शाहबाद क्षेत्र में चिकित्सा विभाग और उससे जुड़ा स्टाफ अतिकुपोषित बच्चों के लिए प्रतिदिन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। आदिवासी क्षेत्र में पलायन के लगातार बने रहने वाले ट्रेंड को देखते हुए, फ़ील्ड स्टाफ गाँव-गाँव जाकर कुपोषित बच्चों का डोर-टू-डोर सर्वे कर रहा है। इस प्रक्रिया में बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है और उनके वजन, लंबाई तथा म्यूएक टेप की सहायता से उन्हें 'लाल', 'पीला' और 'हरा' नामक तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। जो बच्चे 'लाल' श्रेणी में आते हैं, उन्हें तुरंत एम्बुलेंस की सहायता से एमटीसी (MTC) शाहाबाद भेज दिया जाता है। वहीं, 'पीले' श्रेणी के बच्चों को दोगुना पोषण और अन्य चिकित्सकीय सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं, ताकि उन्हें अतिकुपोषण की स्थिति में पहुँचने से रोका जा सके। वर्तमान में, शाहाबाद एमटीसी में 16 कुपोषित बच्चे भर्ती हैं जिनकी नियमित रूप से देखभाल की जा रही है। एमटीसी में भर्ती होने वाले हर बच्चे के परिजनों को प्रतिदिन 225 रुपये भी दिए जा रहे हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि शाहाबाद ब्लॉक में PM जनमन कार्यक्रम के तहत रोजाना दो गाँवों में शिविर लगाए जा रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य दूर-दराज के गाँवों तक चिकित्सकीय सुविधाएँ पहुँचाना है ताकि हर व्यक्ति को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने परिजनों से भी यह अपील की है कि वे अपने बच्चों का एमटीसी में रहकर पूरा इलाज करवाएँ और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही छुट्टी करवाकर घर जाएँ।
शाहबाद क्षेत्र में चिकित्सा विभाग और उससे जुड़ा स्टाफ अतिकुपोषित बच्चों के लिए प्रतिदिन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। आदिवासी क्षेत्र में पलायन के लगातार बने रहने वाले ट्रेंड को देखते हुए, फ़ील्ड स्टाफ गाँव-गाँव जाकर कुपोषित बच्चों का डोर-टू-डोर सर्वे कर रहा है। इस प्रक्रिया में बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है और उनके वजन, लंबाई
तथा म्यूएक टेप की सहायता से उन्हें 'लाल', 'पीला' और 'हरा' नामक तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। जो बच्चे 'लाल' श्रेणी में आते हैं, उन्हें तुरंत एम्बुलेंस की सहायता से एमटीसी (MTC) शाहाबाद भेज दिया जाता है। वहीं, 'पीले' श्रेणी के बच्चों को दोगुना पोषण और अन्य चिकित्सकीय सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं, ताकि उन्हें अतिकुपोषण की स्थिति
में पहुँचने से रोका जा सके। वर्तमान में, शाहाबाद एमटीसी में 16 कुपोषित बच्चे भर्ती हैं जिनकी नियमित रूप से देखभाल की जा रही है। एमटीसी में भर्ती होने वाले हर बच्चे के परिजनों को प्रतिदिन 225 रुपये भी दिए जा रहे हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि शाहाबाद ब्लॉक में PM जनमन कार्यक्रम के तहत रोजाना दो गाँवों में
शिविर लगाए जा रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य दूर-दराज के गाँवों तक चिकित्सकीय सुविधाएँ पहुँचाना है ताकि हर व्यक्ति को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने परिजनों से भी यह अपील की है कि वे अपने बच्चों का एमटीसी में रहकर पूरा इलाज करवाएँ और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही छुट्टी करवाकर घर जाएँ।
- यह योग वीडियो ऊपरी और निचले शरीर को घुमाने वाले आसनों पर केंद्रित है। बताया गया है कि ये आसन हर किसी के जीवन के लिए फायदेमंद हैं। वीडियो के निर्माता ने दर्शकों से आग्रह किया है कि वे इस योग वीडियो को लाइक करें, इस पर टिप्पणी करें और इसे अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ साझा करें। धन्यवाद।1
- छबड़ा कस्बे से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर, धरनावदा रोड़ स्थित उदपुरिया ग्राम के नजदीक बालाजी उदपुरिया (भीलवाड़ा नीचा) में एक रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। इस अवसर पर, ग्रामीणजनों ने रात्रि जागरण का भरपूर आनंद लिया।1
- ग्राम रातोधन में विधायक निधि से वर्ष 2020-21 में निर्मित कराए गए एक पेयजल टैंकर को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विधायक बाबू जंडेल ने बड़ौदा थाना प्रभारी को पत्र लिखकर इस टैंकर के निर्माण में गंभीर अनियमितताओं और उसे बेचे जाने की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। विधायक को 6 जून 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, उक्त पेयजल टैंकर के ऊपर बड़ी मात्रा में मिट्टी भरकर उसे समतल किया जा रहा था। इस स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसकी वास्तविक उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्र में यह भी बताया गया है कि कुछ युवाओं द्वारा भी इस पूरे मामले की शिकायत की गई है। बाबू जंडेल ने थाना प्रभारी से पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। इस मामले को लेकर पूरे क्षेत्र में गरमागरम चर्चाओं का दौर जारी है, और अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या फिर इसे बेचे जाने के आरोप में कितनी सच्चाई है।1
- बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने अपनी आगामी फिल्म की रिलीज़ से पहले आंध्र प्रदेश स्थित तिरुमला मंदिर में दर्शन के दौरान कोटा की प्रसिद्ध ‘सोनचिरैया’ की रियल ज़री कोटा साड़ी धारण की। इस कदम से हाड़ौती की पारंपरिक हस्तकरघा कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक ने बताया कि रियल ज़री कोटा साड़ी को शुद्ध रेशम, सूती धागों और असली सोने-चांदी की ज़री का उपयोग कर पारंपरिक पिटलूम पर हाथ से बुना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह सदियों पुरानी विरासत कभी राजघरानों तक ही सीमित थी, जिसे पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रीति सिंह पारीक के अनुसार, इससे पहले भी महारानी राधिका राजे गायकवाड़, महारानी अम्बिका राजे, महारानी रश्मि राजे, टीना अंबानी और प्रिया गुप्ता जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां इस विशेष साड़ी को धारण कर चुकी हैं। वस्त्र विशेषज्ञों का कहना है कि अब कोटा डोरिया अपनी क्षेत्रीय पहचान से आगे बढ़कर भारत के हेरिटेज लक्ज़री टेक्सटाइल के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित हो रहा है, जिससे हाड़ौती की यह विरासत राष्ट्रीय मंच पर चमक उठी है।1
- कोटा ग्रामीण पुलिस ने अपनी एक अनूठी पहल के तहत 'संडे ऑन साइकिल' अभियान चलाया, जिसके अंतर्गत एक भव्य साइकिल रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में पुलिस अधिकारियों और जवानों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना था। रैली के माध्यम से, प्रतिभागियों ने पूरे रास्ते आम जनता को फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने सामूहिक रूप से कोटा ग्रामीण को एक फिट, हरित और जागरूक जिला बनाने का संकल्प लिया। कोटा ग्रामीण पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे प्रदूषण कम करने और स्वस्थ रहने के लिए साइकिलिंग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान, सुरक्षा और यातायात के सुचारू संचालन के लिए पुलिस द्वारा कड़े इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप रैली शांतिपूर्वक संपन्न हुई।1
- महंत हत्याकांड को लेकर चल रहे धरने के दौरान एडिशनल एसपी और एडीएम सिटी मौके पर मौजूद थे। इसी बीच, पुलिस अधिकारी मांगेलाल यादव और धरने पर बैठे लोगों के बीच किसी बात को लेकर तीखी कहासुनी हो गई। देखते ही देखते वहाँ मौजूद लोग भड़क गए और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को बिगड़ता देख, कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने तुरंत हस्तक्षेप किया और पुलिस अधिकारी मांगेलाल यादव को खरी-खोटी सुनाई। प्रहलाद गुंजल ने बेहद तीखे लहजे में कहा, "आखिर क्यों बात को बिगाड़ना चाहते हो? गलतफहमी में मत रहना। बात उलझ गई तो अभी नानी याद दिला देंगे। डीजी को भी बुला लेना, लाशें बिछ जाएंगी।" प्रदर्शन कर रहे लोगों ने भी अपनी राय रखते हुए कहा कि उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों पर बिल्कुल विश्वास नहीं है और वे केवल प्रहलाद गुंजल के भरोसे ही धरने पर बैठे हैं। बाद में, प्रहलाद गुंजल ने स्वयं सभी प्रदर्शनकारियों को शांत करवाया, जिसके उपरांत प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता दोबारा शुरू हो सकी।1
- इंटरनेशनल योगा दिवस की तैयारियों के तहत छिपाबड़ौद स्टेडियम में धीमी गति से दौड़ लगाई जा रही है।1
- हाल ही में, एक प्रतिष्ठित ए-क्लास कॉन्ट्रैक्टर, जो बड़े निर्माण कार्यों और करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन करते हैं, एक मकान का नक्शा बनवाने पहुंचे। वे स्वयं थोड़ा-बहुत वास्तु जानते थे और पारंपरिक आर्किटेक्ट के बजाय लेखक के पास आए, जिसके पीछे उनकी कुंडली में शनि के प्रबल योग को एक कारण बताया गया। लेखक ने बताया कि सामान्य नक्शा बनाना आसान है, लेकिन ऊर्जा का संतुलन स्थापित करना हर किसी के बस की बात नहीं। नक्शे पर विस्तार से चर्चा के दौरान, कॉन्ट्रैक्टर ने बालकनी रखने की इच्छा व्यक्त की। इस पर लेखक ने वास्तु के गहन दृष्टिकोण को समझाते हुए दक्षिण दिशा की बालकनी को सीमित रखने और पश्चिम दिशा की बालकनी को दक्षिण की तुलना में थोड़ा बड़ा रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, स्पष्ट रूप से यह भी बताया गया कि निर्माण के दौरान दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) क्षेत्र का भार, ऊँचाई और संरचनात्मक संतुलन विशेष रूप से बनाए रखा जाना चाहिए। लेखक के अनुसार, यह बात कई लोगों को साधारण लग सकती है, लेकिन यहीं से वास्तु और सामान्य ड्राइंग के बीच का महत्वपूर्ण अंतर शुरू होता है। लेखक ने यह भी जोर दिया कि आजकल कई लोग खुद को वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं और केवल रसोई, मंदिर या बेडरूम की दिशा बताकर ही अपनी बात समाप्त कर देते हैं। परंतु, वास्तविक वास्तु पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, सूर्य की गति, ऊष्मा संचय और वास्तुपुरुष मंडल के संयुक्त अध्ययन पर आधारित है। यह अध्ययन दर्शाता है कि दक्षिण और नैऋत्य क्षेत्र भवन की स्थिरता और नियंत्रण शक्ति के प्रतीक हैं, जिसके कारण प्राचीन वास्तु में 'दक्षिणे गुरुत्वं श्रेष्ठम्' अर्थात दक्षिण भाग में गुरुत्व और भार का संरक्षण शुभ माना गया है। लेखक का मानना है कि बालकनी जैसे छोटे तत्व भी पूरे घर के भाग्य को बदल सकते हैं और वास्तु का सच्चा उद्देश्य ऐसा घर बनाना है जो पीढ़ियों तक स्थिरता, समृद्धि और संतुलन प्रदान करे।1
- कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहाँ मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। यह अस्पताल कुछ समय पहले तक अपनी गंभीर लापरवाहियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रहा था, जिनमें प्रसूताओं की मौत, किडनी फेलियर, नकली दवाएं और आईसीयू में फंगस जैसे मामले शामिल थे। आज के ताजा मामले में, न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा में एक मरीज को सिटी स्कैन करवाने के लिए उसके परिजन खुद ही स्ट्रेचर पर डालकर ले जा रहे थे। इस दौरान, वे स्वयं मरीज की बोतल भी पकड़े हुए थे, जिससे अस्पताल प्रशासन की ओर से की जा रही उपेक्षा साफ दिखती है। यह घटना एक बार फिर कोटा के इस प्रमुख चिकित्सा संस्थान में व्याप्त लापरवाहियों को उजागर करती है।1