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उत्तर प्रदेश का विकास! मुस्कुराइए कि बाढ़ यहां है प्रोटोकॉल कहां है!
Rajkumar mehra press reporter
उत्तर प्रदेश का विकास! मुस्कुराइए कि बाढ़ यहां है प्रोटोकॉल कहां है!
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- उत्तर प्रदेश का विकास! मुस्कुराइए कि बाढ़ यहां है प्रोटोकॉल कहां है!1
- तेज हवा और बारिश का कहर: तिब्बती मार्केट के पास दुकानों पर गिरा पेड़, टला बड़ा हादसा स्थान - देहरादून रिपोर्ट - दीपक पंवार देहरादून। राजधानी देहरादून में तेज हवा और बारिश के चलते तिब्बती मार्केट के पास एक बड़ा पेड़ अचानक दुकानों के ऊपर जा गिरा। पेड़ का एक हिस्सा सड़क पर भी गिरने से मार्ग प्रभावित हो गया। गनीमत रही कि हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। पेड़ पूरी तरह से दुकानों के ऊपर गिरा, जिससे दुकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं आधा पेड़ सड़क पर गिरने से आवाजाही भी प्रभावित हुई। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। पेड़ को हटाने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि सड़क पर यातायात सुचारू हो सके।1
- जय जवान जय किसान माननीय उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद श्री भगवती प्रसाद त्रिवेदी को सचिव के पद से हटा दिया गया, हालांकि उन्हें जिला अल्पसंख्यक अधिकारी के पद से नहीं हटाया गया। इसके पश्चात बरकत अली को सचिव के पद पर नियुक्त किया गया। लेकिन बरकत अली की नियुक्ति को लेकर भी यह प्रश्न उठता है कि क्या वे सचिव पद के लिए निर्धारित योग्यता, अनुभव एवं कार्यक्षेत्र के अनुरूप हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका मूल कार्य फार्मेसी एवं दवाइयों से संबंधित है, जबकि सचिव का पद प्रशासनिक एवं विभागीय दायित्वों से जुड़ा हुआ है। इसलिए यह आवश्यक है कि उनकी नियुक्ति में निर्धारित नियमों, योग्यता एवं पद की पात्रता का पालन हुआ है या नहीं, इसकी निष्पक्ष रूप से जांच की जाए। जय जवान जय किसान माननीय उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद श्री भगवती प्रसाद त्रिवेदी को सचिव के पद से हटा दिया गया, हालांकि उन्हें जिला अल्पसंख्यक अधिकारी के पद से नहीं हटाया गया। इसके पश्चात बरकत अली को सचिव के पद पर नियुक्त किया गया। लेकिन बरकत अली की नियुक्ति को लेकर भी यह प्रश्न उठता है कि क्या वे सचिव पद के लिए निर्धारित योग्यता, अनुभव एवं कार्यक्षेत्र के अनुरूप हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका मूल कार्य फार्मेसी एवं दवाइयों से संबंधित है, जबकि सचिव का पद प्रशासनिक एवं विभागीय दायित्वों से जुड़ा हुआ है। इसलिए यह आवश्यक है कि उनकी नियुक्ति में निर्धारित नियमों, योग्यता एवं पद की पात्रता का पालन हुआ है या नहीं, इसकी निष्पक्ष रूप से जांच की जाए।1
- देहरादून में प्रदेश के ग्राम प्रधानों का उग्र प्रदेश, तोड़े बैरिकेड।। The Aman Times देहरादून में प्रदेश के ग्राम प्रधानों का उग्र प्रदेश, तोड़े बैरिकेड। 10 सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तराखंडभर के ग्राम प्रधानों ने परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच किया। सुभाष रोड पर पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और आगे बढ़ गए। प्रधानों की प्रमुख मांगों में ₹20 हजार मासिक मानदेय, अलग प्रधान फंड, ₹10 लाख तक के विकास कार्यों का अधिकार और पंचायती राज के 29 विषय ग्राम पंचायतों को सौंपना शामिल है। प्रधानों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।1
- बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन, 75 साल की उम्र में हार्ट अटैक ने ली जान, फिल्म जगत में दौड़ी शोक की लहर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उनकी तबीयत बिगड़ी और वे बेहोश पाए गए। उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। अस्पताल के अनुसार उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई। नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में करीब पांच दशक तक यादगार अभिनय किया। क्रांतिवीर, परिंदा, नटसम्राट और सलाम बॉम्बे! जैसी फिल्मों में उनके दमदार अभिनय को हमेशा याद किया जाएगा। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है।1
- उत्तराखंड प्रदेश प्रधान संगठन के आह्वान पर प्रदेश भर के सैकड़ों ग्राम प्रधानों ने देहरादून के परेड ग्राउंड में अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बड़ी जनसभा की और वहां से सचिवालय कूच किया। उत्तराखंड प्रदेश प्रधान संगठन के आह्वान पर प्रदेश भर के सैकड़ों ग्राम प्रधानों ने देहरादून के परेड ग्राउंड में अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बड़ी जनसभा की और वहां से सचिवालय कूच किया। इस प्रदर्शन के दौरान जब ग्राम प्रधान जुलूस की शक्ल में सचिवालय की ओर बढ़े, तो पुलिस प्रशासन ने सचिवालय से पहले ही सुभाष रोड (पुलिस मुख्यालय के पास) पर भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान आक्रोशित प्रधानों और पुलिस के बीच तीखी बहस और जमकर धक्का-मुक्की हुई। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर और फांदकर आगे बढ़ गए, जिससे मौके पर काफी समय तक तनाव की स्थिति बनी रही। ग्राम प्रधानों की प्रमुख मांगें: संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश माहरा और अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में प्रधानों ने सरकार पर उनके साथ दोहरा व्यवहार करने का आरोप लगाया और निम्नलिखित मांगें उठाईं: मानदेय में वृद्धि: ग्राम प्रधानों के लिए 20,000 रुपये मासिक वेतन/मानदेय तय किया जाए। मनरेगा मजदूरी और उपस्थिति: मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी को महंगाई के अनुपात में बढ़ाया जाए और ऑनलाइन उपस्थिति (NMMS) में नेटवर्क की समस्या के कारण आ रही दिक्कतों को दूर किया जाए। अधिकारों का हस्तांतरण: पंचायती राज विभाग के 29 विषयों को पूरी तरह पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए और ₹10 लाख तक के कार्यों के लिए पंचायत को ही कार्यदायी संस्था बनाया जाए। टैक्स बाध्यता का विरोध: 16वें वित्त आयोग की नई गाइडलाइन के तहत ग्राम पंचायतों में परिवारों से जबरन ₹100 प्रतिमाह टैक्स वसूलने के नियम का विरोध किया गया, क्योंकि ऐसा न करने पर बजट में 20% कटौती का प्रावधान है। अन्य मांगें: सांसदों और विधायकों की तरह प्रधान निधि का गठन हो और जिला योजना की बैठकों में प्रधानों को नामित किया जाए। प्रधान संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी इन मांगों पर जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।3