सीधी जिले में रेत की अवैध निकासी पर गरमाई सियासत, शिवसेना नेता का बड़ा बयान. शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने रेत की अवैध निकासी को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं को रोजगार देने में सक्षम नहीं है, तो रेत खनन को केवल “अपराध” के रूप में देखना उचित नहीं है। विवेक पांडे ने सोन नदी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वहां अवैध रेत खनन हो रहा है, तो यह बढ़ती बेरोजगारी का संकेत है। उनके अनुसार, “युवा रोजगार के अभाव में ऐसे कार्यों की ओर मजबूर हो रहे हैं।” उन्होंने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में घड़ियाल संरक्षित हैं, वहां प्रतिबंध जारी रहना चाहिए, लेकिन बाकी क्षेत्रों में रेत निकासी की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि खदानों को जल्द स्वीकृति दी जाए, ताकि स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिल सके। पांडे ने सीधी जिला का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यहां से बड़े पैमाने पर रेत अन्य राज्यों में भेजी जाती है, लेकिन स्थानीय जनता को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने यह भी कहा कि रेत खनन को “जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा” बना दिया गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में रेत खनन और अवैध निकासी को लेकर लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक बहस जारी
सीधी जिले में रेत की अवैध निकासी पर गरमाई सियासत, शिवसेना नेता का बड़ा बयान. शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने रेत की अवैध निकासी को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं को रोजगार देने में सक्षम नहीं है, तो रेत खनन को केवल “अपराध” के रूप में देखना उचित नहीं है। विवेक पांडे ने सोन नदी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वहां अवैध रेत खनन हो रहा है, तो यह बढ़ती बेरोजगारी का संकेत है। उनके अनुसार, “युवा रोजगार के अभाव में ऐसे कार्यों की ओर मजबूर हो रहे हैं।” उन्होंने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में घड़ियाल संरक्षित हैं, वहां प्रतिबंध जारी रहना चाहिए, लेकिन बाकी क्षेत्रों में रेत निकासी की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि खदानों को जल्द स्वीकृति दी जाए, ताकि स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिल सके। पांडे ने सीधी जिला का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यहां से बड़े पैमाने पर रेत अन्य राज्यों में भेजी जाती है, लेकिन स्थानीय जनता को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने यह भी कहा कि रेत खनन को “जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा” बना दिया गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में रेत खनन और अवैध निकासी को लेकर लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक बहस जारी
- जिला कलेक्टर जमीन में उतरकर जमीनी किसानों के साथ जमीन में बैठकर लोगों की सुनी समस्याएं केवाईसी को लेकर भ्रष्ट अधिकारियों को लगाई फटकार1
- जब सिस्टम सो जाता है, तो एक कड़क अधिकारी को मैदान में उतरना ही पड़ता है। सीधी जिला कलेक्टर ने आज सादगी और सख्ती की मिसाल पेश की। जमीनी हकीकत: कलेक्टर साहब ने दफ्तर के एसी (AC) को छोड़कर तपती जमीन पर किसानों के बीच बैठना बेहतर समझा। KYC पर एक्शन: किसानों को केवाईसी के लिए चक्कर कटवाने वाले कर्मचारियों को बीच मैदान में फटकार लगाई। कलेक्टर ने साफ़ कर दिया— 'जनता परेशान हुई, तो कार्रवाई तय है!' सीधा संदेश: आम आदमी की सुनवाई में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। #Sidhi #Collector #Action #PublicService #Farmers #MadhyaPradesh #VindhyaNews1
- पालम थाने में वकीलों का जोरदार हंगामा जमकर हुई नारेबाजी पुलिस कर्मियों पर वकील के साथ हाथापाई करने का आरोप1
- हेयरकट करने के बाद, सिर और गर्दन के पीछे के हिस्से की मालिश करते समय, मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने वाली एक नस संकुचित हो गई, जिसके परिणामस्वरूप स्ट्रोक हुआ और अंततः मृत्यु हो गई……। कटिंग कराते समय यदि नाई इस तरह की हरकत करता है, तो इससे सावधान रहे।1
- मऊगंज/ दिनांक 02 अप्रैल 2026 को विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल जिला मऊगंज द्वारा बजरंग दल के आराध्य देव हनुमान जी प्राकट्याेत्सव बिछरहटा प्रखंड के ग्राम बरांव में धूम से मनाया गया सुन्दर काण्ड उम्परांत हनुमान चालीसा प्रसाद वितरण हुआ कार्यक्रम में जिला एवं प्रखण्ड खंड के कार्यकर्ता एवं सनातनी जन उपस्थित रहे...4
- Post by Durgesh Kumar Gupta1
- NTPC मटवई गेट पर मजदूरों का गुस्सा फूटा, 12 घंटे काम–8 घंटे का वेतन! गेट किया लॉक सिंगरौली में NTPC Limited के मटवई गेट पर मजदूरों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। बड़ी संख्या में वर्करों ने एकजुट होकर गेट को लॉक कर दिया और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मजदूरों का आरोप है कि उनसे रोजाना 12 घंटे तक काम कराया जाता है, लेकिन भुगतान सिर्फ 8 घंटे का ही दिया जाता है—वह भी पूरा नहीं। उनका कहना है कि यह सीधे तौर पर श्रम कानूनों का उल्लंघन है और लंबे समय से उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे वर्करों ने साफ मांग रखी है कि उन्हें केवल 8 घंटे की ड्यूटी करवाई जाए। यदि उससे अधिक काम लिया जाता है तो ओवरटाइम (OT) का भुगतान दिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में मिलने वाला वेतन बेहद कम है, जबकि सरकार की गाइडलाइन के अनुसार उन्हें उचित और पूरा भुगतान मिलना चाहिए। मजदूरों ने NTPC अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर यह पूरा खेल चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। आक्रोशित मजदूरों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो NTPC के अधिकारी भी गेट के अंदर-बाहर नहीं आ-जा पाएंगे। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अब सबकी नजर प्रशासन व NTPC प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।1
- शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने रेत की अवैध निकासी को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं को रोजगार देने में सक्षम नहीं है, तो रेत खनन को केवल “अपराध” के रूप में देखना उचित नहीं है। विवेक पांडे ने सोन नदी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वहां अवैध रेत खनन हो रहा है, तो यह बढ़ती बेरोजगारी का संकेत है। उनके अनुसार, “युवा रोजगार के अभाव में ऐसे कार्यों की ओर मजबूर हो रहे हैं।” उन्होंने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में घड़ियाल संरक्षित हैं, वहां प्रतिबंध जारी रहना चाहिए, लेकिन बाकी क्षेत्रों में रेत निकासी की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि खदानों को जल्द स्वीकृति दी जाए, ताकि स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिल सके। पांडे ने सीधी जिला का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यहां से बड़े पैमाने पर रेत अन्य राज्यों में भेजी जाती है, लेकिन स्थानीय जनता को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने यह भी कहा कि रेत खनन को “जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा” बना दिया गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में रेत खनन और अवैध निकासी को लेकर लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक बहस जारी1