UPI पर MDR लागू होने के प्रस्ताव के विरोध में ज्ञापन UPI पर MDR लागू होने के UPI पर MDR लागू होने के प्रस्ताव के विरोध में ज्ञापन। बांदा UPI पर MDR लागू होने के प्रस्ताव के विरोध में आज बांदा के व्यापारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले व्यापारियों ने कहा कि 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR लागू होने से छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। जिला उद्योग व्यापार मंडल बांदा द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि UPI ने डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है, लेकिन नई MDR व्यवस्था से छोटे, मध्यम और फुटकर व्यापारियों में चिंता है। किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, दवा सहित फुटकर व्यापार में मार्जिन पहले से ही कम है, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क की लागत अंततः उपभोक्ता पर ही पड़ेगी। इससे महंगाई बढ़ने और लोग फिर से नकद लेनदेन की ओर लौटने की आशंका है।व्यापार मंडल ने 7 सूत्रीय मांग रखी है, जिसमें छोटे व्यापारियों के लिए UPI को पूरी तरह शुल्क मुक्त रखने, केवल UPI राशि के आधार पर नहीं बल्कि व्यापार की प्रकृति के आधार पर सीमा तय करने और व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापारी संगठनों से परामर्श करने की मांग शामिल है।
UPI पर MDR लागू होने के प्रस्ताव के विरोध में ज्ञापन UPI पर MDR लागू होने के UPI पर MDR लागू होने के प्रस्ताव के विरोध में ज्ञापन। बांदा UPI पर MDR लागू होने के प्रस्ताव के विरोध में आज बांदा के व्यापारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले व्यापारियों ने कहा कि 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR लागू होने से छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। जिला उद्योग व्यापार मंडल बांदा द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि UPI ने डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है, लेकिन नई MDR व्यवस्था से छोटे, मध्यम और फुटकर व्यापारियों में चिंता है। किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, दवा सहित फुटकर व्यापार में मार्जिन पहले से ही कम है, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क की लागत अंततः उपभोक्ता पर ही पड़ेगी। इससे महंगाई बढ़ने और लोग फिर से नकद लेनदेन की ओर लौटने की आशंका है।व्यापार मंडल ने 7 सूत्रीय मांग रखी है, जिसमें छोटे व्यापारियों के लिए UPI को पूरी तरह शुल्क मुक्त रखने, केवल UPI राशि के आधार पर नहीं बल्कि व्यापार की प्रकृति के आधार पर सीमा तय करने और व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापारी संगठनों से परामर्श करने की मांग शामिल है।
- ड्यूटी पर जा रहे वन विभाग के बाबू की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत *बाँदा:* बाँदा जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में वन विभाग में तैनात बाबू की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान *अब्दुल शाहिद (उम्र 40 वर्ष), पुत्र अब्दुल वारिस* के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अब्दुल शाहिद अपनी स्कूटी से बाँदा वन विभाग में अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चौकी के पास दो ट्रक एक-दूसरे को ओवरटेक कर रहे थे, इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से स्कूटी सवार शाहिद ट्रक की चपेट में आ गए और ट्रक के नीचे कुचल गए। हादसा इतना भीषण था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मृतक के चचेरे भाई *अब्दुल मजीद* ने दी। उन्होंने बताया कि शाहिद बाँदा वन विभाग में क्लर्क (बाबू) के पद पर कार्यरत थे। वह शादीशुदा थे और उनका एक बच्चा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।4
- नौगवा गद्दी को ब्राह्मणों से मुक्त कराने के लिए शांति पूर्वक महापंचायत सफल हुई बांदा पुलिस प्रशासन अधिकारियों के बस की बात नहीं रही कबीरपंथियो को न्याय दिलाना महापंचायत रखी गई सोए हुए भ्रष्ट अधिकारियों को जगाने के लिए4
- बांदा में स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ आमरण अनशन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग को लेकर जदयू का आंदोलन। बांदा में स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ आमरण अनशन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग को लेकर जदयू का आंदोलन। बांदा में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं और कथित अनियमितताओं को लेकर जनता दल यूनाइटेड ने आमरण अनशन शुरू किया है। अशोक लाट पर शुरू हुए इस अनिश्चितकालीन अनशन का नेतृत्व जदयू की प्रदेश उपाध्यक्ष और बुंदेलखंड संगठन प्रभारी शालिनी सिंह पटेल कर रही हैं। जदयू ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और विभिन्न शिकायतों की जांच को लेकर प्रशासन के सामने 15 सूत्रीय मांगें रखी हैं। पार्टी का कहना है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक अनशन जारी रहेगा। बांदा के अशोक लाट पर सोमवार को जदयू के आमरण अनशन की शुरुआत हुई। स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं में सुधार और जनसमस्याओं के समाधान की मांग को लेकर शुरू किए गए इस आंदोलन में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय नागरिक भी पहुंचे। अनशन का नेतृत्व जदयू की प्रदेश उपाध्यक्ष और बुंदेलखंड संगठन प्रभारी शालिनी सिंह पटेल कर रही हैं। पार्टी की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी 15 सूत्रीय मांगें प्रशासन के सामने रखी गई हैं। जदयू की प्रमुख मांगों में 300 बेड के मंडलीय अस्पताल को जल्द शुरू कराना और जिला अस्पताल के साथ नरैनी, बबेरू, कमासिन, अतर्रा, तिंदवारी और जसपुरा समेत स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं में सुधार शामिल है। पार्टी ने रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में मरीजों से कथित अवैध वसूली, बाहर की दवाइयां और जांच लिखे जाने जैसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मेडिकल कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। इसके अलावा मेट्रन कार्यालय की कार्यप्रणाली, ड्यूटी और बायोमैट्रिक उपस्थिति से जुड़ी कथित अनियमितताओं, रोस्टर, कर्मचारियों पर कथित दबाव, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की ड्यूटी और वेतन से जुड़े मामलों की जांच की मांग की गई है। जदयू ने वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमानुसार स्थानांतरण नीति लागू करने तथा स्वास्थ्य विभाग से संबंधित पूर्व जांचों और कार्रवाई के अभिलेखों की पुनर्समीक्षा की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है। जदयू की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल का कहना है कि ये मांगें जनहित और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हैं और जब तक इन पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा। बाइट:- शालनी पटेल जेडीयू नेत्री1
- ढोल-नगाड़ों के बीच हुआ था भूमि पूजन, ग्रामीण पूछ रहे—अब सड़क आखिर कब बनेगी?उत्तर प्रदेश सरकार के विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सुखारी पुरवा की तस्वीर पर उठे सवाल बांदा। विकास की तस्वीर अक्सर मंचों और सरकारी बयानों में बेहद चमकदार दिखाई देती है, लेकिन जब नजर गांव की पगडंडियों और बदहाल रास्तों पर जाती है तो कहानी कुछ अलग नजर आती है। नरैनी क्षेत्र के सुखारी पुरवा की सड़क का मामला इसी अंतर को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों के साथ लखनऊ से लेकर दिल्ली तक संघर्ष करने का दावा करने वालों का कहना है कि लगातार प्रयास के बाद सड़क को स्वीकृति मिली। इसके बाद भूमि पूजन भी हुआ। कार्यक्रम के दौरान ढोल-नगाड़े बजे, समर्थकों ने नारे लगाए और माहौल में विकास की उपलब्धि का उत्साह दिखाई दिया। लेकिन अब कार्यक्रम की भीड़ छंट चुकी है, ढोल-नगाड़े शांत हैं और नारों की गूंज भी खत्म हो चुकी है। ग्रामीण आज भी उसी रास्ते पर खड़े हैं, जहां से उनकी परेशानी शुरू होती है। भूमि पूजन हुआ, सड़क कहां है? ग्रामीणों का कहना है कि भूमि पूजन के समय ही उन्होंने सड़क निर्माण को लेकर अपनी चिंता और विरोध दर्ज कराया था। उम्मीद थी कि अब निर्माण कार्य शुरू होगा और वर्षों से खराब रास्ते की समस्या खत्म होगी। लेकिन उनके मुताबिक आज तक सड़क निर्माण धरातल पर दिखाई नहीं दिया। यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब सड़क स्वीकृत हो गई, भूमि पूजन हो गया तो निर्माण कार्य कहां अटका है?विकास की घोषणा कागज पर हो सकती है, भूमि पूजन मंच पर हो सकता है, लेकिन सड़क का असली प्रमाण तभी मिलेगा जब उस पर गड्ढों के बजाय पक्की सड़क और धूल के बजाय निर्माण की तस्वीर दिखाई दे।सरकार के दावे और गांव की हकीकत उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सड़क, संपर्क मार्ग और ग्रामीण विकास को लेकर बड़े स्तर पर दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन सुखारी पुरवा के ग्रामीणों की स्थिति को लेकर सवाल उठाने वालों का कहना है कि सरकारी दावों और गांव की जमीनी हकीकत के बीच अभी भी दूरी दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विकास का पैमाना केवल भूमि पूजन और नारों से तय होना है तो सुखारी पुरवा भी विकसित हो चुका है। लेकिन यदि विकास का मतलब ग्रामीणों को सुरक्षित और सुगम आवागमन देना है तो अभी काम बाकी है।नारों से नहीं, सड़क से मिलेगा जवाब भूमि पूजन के दौरान वाह-वाह और जिंदाबाद के नारे लगाना आसान है, लेकिन निर्माण पूरा होने तक उसकी निगरानी करना असली परीक्षा है। ग्रामीणों का सवाल है कि जिस सड़क के नाम पर कार्यक्रम हुआ, उसका निर्माण कब शुरू होगा और कब पूरा होगा?सड़क ग्रामीणों के लिए सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि बाजार, स्कूल, अस्पताल और रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंचने का माध्यम है। खराब रास्ते का असर सीधे ग्रामीण जीवन पर पड़ता है।इसलिए सुखारी पुरवा के लोगों को अब किसी नए समारोह की नहीं, निर्माण कार्य शुरू होने की सूचना चाहिए।अब कागज नहीं, जमीन पर चाहिए विकास सुखारी पुरवा की सड़क का मामला यही सवाल सामने रखता है कि विकास की योजनाओं का मूल्यांकन आखिर भूमि पूजन से होगा या उनके पूरा होने से? ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—सड़क की स्थिति बताई जाए, निर्माण में देरी का कारण सार्वजनिक किया जाए और यदि कोई बाधा है तो उसे दूर कर काम शुरू कराया जाए। क्योंकि भूमि पूजन एक दिन की तस्वीर है, सड़क वर्षों की जरूरत।दिखावा नहीं, जमीन पर विकास चाहिए। भूमि पूजन नहीं, सड़क चाहिए। बयान जारी करने वालों ने कहा कि जनता सब देख रही है और अपने स्तर पर सवालों का जवाब मांग रही है। हालांकि सड़क निर्माण की वास्तविक स्थिति, स्वीकृति की समयसीमा और कार्यदायी संस्था का पक्ष संबंधित विभाग से सामने आना बाकी है।1
- वीरांगना रानी दुर्गावती समिति के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव के छठे दिन कलाकारों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समां बांधा। वीरांगना रानी दुर्गावती समिति के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव के छठे दिन कलाकारों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर समां बांधा।1
- मकरी गाँव की सुनिए पुकार चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे, लेकिन आज भी कोटेदार के यहाँ जाने वाली सड़क बदहाल! टूटी सड़क • गड्ढे • कीचड़ • गंदगी आखिर कब सुधरेगी हमारे गाँव की यह सड़क? 📢 वादे नहीं, अब काम चाहिए। मकरी गाँव को भी पक्की और सुरक्षित सड़क चाहिए।1
- मौदहा नगर में ऐतिहासिक कंस मेला क्षेत्र का पुलिस अधीक्षक ने किया निरीक्षण 📍 एसपी मृगांक शेखर पाठक ने गुड़ाही बाजार से मीरा तालाब तक लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा। 📍 तालाब के आसपास सतर्कता और नावों की व्यवस्था के दिए निर्देश। 📍 एसडीएम, सीओ, ईओ, कोतवाली प्रभारी समेत पुलिस बल रहा मौजूद।1
- UPI पर MDR लागू होने के प्रस्ताव के विरोध में ज्ञापन UPI पर MDR लागू होने के UPI पर MDR लागू होने के प्रस्ताव के विरोध में ज्ञापन। बांदा UPI पर MDR लागू होने के प्रस्ताव के विरोध में आज बांदा के व्यापारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले व्यापारियों ने कहा कि 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR लागू होने से छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। जिला उद्योग व्यापार मंडल बांदा द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि UPI ने डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है, लेकिन नई MDR व्यवस्था से छोटे, मध्यम और फुटकर व्यापारियों में चिंता है। किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, दवा सहित फुटकर व्यापार में मार्जिन पहले से ही कम है, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क की लागत अंततः उपभोक्ता पर ही पड़ेगी। इससे महंगाई बढ़ने और लोग फिर से नकद लेनदेन की ओर लौटने की आशंका है।व्यापार मंडल ने 7 सूत्रीय मांग रखी है, जिसमें छोटे व्यापारियों के लिए UPI को पूरी तरह शुल्क मुक्त रखने, केवल UPI राशि के आधार पर नहीं बल्कि व्यापार की प्रकृति के आधार पर सीमा तय करने और व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापारी संगठनों से परामर्श करने की मांग शामिल है।1