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कभी नक्सल प्रभावित रहे दुरुप ग्राम पंचायत को अब मूलभूत समस्याओं ने घेर लिया है। लातेहार जिले के महुआडार प्रखंड के अंतर्गत, शृंखलाबद्ध पहाड़ियों, नदी-नालों और घने जंगलों के बीच स्थित इस पंचायत के कई गांवों और टोलों तक पहुँचने के लिए कोई सड़क नहीं है। इसके साथ ही, गांव में नल-जल योजना के तहत बनाए गए आधे से अधिक जल मीनार केवल खड़े शोपीस बने हुए हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। शाम होते ही पूरे गांव में अंधेरा छा जाता है, क्योंकि यहाँ बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जो यहाँ के लोगों के जीवन को और कठिन बना देती है।
Manoj dutt dev
कभी नक्सल प्रभावित रहे दुरुप ग्राम पंचायत को अब मूलभूत समस्याओं ने घेर लिया है। लातेहार जिले के महुआडार प्रखंड के अंतर्गत, शृंखलाबद्ध पहाड़ियों, नदी-नालों और घने जंगलों के बीच स्थित इस पंचायत के कई गांवों और टोलों तक पहुँचने के लिए कोई सड़क नहीं है। इसके साथ ही, गांव में नल-जल योजना के तहत बनाए गए आधे से अधिक जल मीनार केवल खड़े शोपीस बने हुए हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। शाम होते ही पूरे गांव में अंधेरा छा जाता है, क्योंकि यहाँ बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जो यहाँ के लोगों के जीवन को और कठिन बना देती है।
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- झारखंड के लोहरदगा जिले में जमीन विवाद को लेकर एक ग्राम सभा में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ग्रामीणों के बीच जमीन से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, जिसने स्थानीय लोगों के बीच इस विषय को लेकर गरमागरम बहस छेड़ दी है। यह बैठक जमीन से संबंधित विवादों को सुलझाने के उद्देश्य से बुलाई गई थी, और इसने ग्रामीणों के बीच बढ़ती चर्चा को और बढ़ावा दिया है।1
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