शाहबाद उपखंड क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा ग्रीनको एनर्जी के हाइड्रो पावर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जिसका कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा विरोध किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय शाहाबाद आदिवासी क्षेत्र के लोग इस परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसके समर्थन में शनिवार रात 8 बजे रामजानकी मंदिर के सामने ग्रामीणों ने एक बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में आजाद मित्तल और शिखर चंद जैन ने जानकारी दी कि सोमवार को दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के नाम एक ज्ञापन उपखंड अधिकारी शाहाबाद को सौंपा जाएगा। ज्ञापन में ग्रीनको एनर्जी से प्लांट का कार्य जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की गई है। इस बैठक में हरिओम सोनी, जितेंद्र जैन, कालू कश्यप, शिवनारायण सेन, राजकुमार नामदेव, बाबूलाल मेहता, सुरेश जैन, हर्षित, लेखराज शर्मा, जितेंद्र धानुक और पवन शर्मा सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने बारां जिले में संचालित 'शाहाबाद घाटी बचाओ संघर्ष समिति' पर आरोप लगाए हैं कि इस समिति में शाहाबाद का एक भी सदस्य या पदाधिकारी नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि समिति ने ग्रीनको एनर्जी प्लांट की मंजूरी के समय कोई प्रदर्शन क्यों नहीं किया। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारी सरकार और ग्रामीणों को कुण्डाखोह किले के जंगलों की तस्वीरें दिखाकर गुमराह कर रहे हैं, जबकि सरकार ने ग्रीनको को वह जमीन दी है जो लोगों के कब्जे में थी। ग्रामीणों का दावा है कि बारां, कोटा और दिल्ली सहित अन्य जगहों के बाहरी लोगों के निजी स्वार्थ पूरे नहीं हो रहे हैं, जिसके कारण वे इस प्लांट का विरोध कर रहे हैं।
शाहबाद उपखंड क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा ग्रीनको एनर्जी के हाइड्रो पावर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जिसका कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा विरोध किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय शाहाबाद आदिवासी क्षेत्र के लोग इस परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसके समर्थन में शनिवार रात 8 बजे रामजानकी मंदिर के सामने ग्रामीणों ने एक बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में आजाद मित्तल और शिखर चंद जैन ने जानकारी दी कि सोमवार को दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के नाम
एक ज्ञापन उपखंड अधिकारी शाहाबाद को सौंपा जाएगा। ज्ञापन में ग्रीनको एनर्जी से प्लांट का कार्य जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की गई है। इस बैठक में हरिओम सोनी, जितेंद्र जैन, कालू कश्यप, शिवनारायण सेन, राजकुमार नामदेव, बाबूलाल मेहता, सुरेश जैन, हर्षित, लेखराज शर्मा, जितेंद्र धानुक और पवन शर्मा सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने बारां जिले में संचालित 'शाहाबाद घाटी बचाओ संघर्ष समिति' पर आरोप लगाए हैं कि इस समिति में शाहाबाद का एक भी सदस्य या पदाधिकारी नहीं है। ग्रामीणों ने यह
भी सवाल उठाया कि समिति ने ग्रीनको एनर्जी प्लांट की मंजूरी के समय कोई प्रदर्शन क्यों नहीं किया। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारी सरकार और ग्रामीणों को कुण्डाखोह किले के जंगलों की तस्वीरें दिखाकर गुमराह कर रहे हैं, जबकि सरकार ने ग्रीनको को वह जमीन दी है जो लोगों के कब्जे में थी। ग्रामीणों का दावा है कि बारां, कोटा और दिल्ली सहित अन्य जगहों के बाहरी लोगों के निजी स्वार्थ पूरे नहीं हो रहे हैं, जिसके कारण वे इस प्लांट का विरोध कर रहे हैं।
- शाहबाद क्षेत्र में चिकित्सा विभाग और उससे जुड़ा स्टाफ अतिकुपोषित बच्चों के लिए प्रतिदिन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। आदिवासी क्षेत्र में पलायन के लगातार बने रहने वाले ट्रेंड को देखते हुए, फ़ील्ड स्टाफ गाँव-गाँव जाकर कुपोषित बच्चों का डोर-टू-डोर सर्वे कर रहा है। इस प्रक्रिया में बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है और उनके वजन, लंबाई तथा म्यूएक टेप की सहायता से उन्हें 'लाल', 'पीला' और 'हरा' नामक तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। जो बच्चे 'लाल' श्रेणी में आते हैं, उन्हें तुरंत एम्बुलेंस की सहायता से एमटीसी (MTC) शाहाबाद भेज दिया जाता है। वहीं, 'पीले' श्रेणी के बच्चों को दोगुना पोषण और अन्य चिकित्सकीय सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं, ताकि उन्हें अतिकुपोषण की स्थिति में पहुँचने से रोका जा सके। वर्तमान में, शाहाबाद एमटीसी में 16 कुपोषित बच्चे भर्ती हैं जिनकी नियमित रूप से देखभाल की जा रही है। एमटीसी में भर्ती होने वाले हर बच्चे के परिजनों को प्रतिदिन 225 रुपये भी दिए जा रहे हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि शाहाबाद ब्लॉक में PM जनमन कार्यक्रम के तहत रोजाना दो गाँवों में शिविर लगाए जा रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य दूर-दराज के गाँवों तक चिकित्सकीय सुविधाएँ पहुँचाना है ताकि हर व्यक्ति को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने परिजनों से भी यह अपील की है कि वे अपने बच्चों का एमटीसी में रहकर पूरा इलाज करवाएँ और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही छुट्टी करवाकर घर जाएँ।4
- खानपुर मंडी में भीषण लापरवाही का मामला सामने आया है, जहाँ हजारों क्विंटल गेहूं बारिश में भीगकर सड़ गया है। इस घटना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।1
- छीपाबड़ौद के हरनावदाशाहजी में सऊदी अरब के मक्का-मदीना के मुकद्दस हज सफर से सकुशल अपने वतन लौटने पर एक हज जायरीन का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान लोगों ने हाजी का गले मिलकर, मुँह मीठा कराकर और फूल-मालाएं पहनाकर अभिनंदन किया। युवा अरबाज खान ने बताया कि हज जायरीन हाजी मोहम्मद जाकिर शेख ईद-उल-अजहा से पहले हज यात्रा के लिए रवाना हुए थे। उन्होंने मक्का-मदीना के विभिन्न पवित्र स्थलों की ज़ियारत की और देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारा, खुशहाली व तरक्की के लिए दुआएं मांगी। हज से लौटे हाजी मोहम्मद जाकिर शेख ने अपने अनुभव साझा करते हुए खुद को खुशकिस्मत बताया कि उन्हें खुदा के घर जाने का अवसर मिला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मक्का-मदीना का यह सफर हर किसी को नसीब नहीं होता और उन्होंने अल्लाह से सभी को यह सौभाग्य प्रदान करने की दुआ की। इस भव्य स्वागत कार्यक्रम के दौरान उपसरपंच संजय पारेता, सद्दाम मेव, दिलीप जैन, दशरथ नागर, आशु मंसूरी, संजय चौरसिया, अजय पारेता, आदिल शेख और ओम पंचोली सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।3
- सारणी की बेरी स्थित मेघवाल समाज के क्षेत्र में बिजली न आने की समस्या बनी हुई है। इसी प्रकार, चरणों की बेरी के मेघवाल समाज के धनी क्षेत्र में भी बिजली और पानी दोनों की समस्याएँ सामने आई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।1
- कोटा जिले के पीपल्दा तहसील की जटवाड़ा ग्राम पंचायत के गोपालपुरा गांव में बागली बड़ी नहर से निकलने वाली रामपुरिया माइनर के पक्कीकरण का कार्य तीन साल से अधूरा पड़ा है। इस अपूर्ण कार्य के कारण जब नहर में पानी आता है, तो मांगीलाल/प्रहलाद के खेत में पानी भर जाता है। इसी वजह से मांगीलाल ने नहर से होकर गुजरने वाले रास्ते को जेसीबी की मदद से खुदवाकर बंद कर दिया है, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह बंद किया गया रास्ता लगभग 250 बीघा जमीन पर खेतों तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग है, और फसल का समय होने के बावजूद अब कोई भी ट्रैक्टर या अन्य कृषि मशीन मांगीलाल के खेत से होकर नहीं जा पाती। यदि कोई किसान उस रास्ते से निकलने का प्रयास करता है, तो मांगीलाल उसके साथ लड़ाई करता है और हथियार लेकर आगे खड़ा हो जाता है। इस मामले की शिकायत 181 के माध्यम से पीपल्दा तहसील में और जल विभाग इटावा के अधिकारी को भी की गई है, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। ग्रामीणों ने अधिकारियों से इस गंभीर समस्या पर तत्काल मदद करने का निवेदन किया है, क्योंकि नहर का काम अधूरा होने और रास्ता बंद होने से उनकी आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।2
- यह सलाह दी गई है कि प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर योग और प्राणायाम का अभ्यास करें।1
- छबड़ा की भुवाखेड़ी ग्राम पंचायत में कलयुग के श्याम बाबा खाटूश्याम का एक मंदिर निर्माणाधीन है। इस नव निर्मित मंदिर में बाबा खाटूश्याम जी के पदार्पण के साथ ही एक तीन दिवसीय श्रीराम यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। यह यज्ञ 22 जून, 2026 से 24 जून, 2026 तक संपन्न होगा। फिलहाल, इस तीन दिवसीय श्रीराम यज्ञ की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी इच्छानुसार किसी भी रूप में अपनी सेवा देने के लिए आ सकते हैं। रास्ते से संबंधित जानकारी के लिए 9413006192 पर संपर्क किया जा सकता है।4
- शाहबाद उपखंड क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा ग्रीनको एनर्जी के हाइड्रो पावर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जिसका कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा विरोध किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय शाहाबाद आदिवासी क्षेत्र के लोग इस परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसके समर्थन में शनिवार रात 8 बजे रामजानकी मंदिर के सामने ग्रामीणों ने एक बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में आजाद मित्तल और शिखर चंद जैन ने जानकारी दी कि सोमवार को दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के नाम एक ज्ञापन उपखंड अधिकारी शाहाबाद को सौंपा जाएगा। ज्ञापन में ग्रीनको एनर्जी से प्लांट का कार्य जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की गई है। इस बैठक में हरिओम सोनी, जितेंद्र जैन, कालू कश्यप, शिवनारायण सेन, राजकुमार नामदेव, बाबूलाल मेहता, सुरेश जैन, हर्षित, लेखराज शर्मा, जितेंद्र धानुक और पवन शर्मा सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने बारां जिले में संचालित 'शाहाबाद घाटी बचाओ संघर्ष समिति' पर आरोप लगाए हैं कि इस समिति में शाहाबाद का एक भी सदस्य या पदाधिकारी नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि समिति ने ग्रीनको एनर्जी प्लांट की मंजूरी के समय कोई प्रदर्शन क्यों नहीं किया। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारी सरकार और ग्रामीणों को कुण्डाखोह किले के जंगलों की तस्वीरें दिखाकर गुमराह कर रहे हैं, जबकि सरकार ने ग्रीनको को वह जमीन दी है जो लोगों के कब्जे में थी। ग्रामीणों का दावा है कि बारां, कोटा और दिल्ली सहित अन्य जगहों के बाहरी लोगों के निजी स्वार्थ पूरे नहीं हो रहे हैं, जिसके कारण वे इस प्लांट का विरोध कर रहे हैं।3