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कटिहार में रामनवमी पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा,जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा कटिहार कटिहार में रामनवमी के मौके पर चप्पा चप्पा भगवामय, जय श्री राम के जयघोष से गुंजा कटिहार, मर्यादा पुरसोत्तम राम की भव्य शोभा यात्रा में क्या आम क्या खास हर कोई हुआ शामिल, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ामत, देखिये रामनवमी की शोभा यात्रा की जबरदस्त वीडियो।

1 hr ago
user_Asadur Rahman
Asadur Rahman
कटिहार, कटिहार, बिहार•
1 hr ago

कटिहार में रामनवमी पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा,जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा कटिहार कटिहार में रामनवमी के मौके पर चप्पा चप्पा भगवामय, जय श्री राम के जयघोष से गुंजा कटिहार, मर्यादा पुरसोत्तम राम की भव्य शोभा यात्रा में क्या आम क्या खास हर कोई हुआ शामिल, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ामत, देखिये रामनवमी की शोभा यात्रा की जबरदस्त वीडियो।

More news from बिहार and nearby areas
  • कटिहार में रामनवमी के मौके पर चप्पा चप्पा भगवामय, जय श्री राम के जयघोष से गुंजा कटिहार, मर्यादा पुरसोत्तम राम की भव्य शोभा यात्रा में क्या आम क्या खास हर कोई हुआ शामिल, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ामत, देखिये रामनवमी की शोभा यात्रा की जबरदस्त वीडियो।
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    कटिहार में रामनवमी के मौके पर चप्पा चप्पा भगवामय, जय श्री राम के जयघोष से गुंजा कटिहार, मर्यादा पुरसोत्तम राम की भव्य शोभा यात्रा में क्या आम क्या खास हर कोई हुआ शामिल, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ामत, देखिये रामनवमी की शोभा यात्रा की जबरदस्त वीडियो।
    user_Asadur Rahman
    Asadur Rahman
    कटिहार, कटिहार, बिहार•
    1 hr ago
  • नहीं नहीं नहीं नरेंद्र मोदी ही पूरे समाज का हिंदू का ठेकेदार नहीं है जो अपने आप को हिंदू बोलते हैं वह हिंसा ही हिंसा करती है
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    नहीं नहीं नहीं नरेंद्र मोदी ही पूरे समाज का हिंदू का ठेकेदार नहीं है जो अपने आप को हिंदू बोलते हैं वह हिंसा ही हिंसा करती है
    user_RAYEES GANDHI Vlogs
    RAYEES GANDHI Vlogs
    Voice of people दंडखोरा, कटिहार, बिहार•
    5 hrs ago
  •   +7  सम्राट अशोक (शासनकाल: 273-232 ईसा पूर्व) मौर्य वंश के तीसरे और सबसे महान चक्रवर्ती सम्राट थे, जिन्होंने अखंड भारत (अफगानिस्तान से बांग्लादेश तक) पर शासन किया। कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व) के नरसंहार से द्रवित होकर उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया और "धम्म" (अहिंसा, प्रेम) का प्रचार किया। उन्हें उनके शिलालेखों, स्तूपों (सांची) और जनकल्याणकारी नीतियों के लिए जाना जाता है।  विकिपीडिया +4 सम्राट अशोक के बारे में मुख्य तथ्य: विशाल साम्राज्य: अशोक का साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश, दक्षिण में मैसूर, पूर्व में बंगाल और पश्चिम में अफगानिस्तान तक फैला था। कलिंग युद्ध और हृदय परिवर्तन: कलिंग युद्ध के बाद हिंसा से दूर होकर उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और अहिंसा की नीति अपनाई। बौद्ध धर्म का प्रसार: अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा था। प्रशासन और जनकल्याण: उन्होंने सड़कों, अस्पतालों, विश्राम गृहों का निर्माण करवाया। उनके शिलालेख (शिलालेख, स्तंभ लेख) प्रशासन और 'धम्म' के प्रचार के मुख्य साधन थे। प्रतीक चिन्ह: भारत का राष्ट्रीय प्रतीक, 'अशोक चक्र' और चार शेर वाला स्तंभ, सम्राट अशोक के सारनाथ स्तंभ से ही लिया गया है। लोकप्रिय नाम: उन्हें 'देवानाम्प्रिय' (देवताओं के प्रिय) और 'प्रियदर्शी' (देखने में सुंदर) के नाम से भी जाना जाता है।  विकिपीडिया +6 सम्राट अशोक का शासनकाल शांति, समृद्धि और मानवतावादी दृष्टिकोण के लिए इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
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सम्राट अशोक (शासनकाल: 273-232 ईसा पूर्व) मौर्य वंश के तीसरे और सबसे महान चक्रवर्ती सम्राट थे, जिन्होंने अखंड भारत (अफगानिस्तान से बांग्लादेश तक) पर शासन किया। कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व) के नरसंहार से द्रवित होकर उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया और "धम्म" (अहिंसा, प्रेम) का प्रचार किया। उन्हें उनके शिलालेखों, स्तूपों (सांची) और जनकल्याणकारी नीतियों के लिए जाना जाता है। 
विकिपीडिया +4
सम्राट अशोक के बारे में मुख्य तथ्य:
विशाल साम्राज्य: अशोक का साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश, दक्षिण में मैसूर, पूर्व में बंगाल और पश्चिम में अफगानिस्तान तक फैला था।
कलिंग युद्ध और हृदय परिवर्तन: कलिंग युद्ध के बाद हिंसा से दूर होकर उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और अहिंसा की नीति अपनाई।
बौद्ध धर्म का प्रसार: अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा था।
प्रशासन और जनकल्याण: उन्होंने सड़कों, अस्पतालों, विश्राम गृहों का निर्माण करवाया। उनके शिलालेख (शिलालेख, स्तंभ लेख) प्रशासन और 'धम्म' के प्रचार के मुख्य साधन थे।
प्रतीक चिन्ह: भारत का राष्ट्रीय प्रतीक, 'अशोक चक्र' और चार शेर वाला स्तंभ, सम्राट अशोक के सारनाथ स्तंभ से ही लिया गया है।
लोकप्रिय नाम: उन्हें 'देवानाम्प्रिय' (देवताओं के प्रिय) और 'प्रियदर्शी' (देखने में सुंदर) के नाम से भी जाना जाता है। 
विकिपीडिया +6
सम्राट अशोक का शासनकाल शांति, समृद्धि और मानवतावादी दृष्टिकोण के लिए इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
    user_बासुकी  नाथ साह  राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लोकसभा पूर्व सांसद प्रत्याशी कटिहार
    बासुकी नाथ साह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लोकसभा पूर्व सांसद प्रत्याशी कटिहार
    Railway services कटिहार, कटिहार, बिहार•
    23 hrs ago
  • दुखद खबर आ रही हैं बांग्लादेश से जहां एक बस पर कई सारे सवारी मौजूद थे जिसमें की 23 लोगों की जान गई हैं
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    दुखद खबर आ रही हैं बांग्लादेश से जहां एक बस पर कई सारे सवारी मौजूद थे जिसमें की 23 लोगों की जान गई हैं
    user_Today Real News
    Today Real News
    Media company पूर्णिया पूर्व, पूर्णिया, बिहार•
    1 hr ago
  • दुर्गा अष्टमी आज का दिन मां शीतल माता का पूजा होता है Gate per Dholak Bajata hai पूजा तैयारी हो जाता है
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    दुर्गा अष्टमी आज का दिन मां  शीतल माता का पूजा होता है Gate per Dholak Bajata hai  पूजा तैयारी हो जाता है
    user_Usha devi
    Usha devi
    पीरपैंती, भागलपुर, बिहार•
    5 hrs ago
  • दुखद ख़बर बांग्लादेश के राजावाड़ी में दुखद हादसा। बस पद्मा नदी में गिरी। बस पर 40 लोग सवार थे। 16 की मौत की खबर। बस में मुसाफ़िर ईद मना कर लौट रहे थे। फेरी पर चढ़ाए जाने के समय हुआ हादसा
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    दुखद ख़बर 
बांग्लादेश के राजावाड़ी में दुखद हादसा। बस पद्मा नदी में गिरी। बस पर 40 लोग सवार थे। 16 की मौत की खबर। बस में मुसाफ़िर ईद मना कर लौट रहे थे। फेरी पर चढ़ाए जाने के समय हुआ हादसा
    user_Seemanchal Bytes
    Seemanchal Bytes
    Media company पूर्णिया पूर्व, पूर्णिया, बिहार•
    14 hrs ago
  • कटिहार जिले के फलका प्रखंड अंतर्गत उत्तरी सोहथा गांव में तेज हवा के साथ हुई अचानक बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में लगी फसलें तेज आंधी और बारिश से बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। किसानों का कहना है कि तैयार फसल गिर जाने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, जिससे किसानों के बीच चिंता और हाहाकार का माहौल है। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।
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    कटिहार जिले के फलका प्रखंड अंतर्गत उत्तरी सोहथा गांव में तेज हवा के साथ हुई अचानक बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में लगी फसलें तेज आंधी और बारिश से बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं।
किसानों का कहना है कि तैयार फसल गिर जाने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, जिससे किसानों के बीच चिंता और हाहाकार का माहौल है। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।
    user_बिहार संवाद कटिहार
    बिहार संवाद कटिहार
    Social Media Manager फलका, कटिहार, बिहार•
    23 hrs ago
  • बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कटिहार से एक बड़ा राजनीतिक बयान सामने आया है, जिसने मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है। पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अहमद अशफाक करीम ने निशांत कुमार को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वे लगातार जनता के बीच जाकर काम कर रहे हैं और जमीन से जुड़कर अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर इस बात का जिक्र किया कि ईद के मौके पर भी निशांत कुमार अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मिलने पहुंचे, जो उनकी सक्रियता और सामाजिक जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार अपने पिता नीतीश कुमार की तरह इंजीनियर हैं और उन्हीं की कार्यशैली को आगे बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। उनका मानना है कि भविष्य में पार्टी या सरकार में जो भी जिम्मेदारी निशांत कुमार को मिलेगी, वे उसे बखूबी निभाने में सक्षम हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे बिहार की राजनीति से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बिहार में रहकर विकास कार्यों और संगठन दोनों को संभालते रहेंगे, साथ ही निशांत कुमार को भी मार्गदर्शन देंगे। इस बयान के बाद बिहार की सियासत में कयासों का दौर तेज हो गया है और यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या आने वाले समय में निशांत कुमार राज्य की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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    बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कटिहार से एक बड़ा राजनीतिक बयान सामने आया है, जिसने मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है।
पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अहमद अशफाक करीम ने निशांत कुमार को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वे लगातार जनता के बीच जाकर काम कर रहे हैं और जमीन से जुड़कर अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर इस बात का जिक्र किया कि ईद के मौके पर भी निशांत कुमार अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मिलने पहुंचे, जो उनकी सक्रियता और सामाजिक जुड़ाव को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि निशांत कुमार अपने पिता नीतीश कुमार की तरह इंजीनियर हैं और उन्हीं की कार्यशैली को आगे बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। उनका मानना है कि भविष्य में पार्टी या सरकार में जो भी जिम्मेदारी निशांत कुमार को मिलेगी, वे उसे बखूबी निभाने में सक्षम हैं।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे बिहार की राजनीति से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बिहार में रहकर विकास कार्यों और संगठन दोनों को संभालते रहेंगे, साथ ही निशांत कुमार को भी मार्गदर्शन देंगे।
इस बयान के बाद बिहार की सियासत में कयासों का दौर तेज हो गया है और यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या आने वाले समय में निशांत कुमार राज्य की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
    user_Asadur Rahman
    Asadur Rahman
    कटिहार, कटिहार, बिहार•
    9 hrs ago
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