रवि सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, किरंदुल और बैलाडीला पर्वतमाला केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की पहचान मानी जाती है। बस्तर अंचल में स्थित यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, विशाल पर्वतमालाओं, घने वनों, शीतल हवाओं और लौह अयस्क की अथाह संपदा से समृद्ध है, जो प्रकृति और विकास का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। अपनी अलौकिक सुंदरता के कारण यह वर्षों से लोगों को आकर्षित करता रहा है, जहाँ की हरी-भरी पहाड़ियाँ, बादलों से ढकी घाटियाँ और शांत वातावरण हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। यही वजह है कि लोग बैलाडीला को प्रेमपूर्वक 'धरती का स्वर्ग' और 'छोटा कश्मीर' कहकर पुकारते हैं। जब बारिश की बूंदें बैलाडीला की पर्वत श्रृंखलाओं को स्पर्श करती हैं, तो पूरा क्षेत्र हरियाली की चादर ओढ़ लेता है। पहाड़ों से गिरते झरनों की मधुर ध्वनि, ठंडी हवाओं का स्पर्श और बादलों के बीच दिखाई देती घाटियों का दृश्य किसी चित्रकारी से कम प्रतीत नहीं होता। सर्दियों के मौसम में सुबह की धुंध और ठंडी हवाएँ पूरे नगर को एक अलग ही सौंदर्य प्रदान करती हैं, जहाँ प्रकृति अपने सबसे सुंदर और शांत स्वरूप में दिखाई देती है। किरंदुल सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यहाँ स्थित एनएमडीसी लिमिटेड की लौह अयस्क खदानें भारत की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित खदानों में शामिल हैं। बैलाडीला पर्वतमाला से निकाला जाने वाला उच्च गुणवत्ता का लौह अयस्क देश-विदेश तक निर्यात किया जाता है, जिससे भारत की औद्योगिक प्रगति को मजबूती मिलती है। इसी कारण किरंदुल और बैलाडीला को 'लोह नगरी' के नाम से विशेष पहचान मिली है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती केवल इसकी प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि यहाँ रहने वाले लोगों का सौहार्द, सरलता और अपनापन भी है। विभिन्न समुदायों के लोग यहाँ प्रेम, भाईचारे और आपसी सम्मान के साथ रहते हैं। आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के प्रति लोगों का गहरा जुड़ाव इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और भी समृद्ध बनाता है, जहाँ मानवता और सद्भावना की मिसाल देखने को मिलती है। किरंदुल और बैलाडीला की वादियों में आने वाला हर व्यक्ति यहाँ की सुंदरता और शांति को अपने दिल में बसाकर लौटता है। पहाड़ों के बीच बसे इस नगर की हर सुबह नई ऊर्जा लेकर आती है और हर शाम प्रकृति की अनुपम छटा बिखेर देती है। यह क्षेत्र बस्तर की आत्मा, छत्तीसगढ़ का गौरव और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक समृद्धि और सौहार्द का प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
रवि सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, किरंदुल और बैलाडीला पर्वतमाला केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की पहचान मानी जाती है। बस्तर अंचल में स्थित यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, विशाल पर्वतमालाओं, घने वनों, शीतल हवाओं और लौह अयस्क की अथाह संपदा से समृद्ध है, जो प्रकृति और विकास का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। अपनी अलौकिक सुंदरता के कारण यह वर्षों से लोगों को आकर्षित करता रहा है, जहाँ की हरी-भरी पहाड़ियाँ, बादलों से ढकी घाटियाँ और शांत वातावरण हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। यही वजह है कि लोग बैलाडीला को प्रेमपूर्वक 'धरती का स्वर्ग' और 'छोटा कश्मीर' कहकर पुकारते हैं। जब बारिश की बूंदें बैलाडीला की पर्वत श्रृंखलाओं को स्पर्श करती हैं, तो पूरा क्षेत्र हरियाली की चादर ओढ़ लेता है। पहाड़ों से गिरते झरनों की मधुर ध्वनि, ठंडी हवाओं का स्पर्श और बादलों के बीच दिखाई देती घाटियों का दृश्य किसी चित्रकारी से कम प्रतीत नहीं होता। सर्दियों के मौसम में सुबह की धुंध और ठंडी हवाएँ पूरे नगर को एक अलग ही सौंदर्य प्रदान करती हैं, जहाँ प्रकृति अपने सबसे सुंदर और शांत स्वरूप में दिखाई देती है। किरंदुल सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यहाँ स्थित एनएमडीसी लिमिटेड की लौह अयस्क खदानें भारत की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित खदानों में शामिल हैं। बैलाडीला पर्वतमाला से निकाला जाने वाला उच्च गुणवत्ता का लौह अयस्क देश-विदेश तक निर्यात किया जाता है, जिससे भारत की औद्योगिक प्रगति को मजबूती मिलती है। इसी कारण किरंदुल और बैलाडीला को 'लोह नगरी' के नाम से विशेष पहचान मिली है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती केवल इसकी प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि यहाँ रहने वाले लोगों का सौहार्द, सरलता और अपनापन भी है। विभिन्न समुदायों के लोग यहाँ प्रेम, भाईचारे और आपसी सम्मान के साथ रहते हैं। आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के प्रति लोगों का गहरा जुड़ाव इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और भी समृद्ध बनाता है, जहाँ मानवता और सद्भावना की मिसाल देखने को मिलती है। किरंदुल और बैलाडीला की वादियों में आने वाला हर व्यक्ति यहाँ की सुंदरता और शांति को अपने दिल में बसाकर लौटता है। पहाड़ों के बीच बसे इस नगर की हर सुबह नई ऊर्जा लेकर आती है और हर शाम प्रकृति की अनुपम छटा बिखेर देती है। यह क्षेत्र बस्तर की आत्मा, छत्तीसगढ़ का गौरव और प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक समृद्धि और सौहार्द का प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
- मोहला-मानपुर से एक दुष्कर्म आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित था।1
- गरियाबंद जिले के मैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत कुल्हाड़ीघाट कैंप से 10 किलोमीटर दूर दड़ईपानी जंगल क्षेत्र में एक बड़ी नक्सल विरोधी कार्रवाई की गई है। एफ/65 बटालियन सीआरपीएफ, जिला पुलिस बल और बीडीएस टीम की संयुक्त पार्टी सर्च अभियान पर निकली थी, जिसके दौरान उन्हें नक्सलियों द्वारा छिपाए गए एक संदिग्ध डंप का पता चला। यह डंप, जिसमें माओवादियों द्वारा विस्फोटक सामग्री रखी गई थी, 12 जून 2026 को दोपहर 12:25 बजे बरामद किया गया। बरामद की गई सामग्री में 15 मीटर कमर्शियल कॉर्डेक्स वायर, 1.5 किलोग्राम गन पाउडर, जिलेटिन रॉड, लगभग 4 किलोग्राम का एक कुकर आईईडी, लगभग 5 किलोग्राम का एक टिफिन आईईडी, छह बीजीएल राउंड, एक एयर गन, एक इंटरसेप्टर, एक इंसास मैगजीन के साथ-साथ दवाइयां और दैनिक उपयोग की अन्य सामग्री शामिल थी। बीडीएस टीम ने मौके पर ही इन आईईडी बमों और अन्य विस्फोटक सामग्री को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। यह संयुक्त कार्रवाई नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा बलों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।4
- राजनांदगांव जिले के ग्राम गठुला की महिलाओं ने अवैध शराब बिक्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बड़ी संख्या में महिलाएं पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं और गांव में चल रहे अवैध शराब के कारोबार को बंद कराने की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। महिलाओं ने आरोप लगाया कि अवैध शराब की बिक्री से गांव का माहौल खराब हो रहा है और इससे परिवारों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।1
- बच्चों के जीवन में सफलता और उज्ज्वल भविष्य के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कांकेतरा गाँव में समृद्धि पब्लिक स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) का शुभारंभ किया गया है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँव के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपने गाँव से दूर न जाना पड़े। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए आज एक सही निर्णय लें और इस नई ग्रामीण पहल को सफल बनाने में अपना सहयोग दें। स्कूल में प्रवेश प्रारंभ हो चुके हैं, जो 'हमारे बच्चों का उज्ज्वल भविष्य, हमारे गाँव का गौरव' के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।1
- बिलासपुर के कोटा क्षेत्र में जिम संचालक निखिल गोस्वामी की हत्या के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों में से एक व्यक्ति मृतक की अपनी पत्नी से बातचीत को लेकर नाराज था। इसी पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पहले निखिल की आंखों में मिर्च पाउडर झोंका और फिर बेरहमी से उसकी पिटाई कर बड़े पत्थर से सिर कुचलकर हत्या कर दी। इस मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका जुलूस भी निकाला। इसके उपरांत, सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हत्या में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।1
- रायगढ़ जिले के चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के अतरमुड़ा में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए एक मकान में चल रहे कथित देह व्यापार के धंधे का भंडाफोड़ किया है। रायगढ़ एसपी के निर्देश पर गठित एक विशेष टीम ने छापेमारी कर मौके से कुल 6 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें 4 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं। पुलिस को लंबे समय से इस मकान में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इसी सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें कई अहम सबूत भी बरामद किए गए हैं। जानकारी के अनुसार, जिस्मफरोसी का यह धंधा किराए के मकान में संचालित हो रहा था। फिलहाल, पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।1
- ब्लॉक कांग्रेस कमेटी और भारतीय किसान यूनियन के तत्वावधान में मंगलवार को राजिम में एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली गई और चक्काजाम किया गया। यह प्रदर्शन किसानों को हो रही खाद की किल्लत, बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम, एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी और खाद की कालाबाजारी पर रोक सहित विभिन्न मांगों को लेकर आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक और प्रथम पंचायत मंत्री अमितेष शुक्ल शामिल हुए, जिनके साथ सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे। भारतीय किसान यूनियन की ओर से तेजराम विद्रोही के नेतृत्व में राजिम क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान भी इस आयोजन का हिस्सा बने। किसानों ने राजिम कृषि उपज मंडी से पंडित सुंदर लाल शर्मा चौक तक ट्रैक्टर रैली निकाली, जिसके बाद चौक पर प्रदर्शनकारियों ने चक्काजाम कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि बुवाई का सीजन होने के बावजूद उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है और कालाबाजारी के कारण दोगुने दाम चुकाने पड़ रहे हैं। उनका यह भी आरोप है कि महंगाई और डीजल के दामों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है, जबकि एमएसपी की कानूनी गारंटी न मिलने से वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। चक्काजाम के दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।4
- कोंडागांव से सामने आई खबर के अनुसार, वहाँ आदिवासियों को उनके जंगल से बेदखल किया जा रहा है। उन्हें जंगल से बाहर निकालने के लिए यह तर्क दिया जा रहा है कि उन्होंने 'औषधीय कब्जा' कर रखा है।1
- 12 जून शुक्रवार को दोपहर 1 बजे मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के आबकारी आयुक्त ने गंडई स्थित कंपोजिट मदिरा दुकान में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बिक्री के मामले में कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत आबकारी उप निरीक्षक प्रभाकर सिरमौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जांच में पाया गया कि दुकान पर पाव शराब की बोतलें 240 रुपये की निर्धारित कीमत के बजाय 250 रुपये में बेची जा रही थीं। इस अनियमितता को गंभीर लापरवाही मानते हुए, प्रभाकर सिरमौर के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत निलंबन आदेश जारी किया गया है। उनकी निलंबन अवधि के लिए मुख्यालय दुर्ग संभागीय उड़नदस्ता कार्यालय निर्धारित किया गया है।1