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- चोपन थाना परिसर में रफ्तार शिविर का हुआ आयोजन थाना प्रभारी समेत स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा1
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- जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसानों को अब किसान सम्मन निधि नहीं मिलेगी उन्होंने कहा कि जिंदगी किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है और तत्काल फॉर्म रजिस्ट्री करवा लें क्योंकि बिना फार्मर रजिस्ट्री हुई किसान सम्मन निधि की किस्त उनके खाते में नहीं भेजी जाएगी उन्होंने कहा कुछ ऐसे भी मामले आए हैं इनमें देखा गया है कि कुछ मृतक भी हैं जिनकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सकती उन मृतकों की किसान सम्मान निधि की धनराशि रोक दी गई है,किसी भी अपात्र के खाते में किसान सम्मान निधि नहीं भेजी जाएगी।1
- कोन/सोनभद्र। जनपद के नवसृजित विकास खंड कोन में केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना ज़मीनी हकीकत में पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही है। फ़्लोरोसिस प्रभावित कचनरवा और कुड़वा समेत दर्जनों गांवों में “हर घर नल” योजना अब लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी और आक्रोश का कारण बन चुकी है। वर्षों पहले पाइप लाइन बिछी, टंकियां बनीं, कनेक्शन दिए गए—लेकिन आज तक कई घरों में एक बूंद पानी नहीं पहुंचा। नतीजा यह है कि ग्रामीण आज भी नदी, नाले और दूषित स्रोतों का पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। सड़कों पर उतरे ग्रामीण, लगे मुर्दाबाद के नारे सोमवार को कुड़वा गांव में समाजसेवी सोमारु यादव की अगुवाई में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोगों ने जल निगम और कार्यदायी संस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत और प्रदर्शन के बावजूद न तो जलापूर्ति शुरू हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई। “नल लगे, पानी गायब”—ग्रामीणों का आरोप स्थानीय लोगों के अनुसार: आधार कार्ड के आधार पर कनेक्शन तो दे दिए गए, लेकिन नलों से कभी पानी नहीं आया पाइपलाइन की गुणवत्ता बेहद खराब है, कई जगहों पर मानकों की अनदेखी सड़क किनारे पाइप ढककर खानापूर्ति की गई, लेकिन गांव के अंदर पानी नहीं पहुंचा कचनरवा के असनाबांध वार्ड-3, बागेसोती के सिंगा टोला और बड़ाप गांव जैसे कई इलाके आज भी जलापूर्ति से वंचित हैं, जबकि ये क्षेत्र जलशोधन संयंत्र (WTP) के नजदीक हैं। फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर लोग फ्लोरोसिस प्रभावित इन इलाकों में साफ पानी की कमी ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। समाजसेवी बिहारी प्रसाद यादव और जवाहिर उरांव का कहना है कि— “लोग आज भी नदी-नाले और चुहाड़ का दूषित पानी पी रहे हैं, जिससे बीमारी और मौत का खतरा बढ़ गया है।”ग्रामीणों का दावा है कि कई लोग फ्लोरोसिस की चपेट में आ चुके हैं और कुछ की जान भी जा चुकी है। “करोड़ों की योजना बनी शोपीस”—गंभीर आरोप ग्राम प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष लक्ष्मी कुमार जायसवाल ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी पानी टंकी सिर्फ शोपीस बनकर रह गई निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और धन का बंदरबांट हुआ बार-बार शिकायत के बावजूद जांच नहीं हुई उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ट्रांसफार्मर हटाने पर भी उठे सवाल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कचनरवा WTP पर लगा 2500 KVA ट्रांसफार्मर हटाकर दूसरी जगह ले जाया गया, जिससे जलापूर्ति और बाधित हो गई। हालांकि, संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर सुदर्शन विंद का कहना है कि ट्रांसफार्मर “अंडर कैपेसिटी” होने के कारण हटाया गया है और जल्द ही नया ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इंटेकवेल (सोर्स) पर पानी की कमी है और प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजा गया है। अधिकारी संपर्क से बाहर इस पूरे मामले पर जल निगम के अधिशासी अभियंता अरुण सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। बड़ा सवाल—गर्मी में मिलेगा पानी या फिर वादों का सूखा? सबसे बड़ा सवाल यही है कि भीषण गर्मी के इस दौर में क्या इन गांवों को पीने का पानी मिल पाएगा, या फिर करोड़ों की यह योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी? ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।4
- आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी मांग की, जो सिर्फ एक नामकरण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और गौरव से जुड़ा हुआ मुद्दा है। सोनभद्र के चुर्क तिराहा छपका को “वंदे मातरम् चौक” बनाने की मांग तेज हो गई है। विश्व हिंदू महासंघ उत्तर प्रदेश की जिला इकाई ने इसको लेकर प्रशासन से औपचारिक अनुरोध किया है। यह मांग ऐसे खास मौके पर उठी है—जब देश मना रहा है भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहादत दिवस और साथ ही “वंदे मातरम्” गीत की 151वीं वर्षगांठ। संगठन का कहना है कि “वंदे मातरम्” केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है… एक ऐसा उद्घोष, जिसने वीरों के दिलों में जोश भर दिया और उन्हें हंसते-हंसते बलिदान देने की ताकत दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विचारधारा का हवाला देते हुए संगठन ने कहा कि हर जिले में एक “वंदे मातरम् चौक” होना चाहिए, जो देशभक्ति का प्रतीक बने। प्रस्ताव के अनुसार, इस चौक को शहीदों के चित्र, तिरंगा ध्वज, यातायात संकेत और “वंदे मातरम्” की पट्टिका से सजाया जाएगा… ताकि हर गुजरने वाला नागरिक देशप्रेम की भावना से प्रेरित हो। अब सवाल ये है—क्या प्रशासन इस मांग को मंजूरी देगा? और क्या चुर्क तिराहा जल्द ही “वंदे मातरम् चौक” के नाम से जाना जाएगा?1
- ओबरा (सोनभद्र)। शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के पावन अवसर पर सोमवार को स्थानीय गांधी मैदान में 'सोन चेतना सामाजिक संगठन' के तत्वाधान में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक अग्रहरी ने अमर शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर नमन करते हुए ओबरा नगर की वर्तमान जर्जर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए अभिषेक अग्रहरी ने तीखा प्रहार किया कि जिन क्रांतिकारियों ने शोषण मुक्त और न्यायपूर्ण भारत का सपना देखा था, आज उन्हीं के बलिदान की धरती ओबरा प्रशासनिक उत्पीड़न और जनमानस की उपेक्षा का केंद्र बन चुकी है। नगर में समस्याओं का अंबार लगा है ओबरा इंटर कॉलेज का निजीकरण कर गरीब बच्चों की शिक्षा छीनी जा रही है, ओबरा अस्पताल स्वयं वेंटिलेटर पर है और स्थानीय परियोजनाओं में योग्यता होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दरकिनार किया जा रहा है। सबसे भयावह स्थिति श्रमिक वर्ग की है, जहाँ मजदूरों से 12-12 घंटे का कठिन परिश्रम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें भुगतान मात्र 8 घंटे का भी नहीं मिल रहा है।CSR फंड का दुरुपयोग हो रहा है अभिषेक अग्रहरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ओबरा की इस बदहाली का मुख्य कारण स्थानीय जनमानस का आपसी बिखराव और एकजुटता की कमी है, जिसका सीधा फायदा उठाकर प्रशासनिक अधिकारी और ठेकेदार आम आदमी का शोषण कर रहे हैं। जब तक ओबरा का नागरिक अपनी जाति और व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर एक मंच पर नहीं आएगा, तब तक न्याय की उम्मीद बेमानी है। ठेका आवंटन में पारदर्शिता का अभाव और भुगतान की अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने पर भी न्याय न मिलना लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से विकास पाठक, सूर्य पटेल, संजय गौतम, सिद्धांत पटेल, बाबूलाल सोनकर सहित जागरूक नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी जब ओबरा का जनमानस संगठित होकर अपने संवैधानिक अधिकारों, पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार मुक्त ऊर्जा नगरी के लिए साझा संघर्ष का बिगुल फूंकेगा।1
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