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बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने अपनी आगामी फिल्म की रिलीज़ से पहले आंध्र प्रदेश स्थित तिरुमला मंदिर में दर्शन के दौरान कोटा की प्रसिद्ध ‘सोनचिरैया’ की रियल ज़री कोटा साड़ी धारण की। इस कदम से हाड़ौती की पारंपरिक हस्तकरघा कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक ने बताया कि रियल ज़री कोटा साड़ी को शुद्ध रेशम, सूती धागों और असली सोने-चांदी की ज़री का उपयोग कर पारंपरिक पिटलूम पर हाथ से बुना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह सदियों पुरानी विरासत कभी राजघरानों तक ही सीमित थी, जिसे पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रीति सिंह पारीक के अनुसार, इससे पहले भी महारानी राधिका राजे गायकवाड़, महारानी अम्बिका राजे, महारानी रश्मि राजे, टीना अंबानी और प्रिया गुप्ता जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां इस विशेष साड़ी को धारण कर चुकी हैं। वस्त्र विशेषज्ञों का कहना है कि अब कोटा डोरिया अपनी क्षेत्रीय पहचान से आगे बढ़कर भारत के हेरिटेज लक्ज़री टेक्सटाइल के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित हो रहा है, जिससे हाड़ौती की यह विरासत राष्ट्रीय मंच पर चमक उठी है।

3 hrs ago
user_Dushyant singh gehlot (journal
Dushyant singh gehlot (journal
लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
3 hrs ago

बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने अपनी आगामी फिल्म की रिलीज़ से पहले आंध्र प्रदेश स्थित तिरुमला मंदिर में दर्शन के दौरान कोटा की प्रसिद्ध ‘सोनचिरैया’ की रियल ज़री कोटा साड़ी धारण की। इस कदम से हाड़ौती की पारंपरिक हस्तकरघा कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक ने बताया कि रियल ज़री कोटा साड़ी को शुद्ध रेशम, सूती धागों और असली सोने-चांदी की ज़री का उपयोग कर पारंपरिक पिटलूम पर हाथ से बुना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह सदियों पुरानी विरासत कभी राजघरानों तक ही सीमित थी, जिसे पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रीति सिंह पारीक के अनुसार, इससे पहले भी महारानी राधिका राजे गायकवाड़, महारानी अम्बिका राजे, महारानी रश्मि राजे, टीना अंबानी और प्रिया गुप्ता जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां इस विशेष साड़ी को धारण कर चुकी हैं। वस्त्र विशेषज्ञों का कहना है कि अब कोटा डोरिया अपनी क्षेत्रीय पहचान से आगे बढ़कर भारत के हेरिटेज लक्ज़री टेक्सटाइल के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित हो रहा है, जिससे हाड़ौती की यह विरासत राष्ट्रीय मंच पर चमक उठी है।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • कापरेन के श्री लक्ष्मी नाथ मंदिर रोटेदा में चल रही 11 दिवसीय संगीतमय श्री पुरुषोत्तम मास कथा के आज तीसरे दिन, कथा वाचक कवि पंडित देवकी दर्पण ने चौदह अध्याय तक की कथा का विस्तार से वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने वनवास काल में भगवान श्री कृष्ण के पाण्डवों से वन में मिलने, द्वारिकाधीश द्वारा पुरुषोत्तम मास स्नान व्रत का महत्व समझाकर अधिक मास सेवन की प्रेरणा देने, द्रोपदी के पूर्व जन्म की कथा, पाण्डव विवाह और हैहय देश के सत्य पराक्रमी राजा चित्रधर्मा को दृढधन्वा नाम के उत्तम संस्कारी पुत्र प्राप्त होने की कथाएँ सुनाईं। इस प्रसंग से कुटुम्ब प्रबोधन को जोड़ते हुए, कवि पंडित दर्पण ने बताया कि परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है, जिसे खून के रिश्ते से परिभाषित किया जाता है। उन्होंने बल दिया कि संयुक्त परिवार आध्यात्मिक विचारों से पोषित होकर 'वसुधैव कुटुम्बकम' की यात्रा करता है, और ऋग्वेद में परिवार को आनंद स्थल के रूप में देखा गया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार संस्कार, एकता, अखंडता और आध्यात्मिक दर्शन की पाठशाला रहा है। आज के समय में परिवारों के टूटने और एकल परिवार होने से 'अपने-पराये' के बोध की कमी पर चिंता जताते हुए पंडित दर्पण ने कहा कि मानव भाई को शत्रु और शत्रु को भाई जैसा व्यवहार करके स्वयं को धोखा दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अराजक तत्वों द्वारा एकल परिवारों को मानसिक वेदना, आर्थिक तंगी और धर्म परिवर्तन का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने एक बार फिर संयुक्त परिवार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संस्कार, एकता, अखंडता और आध्यात्मिक दर्शन की पाठशाला रही है।
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    कापरेन के श्री लक्ष्मी नाथ मंदिर रोटेदा में चल रही 11 दिवसीय संगीतमय श्री पुरुषोत्तम मास कथा के आज तीसरे दिन, कथा वाचक कवि पंडित देवकी दर्पण ने चौदह अध्याय तक की कथा का विस्तार से वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने वनवास काल में भगवान श्री कृष्ण के पाण्डवों से वन में मिलने, द्वारिकाधीश द्वारा पुरुषोत्तम मास स्नान व्रत का महत्व समझाकर अधिक मास सेवन की प्रेरणा देने, द्रोपदी के पूर्व जन्म की कथा, पाण्डव विवाह और हैहय देश के सत्य पराक्रमी राजा चित्रधर्मा को दृढधन्वा नाम के उत्तम संस्कारी पुत्र प्राप्त होने की कथाएँ सुनाईं।

इस प्रसंग से कुटुम्ब प्रबोधन को जोड़ते हुए, कवि पंडित दर्पण ने बताया कि परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है, जिसे खून के रिश्ते से परिभाषित किया जाता है। उन्होंने बल दिया कि संयुक्त परिवार आध्यात्मिक विचारों से पोषित होकर 'वसुधैव कुटुम्बकम' की यात्रा करता है, और ऋग्वेद में परिवार को आनंद स्थल के रूप में देखा गया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार संस्कार, एकता, अखंडता और आध्यात्मिक दर्शन की पाठशाला रहा है।

आज के समय में परिवारों के टूटने और एकल परिवार होने से 'अपने-पराये' के बोध की कमी पर चिंता जताते हुए पंडित दर्पण ने कहा कि मानव भाई को शत्रु और शत्रु को भाई जैसा व्यवहार करके स्वयं को धोखा दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अराजक तत्वों द्वारा एकल परिवारों को मानसिक वेदना, आर्थिक तंगी और धर्म परिवर्तन का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने एक बार फिर संयुक्त परिवार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संस्कार, एकता, अखंडता और आध्यात्मिक दर्शन की पाठशाला रही है।
    user_Mayur times news
    Mayur times news
    Artist लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    1 hr ago
  • बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने अपनी आगामी फिल्म की रिलीज़ से पहले आंध्र प्रदेश स्थित तिरुमला मंदिर में दर्शन के दौरान कोटा की प्रसिद्ध ‘सोनचिरैया’ की रियल ज़री कोटा साड़ी धारण की। इस कदम से हाड़ौती की पारंपरिक हस्तकरघा कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक ने बताया कि रियल ज़री कोटा साड़ी को शुद्ध रेशम, सूती धागों और असली सोने-चांदी की ज़री का उपयोग कर पारंपरिक पिटलूम पर हाथ से बुना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह सदियों पुरानी विरासत कभी राजघरानों तक ही सीमित थी, जिसे पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रीति सिंह पारीक के अनुसार, इससे पहले भी महारानी राधिका राजे गायकवाड़, महारानी अम्बिका राजे, महारानी रश्मि राजे, टीना अंबानी और प्रिया गुप्ता जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां इस विशेष साड़ी को धारण कर चुकी हैं। वस्त्र विशेषज्ञों का कहना है कि अब कोटा डोरिया अपनी क्षेत्रीय पहचान से आगे बढ़कर भारत के हेरिटेज लक्ज़री टेक्सटाइल के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित हो रहा है, जिससे हाड़ौती की यह विरासत राष्ट्रीय मंच पर चमक उठी है।
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    बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने अपनी आगामी फिल्म की रिलीज़ से पहले आंध्र प्रदेश स्थित तिरुमला मंदिर में दर्शन के दौरान कोटा की प्रसिद्ध ‘सोनचिरैया’ की रियल ज़री कोटा साड़ी धारण की। इस कदम से हाड़ौती की पारंपरिक हस्तकरघा कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक ने बताया कि रियल ज़री कोटा साड़ी को शुद्ध रेशम, सूती धागों और असली सोने-चांदी की ज़री का उपयोग कर पारंपरिक पिटलूम पर हाथ से बुना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह सदियों पुरानी विरासत कभी राजघरानों तक ही सीमित थी, जिसे पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रीति सिंह पारीक के अनुसार, इससे पहले भी महारानी राधिका राजे गायकवाड़, महारानी अम्बिका राजे, महारानी रश्मि राजे, टीना अंबानी और प्रिया गुप्ता जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां इस विशेष साड़ी को धारण कर चुकी हैं। वस्त्र विशेषज्ञों का कहना है कि अब कोटा डोरिया अपनी क्षेत्रीय पहचान से आगे बढ़कर भारत के हेरिटेज लक्ज़री टेक्सटाइल के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित हो रहा है, जिससे हाड़ौती की यह विरासत राष्ट्रीय मंच पर चमक उठी है।
    user_Dushyant singh gehlot (journal
    Dushyant singh gehlot (journal
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • कोटा ग्रामीण पुलिस ने अपनी एक अनूठी पहल के तहत 'संडे ऑन साइकिल' अभियान चलाया, जिसके अंतर्गत एक भव्य साइकिल रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में पुलिस अधिकारियों और जवानों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना था। रैली के माध्यम से, प्रतिभागियों ने पूरे रास्ते आम जनता को फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने सामूहिक रूप से कोटा ग्रामीण को एक फिट, हरित और जागरूक जिला बनाने का संकल्प लिया। कोटा ग्रामीण पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे प्रदूषण कम करने और स्वस्थ रहने के लिए साइकिलिंग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान, सुरक्षा और यातायात के सुचारू संचालन के लिए पुलिस द्वारा कड़े इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप रैली शांतिपूर्वक संपन्न हुई।
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    कोटा ग्रामीण पुलिस ने अपनी एक अनूठी पहल के तहत 'संडे ऑन साइकिल' अभियान चलाया, जिसके अंतर्गत एक भव्य साइकिल रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में पुलिस अधिकारियों और जवानों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना था।

रैली के माध्यम से, प्रतिभागियों ने पूरे रास्ते आम जनता को फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने सामूहिक रूप से कोटा ग्रामीण को एक फिट, हरित और जागरूक जिला बनाने का संकल्प लिया। कोटा ग्रामीण पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे प्रदूषण कम करने और स्वस्थ रहने के लिए साइकिलिंग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान, सुरक्षा और यातायात के सुचारू संचालन के लिए पुलिस द्वारा कड़े इंतजाम किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप रैली शांतिपूर्वक संपन्न हुई।
    user_Kishan Lal jangid
    Kishan Lal jangid
    Real Estate Developer Ladpura, Kota•
    4 hrs ago
  • महंत हत्याकांड को लेकर चल रहे धरने के दौरान एडिशनल एसपी और एडीएम सिटी मौके पर मौजूद थे। इसी बीच, पुलिस अधिकारी मांगेलाल यादव और धरने पर बैठे लोगों के बीच किसी बात को लेकर तीखी कहासुनी हो गई। देखते ही देखते वहाँ मौजूद लोग भड़क गए और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को बिगड़ता देख, कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने तुरंत हस्तक्षेप किया और पुलिस अधिकारी मांगेलाल यादव को खरी-खोटी सुनाई। प्रहलाद गुंजल ने बेहद तीखे लहजे में कहा, "आखिर क्यों बात को बिगाड़ना चाहते हो? गलतफहमी में मत रहना। बात उलझ गई तो अभी नानी याद दिला देंगे। डीजी को भी बुला लेना, लाशें बिछ जाएंगी।" प्रदर्शन कर रहे लोगों ने भी अपनी राय रखते हुए कहा कि उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों पर बिल्कुल विश्वास नहीं है और वे केवल प्रहलाद गुंजल के भरोसे ही धरने पर बैठे हैं। बाद में, प्रहलाद गुंजल ने स्वयं सभी प्रदर्शनकारियों को शांत करवाया, जिसके उपरांत प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता दोबारा शुरू हो सकी।
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    महंत हत्याकांड को लेकर चल रहे धरने के दौरान एडिशनल एसपी और एडीएम सिटी मौके पर मौजूद थे। इसी बीच, पुलिस अधिकारी मांगेलाल यादव और धरने पर बैठे लोगों के बीच किसी बात को लेकर तीखी कहासुनी हो गई। देखते ही देखते वहाँ मौजूद लोग भड़क गए और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति को बिगड़ता देख, कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने तुरंत हस्तक्षेप किया और पुलिस अधिकारी मांगेलाल यादव को खरी-खोटी सुनाई। प्रहलाद गुंजल ने बेहद तीखे लहजे में कहा, "आखिर क्यों बात को बिगाड़ना चाहते हो? गलतफहमी में मत रहना। बात उलझ गई तो अभी नानी याद दिला देंगे। डीजी को भी बुला लेना, लाशें बिछ जाएंगी।"

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने भी अपनी राय रखते हुए कहा कि उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों पर बिल्कुल विश्वास नहीं है और वे केवल प्रहलाद गुंजल के भरोसे ही धरने पर बैठे हैं। बाद में, प्रहलाद गुंजल ने स्वयं सभी प्रदर्शनकारियों को शांत करवाया, जिसके उपरांत प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता दोबारा शुरू हो सकी।
    user_Jitendra Kumar
    Jitendra Kumar
    Local News Reporter लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • हाल ही में, एक प्रतिष्ठित ए-क्लास कॉन्ट्रैक्टर, जो बड़े निर्माण कार्यों और करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन करते हैं, एक मकान का नक्शा बनवाने पहुंचे। वे स्वयं थोड़ा-बहुत वास्तु जानते थे और पारंपरिक आर्किटेक्ट के बजाय लेखक के पास आए, जिसके पीछे उनकी कुंडली में शनि के प्रबल योग को एक कारण बताया गया। लेखक ने बताया कि सामान्य नक्शा बनाना आसान है, लेकिन ऊर्जा का संतुलन स्थापित करना हर किसी के बस की बात नहीं। नक्शे पर विस्तार से चर्चा के दौरान, कॉन्ट्रैक्टर ने बालकनी रखने की इच्छा व्यक्त की। इस पर लेखक ने वास्तु के गहन दृष्टिकोण को समझाते हुए दक्षिण दिशा की बालकनी को सीमित रखने और पश्चिम दिशा की बालकनी को दक्षिण की तुलना में थोड़ा बड़ा रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, स्पष्ट रूप से यह भी बताया गया कि निर्माण के दौरान दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) क्षेत्र का भार, ऊँचाई और संरचनात्मक संतुलन विशेष रूप से बनाए रखा जाना चाहिए। लेखक के अनुसार, यह बात कई लोगों को साधारण लग सकती है, लेकिन यहीं से वास्तु और सामान्य ड्राइंग के बीच का महत्वपूर्ण अंतर शुरू होता है। लेखक ने यह भी जोर दिया कि आजकल कई लोग खुद को वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं और केवल रसोई, मंदिर या बेडरूम की दिशा बताकर ही अपनी बात समाप्त कर देते हैं। परंतु, वास्तविक वास्तु पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, सूर्य की गति, ऊष्मा संचय और वास्तुपुरुष मंडल के संयुक्त अध्ययन पर आधारित है। यह अध्ययन दर्शाता है कि दक्षिण और नैऋत्य क्षेत्र भवन की स्थिरता और नियंत्रण शक्ति के प्रतीक हैं, जिसके कारण प्राचीन वास्तु में 'दक्षिणे गुरुत्वं श्रेष्ठम्' अर्थात दक्षिण भाग में गुरुत्व और भार का संरक्षण शुभ माना गया है। लेखक का मानना है कि बालकनी जैसे छोटे तत्व भी पूरे घर के भाग्य को बदल सकते हैं और वास्तु का सच्चा उद्देश्य ऐसा घर बनाना है जो पीढ़ियों तक स्थिरता, समृद्धि और संतुलन प्रदान करे।
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    हाल ही में, एक प्रतिष्ठित ए-क्लास कॉन्ट्रैक्टर, जो बड़े निर्माण कार्यों और करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन करते हैं, एक मकान का नक्शा बनवाने पहुंचे। वे स्वयं थोड़ा-बहुत वास्तु जानते थे और पारंपरिक आर्किटेक्ट के बजाय लेखक के पास आए, जिसके पीछे उनकी कुंडली में शनि के प्रबल योग को एक कारण बताया गया। लेखक ने बताया कि सामान्य नक्शा बनाना आसान है, लेकिन ऊर्जा का संतुलन स्थापित करना हर किसी के बस की बात नहीं।

नक्शे पर विस्तार से चर्चा के दौरान, कॉन्ट्रैक्टर ने बालकनी रखने की इच्छा व्यक्त की। इस पर लेखक ने वास्तु के गहन दृष्टिकोण को समझाते हुए दक्षिण दिशा की बालकनी को सीमित रखने और पश्चिम दिशा की बालकनी को दक्षिण की तुलना में थोड़ा बड़ा रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, स्पष्ट रूप से यह भी बताया गया कि निर्माण के दौरान दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) क्षेत्र का भार, ऊँचाई और संरचनात्मक संतुलन विशेष रूप से बनाए रखा जाना चाहिए। लेखक के अनुसार, यह बात कई लोगों को साधारण लग सकती है, लेकिन यहीं से वास्तु और सामान्य ड्राइंग के बीच का महत्वपूर्ण अंतर शुरू होता है।

लेखक ने यह भी जोर दिया कि आजकल कई लोग खुद को वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं और केवल रसोई, मंदिर या बेडरूम की दिशा बताकर ही अपनी बात समाप्त कर देते हैं। परंतु, वास्तविक वास्तु पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, सूर्य की गति, ऊष्मा संचय और वास्तुपुरुष मंडल के संयुक्त अध्ययन पर आधारित है। यह अध्ययन दर्शाता है कि दक्षिण और नैऋत्य क्षेत्र भवन की स्थिरता और नियंत्रण शक्ति के प्रतीक हैं, जिसके कारण प्राचीन वास्तु में 'दक्षिणे गुरुत्वं श्रेष्ठम्' अर्थात दक्षिण भाग में गुरुत्व और भार का संरक्षण शुभ माना गया है। लेखक का मानना है कि बालकनी जैसे छोटे तत्व भी पूरे घर के भाग्य को बदल सकते हैं और वास्तु का सच्चा उद्देश्य ऐसा घर बनाना है जो पीढ़ियों तक स्थिरता, समृद्धि और संतुलन प्रदान करे।
    user_Vastuvid Bhagyesh
    Vastuvid Bhagyesh
    Vastu consultant लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • Post by Mahendar.merotha
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    Post by Mahendar.merotha
    user_Mahendar.merotha
    Mahendar.merotha
    Voice of people लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • कोटा के बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में स्थित चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या के बाद, पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजल के नेतृत्व में चल रहा धरना मांगों पर सहमति बनने के उपरांत समाप्त हो गया है। मांगों पर बनी सहमति के बाद धरना खत्म होने पर प्रह्लाद गुंजल ने मीडिया से रूबरू होकर इसकी जानकारी दी।
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    कोटा के बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में स्थित चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या के बाद, पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजल के नेतृत्व में चल रहा धरना मांगों पर सहमति बनने के उपरांत समाप्त हो गया है। मांगों पर बनी सहमति के बाद धरना खत्म होने पर प्रह्लाद गुंजल ने मीडिया से रूबरू होकर इसकी जानकारी दी।
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहाँ मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। यह अस्पताल कुछ समय पहले तक अपनी गंभीर लापरवाहियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रहा था, जिनमें प्रसूताओं की मौत, किडनी फेलियर, नकली दवाएं और आईसीयू में फंगस जैसे मामले शामिल थे। आज के ताजा मामले में, न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा में एक मरीज को सिटी स्कैन करवाने के लिए उसके परिजन खुद ही स्ट्रेचर पर डालकर ले जा रहे थे। इस दौरान, वे स्वयं मरीज की बोतल भी पकड़े हुए थे, जिससे अस्पताल प्रशासन की ओर से की जा रही उपेक्षा साफ दिखती है। यह घटना एक बार फिर कोटा के इस प्रमुख चिकित्सा संस्थान में व्याप्त लापरवाहियों को उजागर करती है।
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    कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहाँ मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। यह अस्पताल कुछ समय पहले तक अपनी गंभीर लापरवाहियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रहा था, जिनमें प्रसूताओं की मौत, किडनी फेलियर, नकली दवाएं और आईसीयू में फंगस जैसे मामले शामिल थे।

आज के ताजा मामले में, न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा में एक मरीज को सिटी स्कैन करवाने के लिए उसके परिजन खुद ही स्ट्रेचर पर डालकर ले जा रहे थे। इस दौरान, वे स्वयं मरीज की बोतल भी पकड़े हुए थे, जिससे अस्पताल प्रशासन की ओर से की जा रही उपेक्षा साफ दिखती है। यह घटना एक बार फिर कोटा के इस प्रमुख चिकित्सा संस्थान में व्याप्त लापरवाहियों को उजागर करती है।
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    6 hrs ago
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