प्रयागराज के बारा तहसील के ग्राम खैरहट कला के किसान अनुपम सिंह, जो कुंवर बहादुर सिंह के पुत्र हैं, ने पक्के मार्ग पर दबंगों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है। किसान का कहना है कि इस अतिक्रमण के कारण उन्हें अपने खेत तक पहुँचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अनुपम सिंह के अनुसार, उनकी अराजी संख्या 948, जिसका रकबा 1.3990 हेक्टेयर है, तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता पक्का मार्ग संख्या 446 है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ दबंगों ने इस मार्ग पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और उस पर जोताई-बुआई भी शुरू कर दी है। किसान ने पूर्व में 18 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी प्रयागराज और 22 जून 2026 को उपजिलाधिकारी बारा को प्रार्थना पत्र देकर इस समस्या से अवगत कराया था। किसान का यह भी दावा है कि मार्ग की अब तक चार बार लेखपाल और कानूनगो द्वारा नापी की जा चुकी है, लेकिन ग्राम प्रधान के दबाव में नापी के निशान (मिट्टी) नहीं लगाए जा रहे, जिसके चलते मार्ग खाली नहीं हो पा रहा है। अनुपम सिंह ने लेखपाल रुचकार मौर्य पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रुचकार मौर्य ने बिना स्थलीय निरीक्षण के ही गलत आख्या लगाकर मार्ग को 'कुंस्थानी' (स्थानीय) दिखा दिया। उन्होंने यह भी बताया कि जिलाधिकारी प्रयागराज ने 13 अप्रैल 2026 को मार्ग खाली कराने का आदेश दिया था, लेकिन तहसीलदार बारा ने 18 मई 2026 तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की। एसडीओ बारा को भी प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। किसान अनुपम सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि पक्का मार्ग संख्या 446 की पुनः नापी कराकर अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए, दोषी लेखपाल पर उचित कार्रवाई की जाए, और ग्राम प्रधान को मार्ग पर मिट्टी लगवाने का आदेश दिया जाए, ताकि उन्हें अपनी खेती करने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। अधिकारियों के आदेश के बावजूद फिलहाल किसान को राहत नहीं मिली है, और अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कोई ठोस कार्रवाई करता है।
प्रयागराज के बारा तहसील के ग्राम खैरहट कला के किसान अनुपम सिंह, जो कुंवर बहादुर सिंह के पुत्र हैं, ने पक्के मार्ग पर दबंगों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है। किसान का कहना है कि इस अतिक्रमण के कारण उन्हें अपने खेत तक पहुँचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अनुपम सिंह के अनुसार, उनकी अराजी संख्या 948, जिसका रकबा 1.3990 हेक्टेयर है, तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता पक्का मार्ग संख्या 446 है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ दबंगों ने इस मार्ग पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और उस पर जोताई-बुआई भी शुरू कर दी है। किसान ने पूर्व में 18 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी प्रयागराज और 22 जून 2026 को उपजिलाधिकारी बारा को प्रार्थना पत्र देकर इस समस्या से अवगत कराया था। किसान का यह भी दावा है कि मार्ग की अब तक चार बार लेखपाल और कानूनगो द्वारा नापी की जा चुकी है, लेकिन ग्राम प्रधान के दबाव में नापी के निशान (मिट्टी) नहीं लगाए जा रहे, जिसके चलते मार्ग खाली नहीं हो पा रहा है। अनुपम सिंह ने लेखपाल रुचकार मौर्य पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रुचकार मौर्य ने बिना स्थलीय निरीक्षण के ही गलत आख्या लगाकर मार्ग को 'कुंस्थानी' (स्थानीय) दिखा दिया। उन्होंने यह भी बताया कि जिलाधिकारी प्रयागराज ने 13 अप्रैल 2026 को मार्ग खाली कराने का आदेश दिया था, लेकिन तहसीलदार बारा ने 18 मई 2026 तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की। एसडीओ बारा को भी प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। किसान अनुपम सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि पक्का मार्ग संख्या 446 की पुनः नापी कराकर अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए, दोषी लेखपाल पर उचित कार्रवाई की जाए, और ग्राम प्रधान को मार्ग पर मिट्टी लगवाने का आदेश दिया जाए, ताकि उन्हें अपनी खेती करने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। अधिकारियों के आदेश के बावजूद फिलहाल किसान को राहत नहीं मिली है, और अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कोई ठोस कार्रवाई करता है।
- लखनऊ में हुए कोचिंग अग्निकांड के बाद देशभर में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की जाँच शुरू हो गई है। प्रशासन द्वारा की जा रही इस जाँच के तहत मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने 23 संस्थानों को सील कर दिया है, जिनमें 18 कोचिंग-लाइब्रेरी के साथ-साथ 5 होटल, रेस्टोरेंट और ऑफिस भी शामिल हैं।1
- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मोहर्रम को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है, जहाँ एक मंदिर को कपड़े से ढके जाने के विरोध में संयुक्त हिंदू मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताते हुए मंदिर पर लगाए गए कपड़े को हटा दिया। यह नया विवाद तब सामने आया है जब इससे पहले मोहर्रम का जुलूस हिंदू मंदिरों के सामने से निकलने को लेकर हिंदू संगठनों द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी। हिंदू संगठनों का स्पष्ट कहना है कि मंदिर को ढकना उचित नहीं है, और उन्होंने अपनी इस आपत्ति से प्रशासन को भी अवगत करा दिया है।1
- प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में प्रेम प्रसंग के चलते हुए एक ट्रिपल हत्याकांड के बाद, अब इस मामले से जुड़ी लड़की का बयान सामने आ गया है।1
- प्रयागराज के बारा तहसील के ग्राम खैरहट कला के किसान अनुपम सिंह, जो कुंवर बहादुर सिंह के पुत्र हैं, ने पक्के मार्ग पर दबंगों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है। किसान का कहना है कि इस अतिक्रमण के कारण उन्हें अपने खेत तक पहुँचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अनुपम सिंह के अनुसार, उनकी अराजी संख्या 948, जिसका रकबा 1.3990 हेक्टेयर है, तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता पक्का मार्ग संख्या 446 है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ दबंगों ने इस मार्ग पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और उस पर जोताई-बुआई भी शुरू कर दी है। किसान ने पूर्व में 18 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी प्रयागराज और 22 जून 2026 को उपजिलाधिकारी बारा को प्रार्थना पत्र देकर इस समस्या से अवगत कराया था। किसान का यह भी दावा है कि मार्ग की अब तक चार बार लेखपाल और कानूनगो द्वारा नापी की जा चुकी है, लेकिन ग्राम प्रधान के दबाव में नापी के निशान (मिट्टी) नहीं लगाए जा रहे, जिसके चलते मार्ग खाली नहीं हो पा रहा है। अनुपम सिंह ने लेखपाल रुचकार मौर्य पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रुचकार मौर्य ने बिना स्थलीय निरीक्षण के ही गलत आख्या लगाकर मार्ग को 'कुंस्थानी' (स्थानीय) दिखा दिया। उन्होंने यह भी बताया कि जिलाधिकारी प्रयागराज ने 13 अप्रैल 2026 को मार्ग खाली कराने का आदेश दिया था, लेकिन तहसीलदार बारा ने 18 मई 2026 तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की। एसडीओ बारा को भी प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। किसान अनुपम सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि पक्का मार्ग संख्या 446 की पुनः नापी कराकर अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए, दोषी लेखपाल पर उचित कार्रवाई की जाए, और ग्राम प्रधान को मार्ग पर मिट्टी लगवाने का आदेश दिया जाए, ताकि उन्हें अपनी खेती करने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। अधिकारियों के आदेश के बावजूद फिलहाल किसान को राहत नहीं मिली है, और अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कोई ठोस कार्रवाई करता है।1
- 7 मोहर्रम के अवसर पर पानदरीबा में दुलदुल निकाला गया। इस दौरान दादूपुर के लोगों ने मातम मनाया।1
- प्रयागराज में जोनल अधिकारी सूरज कुमार पटेल के नेतृत्व में जोन-04, उपजोन-4ए के अंतर्गत अवैध प्लाटिंग और निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इस अभियान के तहत, मवझ्या नैनी, प्रयागराज में कुलदीप महरा, बब्लू पाण्डेय, रत्नेश सिंह और रंजन पाण्डेय व अन्य द्वारा लगभग 04 बीघा में की गई अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया गया। इसी क्रम में, मवइया ओमेक्स के पास नैनी, प्रयागराज में सुनील शुक्ला व अन्य द्वारा लगभग 02 बीघा में की गई अवैध प्लाटिंग पर भी बुलडोजर चलाया गया। यह कार्रवाई अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) द्वारा की गई है।2
- प्रयागराज के यमुनापार स्थित शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के कपारी गाँव में सड़क किनारे एक युवक का शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मृतक युवक शंकरगढ़ के रानीगंज का निवासी बताया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब मृतक युवक की पूरी शिनाख्त करने और उसकी मौत के पीछे की असली वजह का पता लगाने में जुटी हुई है। यह हादसा है, हत्या है या कोई गहरी साजिश, पुलिस इन सभी संभावनाओं की पड़ताल कर रही है। इस घटना के बाद से कपारी और रानीगंज के निवासियों में हड़कंप के साथ-साथ मातम का माहौल भी व्याप्त है। पुलिस के अनुसार, मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और गहन पुलिस तफ्तीश के बाद ही साफ हो पाएगी।1
- प्रयागराज में जिला कांग्रेस कमेटी यमुनापार और शहर कांग्रेस कमेटी ने आज जिला अध्यक्ष अशोक सिंह पटेल के नेतृत्व में संयुक्त रूप से जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने श्री राम मंदिर चंदा चोरी मामले में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर एकत्र होकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन भी प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए, जिला अध्यक्ष अशोक सिंह पटेल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि योगी सरकार द्वारा बिना एफआईआर दर्ज कराए सीधे एसआईटी (SIT) जांच का आदेश देना असल दोषियों को बचाने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आस्था के नाम पर हुए इस कथित घोटाले ने करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, इसलिए इसकी उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच होना बेहद जरूरी है। इस विरोध प्रदर्शन में हरिकेश तिवारी, सुशील तिवारी, डॉ. राधेश्याम यादव, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी बारा मंजू संत, अवनीश कोल, बृजेश गौतम सहित भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई की मांग की।1