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महोबा जिले में मोहर्रम पर्व को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। इसी क्रम में, पीस कमेटी की एक बैठक का आयोजन किया गया, जहाँ पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
महोबा जिले में मोहर्रम पर्व को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। इसी क्रम में, पीस कमेटी की एक बैठक का आयोजन किया गया, जहाँ पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
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- महोबा जिले में मोहर्रम पर्व को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। इसी क्रम में, पीस कमेटी की एक बैठक का आयोजन किया गया, जहाँ पर्व के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।1
- महोबा सदर कोतवाली क्षेत्र के दिसरापुर गांव में बीती रात जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच संघर्ष हो गया। बातों ही बातों में यह विवाद मारपीट में बदल गया, जिसमें एक पक्ष के पांच लोग घायल हो गए। इस दौरान दोनों पक्षों में जमकर लाठी-डंडे चले। घटना के संबंध में दोनों ही पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।1
- हमीरपुर जिले के राठ विकासखंड परिसर में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित जन कल्याण शिविर और स्वास्थ्य मेला पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ। प्रचार-प्रसार के अभाव के कारण न तो ग्रामीण और न ही कोई लाभार्थी शिविर में पहुंचे, जिसके परिणामस्वरूप खाली कुर्सियां, सूने स्टॉल और कुर्सी-टेबल पर सोते कर्मचारी ही शिविर की हकीकत बयां करते रहे। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस शिविर में दोपहर 12 बजे तक न तो अधिकारी पहुंचे और न ही जनता की उपस्थिति दर्ज की गई। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल वीरान पड़े थे। कुछ कर्मचारी कुर्सियों पर सोते दिखाई दिए, जबकि अन्य मोबाइल पर रील्स और गेम खेलकर समय बिताते रहे। कई स्थानों पर तो अधिकारी और कर्मचारी केवल सेल्फी और फोटो सेशन तक ही सीमित रहे। बताया जा रहा है कि लाखों की योजनाओं का प्रचार करने के उद्देश्य से लगाए गए इस मेले का खुद ही प्रचार नहीं किया गया, जिससे गांव-गांव तक मुनादी या सूचना न पहुंचने के कारण ग्रामीणों को शिविर की कोई जानकारी ही नहीं मिल पाई। नतीजतन, यह सरकारी मेला सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया। स्वास्थ्य विभाग का स्टॉल भी खाली पड़ा था, जहां डॉक्टर तक नदारद थे। लाभार्थियों के लिए लगाई गईं सैकड़ों कुर्सियां पूरे दिन खाली रहीं। अधिकारी दोपहर बाद पहुंचे, लेकिन तब तक माहौल इतना सन्नाटे भरा हो चुका था कि वे भी कुछ देर बैठकर लौट गए। सरकारी योजनाओं के पंपलेट और फॉर्म टेबल पर ही धूल फांकते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शिविर सिर्फ फोटो खिंचवाने और रिपोर्ट भेजने के लिए लगाया गया था, और एक ग्रामीण ने कहा कि “जब जनता को पता ही नहीं चलेगा तो आएगी कैसे? यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति है।” केंद्र सरकार की 12 साल की उपलब्धियां गिनाने वाला यह आयोजन खुद ही सवालों के घेरे में आ गया है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।1
- हमीरपुर के मौदहा क्षेत्र का उपरी गांव आजादी के 79 वर्ष बाद भी गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। करीब पांच हजार की आबादी वाले इस गांव में अधिकांश हैंडपंपों का पानी खारा है, जबकि पीने योग्य पानी केवल दो कुओं से ही मिल पाता है। इस वजह से ग्रामीणों को रोजाना दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर होना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन वर्ष पहले नमामि गंगे योजना के तहत पानी की टंकी स्थापित की गई थी और घर-घर नल कनेक्शन दिए गए थे, लेकिन इन नलों में पानी नहीं पहुंचता, बल्कि कई स्थानों पर सिर्फ हवा निकलती है। पेयजल की यह समस्या अब इतनी विकट हो चुकी है कि इसका असर सामाजिक जीवन पर भी पड़ने लगा है, जिसके चलते कई परिवार विवाह संबंध बनाने से भी कतरा रहे हैं। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए उपरी और शायर गांव के ग्रामीण उप जिलाधिकारी के पास पहुँचकर गुहार लगाई है। इस संबंध में, एडीएम नमामि गंगे ने स्वीकार किया है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जलापूर्ति की समस्या मौजूद है और उन्होंने इसकी जांच कर जल्द समाधान कराने का आश्वासन दिया है।1
- समाजवादी पार्टी के नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की, जिसमें उन्होंने केंद्र और प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकारों पर जमकर निशाना साधा।1
- छतरपुर जिले के बड़ामलहरा थाना क्षेत्र के ग्राम बरमा में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ जंगल में महुआ के पेड़ की डाल गिरने से एक 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान बरमा निवासी सुरेश सिंह घोषी (45 वर्ष), पिता दयासिंह के रूप में हुई है। यह घटना सुबह करीब 9 बजे की है, जब सुरेश सिंह गांव के पास जंगल में गए थे। इसी दौरान महुआ के पेड़ की एक बड़ी डाल अचानक उन पर गिर गई, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। पास मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल घटना की जानकारी सुरेश सिंह के परिजनों को दी। परिजन मौके पर पहुंचे और घायल सुरेश सिंह को एक निजी वाहन से बड़ामलहरा अस्पताल ले गए। वहाँ प्राथमिक उपचार के बाद, हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें छतरपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों ने जांच के बाद सुरेश सिंह को मृत घोषित कर दिया। मृतक का पोस्टमार्टम 15 जून को दोपहर करीब 4:30 बजे जिला अस्पताल में कराया गया। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर आगे की जांच शुरू कर दी है।1
- लखनऊ में सहारा गंज मॉल के पास एक तेज रफ्तार गाड़ी ने कहर बरपाया। इस घटना में एक मोटरसाइकिल इस गाड़ी की चपेट में आ गई।1
- छतरपुर जिला अस्पताल में एक डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जहाँ एक बुजुर्ग मरीज के परिजनों ने दावा किया है कि प्रोस्टेट ऑपरेशन के लिए उनसे 12 हजार रुपये लिए गए थे, लेकिन ऑपरेशन सफल नहीं हुआ। मरीज के पुत्र अमर अहिरवार का आरोप है कि करीब एक माह पहले डॉ. सना सिद्दकी (सना खान) ने उनके पिता का ऑपरेशन किया था। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद भी मरीज की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उन्हें बाद में ग्वालियर रेफर करना पड़ा। परिजनों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने ऑपरेशन में खर्च हुए 12 हजार रुपये वापस मांगे, तो अस्पताल परिसर के बाहर डॉक्टर और उनके बीच तीखी बहस हुई। इसी दौरान परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने उन्हें वाहन से डराने या गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। हालांकि, इन आरोपों पर डॉक्टर का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। यह मामला फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है, और यदि परिजन लिखित शिकायत करते हैं तो संबंधित विभाग द्वारा इसकी जांच की जा सकती है। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।1