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कोडरमा के डोमचांच में सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी रविंद्र पांडेय के खिलाफ प्रतिवाद मार्च निकाला और अंचल कार्यालय परिसर में एकदिवसीय धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने जमीन की जमाबंदी, म्यूटेशन, रजिस्टर-2 में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी धरना को समर्थन दिया और मुख्यमंत्री, राजस्व आयुक्त और जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन को देखते हुए अंचल कार्यालय के बाहर बैरिकेडिंग की गई और भारी पुलिस बल व दंडाधिकारी की तैनाती की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और धरना शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
झारखंड news
कोडरमा के डोमचांच में सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी रविंद्र पांडेय के खिलाफ प्रतिवाद मार्च निकाला और अंचल कार्यालय परिसर में एकदिवसीय धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने जमीन की जमाबंदी, म्यूटेशन, रजिस्टर-2 में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी धरना को समर्थन दिया और मुख्यमंत्री, राजस्व आयुक्त और जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन को देखते हुए अंचल कार्यालय के बाहर बैरिकेडिंग की गई और भारी पुलिस बल व दंडाधिकारी की तैनाती की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और धरना शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
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- विरोध प्रदर्शन करने के उद्देश्य से दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे।1
- मॉडर्न इंटरनेशनल स्कूल, हिसुआ के बहुउद्देशीय सभागार में रविवार को शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ। प्रथम सत्र में नर्सरी से कक्षा पाँच तक तथा द्वितीय सत्र में कक्षा छह से दस तक के विद्यार्थियों के अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यालय परिसर अभिभावकों की उपस्थिति से खचाखच भरा रहा और लगभग शत-प्रतिशत अभिभावकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मॉडर्न शैक्षणिक समूह के निदेशक डॉ. अनुज सिंह ने अध्येता, अध्यापक और अभिभावक के बीच बेहतर समन्वय को बच्चों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि आज के बदलते शैक्षिक परिवेश में बच्चों का इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रति बढ़ता आकर्षण चिंता का विषय है। यदि शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों को मोबाइल एवं अन्य डिजिटल उपकरणों के अनावश्यक उपयोग से दूर रखते हुए स्वाध्याय, पुस्तक-पठन और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें, तो उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का विकास होगा। डॉ. अनुज सिंह ने कहा कि मॉडर्न की पहचान केवल उत्कृष्ट शैक्षणिक परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छी शिक्षा, अनुशासन, सुंदर लिखावट, संस्कार, खेल, संगीत, नृत्य एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन भी इसकी विशेषता है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के सामने अपने व्यवहार, भाषा और आदतों का सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें, क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता से ही जीवन के प्रारंभिक संस्कार सीखते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं को बच्चों के जीवन में अपनाने पर विशेष बल दिया। विद्यालय के प्राचार्य योगलाल चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय में बच्चों का नामांकन कराना पहला कदम है, लेकिन उनके सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी में शैक्षणिक, व्यवहारिक अथवा अन्य किसी प्रकार की समस्या दिखाई दे, तो अभिभावक बिना संकोच विद्यालय प्रशासन अथवा संबंधित वर्ग शिक्षक से संपर्क करें। विद्यालय प्रत्येक विद्यार्थी के उज्ज्वल भविष्य के लिए सदैव तत्पर है। संगोष्ठी के दौरान अभिभावकों ने विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था, अनुशासन, शैक्षणिक वातावरण एवं नियमित संवाद की सराहना की। अनेक अभिभावकों ने अपने सुझाव एवं समस्याएँ भी विद्यालय प्रबंधन के समक्ष रखीं, जिन पर सकारात्मक चर्चा हुई। विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों को विश्वास दिलाया कि उनके सुझावों को प्राथमिकता देते हुए बच्चों के हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभिभावकों ने इस प्रकार के संवादात्मक कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए विद्यालय प्रबंधन के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।2
- झारखंड के गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में सोमवार को नशा मुक्त समाज के निर्माण को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी मनीष कुमार और अंचलाधिकारी अखिलेश प्रसाद ने संयुक्त रूप से अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज को दीमक की तरह चाट जाता है। इससे न केवल स्वास्थ्य बिगड़ता है, बल्कि व्यक्ति आर्थिक और सामाजिक रूप से भी पूरी तरह टूट जाता है। उन्होंने सभी से खुद नशे से दूर रहने और समाज के अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की। जागरूकता अभियान के तहत मदन मंजरबेर एवं उनकी टीम द्वारा एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपनी जीवंत प्रस्तुति से दिखाया कि कैसे नशे की बुरी लत युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल देती है और हंसते-खेलते परिवारों को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा करती है। नाटक के जरिए उपस्थित लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशामुक्त समाज बनाने का संदेश दिया गया। इस दौरान सभागार में मौजूद सभी लोगों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर सहयोग देने का संकल्प लिया।3
- बिहार के नवादा जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है जिसमें दो चचेरे भाइयों की मौत हो गई। हादसा रविवार देर रात कोडरमा घाटी में हुआ। 44 वर्षीय ट्रक चालक साधू यादव और उनके 22 वर्षीय चचेरे भाई सह उपचालक अमरजीत उर्फ छोटू यादव झारखंड से रजौली की ओर लोडेड ट्रक लेकर आ रहे थे। इसी दौरान कोडरमा घाटी में ट्रक का संतुलन बिगड़ गया। वाहन पहले सड़क किनारे एक पेड़ से टकराया और फिर विपरीत दिशा से आ रहे एक अन्य ट्रक से जा भिड़ा। भीषण टक्कर में चालक और उपचालक दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सदर विधायक विभा देवी एवं विधान परिषद सदस्य अशोक कुमार ने अपने प्रतिनिधियों को घटनास्थल पर भेजा। विधायक प्रतिनिधि सुरेंद्र यादव एवं बृज यादव ने बताया कि उनके पहुंचने से पहले दोनों शव कोडरमा थाना लाए जा चुके थे, जहां कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। सोमवार शाम करीब चार बजे जब दोनों का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो परिजनों के बीच चीख-पुकार मच गई। पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए जुट गए। विधायक विभा देवी ने पटना से फोन पर मृतकों के परिजनों से बात कर उन्हें सांत्वना दी और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। वहीं एमएलसी अशोक कुमार ने कहा कि मृतक परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा तथा हर संभव सहयोग किया जाएगा। साधू यादव अपने पीछे तीन पुत्रियां और एक पुत्र छोड़ गए हैं, जबकि अमरजीत उर्फ छोटू यादव की आठ माह की एक मासूम पुत्री है। इस दर्दनाक हादसे से दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।1
- नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड क्षेत्र के मंझवे, तुंगी, चक, धरमपुर, उमराव बीघा समेत कई गांवों में सोमवार को दोपहर में झमाझम बारिश हुई। इस बारिश ने गर्मी से हलकान लोगों को राहत प्रदान की। बारिश का लुत्फ उठाते नन्हे बच्चे अली और आफिया की तस्वीर ने बारिश की खुशी को और बढ़ा दिया। हालांकि, यह बारिश सिर्फ 10 मिनट तक ही हुई, लेकिन इस छोटे से समय में ही मौसम सुहाना हो गया और गर्मी से परेशान लोगों को काफी राहत मिली।1
- नवादा जिले के रजौली क्षेत्र अंतर्गत स्थित अंबेडकर आवासीय विद्यालय में बच्चों को कीड़ा नुमा खाना दिया जा रहा है। रजौली के इस अंबेडकर आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को खाने में कीड़े युक्त भोजन ही परोसा जाता है।1
- नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड क्षेत्र में रविवार को एक बेहद दर्दनाक हादसे में 14 वर्षीय किशोर की सकरी नदी में डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान गोविंदपुर थाना क्षेत्र के गोविंदपुर डीह निवासी अवधेश कुमार के 14 वर्षीय पुत्र निक्की कुमार के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, निक्की किसी काम से सकरी नदी के किनारे गया था, जहां वह अचानक नदी के गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन देखते ही देखते वह पानी में लापता हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की मदद से किशोर को नदी से बाहर निकाला गया। उसे तत्काल इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची गोविंदपुर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए नवादा सदर अस्पताल भेज दिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। निक्की की असामयिक मौत से पूरे गोविंदपुर डीह गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दुखद घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नदी किनारे सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने और संवेदनशील घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।1