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लातेहार उपायुक्त ने प्रखंड कार्यालय एवं मंडल कारा का किया औचक निरीक्षण लातेहार उपायुक्त ने मंडल कारा एवं प्रखंड कार्यालय का किया औचक निरीक्षण।
Nihit Kumar
लातेहार उपायुक्त ने प्रखंड कार्यालय एवं मंडल कारा का किया औचक निरीक्षण लातेहार उपायुक्त ने मंडल कारा एवं प्रखंड कार्यालय का किया औचक निरीक्षण।
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- महुआडांड़ प्रखंड में जेएसएलपीएस के तहत धान खरीद प्रक्रिया अब खुले घोटाले की शक्ल लेती दिख रही है। सरकारी नियमों को दरकिनार कर जिस तरह से किसानों की जगह बाजार से धान खरीद कर फाइलें भरी गईं, उसने पूरे सिस्टम की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।सूत्रों के मुताबिक, जिले से 700 टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन हकीकत चौंकाने वाली है — जमीनी स्तर पर महज 50 से 55 टन धान की खरीद हुई। और सबसे गंभीर आरोप यह कि यह खरीद किसानों से नहीं, बल्कि बाजार से की गई। यानी योजना किसानों के लिए थी, लेकिन फायदा कहीं और पहुंच गया।ग्रामीणों का कहना है कि कम खरीद को छुपाने के लिए रजिस्टर में आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज किया गया। सीधे शब्दों में कहें तो कागजों में “रिकॉर्ड खरीद”, जमीनी हकीकत में “फर्जीवाड़ा”। यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।मामला यहीं खत्म नहीं होता। बीज और खाद वितरण में भी भारी गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सामान प्रखंड तक तो पहुंचा, लेकिन किसानों तक नहीं। आरोप है कि विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से यह सामग्री बाजारों में बेच दी गई, जिससे असली लाभार्थी किसान वंचित रह गए।किसानों में गुस्सा साफ है। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार योजनाओं के जरिए उन्हें सशक्त बनाने की बात करती है, दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर उन्हीं योजनाओं को लूट का जरिया बना दिया गया है।ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।1
- 1 से 15 मई तक पानी कनेक्शन निःशुल्क देने का निर्णय लातेहार। भीषण गर्मी और बढ़ते जल संकट को देखते हुए नगर क्षेत्र के लोगों को राहत देने के उद्देश्य से नगर पंचायत अध्यक्ष महेश सिंह की अध्यक्षता में वार्ड पार्षदों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आगामी 1 मई से 15 मई तक नगर पंचायत क्षेत्र के इच्छुक परिवारों को पानी का नया कनेक्शन निःशुल्क प्रदान किया जाएगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य उन घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जहां अब तक पानी की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। बैठक के दौरान अध्यक्ष महेश सिंह ने कहा कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कई वार्डों से पेयजल संकट की शिकायतें मिल रही थीं, जिसे गंभीरता से लेते हुए यह जनहितकारी निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में जो भी परिवार पानी का कनेक्शन लेना चाहेंगे, उनसे किसी प्रकार का कनेक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। केवल आवश्यक दस्तावेज जमा कर आवेदन करना होगा। मौके पर नगर उपाध्यक्ष राजीव रंजन कुमार एवं सभी वार्ड के वार्ड सदस्य मौजूद रहे। वार्ड पार्षदों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी आवश्यकता होती है, ऐसे में यह निर्णय आम जनता के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि संबंधित वार्डों में इस योजना की जानकारी व्यापक रूप से प्रचारित की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। नगर पंचायत प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि के भीतर आवेदन कर योजना का लाभ उठाएं। साथ ही यह भी कहा गया कि पेयजल का उपयोग आवश्यकतानुसार और जिम्मेदारी के साथ करें, ताकि सभी को पर्याप्त पानी मिल सके। इस निर्णय से नगर क्षेत्र में जल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है।3
- लातेहार ब्लड बैंक में जालिम गांव निवासी जरूरतमंद महिला अनारी देवी को एबी पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता होने पर मंगलवार को सीआरपीएफ 11वीं बटालियन के जवान लवकुश ने कमांडेंट के निर्देश पर रक्तदान किया। चार दिन से रक्त की तलाश के बाद यह मदद मिली। जवान ने लोगों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए इसे सबसे बड़ा पुण्य कार्य बताया। परिजनों ने इस सराहनीय पहल पर आभार जताया।1
- Post by Shamsher Alam1
- Post by MUKESH NATH3
- रांची जिलेके के चाहो आस पास हल्के बारिश के साथ पत्थर भी गिरा1
- Post by Sahdew oraon2
- *सरकार चाहे महुआडांड़ से तो अच्छी खासी अपने राजस्व में वृद्धि एवम अपनी कामयाबी प्राप्त कर सकती है* *महुआडांड़ की कलम से हम और आप सभी*..... महुआडांड़ (लातेहार)महुआडांड़ प्रखंड में एक तरफ बेरोजगारी चरम पर है, वहीं दूसरी ओर सरकारी जमीनें वर्षों से खाली पड़ी धूल खा रही हैं। यह विरोधाभास अब स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों के बीच आक्रोश का बड़ा कारण बनता जा रहा है। सवाल साफ है—जब संसाधन मौजूद हैं, तो रोजगार क्यों नहीं?स्थानीय विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि यदि सरकार वास्तव में विकास और राजस्व बढ़ाने को लेकर गंभीर है, तो उसे महुआडांड़ की सरकारी जमीनों पर तत्काल व्यावसायिक दुकान (रूम) निर्माण की योजना लागू करनी चाहिए। उनका मानना है कि यह एक ऐसा मॉडल है, जो “एक तीर से दो निशान” साबित हो सकता है—सरकार को नियमित आय और आम जनता को स्थायी रोजगार। *बस स्टैंड बना उदाहरण, बाकी जगह क्यों उपेक्षित?* महुआडांड़ बस स्टैंड इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां करीब 150 दुकानें बनाकर सरकार न सिर्फ अच्छा-खासा राजस्व कमा रही है, बल्कि सैकड़ों परिवारों का रोजगार भी सुनिश्चित हुआ है।फिर सवाल उठता है—जब यह मॉडल सफल है, तो इसे अन्य स्थानों पर लागू करने में आखिर देरी क्यों? *चिन्हित स्थान, फिर भी कार्रवाई शून्य* स्थानीय लोगों ने कई अहम सरकारी परिसरों की पहचान की है, जहां बड़ी संख्या में दुकानें बनाई जा सकती हैं: *ब्लॉक परिसर (रांची रोड किनारे): लगभग 40 दुकानें* *आईआईआरबी कैंप (डाल्टनगंज रोड की ओर): करीब 100 दुकानें* *पोस्ट ऑफिस परिसर: लगभग 15 दुकानें* *महुआडांड़ अस्पताल परिसर: करीब 50 दुकानें* इन सभी जगहों पर दुकान निर्माण की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। “ *सरकार चाहे तो बदल सकती है तस्वीर* ” विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन स्थानों पर योजनाबद्ध तरीके से दुकानें बनाकर आम लोगों को नाममात्र शुल्क पर आवंटित किया जाए, तो न सिर्फ बेरोजगारी कम होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी जबरदस्त गति मिलेगी। व्यापार बढ़ेगा, बाजार विकसित होंगे और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। *डीसी से अपील* स्थानीय लोगों ने लातेहार उपायुक्त (डीसी) से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अब भी पहल नहीं हुई, तो यह एक बड़ा मौका गंवाने जैसा होगा। *नीति नहीं, नीयत की जरूरत”* महुआडांड़ में विकास का रास्ता कहीं बाहर नहीं, बल्कि यहीं मौजूद सरकारी जमीनों में छिपा है। जरूरत है तो सिर्फ मजबूत इच्छाशक्ति और सही नीति की।अगर सरकार इस मॉडल को अपनाती है, तो महुआडांड़ न सिर्फ लातेहार, बल्कि पूरे राज्य के लिए “रोजगार और राजस्व” का रोल मॉडल बन सकता है।1