Shuru
Apke Nagar Ki App…
भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन माना जाता है, लेकिन मानसून की पहली ही तेज बारिश ने रायपुर रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि रेलवे अब 'वॉटरलाइन' भी बन चुका है। ए-1 श्रेणी के इस रायपुर रेलवे स्टेशन पर, प्लेटफॉर्म नंबर-1 की छत से पानी इस तरह टपकने लगा, मानो यात्रियों के स्वागत के लिए कोई कृत्रिम झरना तैयार किया गया हो।
Kaniya Soni
भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन माना जाता है, लेकिन मानसून की पहली ही तेज बारिश ने रायपुर रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि रेलवे अब 'वॉटरलाइन' भी बन चुका है। ए-1 श्रेणी के इस रायपुर रेलवे स्टेशन पर, प्लेटफॉर्म नंबर-1 की छत से पानी इस तरह टपकने लगा, मानो यात्रियों के स्वागत के लिए कोई कृत्रिम झरना तैयार किया गया हो।
More news from Chhattisgarh and nearby areas
- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में उच्च न्यायालय ने एक हत्या के मामले पर अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस न्यायिक प्रक्रिया के दौरान, कोर्ट ने नार्को टेस्ट से जुड़े बिंदुओं पर भी अपनी राय व्यक्त की है।1
- कोरबा के कुसमुंडा कोयला खदान क्षेत्र में आज एक बड़ा हादसा उस समय होते-होते टल गया जब नीलकंठ कंपनी का एक विशालकाय डंपर अनजाने में ऊपर से गुजर रही बिजली की हाई-टेंशन लाइन से टकरा गया। गनीमत यह रही कि उस समय लाइन में विद्युत प्रवाह बंद था, जिसके कारण डंपर चालक की जान बाल-बाल बच गई। मिली जानकारी के अनुसार, नीलकंठ कंपनी के डंपर ऑपरेटर लकी यादव, जो ग्राम पाली निवासी रामदास यादव के पुत्र हैं, रोजाना की तरह खदान क्षेत्र में काम कर रहे थे। इसी दौरान डंपर का ऊपरी हिस्सा वहां से गुजर रहे भारी भरकम बिजली के तारों से टकरा गया। घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया और मौजूद लोगों ने देखा कि बिजली का तार डंपर के पिछले टायरों और बॉडी के बीच बुरी तरह फंस चुका था। यदि उस वक्त लाइन में सप्लाई चालू होती, तो डंपर में भीषण ब्लास्ट हो सकता था और ऑपरेटर लकी यादव की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। इस घटना ने एसईसीएल (SECL) प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खदान क्षेत्र में, जहाँ हर वक्त भारी वाहनों की आवाजाही रहती है, वहाँ इतनी नीचे बिजली की लाइनें होना सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन माना जा रहा है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों और सहकर्मियों के बीच भी इस बात को लेकर तीखी बहस देखने को मिली, जिसमें कुछ लोगों ने सीधे तौर पर वहाँ तैनात सुपरवाइजरों और प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया, जो समय रहते ऐसी जगहों पर सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करते। बिजली सप्लाई बंद होने के कारण एक बड़ा अनर्थ होने से रुक गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षा अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई है और तार को डंपर से सुरक्षित अलग करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने मांग की है कि खदान क्षेत्रों में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए बिजली के तारों को पर्याप्त ऊंचाई पर रखा जाए।1
- कोरबा के करतला क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग से इस बात का जवाब मांगा जा रहा है कि क्या किसी फाईल पर काम थम गया है या फिर उसकी जांच करने में विभाग कोई रुचि नहीं ले रहा है।1
- कोरबा जिले के नकटीगांव में गरीबों के घर तोड़े जाने के विरोध में कांग्रेस ने अपना ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया। यह प्रदर्शन घर तोड़ने की कार्रवाई के खिलाफ था।1
- जहाँगीर में धान के घटिया बीज की आपूर्ति को लेकर बीज निगम पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद रायपुर से एक जाँच दल मौके पर पहुँचा है। इस जाँच में बीज निगम की घोर लापरवाही उजागर हुई है, जिससे क्षेत्र के किसानों में बीज निगम के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।1
- भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन माना जाता है, लेकिन मानसून की पहली ही तेज बारिश ने रायपुर रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि रेलवे अब 'वॉटरलाइन' भी बन चुका है। ए-1 श्रेणी के इस रायपुर रेलवे स्टेशन पर, प्लेटफॉर्म नंबर-1 की छत से पानी इस तरह टपकने लगा, मानो यात्रियों के स्वागत के लिए कोई कृत्रिम झरना तैयार किया गया हो।1
- छत्तीसगढ़ के केसला नामक स्थान पर आज भी मुक्तिधाम की अनुपलब्धता एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जिसके कारण मृतकों का अंतिम संस्कार खुले आसमान के नीचे ही करना पड़ रहा है। यह स्थिति विकास के बड़े-बड़े दावों पर भारी पड़ रही स्थानीय लोगों की बेबसी को उजागर करती है। यह विडंबना है कि 75 साल बीत जाने के बाद भी, इस क्षेत्र में अंतिम संस्कार के लिए एक भी व्यवस्थित स्थल नहीं बन पाया है। इसी कारण, मरने के बाद भी लोगों को उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा है और उनका अंतिम संस्कार बिना किसी मर्यादा के खुले में संपन्न होता है।1