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कंबल लेने निकले वृद्ध का शव डैम में मिला, विधायक प्रतिनिधि ने भाजपा पर लगाया आरो

2 hrs ago
user_The Update Abtak
The Update Abtak
Journalist केतर, गढ़वा, झारखंड•
2 hrs ago

कंबल लेने निकले वृद्ध का शव डैम में मिला, विधायक प्रतिनिधि ने भाजपा पर लगाया आरो

More news from झारखंड and nearby areas
  • Post by The Update Abtak
    1
    Post by The Update Abtak
    user_The Update Abtak
    The Update Abtak
    Journalist केतर, गढ़वा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • रांची// अल्बर्ट एक्का चौक पर मशाल जुलूस निकाल कर आदिवासी संगठनों ने किया झारखंड बंद का ऐलान। खूंटी के पड़हा राजा सोम मुंडा की हत्या के विरोध में कल 17 जनवरी को झारखंड बंद।
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    रांची// अल्बर्ट एक्का चौक पर मशाल जुलूस निकाल कर आदिवासी संगठनों ने किया झारखंड बंद का ऐलान। खूंटी के पड़हा राजा सोम मुंडा की हत्या के विरोध में कल 17 जनवरी को झारखंड बंद।
    user_Chandan Mehta
    Chandan Mehta
    Press reporter Bardiha, Garhwa•
    1 hr ago
  • हमारे पास जो सॉक्स बैठे हैं ये गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड के चर्चित कलाकर जिनका नाम प्रेमी पिंटू यादव है इनके गाने को सुनिए ये बहुत ही खूबसूरत गाना गाते है ।
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    हमारे पास जो सॉक्स बैठे हैं ये गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड के चर्चित कलाकर जिनका नाम प्रेमी पिंटू यादव है इनके  गाने को सुनिए 
ये बहुत ही खूबसूरत गाना गाते है ।
    user_Excellent news 66
    Excellent news 66
    Kandi, Garhwa•
    3 hrs ago
  • Post by Men of jharkhand
    1
    Post by Men of jharkhand
    user_Men of jharkhand
    Men of jharkhand
    Journalist Dhurki, Garhwa•
    13 hrs ago
  • झोलाछाप इलाज ने बिगाड़ी युवक की हालत: गलत उपचार से जिंदगी–मौत से जूझ रहा डंडई का मजदूर, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल हेमंत कुमार की रिपोर्ट डंडई प्रखंड में झोलाछाप चिकित्सकों की मनमानी एक बार फिर सामने आई है। रारो गांव अंतर्गत बाघीझरिया टोला निवासी उमेश भुइयां (35 वर्ष), पिता स्व. लौटन भुइयां, कथित गलत इलाज का शिकार हो गया है और इस समय जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। शुक्रवार दोपहर 1:00 परिजनो ने जानकारी देते हुए बताया कि उमेश बाहर रहकर मजदूरी करता था। करीब दो माह पहले काम के दौरान उसके गाल में एक छोटी सी फुंसी हो गई थी, जिसमें हल्की सूजन थी। इलाज के लिए वह घर लौटा, लेकिन बेहतर अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाने के बजाय गांव के लोगों की सलाह पर लवाही कला गांव में स्थित कथित झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र रजक के पास चला गया। आरोप है कि बिना किसी जांच के डॉक्टर ने फुंसी को सामान्य सूजन बताकर पकने देने की सलाह दी। बाद में फुंसी पकने पर गाल को चीरकर मवाद निकाला गया, वहां बाती लगाई गई और लगातार इंजेक्शन दिए जाने लगे। कई दिनों तक इलाज चलने के बावजूद न तो मरीज की हालत सुधरी और न ही दर्द में कोई कमी आई। उल्टे जख्म बढ़ता चला गया और पीड़ा असहनीय होती गई। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने मरीज को बाहर किसी बड़े अस्पताल में दिखाने की बात कही, तो कथित डॉक्टर ने यह कहकर रोक दिया कि वही इलाज कर देगा और कहीं ले जाने की जरूरत नहीं है। इस दौरान इलाज के नाम पर करीब 7 हजार रुपये खर्च कराए गए। वर्तमान में उमेश के गाल का जख्म काफी बड़ा और गंभीर हो चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार जख्म की स्थिति बेहद चिंताजनक है और किसी गंभीर बीमारी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अब तक किसी विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा इसकी पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों का यह भी आरोप है कि हालत बिगड़ने के बावजूद कथित डॉक्टर अब भी इलाज के नाम पर 4500 रुपये की मांग कर रहा है और जड़ी-बूटी देने की बात कह रहा है। मरीज की पत्नी सुनीता देवी और मां सानती कुंवर ने बताया कि अब उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं बचे हैं। उमेश ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला था। उसके दो छोटे बच्चे—एक बेटी और एक बेटा—हैं। परिजनों का कहना है कि यदि कथित डॉक्टर को सही इलाज की जानकारी नहीं थी, तो समय रहते मरीज को किसी बड़े अस्पताल भेजने की सलाह देनी चाहिए थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर झोलाछाप चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कथित डॉक्टर राजेंद्र रजक ने स्वीकार किया है कि मरीज के गाल में फुंसी थी। उसने बताया कि फुंसी को चीरकर मवाद निकाला गया और करीब आठ दिनों तक सुबह-शाम कुल 16 इंजेक्शन (डेक्सोना सहित) लगाए गए। वहीं मामलेमें पूछे जाने पर सिविल सर्जन जॉन एफ. केनेडी ने स्पष्ट कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं है, तो उसे इलाज करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज को तत्काल डंडई अस्पताल या गढ़वा सदर अस्पताल रेफर किया जाना चाहिए था। झोलाछाप द्वारा इस तरह इलाज करना नियमों के विरुद्ध है और मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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    झोलाछाप इलाज ने बिगाड़ी युवक की हालत: गलत उपचार से जिंदगी–मौत से जूझ रहा डंडई का मजदूर, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
हेमंत कुमार की रिपोर्ट
डंडई प्रखंड में झोलाछाप चिकित्सकों की मनमानी एक बार फिर सामने आई है। रारो गांव अंतर्गत बाघीझरिया टोला निवासी उमेश भुइयां (35 वर्ष), पिता स्व. लौटन भुइयां, कथित गलत इलाज का शिकार हो गया है और इस समय जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। शुक्रवार दोपहर 1:00 परिजनो ने जानकारी देते हुए बताया कि उमेश बाहर रहकर मजदूरी करता था। करीब दो माह पहले काम के दौरान उसके गाल में एक छोटी सी फुंसी हो गई थी, जिसमें हल्की सूजन थी। इलाज के लिए वह घर लौटा, लेकिन बेहतर अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाने के बजाय गांव के लोगों की सलाह पर लवाही कला गांव में स्थित कथित झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र रजक के पास चला गया।
आरोप है कि बिना किसी जांच के डॉक्टर ने फुंसी को सामान्य सूजन बताकर पकने देने की सलाह दी। बाद में फुंसी पकने पर गाल को चीरकर मवाद निकाला गया, वहां बाती लगाई गई और लगातार इंजेक्शन दिए जाने लगे। कई दिनों तक इलाज चलने के बावजूद न तो मरीज की हालत सुधरी और न ही दर्द में कोई कमी आई। उल्टे जख्म बढ़ता चला गया और पीड़ा असहनीय होती गई।
परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने मरीज को बाहर किसी बड़े अस्पताल में दिखाने की बात कही, तो कथित डॉक्टर ने यह कहकर रोक दिया कि वही इलाज कर देगा और कहीं ले जाने की जरूरत नहीं है। इस दौरान इलाज के नाम पर करीब 7 हजार रुपये खर्च कराए गए।
वर्तमान में उमेश के गाल का जख्म काफी बड़ा और गंभीर हो चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार जख्म की स्थिति बेहद चिंताजनक है और किसी गंभीर बीमारी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अब तक किसी विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा इसकी पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों का यह भी आरोप है कि हालत बिगड़ने के बावजूद कथित डॉक्टर अब भी इलाज के नाम पर 4500 रुपये की मांग कर रहा है और जड़ी-बूटी देने की बात कह रहा है। मरीज की पत्नी सुनीता देवी और मां सानती कुंवर ने बताया कि अब उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं बचे हैं। उमेश ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला था। उसके दो छोटे बच्चे—एक बेटी और एक बेटा—हैं। परिजनों का कहना है कि यदि कथित डॉक्टर को सही इलाज की जानकारी नहीं थी, तो समय रहते मरीज को किसी बड़े अस्पताल भेजने की सलाह देनी चाहिए थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर झोलाछाप चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले में कथित डॉक्टर राजेंद्र रजक ने स्वीकार किया है कि मरीज के गाल में फुंसी थी। उसने बताया कि फुंसी को चीरकर मवाद निकाला गया और करीब आठ दिनों तक सुबह-शाम कुल 16 इंजेक्शन (डेक्सोना सहित) लगाए गए।
वहीं मामलेमें पूछे जाने पर सिविल सर्जन जॉन एफ. केनेडी ने स्पष्ट कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं है, तो उसे इलाज करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज को तत्काल डंडई अस्पताल या गढ़वा सदर अस्पताल रेफर किया जाना चाहिए था। झोलाछाप द्वारा इस तरह इलाज करना नियमों के विरुद्ध है और मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    user_Hemant Kumar
    Hemant Kumar
    Government Officer चिनिया, गढ़वा, झारखंड•
    50 min ago
  • पपीता में कौन सा विटामीन होता है बताओ #हेल्थ
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    पपीता में कौन सा विटामीन होता है बताओ #हेल्थ
    user_NEWS INDIAN 724
    NEWS INDIAN 724
    Journalist गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    4 hrs ago
  • झारखंड में मोदी जी का बड़ा तौफा, 18 जनवरी को होगा शुभारंभ
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    झारखंड में मोदी जी का बड़ा तौफा, 18 जनवरी को होगा शुभारंभ
    user_पत्रकार - विकास कुमार
    पत्रकार - विकास कुमार
    Journalist Garhwa, Jharkhand•
    8 hrs ago
  • Post by The Update Abtak
    1
    Post by The Update Abtak
    user_The Update Abtak
    The Update Abtak
    Journalist केतर, गढ़वा, झारखंड•
    2 hrs ago
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