प्रदेश सरकार ने भूमि विवादों के प्रभावी, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए एक विशेष महाअभियान शुरू किया है, जिसके तहत वर्षों से फाइलों में दबी शिकायतों पर अब फिर से कार्रवाई की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री स्तर पर हुई समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है। इस अभियान में सरकारी भूमि, चकरोड, सार्वजनिक रास्तों, नालियों, तालाबों, चारागाह और कृषि भूमि पर अवैध कब्जों से जुड़ी शिकायतों की दोबारा जांच कराई जाएगी। कैराना तहसील में भी लगभग 900 भूमि विवाद संबंधी शिकायतों की फिर से जांच होगी, साथ ही गलत रिपोर्ट लगाकर मामलों को बंद करने या जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी। सहारनपुर मंडल आयुक्त के निर्देशों के अनुसार, यह विशेष भूमि विवाद निस्तारण अभियान 1 जून से 30 जून तक संचालित किया जा रहा है। इसके तहत 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच आईजीआरएस पोर्टल, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से प्राप्त भूमि विवाद संबंधी शिकायतों को पुनर्जीवित कर उनका दोबारा परीक्षण किया जाएगा। शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी रिपोर्टों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर राजस्व अभिलेखों, खतौनी, खसरा, सजरा नक्शा और वास्तविक स्थिति का मिलान करेंगे। यदि पूर्व में लगाई गई रिपोर्टें तथ्यों के विपरीत पाई गईं, तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। इस विशेष अभियान के बीच, कैराना क्षेत्र का एक मामला फिर से चर्चा में आ गया है। हल्का कैराना नंबर-2 के बाहरी हदूद क्षेत्र में स्थित खसरा संख्या 990 और 991 में दर्ज सरकारी रास्ते और नाली पर कथित कब्जे की शिकायत 10 दिसंबर 2025 को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप था कि सरकारी भूमि पर पेड़ लगाकर और बैरिकेडिंग कर सार्वजनिक रास्ता बाधित किया गया है। इसके अतिरिक्त, खसरा संख्या 923 में सहखातेदारों द्वारा कथित कब्जे की शिकायत भी दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किसी सक्षम न्यायालय का स्थगन आदेश न होने के बावजूद लंबे समय से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सरकारी भूमि पर कोई स्टे भी नहीं होता है। उनका मानना है कि राजस्व अभिलेखों और सजरा नक्शे के आधार पर स्पष्ट कार्रवाई होनी चाहिए थी, और अब शासन के विशेष अभियान के बाद ऐसे मामलों में दोबारा जांच व समाधान की उम्मीद बढ़ गई है, जिससे सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की दिशा में ठोस कार्रवाई सामने आएगी। इस संबंध में एसडीएम कैराना शिवाजी यादव ने जानकारी देते हुए बताया है कि कैराना तहसील में लगभग 900 भूमि विवाद संबंधी शिकायतें चिन्हित की गई हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी मामलों की पुनः जांच कराई जाएगी और मौके पर जाकर निष्पक्ष परीक्षण के बाद ही रिपोर्ट लगाई जाएगी। एसडीएम ने कहा कि जिन शिकायतों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ होगा, उन्हें पुनर्जीवित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा शासन के निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन कराया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने भूमि विवादों के प्रभावी, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए एक विशेष महाअभियान शुरू किया है, जिसके तहत वर्षों से फाइलों में दबी शिकायतों पर अब फिर से कार्रवाई की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री स्तर पर हुई समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है। इस अभियान में सरकारी भूमि, चकरोड, सार्वजनिक रास्तों, नालियों, तालाबों, चारागाह और कृषि भूमि पर अवैध कब्जों से जुड़ी शिकायतों की दोबारा जांच कराई जाएगी। कैराना तहसील में भी लगभग 900 भूमि विवाद संबंधी शिकायतों की फिर से जांच होगी, साथ ही गलत रिपोर्ट लगाकर मामलों को बंद करने या जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी। सहारनपुर मंडल आयुक्त के निर्देशों के अनुसार, यह विशेष भूमि विवाद निस्तारण अभियान 1 जून से 30 जून तक संचालित किया जा रहा है। इसके तहत 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच आईजीआरएस पोर्टल, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से प्राप्त भूमि विवाद संबंधी शिकायतों को पुनर्जीवित कर उनका दोबारा परीक्षण किया जाएगा। शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी रिपोर्टों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर राजस्व अभिलेखों, खतौनी, खसरा, सजरा नक्शा और वास्तविक स्थिति का मिलान करेंगे। यदि पूर्व में लगाई गई रिपोर्टें तथ्यों के विपरीत पाई गईं, तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। इस विशेष अभियान के बीच, कैराना क्षेत्र का एक मामला फिर से चर्चा में आ गया है। हल्का कैराना नंबर-2 के बाहरी हदूद क्षेत्र में स्थित खसरा संख्या 990 और 991 में दर्ज सरकारी रास्ते और नाली पर कथित कब्जे की शिकायत 10 दिसंबर 2025 को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप था कि सरकारी भूमि पर पेड़ लगाकर और बैरिकेडिंग कर सार्वजनिक रास्ता बाधित किया गया है। इसके अतिरिक्त, खसरा संख्या 923 में सहखातेदारों द्वारा कथित कब्जे की शिकायत भी दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किसी सक्षम न्यायालय का स्थगन आदेश न होने के बावजूद लंबे समय से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सरकारी भूमि पर कोई स्टे भी नहीं होता है। उनका मानना है कि राजस्व अभिलेखों और सजरा नक्शे के आधार पर स्पष्ट कार्रवाई होनी चाहिए थी, और अब शासन के विशेष अभियान के बाद ऐसे मामलों में दोबारा जांच व समाधान की उम्मीद बढ़ गई है, जिससे सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की दिशा में ठोस कार्रवाई सामने आएगी। इस संबंध में एसडीएम कैराना शिवाजी यादव ने जानकारी देते हुए बताया है कि कैराना तहसील में लगभग 900 भूमि विवाद संबंधी शिकायतें चिन्हित की गई हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी मामलों की पुनः जांच कराई जाएगी और मौके पर जाकर निष्पक्ष परीक्षण के बाद ही रिपोर्ट लगाई जाएगी। एसडीएम ने कहा कि जिन शिकायतों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ होगा, उन्हें पुनर्जीवित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा शासन के निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन कराया जाएगा।
- कनिना महेंद्रगढ़ के विधायक कवर सिंह यादव ने श्री कृष्णा गोशाला का निरीक्षण किया।1
- कांधला में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित प्रताड़ना से तंग आकर एक महिला ने थाने के मुख्य गेट पर धरना दिया। न्याय की मांग को लेकर बैठी इस महिला ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाते हुए थाने के सामने ही हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। इस घटना के बाद से पुलिस प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित महिला का आरोप है कि पुलिस द्वारा उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और उसकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। महिला के अनुसार, पुलिस ने उसके पति की रेहड़ी को हटवा दिया है, जो उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र आय का साधन है। महिला काफी देर तक थाने के गेट पर डटी रही और बाद में पुलिस द्वारा समझाने पर उसने अपना धरना समाप्त कर दिया। यह मामला कस्बे में चर्चा का विषय बना हुआ है।4
- शामली जनपद के कांधला में, पशु क्रूरता और अवैध पशु परिवहन से जुड़े एक मामले में कांधला पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे वांछित आरोपी धीरज पुत्र रामपाल को गिरफ्तार कर लिया है, जो कन्नौज जनपद के ग्राम रसूलाबाद, थाना बिश्नगढ़ का निवासी है। इस गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। यह मामला तब सामने आया था जब कुछ समय पूर्व थाना कांधला पुलिस ने दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर ग्राम एलम के निकट वाहन चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध ट्रक को रोका था। जांच के दौरान, पुलिस ने पाया कि ट्रक में पशुओं को अमानवीय और क्रूरतापूर्ण तरीके से ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। पुलिस की कार्रवाई के समय ट्रक में मौजूद आरोपी वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गए थे। इसके बाद, थाना कांधला में पशु क्रूरता अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक शामली, एन.पी. सिंह के निर्देश पर चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान के तहत फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी थी, और इसी क्रम में कांधला पुलिस ने आरोपी धीरज को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में शामिल एक अन्य आरोपी जियालाल को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश अभी भी जारी है।1
- अतरौली में पशुओं के लिए चारा कूटते समय एक दर्दनाक हादसा हो गया। थ्रेसर मशीन में फंसने से एक व्यक्ति के दोनों पैर कट गए, जिससे मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।1
- पुलिस ने ₹60 लाख की धोखाधड़ी के मामले का पर्दाफ़ाश करते हुए तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। इन ठगों पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ने में सफलता हासिल की।1
- चुलकाना धाम स्थित बाबा श्याम मंदिर, जहां देश-विदेश से आने वाले भक्तों, जिनमें विशेष रूप से यादव शामिल हैं, की सभी मनोकामनाएं बाबा पूरी करते हैं। यह मंदिर बाबा के एक बहुत बड़े और भव्य दरबार के लिए प्रसिद्ध है, जहां बाबा लकी सर और वीर बजरंगबली का भी स्मरण किया जाता है। आज भक्तों को बाबा श्याम के दिव्य दर्शन प्राप्त हुए।1
- मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे में गौसंरक्षण एवं जनजागरण के उद्देश्य से निकाली जा रही 81 दिवसीय 'गौविष्ठि (गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा' के अंतर्गत जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती '1008' जी महाराज का भव्य स्वागत किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गौभक्तों, संतों, व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों ने भाग लिया। अपने संबोधन में शंकराचार्य जी ने स्पष्ट किया कि गौसंरक्षण केवल एक धार्मिक विषय नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, कृषि और समाज से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय है। उन्होंने समाज से गौवंश की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। शंकराचार्य जी ने गौहत्या और पशुओं पर होने वाले अत्याचारों को किसी भी रूप में अस्वीकार्य बताते हुए समाज से इस विषय पर संवेदनशीलता से कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से गौसेवा को एक जनआंदोलन बनाने की अपील की, ताकि भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जा सके। प्रवचन के दौरान, शंकराचार्य जी ने रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए जीवन में विवेक, धैर्य और सही निर्णय लेने की क्षमता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संकट के समय व्यक्ति को संयम और सतर्कता बनाए रखनी चाहिए, तथा किसी भी परिस्थिति में अपने मूल्यों और धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने गौसंरक्षण और गौसेवा के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए गौवंश की रक्षा के लिए जनजागरण का संकल्प लिया। इस अवसर पर आदेश त्यागी, डॉ. सत्येंद्र पाल, प्रमोद गर्ग (उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन), कुलदीप कश्यप, सोनू कुमार, अमित विश्वकर्मा, रोहित जैन (एमडी न्यूज़ बहुआयामी जिला सहायक ब्यूरो प्रमुख) सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, व्यापारी, पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण और श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें गौसेवा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया गया, जो बुढ़ाना से निकला एक महत्वपूर्ण संदेश बन गया।4
- पलवल में छोटे बच्चों ने योग किया और इसके माध्यम से एक बड़ा और महत्वपूर्ण संदेश दिया है। यह जानकारी टुडे24 न्यूज़ के हवाले से सामने आई है।1