कानपुर देहात के रूरा में सड़कों पर बिना नंबर प्लेट वाले ओवरलोड ट्रक और डंपर खुलेआम दौड़ रहे हैं, जिससे सरकार को लाखों का राजस्व चूना लग रहा है। इन वाहनों के कारण होने वाले हादसों में चालकों को पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। खदानों से मौरंग, बालू व गिट्टी परिवहन के लिए जारी होने वाले ई-ट्रांजिट पास और रॉयल्टी के बिना ही खनिज का परिवहन धड़ल्ले से जारी है, क्योंकि अधिकांश वाहनों पर कोई नंबर प्लेट नहीं होती। रूरा निवासी दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक नो-एंट्री होने के बावजूद चालक सुबह 5 से 6 बजे के बीच निकलते हैं, जब यातायात पुलिस का कोई जवान मौजूद नहीं होता, जिससे उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। शशिकांत द्विवेदी ने चिंता व्यक्त की कि नंबर प्लेट न होने से दुर्घटना के बाद चालकों को पकड़ना कठिन होता है और वे वैकल्पिक मार्गों से भागने में सफल हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल बिना हेलमेट और सीट बेल्ट वाले चालकों का चालान कर नियम बताते हैं, जबकि बड़े मुद्दों को अनदेखा कर रहे हैं। डंपर और ट्रक संचालक रूरा में 2 फरवरी 2025 से शुरू हुए आरओबी पुल का फायदा उठाकर बाराजोड़ टोल प्लाजा से बचने के लिए शिवराजपुर, बिल्हौर होते हुए कानपुर नगर की ओर निकल रहे हैं। इन ओवरलोड वाहनों के कारण कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं। 31 मार्च 2025 को कारी गांव के सामने बिना नंबर प्लेट वाले मौरंग लदे ओवरलोड डंपर से हुए हादसे में रेलवे स्टेशन जा रहे बाइक सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद मार्ग पर सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक नो-एंट्री लगाई गई। वहीं, मंगलवार को अकबरपुर से रूरा जाने वाले मार्ग पर अंगनू की गुमटी के पास देर रात एक तेज रफ्तार डंपर ने सड़क पार कर रहे मजदूर को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इन गंभीर घटनाओं के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों की 'नींद नहीं टूट रही है'। इस संबंध में, यातायात प्रभारी कानपुर देहात विवेक कुमार का कहना है कि बिना नंबर प्लेट के चलने वाले वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और यदि डंपर नो-एंट्री का उल्लंघन करते हुए निकल रहे हैं, तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर देहात के रूरा में सड़कों पर बिना नंबर प्लेट वाले ओवरलोड ट्रक और डंपर खुलेआम दौड़ रहे हैं, जिससे सरकार को लाखों का राजस्व चूना लग रहा है। इन वाहनों के कारण होने वाले हादसों में चालकों को पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। खदानों से मौरंग, बालू व गिट्टी परिवहन के लिए जारी होने वाले ई-ट्रांजिट पास और रॉयल्टी के बिना ही खनिज का परिवहन धड़ल्ले से जारी है, क्योंकि अधिकांश वाहनों पर कोई नंबर प्लेट नहीं होती। रूरा निवासी दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक नो-एंट्री होने के बावजूद चालक सुबह 5 से 6 बजे के बीच निकलते हैं, जब यातायात पुलिस का कोई जवान मौजूद नहीं होता, जिससे उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। शशिकांत द्विवेदी ने चिंता व्यक्त की कि नंबर प्लेट न होने से दुर्घटना के बाद चालकों को पकड़ना कठिन होता है और वे वैकल्पिक मार्गों से भागने में सफल हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल बिना हेलमेट और सीट बेल्ट वाले चालकों का चालान कर नियम बताते हैं, जबकि बड़े मुद्दों को अनदेखा कर रहे हैं। डंपर और ट्रक संचालक रूरा में 2 फरवरी 2025 से शुरू हुए आरओबी पुल का फायदा उठाकर बाराजोड़ टोल प्लाजा से बचने के लिए शिवराजपुर, बिल्हौर होते हुए कानपुर नगर की ओर निकल रहे हैं। इन ओवरलोड वाहनों के कारण कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं। 31 मार्च 2025 को कारी गांव के सामने बिना नंबर प्लेट वाले मौरंग लदे ओवरलोड डंपर से हुए हादसे में रेलवे स्टेशन जा रहे बाइक सवार तीन लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद मार्ग पर सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक नो-एंट्री लगाई गई। वहीं, मंगलवार को अकबरपुर से रूरा जाने वाले मार्ग पर अंगनू की गुमटी के पास देर रात एक तेज रफ्तार डंपर ने सड़क पार कर रहे मजदूर को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इन गंभीर घटनाओं के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों की 'नींद नहीं टूट रही है'। इस संबंध में, यातायात प्रभारी कानपुर देहात विवेक कुमार का कहना है कि बिना नंबर प्लेट के चलने वाले वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और यदि डंपर नो-एंट्री का उल्लंघन करते हुए निकल रहे हैं, तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
- कानपुर देहात के डेरापुर में अधिवक्ता समिति ने शासन द्वारा लागू ई-पंजीकरण/ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में 22 जून से 27 जून 2026 तक कलमबंद हड़ताल करने का निर्णय लिया है। समिति ने इस संबंध में न्यायालयों को प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि हड़ताल की अवधि के दौरान सूचीबद्ध वादों में सामान्य तिथियां निर्धारित की जाएं। अधिवक्ता समिति ने न्यायालयों को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया है कि ई-पंजीकरण व्यवस्था के निजीकरण के खिलाफ आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से कलमबंद हड़ताल पर रहने का फैसला किया गया है। इसलिए, 22 से 27 जून तक न्यायालयों में नियत मामलों में अगली सामान्य तिथि निर्धारित की जाए, जिससे पक्षकारों के हित प्रभावित न हों। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि इस व्यवस्था से पक्षकारों को अनावश्यक असुविधा से बचाया जा सकेगा तथा न्यायिक कार्यवाही प्रभावित होने की स्थिति में भी वादों का समुचित प्रबंधन संभव होगा। इस हड़ताल के समर्थन में अकबरपुर अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष विपिन चंद्र दीक्षित, सुधीर सिंह भदौरिया, दिलीप यादव और विजय शंकर पांडेय डेरापुर तहसील परिसर पहुंचे और अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ाया। इस अवसर पर डेरापुर अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्र द्विवेदी, महामंत्री हरिशंकर संखवार, गिरेंद्र सिंह गौर, महेंद्र यादव, अमर सिंह गौर, प्रशांत दीक्षित, सौरभ चौबे, बिल्लू मिश्रा, चंद्र प्रताप यादव, महेंद्र पाल, अमित तिवारी, अनिल शुक्ला और सुशील दीक्षित सहित बड़ी संख्या में अन्य अधिवक्ता भी मौजूद रहे।1
- कानपुर देहात के झींझक क्षेत्र में इस समय भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है, जिसके कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लोग चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं से बचने के लिए अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं, जिसके चलते सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। इस बीच, बिजली की लगातार आँख मिचौली ने स्थानीय निवासियों की परेशानियों को और भी बढ़ा दिया है, जिससे भीषण गर्मी में उन्हें अतिरिक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।1
- कानपुर देहात के डेरापुर थाना क्षेत्र में एक युवती को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर ले जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में युवती के पिता की तहरीर पर पुलिस ने चार नामजद व्यक्तियों सहित कुछ अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित पिता के अनुसार, यह घटना 18 जून 2026 को हुई, जब उनकी लगभग 18 वर्ष 5 माह की बेटी को ग्राम कटेही निवासी अंकित पुत्र महेश राठौर, अवधेश पुत्र मुन्नीलाल, उपेंद्र पुत्र भूरा राठौर, और शरद पुत्र महेश राठौर अपने साथ ले गए। आरोप है कि युवती अपने साथ शैक्षणिक प्रमाण पत्र, कुछ जेवरात और लगभग 1.32 लाख रुपये नकद भी ले गई है। मामले में कुछ अन्य लोगों पर भी इन नामित व्यक्तियों का सहयोग करने का आरोप लगाया गया है। डेरापुर थाना प्रभारी धीरेंद्र सिंह ने सोमवार शाम पांच बजे बताया कि मिली तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, और युवती की बरामदगी के लिए आवश्यक कार्रवाई करते हुए मामले की गहराई से जांच की जा रही है।1
- सिकंदरा तहसील क्षेत्र में यमुना नदी में लगातार अवैध रूप से मछलियों का शिकार जारी है, जिससे संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालाँकि, इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसे यमुना नदी क्षेत्र का ही बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यमुना नदी के किनारे स्थित भुपैयापुर, गौहानी बांगर, बिलासपुर, बैजामऊ और महेशपुर गांवों के आसपास बड़े पैमाने पर मछली शिकार की शिकायतें सामने आ रही हैं। जिला प्रशासन ने 31 मई 2026 से मछलियों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है, क्योंकि जून माह में अधिकांश मछलियाँ अंडे देती हैं और सितंबर तक उनके बच्चों का विकास होता है। मत्स्य संपदा के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से हर वर्ष इस अवधि में प्रतिबंध लगाया जाता है, इसके बावजूद कुछ मछुआरे चोरी-छिपे नदी में जाल डालकर मछली पकड़ रहे हैं, जिससे मत्स्य संपदा को भारी नुकसान पहुँचने की आशंका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक निगरानी के अभाव में प्रतिबंध का प्रभावी पालन नहीं हो पा रहा है और यमुना नदी में खुलेआम मछलियों का शिकार किया जा रहा है। इस मामले पर जिलाधिकारी कपिल सिंह ने संज्ञान लेते हुए बताया कि उन्हें इसकी जानकारी मिली है। उन्होंने अवैध मछली शिकार पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और यमुना नदी में हो रहे अवैध मछली शिकार पर प्रभावी रोक लग पाती है या नहीं।1
- लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक अग्निकांड की घटना के मद्देनजर औरैया जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, जनपद के विभिन्न कोचिंग संस्थानों में एक व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया गया है। इस अभियान के दौरान, अग्नि सुरक्षा मानकों, आपातकालीन निकास व्यवस्थाओं, अग्निशमन उपकरणों और भवन सुरक्षा से संबंधित सभी व्यवस्थाओं की गहन जांच की गई।1
- कानपुर देहात के डेरापुर में अधिवक्ता समिति ने शासन द्वारा लागू की गई ई-पंजीकरण/ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में 22 जून से 27 जून 2026 तक कलमबंद हड़ताल करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में समिति ने न्यायालयों को एक प्रार्थना पत्र देकर हड़ताल अवधि के दौरान सूचीबद्ध वादों में सामान्य तिथियां निर्धारित करने की मांग की है। अधिवक्ता समिति द्वारा न्यायालयों को सौंपे गए प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ई-पंजीकरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में हुई बैठक में सर्वसम्मति से कलमबंद रहने का फैसला लिया गया है। इसलिए, 22 से 27 जून तक न्यायालयों में निर्धारित मामलों में अगली सामान्य तिथि तय की जाए, ताकि पक्षकारों के हित प्रभावित न हों। समिति पदाधिकारियों ने बताया कि यह कदम पक्षकारों को अनावश्यक असुविधा से बचाएगा और न्यायिक कार्यवाही प्रभावित होने की स्थिति में भी वादों का उचित प्रबंधन संभव होगा। अधिवक्ताओं के इस आंदोलन को अकबरपुर अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष विपिन चंद्र दीक्षित, सुधीर सिंह भदौरिया, दिलीप यादव और विजय शंकर पांडेय का समर्थन मिला, जो डेरापुर तहसील परिसर पहुँचे और अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ाया। इस अवसर पर डेरापुर अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्र द्विवेदी, महामंत्री हरिशंकर संखवार, गिरेंद्र सिंह गौर, महेंद्र यादव, अमर सिंह गौर, प्रशांत दीक्षित, सौरभ चौबे, बिल्लू मिश्रा, चंद्र प्रताप यादव, महेंद्र पाल, अमित तिवारी, अनिल शुक्ला सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।1
- राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 20 से अधिक लोग झुलसकर घायल हो गए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद एक कोचिंग सेंटर में अफरा-तफरी मच गई। अपनी जान बचाने के लिए कई छात्र-छात्राओं ने भवन की छत से छलांग लगा दी, जबकि कुछ अन्य छात्रों ने बाथरूम में छिपकर खुद को सुरक्षित रखने का प्रयास किया। दमकल कर्मियों और राहत टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान चलाया। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। उपमुख्यमंत्री ने भी मौके का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, और प्रशासन द्वारा हादसे के कारणों की गहन जांच कराई जा रही है। क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल व्याप्त है। फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं, और प्रशासन ने घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। आग लगने के कारणों और सुरक्षा मानकों में हुई संभावित लापरवाही की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।2