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10 साल से नाली-सड़क को तरस रहे वार्ड 66 के लोग: पूर्व विधायक की कॉलोनी का बुरा हाल, गड्ढों में समा रहा गंदा पानी! ​विकास के दावों की खुली पोल: 10 वर्षों से नरकीय जीवन जीने को मजबूर सिंधी कॉलोनीवासी, नहीं सुन रहे पार्षद

8 hrs ago
user_Rishi Rajak
Rishi Rajak
जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
8 hrs ago

10 साल से नाली-सड़क को तरस रहे वार्ड 66 के लोग: पूर्व विधायक की कॉलोनी का बुरा हाल, गड्ढों में समा रहा गंदा पानी! ​विकास के दावों की खुली पोल: 10 वर्षों से नरकीय जीवन जीने को मजबूर सिंधी कॉलोनीवासी, नहीं सुन रहे पार्षद

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  • वायरल वीडियो पर पुलिस का शिकंजा! ‘गोलू आर्मो’ की पहचान की जांच, भड़काऊ बयान पर होगी कड़ी कार्रवाई
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    वायरल वीडियो पर पुलिस का शिकंजा! ‘गोलू आर्मो’ की पहचान की जांच, भड़काऊ बयान पर होगी कड़ी कार्रवाई
    user_Rishi Rajak
    Rishi Rajak
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • जबलपुर: सिंधी कॉलोनी के लोग 10 वर्षों से नाली सड़क के लिए संघर्षरत जबलपुर: रानी लक्ष्मीबाई वार्ड 66 की सिंधी कॉलोनी के निवासी नाली सड़क की समस्या से लगभग 10 वर्षों से जूझ रहे हैं। यह कॉलोनी पूर्व विधायक द्वारा बनाई गई है, लेकिन आज भी यहां सड़क की हालत खराब है। तीन-चार फीट गहरे गड्ढों में पानी जमा हो जाता है, जिससे इलाके में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे नाली सड़क की मरम्मत के लिए बार-बार अधिकारियों और पार्षदों से मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पार्षद भी इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे समस्या बनी हुई है।
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    जबलपुर: सिंधी कॉलोनी के लोग 10 वर्षों से नाली सड़क के लिए संघर्षरत
जबलपुर: रानी लक्ष्मीबाई वार्ड 66 की सिंधी कॉलोनी के निवासी नाली सड़क की समस्या से लगभग 10 वर्षों से जूझ रहे हैं। यह कॉलोनी पूर्व विधायक द्वारा बनाई गई है, लेकिन आज भी यहां सड़क की हालत खराब है। तीन-चार फीट गहरे गड्ढों में पानी जमा हो जाता है, जिससे इलाके में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे नाली सड़क की मरम्मत के लिए बार-बार अधिकारियों और पार्षदों से मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पार्षद भी इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे समस्या बनी हुई है।
    user_Deepak Vishawakarma
    Deepak Vishawakarma
    Photographer पनागर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें 70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें 70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी जबलपुर। जिस पिता ने कभी अपनी औलाद की जरूरतों के लिए मजदूरी की होगी, जिसने अपनी संतान को पालने के लिए जिंदगी के तमाम संघर्ष सहे होंगे, उसी पिता की जिंदगी का आखिरी पड़ाव रानीताल के एक डिवाइडर पर खत्म हो गया। 70 वर्षीय अशोक कुमार जैन का शव रानीताल बजरंग बली मंदिर के सामने डिवाइडर पर मिला। उनके पास उनकी बेटी अनीता कुमार जैन बैठी थी। आंखों में आंसू थे, सामने पिता का शव था और दिल में सिर्फ एक सवाल—काश, मैं अपने पिता के लिए कुछ कर पाती... अशोक कुमार की जिंदगी गरीबी और अभावों से घिरी रही। मजदूरी कर किसी तरह जीवन चलाया। पत्नी का साथ पहले ही छूट चुका था। बच्चे बड़े हुए तो अपने-अपने संसार में चले गए। बुढ़ापे में जब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब आर्थिक तंगी ने उन्हें रानीताल में मांगकर जीवन गुजारने को मजबूर कर दिया। आखिरकार जिस सड़क किनारे वे जिंदगी के दिन काट रहे थे, वहीं उनकी जिंदगी की आखिरी सांस भी थम गई। राहगीरों ने देखा शव... पास बैठी थी बेटी रानीताल में डिवाइडर पर बुजुर्ग का शव देखकर राहगीरों ने सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जानकारी जुटाई तो शव की पहचान अशोक कुमार जैन के रूप में हुई। शव के पास उनकी बेटी अनीता बैठी थी। पिता को इस हालत में देखकर वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी। सूचना मिलने पर गरीब नवाज कमेटी के सदस्य भी मौके पर पहुंचे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामने आने के बाद कमेटी ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। तीन बेटियां थीं... मगर अंतिम सफर में एक ही बेटी साथ थी अनीता ने बताया कि परिवार में बेटियां और बेटे हैं, लेकिन समय के साथ सभी अपने-अपने परिवारों में चले गए। उसकी दो बहनों की शादी संपन्न परिवारों में हुई। आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पिता से उनका संपर्क कम हो गया। अनीता ने खुद अपनी पसंद से मध्यमवर्गीय बर्मन परिवार में विवाह किया। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसने पिता से रिश्ता नहीं तोड़ा। शायद यही वजह थी कि पिता की मौत की खबर मिलते ही वह दौड़ी चली आई। लेकिन इस बार वह बेटी अपने पिता को बचाने नहीं, उन्हें आखिरी बार विदा करने आई थी। "जिस पिता ने मेरी हर जरूरत पूरी करने के लिए मेहनत की... आज मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही" पिता के शव के पास बैठी अनीता की यह बात वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गई। पिता की मौत का दुख तो था ही, लेकिन उससे बड़ा दर्द अपनी बेबसी का था। पिता के लिए बेटी की आंखों में आंसू थे, मगर जेब में अंतिम संस्कार का खर्च नहीं। डेढ़ साल की उम्र से शुरू हुआ था अनीता का संघर्ष अनीता ने बताया कि जब वह महज डेढ़ वर्ष की थी, तब गरीबी के कारण उसके मामा के परिवार ने उसे अपने घर से बाहर कर दिया था। बचपन से ही उसने अभाव देखे और संघर्ष के बीच जिंदगी गुजारी। शायद गरीबी ने दोनों—पिता और बेटी—को अलग-अलग उम्र में एक ही दर्द दिया था। फर्क सिर्फ इतना था कि पिता जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर थे और बेटी चाहकर भी उनके लिए बहुत कुछ नहीं कर पा रही थी। जब अपने कमजोर पड़े, समाज ने थामा हाथ अशोक कुमार के अंतिम संस्कार के लिए जब आर्थिक संकट सामने आया तो गरीब नवाज कमेटी आगे आई। कमेटी के सदस्यों ने शव को रानीताल मुक्ति धाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। बेटी अनीता ने नम आंखों से पिता को अंतिम विदाई दी। जिस पिता की जिंदगी अकेलेपन में गुजर गई, उनके अंतिम सफर में समाज का एक हाथ सहारा बन गया। एक डिवाइडर पर खत्म हुई जिंदगी... लेकिन कहानी छोड़ गई कई सवाल रानीताल का वह डिवाइडर अब सिर्फ सड़क का हिस्सा नहीं रह गया। वह एक ऐसे पिता की आखिरी कहानी का गवाह बन गया, जिसने गरीबी में जिंदगी काटी, बुढ़ापे में मांगकर गुजारा किया और आखिरकार सड़क किनारे दम तोड़ दिया। अशोक कुमार की मौत कई सवाल छोड़ गई है— क्या बुजुर्ग माता-पिता का सहारा उनकी आर्थिक स्थिति देखकर तय होगा? क्या गरीबी रिश्तों के बीच भी दीवार खड़ी कर देती है? और क्या ऐसे बेसहारा बुजुर्गों की पहचान समय रहते नहीं होनी चाहिए, ताकि उनका आखिरी वक्त सड़क किनारे अकेलेपन में न बीते? अशोक कुमार चले गए। बेटी ने अंतिम विदाई दे दी। गरीब नवाज कमेटी ने अंतिम सफर में साथ दिया। लेकिन रानीताल का वह डिवाइडर पीछे छोड़ गया एक ऐसा दर्द, जिसका जवाब शायद सिर्फ परिवार नहीं, पूरे समाज को तलाशना होगा।
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    पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें

70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी
पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें
70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी
जबलपुर।
जिस पिता ने कभी अपनी औलाद की जरूरतों के लिए मजदूरी की होगी, जिसने अपनी संतान को पालने के लिए जिंदगी के तमाम संघर्ष सहे होंगे, उसी पिता की जिंदगी का आखिरी पड़ाव रानीताल के एक डिवाइडर पर खत्म हो गया। 70 वर्षीय अशोक कुमार जैन का शव रानीताल बजरंग बली मंदिर के सामने डिवाइडर पर मिला। उनके पास उनकी बेटी अनीता कुमार जैन बैठी थी। आंखों में आंसू थे, सामने पिता का शव था और दिल में सिर्फ एक सवाल—काश, मैं अपने पिता के लिए कुछ कर पाती...
अशोक कुमार की जिंदगी गरीबी और अभावों से घिरी रही। मजदूरी कर किसी तरह जीवन चलाया। पत्नी का साथ पहले ही छूट चुका था। बच्चे बड़े हुए तो अपने-अपने संसार में चले गए। बुढ़ापे में जब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब आर्थिक तंगी ने उन्हें रानीताल में मांगकर जीवन गुजारने को मजबूर कर दिया। आखिरकार जिस सड़क किनारे वे जिंदगी के दिन काट रहे थे, वहीं उनकी जिंदगी की आखिरी सांस भी थम गई।
राहगीरों ने देखा शव... पास बैठी थी बेटी
रानीताल में डिवाइडर पर बुजुर्ग का शव देखकर राहगीरों ने सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जानकारी जुटाई तो शव की पहचान अशोक कुमार जैन के रूप में हुई। शव के पास उनकी बेटी अनीता बैठी थी। पिता को इस हालत में देखकर वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी।
सूचना मिलने पर गरीब नवाज कमेटी के सदस्य भी मौके पर पहुंचे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामने आने के बाद कमेटी ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।
तीन बेटियां थीं... मगर अंतिम सफर में एक ही बेटी साथ थी
अनीता ने बताया कि परिवार में बेटियां और बेटे हैं, लेकिन समय के साथ सभी अपने-अपने परिवारों में चले गए। उसकी दो बहनों की शादी संपन्न परिवारों में हुई। आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पिता से उनका संपर्क कम हो गया।
अनीता ने खुद अपनी पसंद से मध्यमवर्गीय बर्मन परिवार में विवाह किया। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसने पिता से रिश्ता नहीं तोड़ा। शायद यही वजह थी कि पिता की मौत की खबर मिलते ही वह दौड़ी चली आई।
लेकिन इस बार वह बेटी अपने पिता को बचाने नहीं, उन्हें आखिरी बार विदा करने आई थी।
"जिस पिता ने मेरी हर जरूरत पूरी करने के लिए मेहनत की... आज मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही"
पिता के शव के पास बैठी अनीता की यह बात वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गई। पिता की मौत का दुख तो था ही, लेकिन उससे बड़ा दर्द अपनी बेबसी का था।
पिता के लिए बेटी की आंखों में आंसू थे, मगर जेब में अंतिम संस्कार का खर्च नहीं।
डेढ़ साल की उम्र से शुरू हुआ था अनीता का संघर्ष
अनीता ने बताया कि जब वह महज डेढ़ वर्ष की थी, तब गरीबी के कारण उसके मामा के परिवार ने उसे अपने घर से बाहर कर दिया था। बचपन से ही उसने अभाव देखे और संघर्ष के बीच जिंदगी गुजारी।
शायद गरीबी ने दोनों—पिता और बेटी—को अलग-अलग उम्र में एक ही दर्द दिया था। फर्क सिर्फ इतना था कि पिता जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर थे और बेटी चाहकर भी उनके लिए बहुत कुछ नहीं कर पा रही थी।
जब अपने कमजोर पड़े, समाज ने थामा हाथ
अशोक कुमार के अंतिम संस्कार के लिए जब आर्थिक संकट सामने आया तो गरीब नवाज कमेटी आगे आई। कमेटी के सदस्यों ने शव को रानीताल मुक्ति धाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। बेटी अनीता ने नम आंखों से पिता को अंतिम विदाई दी।
जिस पिता की जिंदगी अकेलेपन में गुजर गई, उनके अंतिम सफर में समाज का एक हाथ सहारा बन गया।
एक डिवाइडर पर खत्म हुई जिंदगी... लेकिन कहानी छोड़ गई कई सवाल
रानीताल का वह डिवाइडर अब सिर्फ सड़क का हिस्सा नहीं रह गया। वह एक ऐसे पिता की आखिरी कहानी का गवाह बन गया, जिसने गरीबी में जिंदगी काटी, बुढ़ापे में मांगकर गुजारा किया और आखिरकार सड़क किनारे दम तोड़ दिया।
अशोक कुमार की मौत कई सवाल छोड़ गई है—
क्या बुजुर्ग माता-पिता का सहारा उनकी आर्थिक स्थिति देखकर तय होगा?
क्या गरीबी रिश्तों के बीच भी दीवार खड़ी कर देती है?
और क्या ऐसे बेसहारा बुजुर्गों की पहचान समय रहते नहीं होनी चाहिए, ताकि उनका आखिरी वक्त सड़क किनारे अकेलेपन में न बीते?
अशोक कुमार चले गए। बेटी ने अंतिम विदाई दे दी। गरीब नवाज कमेटी ने अंतिम सफर में साथ दिया। लेकिन रानीताल का वह डिवाइडर पीछे छोड़ गया एक ऐसा दर्द, जिसका जवाब शायद सिर्फ परिवार नहीं, पूरे समाज को तलाशना होगा।
    user_मोहम्मद रिजवान मंसूरी
    मोहम्मद रिजवान मंसूरी
    सिहोरा, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • श्रीनगर महाविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ गोटेगांव। श्री जगतगुरु शंकराचार्य महाविद्यालय, श्रीनगर में राज्य शासन के निर्देशानुसार 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है। श्रीनगर महाविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ गोटेगांव। श्री जगतगुरु शंकराचार्य महाविद्यालय, श्रीनगर में राज्य शासन के निर्देशानुसार 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार करना, पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना तथा सेवा एवं विकसित भारत के संकल्प से अधिक से अधिक नागरिकों को जोड़ना है। अभियान का शुभारंभ गुरुवार को महाविद्यालय परिसर में श्री जगतगुरु शंकराचार्य जी के तैलचित्र के समक्ष अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पूजन के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठक डॉ. दिलीप पाठक ने की। महाविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी प्रो. कमल पटेल का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में डॉ. आशीष ठाकुर ने सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस अभियान का उद्देश्य जनसेवा, जनभागीदारी, कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार के साथ पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाना है। इसके बाद महाविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी प्रो. कमल पटेल ने शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं अभियान के दौरान आयोजित होने वाली गतिविधियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. दिलीप पाठक ने सेवा संकल्प अभियान में शासन के योगदान तथा अभियान से जुड़ी गतिविधियों और उद्देश्यों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. राजा दुबे ने किया। उपस्थित अतिथियों, महाविद्यालय स्टाफ एवं छात्र-छात्राओं का आभार प्रो. एस.पी. डेहरिया ने व्यक्त किया। अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय स्टाफ से प्रो. दिलीप द्विवेदी, प्रो. राहुल नेमा, प्रो. विवेक जैन, अर्चना सोनी, भूपत सेन, अंकित नामदेव, छत्रपाल पटेल तथा कार्यालय स्टाफ से भूपेश सेन, चंदन विश्वकर्मा, सत्येंद्र तिवारी एवं आयुष तिवारी का सहयोग रहा। कार्यक्रम में महाविद्यालय के करीब 100 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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    श्रीनगर महाविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ
गोटेगांव। श्री जगतगुरु शंकराचार्य महाविद्यालय, श्रीनगर में राज्य शासन के निर्देशानुसार 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है।
श्रीनगर महाविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ
गोटेगांव। श्री जगतगुरु शंकराचार्य महाविद्यालय, श्रीनगर में राज्य शासन के निर्देशानुसार 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार करना, पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना तथा सेवा एवं विकसित भारत के संकल्प से अधिक से अधिक नागरिकों को जोड़ना है।
अभियान का शुभारंभ गुरुवार को महाविद्यालय परिसर में श्री जगतगुरु शंकराचार्य जी के तैलचित्र के समक्ष अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पूजन के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठक डॉ. दिलीप पाठक ने की। महाविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी प्रो. कमल पटेल का तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. आशीष ठाकुर ने सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस अभियान का उद्देश्य जनसेवा, जनभागीदारी, कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार के साथ पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाना है।
इसके बाद महाविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी प्रो. कमल पटेल ने शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं अभियान के दौरान आयोजित होने वाली गतिविधियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. दिलीप पाठक ने सेवा संकल्प अभियान में शासन के योगदान तथा अभियान से जुड़ी गतिविधियों और उद्देश्यों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. राजा दुबे ने किया। उपस्थित अतिथियों, महाविद्यालय स्टाफ एवं छात्र-छात्राओं का आभार प्रो. एस.पी. डेहरिया ने व्यक्त किया।
अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय स्टाफ से प्रो. दिलीप द्विवेदी, प्रो. राहुल नेमा, प्रो. विवेक जैन, अर्चना सोनी, भूपत सेन, अंकित नामदेव, छत्रपाल पटेल तथा कार्यालय स्टाफ से भूपेश सेन, चंदन विश्वकर्मा, सत्येंद्र तिवारी एवं आयुष तिवारी का सहयोग रहा। कार्यक्रम में महाविद्यालय के करीब 100 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
    user_Raghunath Rai
    Raghunath Rai
    Local News Reporter गोटेगांव, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित स्वच्छता अभियान में पूर्व राज्य मंत्री श्री जालम सिंह पटेल ने स्वच्छता के महत्व का संदेश देते हुए नागरिकों से अपने शहर और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने की अपील की।
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    सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित स्वच्छता अभियान में पूर्व राज्य मंत्री श्री जालम सिंह पटेल ने स्वच्छता के महत्व का संदेश देते हुए नागरिकों से अपने शहर और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने की अपील की।
    user_Shrikant Dubay पत्रकार
    Shrikant Dubay पत्रकार
    TV News Anchor Gotegaon, Narsinghpur•
    4 hrs ago
  • नरसिंहपुर में सेवा संकल्प अभियान के तहत युवाओं ने किया रक्तदान व पूर्व राज्य मंत्री ने स्वच्छता के महत्व का दिया संदेश नरसिंहपुर में भी सेवा संकल्प अभियान के तहत विविध कार्यक्रमों का आयोजन आयोजित हुआ जिसमें बताया गया है कि आज सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम, नरसिंहपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह पटेल, वरिष्ठ समाजसेवी रामसनेही पाठक, महंत प्रीतम पुरी गोस्वामी सहित अन्य एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि व जिला कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह, जिला पंचायत सीईओ गजेन्द्र सिंह नागेश ने किया।
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    नरसिंहपुर में सेवा संकल्प अभियान के तहत युवाओं ने किया रक्तदान व पूर्व राज्य मंत्री ने स्वच्छता के महत्व का दिया संदेश 
नरसिंहपुर में भी सेवा संकल्प अभियान के तहत विविध कार्यक्रमों का आयोजन आयोजित हुआ जिसमें बताया गया है कि आज सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम, नरसिंहपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह पटेल, वरिष्ठ समाजसेवी रामसनेही पाठक, महंत प्रीतम पुरी गोस्वामी सहित अन्य एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि व जिला कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह, जिला पंचायत सीईओ गजेन्द्र सिंह नागेश ने किया।
    user_DEEPAK SAHU
    DEEPAK SAHU
    रिपोर्टर गोटेगांव, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • हमारी तो बस एक ही परेशानी है वह जो सबकी जिंदगानी है सबके पास पानी है मगर हमारे पास कहां पानी है
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    हमारी तो बस एक ही परेशानी है वह जो सबकी जिंदगानी है सबके पास पानी है मगर हमारे पास कहां पानी है
    user_Mahendra Barman
    Mahendra Barman
    Farmer स्लीमनाबाद, कटनी, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • गढ़ा क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग का वीडियो वायरल आम जनता से मनमाने चालान वसूलने के गंभीर आरोप
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    गढ़ा क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग का वीडियो वायरल आम जनता से मनमाने चालान वसूलने के गंभीर आरोप
    user_Rishi Rajak
    Rishi Rajak
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
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