बिंदु 4. नगर पालिका अधिनियम के अनुसार हर महीने बोर्ड बैठक अनिवार्य है, लेकिन कई महीनों से कोई मीटिंग नहीं बुलाई गई। इससे पारदर्शिता, जनहित और बोर्ड सदस्यों की सहभागिता पर सीधा असर पड़ा है। ऐसी लापरवाही की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कर, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाती है। बिंदु 5. अध्यक्ष, ईओ अलका मौर्या, लिपिक एखलाक अहमद व अन्य लोग नगर पंचायत का तेल अपनी व्यक्तिगत गाड़ियों/बाइक में भी भरवाते हैं, जबकि कागजों में ये तेल सफाई गाड़ियों और मशीनों के नाम पर दर्शाया जाता है। इससे न केवल सरकारी फंड की चोरी हो रही है, बल्कि सरकारी तेल को निजी उपयोग में लगाकर सीधा भ्रष्टाचार और पद का घोर दुरुपयोग किया जा रहा है। बिंदु 6. नगर पंचायत ने 33.67 लाख रुपये खर्च कर एमआरएफ (Material Recovery Facility) सेंटर बनाया गया और करीब 16-17 लाख की मशीनें लगवाई गयी है, लेकिन सेंटर अक्सर बंद रहता है। मशीनें बेकार पड़ी हैं. कोई सचालन नहीं, और कचरे की प्रोसेसिंग के बजाय सारा कूड़ा-कचरा खुलेआम सड़क किनारे गिराया जा रहा है। इससे नगर में गंदगी फैल रही है. जनता की सेहत और सरकारी पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। बिंदु 7. अध्यक्ष, E.O. अलका मौर्या व लिपिक एकलाख अहमद नीलाम करने हेतु लगभग 15 वर्षों से रखी विद्युत/अन्य सामग्रियां जैसे सोलर बैट्री, सोलर पैनल, led लाइट, कुर्सी, मेज, ठेला गाड़ी, हाथ गाड़ी, इण्डिया मार्का हैण्ड पम्प मरम्मत पाइप आदि को बेचकर धनउगाही का कार्य किया गया है। लगभग 15 वर्ष पहले से क्रय की गयी विद्युत/अन्य सामग्रियों की वर्षंवार मिलान कराई जाय कि सामग्री कहा लगायी गयी है व् खराब होने के उपरान्त कहा रखी गयी है। बिंदु 8. अध्यक्ष, ईओ, अलका मौर्या लिपिक एकलाख अहमद और ठेकेदार की मिलीभगत से आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में कथित रूप से अपने ड्राइवरों के चैतन के साथ साथ लगभग 20 से ज्यादा फर्जी नाम जोड़े गए हैं और उनकी आह में वेतन निकाला जा रहा है। और ज्यादातर कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से जबरन उनका वेतन या आधा हिस्सा/पैसा वापस लिया जाता है, पैसे न देने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है- यहां तक कि कई लोगों को निकाल भी दिया गया है। मांग है कि इनके कार्यकाल के दौरान, किसके आदेश से किसे रखा हटाया गया, तथा रखने व हटाने के लिए निदेशक नगरीय निकाय महोदय से अनुमति ली गई थी या नहीं एवं मानक के अनुसार ऑउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारी रखे गए है या मानक से अधिक हुन सब की जांच कराई जाए। व नगर पंचायत अजमतगढ़ अधिशासी अधिकारी अलका मौर्या द्वारा 'लकी" नामक छात्र को आउटसोर्सिंग के माध्यम से फर्जी कर्मचारी दिखाकर चेतन निकासी की गई है। वास्तबिक रूप से बह प्रतिदिन स्मिथ इंटर कॉलेज, अजमतगढ़ में अध्ययन करता रहा, जहाँ उसकी नियमित उपस्थिति (हाजिरी) दर्ज है, जबकि उसी अवधि में नगर पंचायत में भी उसकी उपस्थिति दर्शाकर वेतन उठाया गया है। यह स्पष्ट रूप से फर्जी हाजिरी, फर्जी आउटसोर्सिंग एवं संगठित धनउगाही का मामला है। बिंदु 9. पिछले कार्यकाल में नगर पंचायत द्वारा खरीदी गई मोबाइल टॉयलेट, टैंकर, आदि गाड़ियां बिना किसी रखरखाव के निश्प्रयोज्य और खराब हालत में लावारिस पड़ी हैं. जिनमें हवा तक नहीं है- यह करोड़ों की सरकारी संपत्ति की बर्बादी, सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और अधिकारियों की घोर लापरवाही भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है। बिंदु 10. नगर पंचायत में टैंकर शुल्क, जेसीबी शुल्क, सेफ्टी टैंक शुल्क आदि की धनराशियों में से ज्यादातर धनराशियों को नगर निधि में जमा ना कर धनउगाही का कार्य किया जाता है। बिंदु 11. नगर पंचायत अजमतगढ़ में ज्यादातर पोखरियों को नीलाम ना करके उसमे व्यक्तिगत रूप से मछली पालन कराकर धनउगाही किया जा रहा है बिंदु 12. अध्यक्ष, ईओ, लिपिक और ठेकेदार सरकारी वाहनों, मशीनों, तेल व सफाई कर्मचारियों का निजी कार्यों में खुलकर दुरुपयोग कर रहे हैं। यह पद और संसाधनों की गंभीर अनदेखी व भ्रष्टाचार का सीधा उदाहरण है। बिंदु 13. नगर पंचायत अजमतगढ़ के अधीन संचालित वाहनों जैसे मोबाइल टैंकर, ट्रैक्टर, जेसीबी, कचरा वाहन एवं अन्य शासकीय गाड़ियों का मोटर वाहन अधिनियम के प्रायधानों के अनुसार अनिवार्य बीमा नहीं कराया गया है। बीमा न होने की स्थिति में किसी भी दुर्घटना, जनहानि अथवा संपत्ति क्षति की दशा में सरकार को भारी वित्तीय दायित्व वहन करना पड़ सकता है। बिंदु 14. नगर पंचायत अजमतगढ़ द्वारा कराई गई पोखरी/तालाबों की नीलामी में प्रचलित नियमों के अनुसार नीलामी के समय कुल नीलामी राशि का कम से कम 50 प्रतिशत धन तत्काल नगर निधि में जमा कराया जाना अनिवार्य है। परंतु व्यवहार में नीलामी उपरांत न तो निर्धारित 50 प्रतिशत धनराशि तत्काक्ष जमा कराई गई और न ही इस संबंध में कोई वैध शिथिलीकरण आदेश अभिलेखों में उपलब्ध है। इस प्रकार बिना धनराशि जमा कराए नीलामी अधिकार देना राजस्य हानि, पक्षपात एवं मिलीभगत को दर्शाता है। इससे यह संदेह प्रबल होता है कि संबंधित व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुँबाने के उद्देश्य से नियमों को जानबूझकर दरकिनार किया गया। बिंदु 15. नगर पंचायत अजमतगढ़ में कार्यरत अधिशासी अधिकारी (EO) श्रीमती अलका मौर्य द्वारा अपने निजी ड्राइवर बृजभान यादव का वेतन नगर पंचायत निधि से आउटसोर्सिंग के माध्यम से दिलाया गया। उक्त व्यक्ति की नियुक्ति नगर पंचायत की स्वीकृत आवश्यकता, पद सृजन अथवा पारदर्शी चयन प्रक्रिया के अंतर्गत नहीं की गई, बल्कि व्यक्तिगत लाभ हेतु शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया। बिंदु 16. एक सामुदायिक शौचालय पूर्व में ग्राम पंचायत मसोना द्वारा निर्मित किया गया था। पश्चातबर्ती अवधि में नगर पंचायत अजमतगढ़ के सीमा विस्तार के उपरांत यह परिसंपत्ति नगर पंचायत अजमतगढ़ के अधिकार क्षेत्र में आ गई। इसके बावजूद, सीमा विस्तार के बाद से नगर पंचायत अजमतगढ़ द्वारा उक्त सामुदायिक शौचालय को लावारिश, बंद एवं अनुपयोगी अवस्था में छोड़ दिया गया है।
बिंदु 4. नगर पालिका अधिनियम के अनुसार हर महीने बोर्ड बैठक अनिवार्य है, लेकिन कई महीनों से कोई मीटिंग नहीं बुलाई गई। इससे पारदर्शिता, जनहित और बोर्ड सदस्यों की सहभागिता पर सीधा असर पड़ा है। ऐसी लापरवाही की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कर, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाती है। बिंदु 5. अध्यक्ष, ईओ अलका मौर्या, लिपिक एखलाक अहमद व अन्य लोग नगर पंचायत का तेल अपनी व्यक्तिगत गाड़ियों/बाइक में भी भरवाते हैं, जबकि कागजों में ये तेल सफाई गाड़ियों और मशीनों के नाम पर दर्शाया जाता है। इससे न केवल सरकारी फंड की चोरी हो रही है, बल्कि सरकारी तेल को निजी उपयोग में लगाकर सीधा भ्रष्टाचार और पद का घोर दुरुपयोग किया जा रहा है। बिंदु 6. नगर पंचायत ने 33.67 लाख रुपये खर्च कर एमआरएफ (Material Recovery Facility) सेंटर बनाया गया और करीब 16-17 लाख की मशीनें लगवाई गयी है, लेकिन सेंटर अक्सर बंद रहता है। मशीनें बेकार पड़ी हैं. कोई सचालन नहीं, और कचरे की प्रोसेसिंग के बजाय सारा कूड़ा-कचरा खुलेआम सड़क किनारे गिराया जा रहा है। इससे नगर में गंदगी फैल रही है. जनता की सेहत और सरकारी पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। बिंदु 7. अध्यक्ष, E.O. अलका मौर्या व लिपिक एकलाख अहमद नीलाम करने हेतु लगभग 15 वर्षों से रखी विद्युत/अन्य सामग्रियां जैसे सोलर बैट्री, सोलर पैनल, led लाइट, कुर्सी, मेज, ठेला गाड़ी, हाथ गाड़ी, इण्डिया मार्का हैण्ड पम्प मरम्मत पाइप आदि को बेचकर धनउगाही का कार्य किया गया है। लगभग 15 वर्ष पहले से क्रय की गयी विद्युत/अन्य सामग्रियों की वर्षंवार मिलान कराई जाय कि सामग्री कहा लगायी गयी है व् खराब होने के उपरान्त कहा रखी गयी है। बिंदु 8. अध्यक्ष, ईओ, अलका मौर्या लिपिक एकलाख अहमद और ठेकेदार की मिलीभगत से आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में कथित रूप से अपने ड्राइवरों के चैतन के साथ साथ लगभग 20 से ज्यादा फर्जी नाम जोड़े गए हैं और उनकी आह में वेतन निकाला जा रहा है। और ज्यादातर कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से जबरन उनका वेतन या आधा हिस्सा/पैसा वापस लिया जाता है, पैसे न देने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है- यहां तक कि कई लोगों को निकाल भी दिया गया है। मांग है कि इनके कार्यकाल के दौरान, किसके आदेश से किसे रखा हटाया गया, तथा रखने व हटाने के लिए निदेशक नगरीय निकाय महोदय से अनुमति ली गई थी या नहीं एवं मानक के अनुसार ऑउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारी रखे गए है या मानक से अधिक हुन सब की जांच कराई जाए। व नगर पंचायत अजमतगढ़ अधिशासी अधिकारी अलका मौर्या द्वारा 'लकी" नामक छात्र को आउटसोर्सिंग के माध्यम से फर्जी कर्मचारी दिखाकर चेतन निकासी की गई है। वास्तबिक रूप से बह प्रतिदिन स्मिथ इंटर कॉलेज, अजमतगढ़ में अध्ययन करता रहा, जहाँ उसकी नियमित उपस्थिति (हाजिरी) दर्ज है, जबकि उसी अवधि में नगर पंचायत में भी उसकी उपस्थिति दर्शाकर वेतन उठाया गया है। यह स्पष्ट रूप से फर्जी हाजिरी, फर्जी आउटसोर्सिंग एवं संगठित धनउगाही का मामला है। बिंदु 9. पिछले कार्यकाल में नगर पंचायत द्वारा खरीदी गई मोबाइल टॉयलेट, टैंकर, आदि गाड़ियां बिना किसी रखरखाव के निश्प्रयोज्य और खराब हालत में लावारिस पड़ी हैं. जिनमें हवा तक नहीं है- यह करोड़ों की सरकारी संपत्ति की बर्बादी, सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और अधिकारियों की घोर लापरवाही भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है। बिंदु 10. नगर पंचायत में टैंकर शुल्क, जेसीबी शुल्क, सेफ्टी टैंक शुल्क आदि की धनराशियों में से ज्यादातर धनराशियों को नगर निधि में जमा ना कर धनउगाही का कार्य किया जाता है। बिंदु 11. नगर पंचायत अजमतगढ़ में ज्यादातर पोखरियों को नीलाम ना करके उसमे व्यक्तिगत रूप से मछली पालन कराकर धनउगाही किया जा रहा है बिंदु 12. अध्यक्ष, ईओ, लिपिक और ठेकेदार सरकारी वाहनों, मशीनों, तेल व सफाई कर्मचारियों का निजी कार्यों में खुलकर दुरुपयोग कर रहे हैं। यह पद और संसाधनों की गंभीर अनदेखी व भ्रष्टाचार का सीधा उदाहरण है। बिंदु 13. नगर पंचायत अजमतगढ़ के अधीन संचालित वाहनों जैसे मोबाइल टैंकर, ट्रैक्टर, जेसीबी, कचरा वाहन एवं अन्य शासकीय गाड़ियों का मोटर वाहन अधिनियम के प्रायधानों के अनुसार अनिवार्य बीमा नहीं कराया गया है। बीमा न होने की स्थिति में किसी भी दुर्घटना, जनहानि अथवा संपत्ति क्षति की दशा में सरकार को भारी वित्तीय दायित्व वहन करना पड़ सकता है। बिंदु 14. नगर पंचायत अजमतगढ़ द्वारा कराई गई पोखरी/तालाबों की नीलामी में प्रचलित नियमों के अनुसार नीलामी के समय कुल नीलामी राशि का कम से कम 50 प्रतिशत धन तत्काल नगर निधि में जमा कराया जाना अनिवार्य है। परंतु व्यवहार में नीलामी उपरांत न तो निर्धारित 50 प्रतिशत धनराशि तत्काक्ष जमा कराई गई और न ही इस संबंध में कोई वैध शिथिलीकरण आदेश अभिलेखों में उपलब्ध है। इस प्रकार बिना धनराशि जमा कराए नीलामी अधिकार देना राजस्य हानि, पक्षपात एवं मिलीभगत को दर्शाता है। इससे यह संदेह प्रबल होता है कि संबंधित व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुँबाने के उद्देश्य से नियमों को जानबूझकर दरकिनार किया गया। बिंदु 15. नगर पंचायत अजमतगढ़ में कार्यरत अधिशासी अधिकारी (EO) श्रीमती अलका मौर्य द्वारा अपने निजी ड्राइवर बृजभान यादव का वेतन नगर पंचायत निधि से आउटसोर्सिंग के माध्यम से दिलाया गया। उक्त व्यक्ति की नियुक्ति नगर पंचायत की स्वीकृत आवश्यकता, पद सृजन अथवा पारदर्शी चयन प्रक्रिया के अंतर्गत नहीं की गई, बल्कि व्यक्तिगत लाभ हेतु शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया। बिंदु 16. एक सामुदायिक शौचालय पूर्व में ग्राम पंचायत मसोना द्वारा निर्मित किया गया था। पश्चातबर्ती अवधि में नगर पंचायत अजमतगढ़ के सीमा विस्तार के उपरांत यह परिसंपत्ति नगर पंचायत अजमतगढ़ के अधिकार क्षेत्र में आ गई। इसके बावजूद, सीमा विस्तार के बाद से नगर पंचायत अजमतगढ़ द्वारा उक्त सामुदायिक शौचालय को लावारिश, बंद एवं अनुपयोगी अवस्था में छोड़ दिया गया है।
- बिंदु 4. नगर पालिका अधिनियम के अनुसार हर महीने बोर्ड बैठक अनिवार्य है, लेकिन कई महीनों से कोई मीटिंग नहीं बुलाई गई। इससे पारदर्शिता, जनहित और बोर्ड सदस्यों की सहभागिता पर सीधा असर पड़ा है। ऐसी लापरवाही की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कर, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाती है। बिंदु 5. अध्यक्ष, ईओ अलका मौर्या, लिपिक एखलाक अहमद व अन्य लोग नगर पंचायत का तेल अपनी व्यक्तिगत गाड़ियों/बाइक में भी भरवाते हैं, जबकि कागजों में ये तेल सफाई गाड़ियों और मशीनों के नाम पर दर्शाया जाता है। इससे न केवल सरकारी फंड की चोरी हो रही है, बल्कि सरकारी तेल को निजी उपयोग में लगाकर सीधा भ्रष्टाचार और पद का घोर दुरुपयोग किया जा रहा है। बिंदु 6. नगर पंचायत ने 33.67 लाख रुपये खर्च कर एमआरएफ (Material Recovery Facility) सेंटर बनाया गया और करीब 16-17 लाख की मशीनें लगवाई गयी है, लेकिन सेंटर अक्सर बंद रहता है। मशीनें बेकार पड़ी हैं. कोई सचालन नहीं, और कचरे की प्रोसेसिंग के बजाय सारा कूड़ा-कचरा खुलेआम सड़क किनारे गिराया जा रहा है। इससे नगर में गंदगी फैल रही है. जनता की सेहत और सरकारी पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। बिंदु 7. अध्यक्ष, E.O. अलका मौर्या व लिपिक एकलाख अहमद नीलाम करने हेतु लगभग 15 वर्षों से रखी विद्युत/अन्य सामग्रियां जैसे सोलर बैट्री, सोलर पैनल, led लाइट, कुर्सी, मेज, ठेला गाड़ी, हाथ गाड़ी, इण्डिया मार्का हैण्ड पम्प मरम्मत पाइप आदि को बेचकर धनउगाही का कार्य किया गया है। लगभग 15 वर्ष पहले से क्रय की गयी विद्युत/अन्य सामग्रियों की वर्षंवार मिलान कराई जाय कि सामग्री कहा लगायी गयी है व् खराब होने के उपरान्त कहा रखी गयी है। बिंदु 8. अध्यक्ष, ईओ, अलका मौर्या लिपिक एकलाख अहमद और ठेकेदार की मिलीभगत से आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में कथित रूप से अपने ड्राइवरों के चैतन के साथ साथ लगभग 20 से ज्यादा फर्जी नाम जोड़े गए हैं और उनकी आह में वेतन निकाला जा रहा है। और ज्यादातर कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से जबरन उनका वेतन या आधा हिस्सा/पैसा वापस लिया जाता है, पैसे न देने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है- यहां तक कि कई लोगों को निकाल भी दिया गया है। मांग है कि इनके कार्यकाल के दौरान, किसके आदेश से किसे रखा हटाया गया, तथा रखने व हटाने के लिए निदेशक नगरीय निकाय महोदय से अनुमति ली गई थी या नहीं एवं मानक के अनुसार ऑउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारी रखे गए है या मानक से अधिक हुन सब की जांच कराई जाए। व नगर पंचायत अजमतगढ़ अधिशासी अधिकारी अलका मौर्या द्वारा 'लकी" नामक छात्र को आउटसोर्सिंग के माध्यम से फर्जी कर्मचारी दिखाकर चेतन निकासी की गई है। वास्तबिक रूप से बह प्रतिदिन स्मिथ इंटर कॉलेज, अजमतगढ़ में अध्ययन करता रहा, जहाँ उसकी नियमित उपस्थिति (हाजिरी) दर्ज है, जबकि उसी अवधि में नगर पंचायत में भी उसकी उपस्थिति दर्शाकर वेतन उठाया गया है। यह स्पष्ट रूप से फर्जी हाजिरी, फर्जी आउटसोर्सिंग एवं संगठित धनउगाही का मामला है। बिंदु 9. पिछले कार्यकाल में नगर पंचायत द्वारा खरीदी गई मोबाइल टॉयलेट, टैंकर, आदि गाड़ियां बिना किसी रखरखाव के निश्प्रयोज्य और खराब हालत में लावारिस पड़ी हैं. जिनमें हवा तक नहीं है- यह करोड़ों की सरकारी संपत्ति की बर्बादी, सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और अधिकारियों की घोर लापरवाही भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है। बिंदु 10. नगर पंचायत में टैंकर शुल्क, जेसीबी शुल्क, सेफ्टी टैंक शुल्क आदि की धनराशियों में से ज्यादातर धनराशियों को नगर निधि में जमा ना कर धनउगाही का कार्य किया जाता है। बिंदु 11. नगर पंचायत अजमतगढ़ में ज्यादातर पोखरियों को नीलाम ना करके उसमे व्यक्तिगत रूप से मछली पालन कराकर धनउगाही किया जा रहा है बिंदु 12. अध्यक्ष, ईओ, लिपिक और ठेकेदार सरकारी वाहनों, मशीनों, तेल व सफाई कर्मचारियों का निजी कार्यों में खुलकर दुरुपयोग कर रहे हैं। यह पद और संसाधनों की गंभीर अनदेखी व भ्रष्टाचार का सीधा उदाहरण है। बिंदु 13. नगर पंचायत अजमतगढ़ के अधीन संचालित वाहनों जैसे मोबाइल टैंकर, ट्रैक्टर, जेसीबी, कचरा वाहन एवं अन्य शासकीय गाड़ियों का मोटर वाहन अधिनियम के प्रायधानों के अनुसार अनिवार्य बीमा नहीं कराया गया है। बीमा न होने की स्थिति में किसी भी दुर्घटना, जनहानि अथवा संपत्ति क्षति की दशा में सरकार को भारी वित्तीय दायित्व वहन करना पड़ सकता है। बिंदु 14. नगर पंचायत अजमतगढ़ द्वारा कराई गई पोखरी/तालाबों की नीलामी में प्रचलित नियमों के अनुसार नीलामी के समय कुल नीलामी राशि का कम से कम 50 प्रतिशत धन तत्काल नगर निधि में जमा कराया जाना अनिवार्य है। परंतु व्यवहार में नीलामी उपरांत न तो निर्धारित 50 प्रतिशत धनराशि तत्काक्ष जमा कराई गई और न ही इस संबंध में कोई वैध शिथिलीकरण आदेश अभिलेखों में उपलब्ध है। इस प्रकार बिना धनराशि जमा कराए नीलामी अधिकार देना राजस्य हानि, पक्षपात एवं मिलीभगत को दर्शाता है। इससे यह संदेह प्रबल होता है कि संबंधित व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुँबाने के उद्देश्य से नियमों को जानबूझकर दरकिनार किया गया। बिंदु 15. नगर पंचायत अजमतगढ़ में कार्यरत अधिशासी अधिकारी (EO) श्रीमती अलका मौर्य द्वारा अपने निजी ड्राइवर बृजभान यादव का वेतन नगर पंचायत निधि से आउटसोर्सिंग के माध्यम से दिलाया गया। उक्त व्यक्ति की नियुक्ति नगर पंचायत की स्वीकृत आवश्यकता, पद सृजन अथवा पारदर्शी चयन प्रक्रिया के अंतर्गत नहीं की गई, बल्कि व्यक्तिगत लाभ हेतु शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया। बिंदु 16. एक सामुदायिक शौचालय पूर्व में ग्राम पंचायत मसोना द्वारा निर्मित किया गया था। पश्चातबर्ती अवधि में नगर पंचायत अजमतगढ़ के सीमा विस्तार के उपरांत यह परिसंपत्ति नगर पंचायत अजमतगढ़ के अधिकार क्षेत्र में आ गई। इसके बावजूद, सीमा विस्तार के बाद से नगर पंचायत अजमतगढ़ द्वारा उक्त सामुदायिक शौचालय को लावारिश, बंद एवं अनुपयोगी अवस्था में छोड़ दिया गया है।1
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- Post by चन्दन भइया1
- विंध्य बलराम न्यूज. विंध्य क्षेत्र के सीधी जिले अंतर्गत रामपुर नैकिन तहसील के ग्राम तितिरा बघेलान में आज प्रकृति का एक रौद्र रूप देखने को मिला। आज दिनांक 4 मई 2026 को दोपहर 3:00 बजे के बाद अचानक मौसम ने करवट ली और देखते ही देखते आसमान में काले बादलों का डेरा जमा हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि पहले हल्की बूंदाबांदी शुरू हुई, लेकिन कुछ ही पलों में वर्षा के साथ आसमान से बड़े-बड़े पत्थर (ओले) गिरने लगे। करीब आधे घंटे तक चली इस पत्थर रूपी मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र को सफेद चादर से ढक दिया। दोपहर के समय हुए इस अचानक घटनाक्रम से जहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर इस बेमौसम पत्थरबाजी ने क्षेत्र के किसानों और आम जनमानस की चिंताएं बढ़ा दी हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पत्थरों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि घर से बाहर निकलना भी दूभर हो गया था और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। अचानक हुई इस वर्षा और पत्थरबाजी से क्षेत्र की वनस्पति और कच्चे मकानों को भी आंशिक नुकसान पहुँचने की आशंका जताई जा रही है। समाचार लिखे जाने तक आसमान में बादल छाए हुए हैं और रुक-रुक कर वर्षा का दौर जारी है। विंध्य बलराम न्यूज की टीम स्थानीय निवासियों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील करती है।2
- विंध्य में मौसम की मार: ओलावृष्टि से तबाही आम के फल टूटे, गाड़ियों के कांच फूटे, मवेशी हुए अचेत... रीवा के गुढ़, रायपुर कार्चुलियांन, सीधी के रामपुर क्षेत्र में जमकर हुई ओलावृष्टि... रीवा जिले के ग्रामीण अंचलों पर प्रकृति का जोरदार हुआ प्रहार कहीं ओलावृष्ट तो कहीं जोरदार बारिश जिसके चलते जनजीवन हुआ प्रभावित किसने की गेहूं की फसल बर्बादी की कगार पर तो वही छोटे किसान जो प्याज लगा कर रखे थे उन किसानों की तकदीर पर पत्थर पड़ गया मध्य प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रदेश के अन्य दाताओं के लिए गेहूं खरीदी केंद्र बनाया गया था जहां खरीदी केंद्र पर किसान अपने अनाज लेकर गए हुए थे खरीदी केंद्र में किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण किसानों का रखा हुआ अनाज पूर्ण रूप से भीग जाने के कारण वह नष्ट हो गया है तो दूसरी ओर देखा जाए तो जिन किसानों के अनाज भी सहकारी समिति द्वारा खरीदी की गई है सुरक्षा की कोई व्यवस्था न होने के कारण जिले में हजारों कुंतल अनाज पानी गिरने के कारण नष्ट हो चुके हैं एक तरफ तो प्रकृति की मार किसानों के ऊपर चल रही है तो वहीं दूसरी ओर राज्य शासन की नियमों की अनदेखी करते हुए खरीदी केंद्र पर स्थापित कर्मचारियों द्वारा 50 किलो 100 ग्राम की जगह 50 किलो 400 ग्राम अनाज की खरीदारी कर रहे हैं यह सेंटर जिले के समस्त खरीदी केदो में मनमानी की जा रही है3
- करछना में धूल भरी तेज आंधी, अचानक बदला मौसम का मिजाज1
- आज प्रयागराज त्रिवेणी संगम पर जहाँ तकनीक और शौर्य मिलते हैं इस वर्ष की संगोष्ठी का विषय 'रक्षा त्रिवेणी संगम - जहाँ प्रौद्योगिकी, उद्योग और सैनिक कौशल का संगम होता है' रखा गया है। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इसे 'ज्ञान और शक्ति का महाकुंभ' करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रयागराज में तीन नदियों का मिलन होता है, उसी तरह यह आयोजन सेना, उद्योग जगत और वैज्ञानिकों के बीच एक सेतु का काम करेगा। रक्षा मंत्री ने वैश्विक परिदृश्य और युद्ध के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं: रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्रोन और सेंसर गेम चेंजर बनकर उभरे हैं। आज के दौर में किसी भी चीज़ को हथियार (Weaponize) बनाया जा सकता है। *AI और साइबर स्पेस:* राजनाथ सिंह ने कहा कि हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के युग में हैं, जहाँ युद्ध अब साइबर स्पेस में भी लड़े जा रहे हैं। *प्रो-एक्टिव सेना का आह्वान:* उन्होंने सेना से 'एक्टिव' के बजाय 'प्रो-एक्टिव' रहने और 'सरप्राइज एलिमेंट' विकसित करने की अपील की, ताकि दुश्मन सोच भी न सके। उन्होंने चेतावनी दी कि चिकित्सा या शिक्षा में देरी चल सकती है, लेकिन रक्षा तकनीक में पिछड़ना भारी पड़ सकता है। यह तीन दिवसीय आयोजन (4 से 6 मई) भारतीय सेना की उत्तरी और मध्य कमान तथा सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चररर्स (SIDM) के सहयोग से किया जा रहा है। 284 कंपनियां: प्रदर्शनी में देश भर के स्टार्टअप्स, MSMEs और निजी रक्षा फर्मों ने हिस्सा लिया राजनाथ सिंह ने यूपी के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण सेना को मजबूती दे रहा है। उन्होंने हाल ही में लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे को भी रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों से 'डिफेंस कॉरिडोर' की तर्ज पर 'नॉलेज कॉरिडोर' बनाने की भी अपील की।1
- Post by Bablu,Namdev1