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masurpur Thane peace commity ki meeting lekar Aman Shanti banae rakhte Hain 🌹

2 hrs ago
user_Talib Khan
Talib Khan
विक्रेता अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
2 hrs ago

masurpur Thane peace commity ki meeting lekar Aman Shanti banae rakhte Hain 🌹

More news from उत्तराखंड and nearby areas
  • Post by Talib Khan
    1
    Post by Talib Khan
    user_Talib Khan
    Talib Khan
    विक्रेता अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    2 hrs ago
  • अल्मोड़ा। जनपद में रविवार को लोकपर्व फूलदेई उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चैत्र माह की संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह विशेष लोकपर्व प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम का प्रतीक माना जाता है। बच्चों के बीच इसकी विशेष लोकप्रियता के कारण इसे बालपर्व भी कहा जाता है। फूलों की खुशबू से महकता यह पर्व चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है, जो प्रायः मार्च के मध्य में पड़ता है। इस वर्ष फूलदेई का पर्व रविवार, 15 मार्च को मनाया गया। इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और इसका संबंध उत्तराखंड के ग्रामीण समाज में सामूहिकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और आपसी सद्भाव से जुड़ा है। इस दिन छोटे बच्चे सुबह जल्दी उठकर बगीचों और जंगलों से रंग-बिरंगे फूल तोड़कर लाते हैं और उन्हें गांव व कस्बों के घरों की दहलीज पर सजाते हैं। यह परंपरा घर-परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना से जुड़ी मानी जाती है। बच्चे घर-घर जाकर 'फूलदेई, छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार' गाकर आशीर्वाद मांगते हैं, जिसका अर्थ है कि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। बदले में उन्हें चावल, गुड़, पैसे या अन्य उपहार दिए जाते हैं। रात्रि में बच्चों द्वारा एकत्रित चावल और गुड़ से पारंपरिक पकवान ‘सेई’ बनाया जाता है। फूलदेई पर्व की जड़ें उत्तराखंड की कृषि परंपराओं से भी जुड़ी हुई हैं। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है, जब पेड़-पौधे नई कोंपलों और फूलों से लद जाते हैं। घरों की चौखट पर फूल सजाने का अर्थ प्रकृति का स्वागत करना और परिवार की खुशहाली की कामना करना होता है। रविवार सुबह ठंड के मौसम के साथ हल्की बारिश के छींटे भी पड़े। इसके बावजूद अल्मोड़ा में फूलदेई के दिन बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे एक घर से दूसरे घर जाकर दहलीज पर फूल डालते हुए 'फूलदेई, छम्मा देई' गाते नजर आए और पूरे क्षेत्र में पर्व का उल्लास दिखाई दिया।
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    अल्मोड़ा। जनपद में रविवार को लोकपर्व फूलदेई उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चैत्र माह की संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह विशेष लोकपर्व प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम का प्रतीक माना जाता है। बच्चों के बीच इसकी विशेष लोकप्रियता के कारण इसे बालपर्व भी कहा जाता है। फूलों की खुशबू से महकता यह पर्व चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है, जो प्रायः मार्च के मध्य में पड़ता है। इस वर्ष फूलदेई का पर्व रविवार, 15 मार्च को मनाया गया। इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और इसका संबंध उत्तराखंड के ग्रामीण समाज में सामूहिकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और आपसी सद्भाव से जुड़ा है। इस दिन छोटे बच्चे सुबह जल्दी उठकर बगीचों और जंगलों से रंग-बिरंगे फूल तोड़कर लाते हैं और उन्हें गांव व कस्बों के घरों की दहलीज पर सजाते हैं। यह परंपरा घर-परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना से जुड़ी मानी जाती है। बच्चे घर-घर जाकर 'फूलदेई, छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार' गाकर आशीर्वाद मांगते हैं, जिसका अर्थ है कि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। बदले में उन्हें चावल, गुड़, पैसे या अन्य उपहार दिए जाते हैं। रात्रि में बच्चों द्वारा एकत्रित चावल और गुड़ से पारंपरिक पकवान ‘सेई’ बनाया जाता है। फूलदेई पर्व की जड़ें उत्तराखंड की कृषि परंपराओं से भी जुड़ी हुई हैं। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है, जब पेड़-पौधे नई कोंपलों और फूलों से लद जाते हैं। घरों की चौखट पर फूल सजाने का अर्थ प्रकृति का स्वागत करना और परिवार की खुशहाली की कामना करना होता है। रविवार सुबह ठंड के मौसम के साथ हल्की बारिश के छींटे भी पड़े। इसके बावजूद अल्मोड़ा में फूलदेई के दिन बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे एक घर से दूसरे घर जाकर दहलीज पर फूल डालते हुए 'फूलदेई, छम्मा देई' गाते नजर आए और पूरे क्षेत्र में पर्व का उल्लास दिखाई दिया।
    user_Vinod Joshi
    Vinod Joshi
    Local News Reporter अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    22 hrs ago
  • हिन्दू नव वर्ष और चैत्र मास आगमन के अवसर पर नगर पालिका चिलियानौला की ओर से रविवार की देर शाम यहां चौमूथान मंदिर परिसर के निर्माणाधीन पार्क में झोड़ा गायन का आयोजन हुआ। पारम्परिक संस्कृति को बचाने और युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से झोड़ा गायन का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। पालिकाध्यक्ष अरुण रावत ने कहा कि भविष्य में इस आयोजन को वृहद रूप दिया जाएगा। सभासद सुंदर कुवार्बी ने बताया कि शार्ट नोटिस में महिलाएं पहुंच गई यह प्राचीन परम्परा को लेकर उनके उत्साह को दर्शाता है। यहां व्यापार मंडल अध्यक्ष कमलेश बोरा, ललित बिष्ट, हरीश सिंह देव, धर्मेंद्र सिंह अधिकारी सहित पालिका कि महिलाओं ने सहयोग किया।
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    हिन्दू नव वर्ष और चैत्र मास आगमन के अवसर पर नगर पालिका चिलियानौला की ओर से रविवार की देर शाम यहां चौमूथान मंदिर परिसर के निर्माणाधीन पार्क में झोड़ा गायन का आयोजन हुआ। पारम्परिक संस्कृति को बचाने और युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से झोड़ा गायन का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। पालिकाध्यक्ष अरुण रावत ने कहा कि भविष्य में इस आयोजन को वृहद रूप दिया जाएगा। सभासद सुंदर कुवार्बी ने बताया कि शार्ट नोटिस में महिलाएं पहुंच गई यह प्राचीन परम्परा को लेकर उनके उत्साह को दर्शाता है। यहां व्यापार मंडल अध्यक्ष कमलेश बोरा, ललित बिष्ट, हरीश सिंह देव, धर्मेंद्र सिंह अधिकारी सहित पालिका कि महिलाओं ने सहयोग किया।
    user_Gopal Bisht
    Gopal Bisht
    अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    22 hrs ago
  • विडियो देखें - नेताप्रतिपक्ष यशपाल आर्य (बाजपुर विधायक) उत्तराखण्ड के विकास की सबसे बड़ी चुनौती पलायन है। पहाड़ के हजारों गांव खाली हो चुके हैं और कई गांव ऐसे हैं जो पूरी तरह निर्जन हो गए हैं। यदि सरकार वास्तव में राज्य के संतुलित विकास के प्रति गंभीर होती, तो इस बजट में - पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार सृजन, - स्थानीय कृषि और बागवानी को बढ़ावा, - ग्रामीण पर्यटन का विकास, - छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाता, लेकिन इस बजट में इन मुद्दों पर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देती। बजट भाषण में गांवों के विकास की बड़ी-बड़ी बातें की गई हैं। यह कहा गया है कि गांवों को मजबूत करके उत्तराखण्ड को मजबूत बनाया जा रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है लेकिन यदि हम जमीनी सच्चाई को देखें तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है। वास्तविकता यह है कि विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों के गांव शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लगातार खाली होते जा रहे हैं। उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी चुनौती पलायन है। वर्षों से यह विषय इस सदन में उठता रहा है कि पहाड़ के गांव तेजी से खाली हो रहे हैं और लोगों को मजबूरी में अपने गांव छोड़कर शहरों की ओर जाना पड़ रहा है। आज स्थिति यह है कि - पहाड़ के कई गांव निर्जन होते जा रहे हैं, - हजारों गांवों में आबादी बहुत कम रह गई है, - कई गांव ऐसे भी हैं जहां अब स्थायी रूप से लोग रह ही नहीं गए हैं। यह केवल एक सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि यह राज्य के संतुलित विकास के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।
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    विडियो देखें - नेताप्रतिपक्ष यशपाल आर्य (बाजपुर विधायक)
उत्तराखण्ड के विकास की सबसे बड़ी चुनौती पलायन है। पहाड़ के हजारों गांव खाली हो चुके हैं और कई गांव ऐसे हैं जो पूरी तरह निर्जन हो गए हैं। यदि सरकार वास्तव में राज्य के संतुलित विकास के प्रति गंभीर होती, तो इस बजट में
- पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार सृजन,
- स्थानीय कृषि और बागवानी को बढ़ावा,
- ग्रामीण पर्यटन का विकास,
- छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन
जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाता, लेकिन इस बजट में इन मुद्दों पर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देती।
बजट भाषण में गांवों के विकास की बड़ी-बड़ी बातें की गई हैं। यह कहा गया है कि गांवों को मजबूत करके उत्तराखण्ड को मजबूत बनाया जा रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है लेकिन यदि हम जमीनी सच्चाई को देखें तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है। वास्तविकता यह है कि विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों के गांव शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लगातार खाली होते जा रहे हैं।
उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी चुनौती पलायन है। वर्षों से यह विषय इस सदन में उठता रहा है कि पहाड़ के गांव तेजी से खाली हो रहे हैं और लोगों को मजबूरी में अपने गांव छोड़कर शहरों की ओर जाना पड़ रहा है।
आज स्थिति यह है कि
- पहाड़ के कई गांव निर्जन होते जा रहे हैं,
- हजारों गांवों में आबादी बहुत कम रह गई है,
- कई गांव ऐसे भी हैं जहां अब स्थायी रूप से लोग रह ही नहीं गए हैं।
यह केवल एक सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि यह राज्य के संतुलित विकास के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    Nainital, Uttarakhand•
    4 hrs ago
  • अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में ब्रह्मांड की अभी तक की जानकारी और मानव द्वारा विकसित तकनीकी को लेकर यूरोपीयन स्पेस एजेंसी ESA ने वीडियो जारी किया है। अंतरिक्ष में रुचि रखने वालों को इसे जरूर देखना चाहिए।
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    अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में ब्रह्मांड की अभी तक की जानकारी और मानव द्वारा विकसित तकनीकी को लेकर यूरोपीयन स्पेस एजेंसी ESA ने वीडियो जारी किया है। अंतरिक्ष में रुचि रखने वालों को इसे जरूर देखना चाहिए।
    user_NTL
    NTL
    Nainital, Uttarakhand•
    11 hrs ago
  • “गौ सेवा के पीछे छिपा आध्यात्मिक रहस्य: गौ धाम हल्दूचौड़
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    “गौ सेवा के पीछे छिपा आध्यात्मिक रहस्य: गौ धाम हल्दूचौड़
    user_शैल शक्ति
    शैल शक्ति
    लालकुआँ, नैनीताल, उत्तराखंड•
    2 hrs ago
  • चम्पावत:उपजिलाधिकारी ने किया गैस गोदाम का निरीक्षण* #thepublicmatter #champawat #lohaghat #uttrakhand #viralnewsupdate #latestnews
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    चम्पावत:उपजिलाधिकारी ने किया गैस गोदाम का निरीक्षण*
#thepublicmatter #champawat #lohaghat #uttrakhand #viralnewsupdate #latestnews
    user_The Public Matter
    The Public Matter
    पत्रकार चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    3 hrs ago
  • अल्मोड़ा। जनपद के सल्ट क्षेत्र में रविवार शाम एक वैगनार कार दुर्घटनाग्रस्त होकर खाई में गिर गई और पेड़ पर अटक गई। हादसे में वाहन सवार तीन लोग घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। जानकारी के अनुसार वाहन संख्या एचआर 26 ईएक्स 8497 लैणा डडरिया से सल्ट की ओर आ रहा था। इसी दौरान लैणा डडरिया के पास वाहन अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया और एक पेड़ पर अटक गया। हादसे में वाहन सवार तीन लोग घायल हो गए। घायलों में एक व्यक्ति की हालत ठीक बताई जा रही है, जबकि दो अन्य को चोटें आई हैं। घटना के बाद डायल 112 पुलिस जवानों ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को वाहन से बाहर निकाला और 108 एंबुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवायल भेजा, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। घायलों में पवन सिंह (26) पुत्र राम सिंह निवासी ग्राम सौलती हरड़ा भौनखाल, तल्ला सल्ट, अजय रावत (25) पुत्र देवेंद्र सिंह रावत निवासी स्याली लैणा डडरिया, सल्ट तथा कपिल सिंह (20) पुत्र जीवन सिंह निवासी ग्राम सौलती हरड़ा भौनखाल, तल्ला सल्ट शामिल हैं। बताया गया कि तीनों लैणा डडरिया से मौलेखाल बाजार सामान लेने जा रहे थे।
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    अल्मोड़ा। जनपद के सल्ट क्षेत्र में रविवार शाम एक वैगनार कार दुर्घटनाग्रस्त होकर खाई में गिर गई और पेड़ पर अटक गई। हादसे में वाहन सवार तीन लोग घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। 
जानकारी के अनुसार वाहन संख्या एचआर 26 ईएक्स 8497 लैणा डडरिया से सल्ट की ओर आ रहा था। इसी दौरान लैणा डडरिया के पास वाहन अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया और एक पेड़ पर अटक गया। हादसे में वाहन सवार तीन लोग घायल हो गए। घायलों में एक व्यक्ति की हालत ठीक बताई जा रही है, जबकि दो अन्य को चोटें आई हैं। घटना के बाद डायल 112 पुलिस जवानों ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को वाहन से बाहर निकाला और 108 एंबुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवायल भेजा, जहां उनका उपचार किया जा रहा है।
घायलों में पवन सिंह (26) पुत्र राम सिंह निवासी ग्राम सौलती हरड़ा भौनखाल, तल्ला सल्ट, अजय रावत (25) पुत्र देवेंद्र सिंह रावत निवासी स्याली लैणा डडरिया, सल्ट तथा कपिल सिंह (20) पुत्र जीवन सिंह निवासी ग्राम सौलती हरड़ा भौनखाल, तल्ला सल्ट शामिल हैं। बताया गया कि तीनों लैणा डडरिया से मौलेखाल बाजार सामान लेने जा रहे थे।
    user_Vinod Joshi
    Vinod Joshi
    Local News Reporter अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    22 hrs ago
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