सारी मनोकामना पूरी करते है। गोलाकार आकृति में जल बहता है। यह बहुत ही अद्भुत लगती है यहां नीलकंठ महल अकबर के द्वारा शिकार घर के रूप में बनवाया

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गया था। वही बाजीराव के द्वारा भगवान महादेव स्थापित कर नीलकंठ महादेव मंदिर बनाया गया ऐतिहासिक नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में पूरे सावन में कांवड़ यात्रा आती है वही दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए देश के अनेक भागों से आते हैं। मांडू की वास्तुकला के सन्दर्भ में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के लिए 1929 में अध्ययन कर चुके प्रमुख पुरातत्वशास्त्री जीएस यजदानी के अनुसार मांडू में स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर जिसके निर्माणकाल का कोई शिलालेख तो नहीं मिलता लेकिन यह मंदिर भी मांडू के प्राचीन हिन्दू परमार राजवंश की जलयन्त्र संग्रह के आयामों को अपनी अद्भुत जल निकासी की तकनीक से सिद्ध करता है। इसके प्रवेश मार्ग पर ही एक छोटा जलाशय स्थित है जिसमें बरसात का पानी संग्रहित होता है। जलकुंड से पानी भूमिगत मार्गो से होता हुआ सीधे भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर मस्तकाभिषेक करता है। जो मंदिर के ही अंदर से गुजरता हुआ सामने के

छोटे कुंड में संग्रह होता है और फिर इसमें से आगे बढ़कर एक चक्रीय नहरनुमा संरचना से गोल घूमकर इस मंदिर के समीप स्थित खाई में गिरकर एक झरने का रूप लेता है। मध्ययुग में मुगल बादशाह जहांगीर ने इसे मांडू का सबसे सुन्दर स्थान बताया था, तो वहीं अकबर ने इस स्थान पर अपने लिए शिकार घर खानदेश बनवाया था उसका उल्लेख किया गया। यह मंदिर देश के उन मंदिरों में से एक है, जहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं और महादेव का आशीर्वाद भी लेते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर सच्चे दिल से अगर कोई कुछ मांगता है तो भोलेनाथ उसे जरूर पूरा करते हैं। यह मंदिर मांडू के मांडवगढ़ किले में स्थित है। यह मंदिर महल के अंदर बना है, जो एक गहरी खाई के पास स्थित तो है लेकिन इसके लिए आपको 60 सीढ़ियां नीचे उतरने पड़ती है।

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    नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन में लग रही भक्तों की भीड़ 

नीलकंठ महादेव मंदिर के नीचे गोल चक्र में बिल पत्र डालने से होती है मनते पूरी

, यहा पर देश ओर  विदेशी भी श्रद्धा से झुकाते हैं सिर
नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन में लग रही भक्तों की भीड़ 
नीलकंठ महादेव मंदिर के नीचे गोल चक्र में बिल पत्र डालने से होती है मनते पूरी
, यहा पर देश ओर  विदेशी भी श्रद्धा से झुकाते हैं सिर
राहुल सेन मांडव 
मो 9669141814
मांडू न्यूज/नीलकंठ मंदिर मांडू शहर का एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। इस मंदिर को नीलकंठेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर प्राचीन काल में अकबर के द्वारा शिकार  घर बनवाया था  जिसमें बाजीराव के द्वारा  मांडू के सोनगढ़ किले  को बनवाया वही सोनगढ़ किले से थोड़ी आगे जहां नीलकंठ मंदिर वहां पर  बाजीराव के द्वारा भगवान शिव को भी स्थापित क्या बताया जाता है बाजीराव भगवान शिव के परम भक्त थे वह जहां भी जाते थे तो भगवान भोलेनाथ का मंदिर स्थापित करते थे । यह मंदिर मांडू की सुंदर वादियों के बीच में बना हुआ है। मंदिर में झरना भी देखने के लिए मिलता है। यहां पर शिवलिंग पर 24 घंटे पानी गिरता रहता है। यहां का दृश्य बहुत ही जबरदस्त है।
मंदिर में जलकुंड है। इस जलकुंड के पास ही में एक प्राचीन गोल आकृति देखने के लिए मिलती है। यह आकृति गोलाकार है यहां पर भक्त अगर भगवान शिव के ऊपर का बिल पत्र उसमें छोड़ कर जो भी मनत मांगते भगवान शिव उनकी सारी मनोकामना पूरी  करते है। गोलाकार आकृति में जल बहता है। यह बहुत ही अद्भुत लगती है 
यहां नीलकंठ  महल अकबर के द्वारा शिकार घर के रूप में बनवाया गया था। वही बाजीराव के द्वारा भगवान महादेव स्थापित कर नीलकंठ महादेव मंदिर बनाया गया
ऐतिहासिक नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में पूरे सावन में कांवड़ यात्रा आती है  वही दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए देश के अनेक भागों से आते हैं।
मांडू की वास्तुकला के सन्दर्भ में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के लिए 1929 में अध्ययन कर चुके प्रमुख पुरातत्वशास्त्री जीएस यजदानी के अनुसार मांडू में स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर जिसके निर्माणकाल का कोई शिलालेख तो नहीं मिलता लेकिन यह मंदिर भी मांडू के प्राचीन हिन्दू परमार राजवंश की जलयन्त्र संग्रह के आयामों को अपनी अद्भुत जल निकासी की तकनीक से सिद्ध करता है।
इसके प्रवेश मार्ग पर ही एक छोटा जलाशय स्थित है जिसमें बरसात का पानी संग्रहित होता है। जलकुंड से पानी भूमिगत
मार्गो से होता हुआ सीधे भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर मस्तकाभिषेक करता है। जो मंदिर के ही अंदर से गुजरता हुआ सामने के छोटे कुंड में संग्रह होता है और फिर इसमें से आगे बढ़कर एक चक्रीय नहरनुमा संरचना से गोल घूमकर इस मंदिर के समीप स्थित खाई में गिरकर एक झरने का रूप लेता है। मध्ययुग में मुगल बादशाह जहांगीर ने इसे मांडू का सबसे सुन्दर स्थान बताया था, तो वहीं अकबर ने इस स्थान पर अपने  लिए शिकार घर खानदेश बनवाया था उसका उल्लेख किया गया।
यह मंदिर देश के उन मंदिरों में से एक है, जहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं और महादेव का आशीर्वाद भी लेते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर सच्चे दिल से अगर कोई कुछ मांगता है तो भोलेनाथ उसे जरूर पूरा करते हैं। यह मंदिर मांडू के मांडवगढ़ किले में स्थित है। यह मंदिर महल के अंदर बना है, जो  एक गहरी खाई के पास स्थित तो है लेकिन इसके लिए आपको 60 सीढ़ियां नीचे उतरने पड़ती है।
    user_राहुल सेन मांडव
    राहुल सेन मांडव
    Barber Dhar, Madhya Pradesh•
    2 hrs ago
  • *💥बिड़वाल में हुई लाखों रुपए की चोरी,में 25 दिनों बाद भी पुलिस के हाथ खाली💥* 🖕 यहां से देखें पूरी रिपोर्ट 🖕 *💫सभी ग्रुपों में शेयर जरूर करें💫*
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    user_पत्रकार निलेश शर्मा गुरु
    पत्रकार निलेश शर्मा गुरु
    पत्रकार धार, धार, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • आदिवासी डांडिया मामा की प्रतिमा पर माल अर्पण किया एवं बड़ी रैली निकाली गई जिसमें हजारों की तादाद में आदिवासी अपने ढोल नगाड़े और हथियारों के साथ देश निकले डीजे की थाप पर डांस किया तरह-तरह की आदिवासी राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष में आज इंदौर में डांडिया मामा बिल की प्रतिमा पर हिमालय अर्पण किया और रंगारंग झांकियां निकाली गई जिसमें लाखों की तादाद में आदिवासी उपलब्ध से जो अपनी भेज दो ढोल तमाशा डीजे
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आदिवासी राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष में आज इंदौर में डांडिया मामा बिल की प्रतिमा पर हिमालय अर्पण किया और रंगारंग झांकियां निकाली गई जिसमें लाखों की तादाद में आदिवासी उपलब्ध से जो अपनी भेज दो ढोल तमाशा डीजे
    user_सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
    सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • depalpur. me. depalpur
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    depalpur.                          me.                
 depalpur
    user_Manish Parmar
    Manish Parmar
    देपालपुर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • Indian, me. .
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    Indian, me.                                           .
    user_Manish Parmar
    Manish Parmar
    देपालपुर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
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