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कंबल लेने निकले वृद्ध का शव डैम में मिला, विधायक प्रतिनिधि ने भाजपा पर लगाया आरो
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कंबल लेने निकले वृद्ध का शव डैम में मिला, विधायक प्रतिनिधि ने भाजपा पर लगाया आरो
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- Post by The Update Abtak1
- रांची// अल्बर्ट एक्का चौक पर मशाल जुलूस निकाल कर आदिवासी संगठनों ने किया झारखंड बंद का ऐलान। खूंटी के पड़हा राजा सोम मुंडा की हत्या के विरोध में कल 17 जनवरी को झारखंड बंद।1
- हमारे पास जो सॉक्स बैठे हैं ये गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड के चर्चित कलाकर जिनका नाम प्रेमी पिंटू यादव है इनके गाने को सुनिए ये बहुत ही खूबसूरत गाना गाते है ।1
- Post by Men of jharkhand1
- झोलाछाप इलाज ने बिगाड़ी युवक की हालत: गलत उपचार से जिंदगी–मौत से जूझ रहा डंडई का मजदूर, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल हेमंत कुमार की रिपोर्ट डंडई प्रखंड में झोलाछाप चिकित्सकों की मनमानी एक बार फिर सामने आई है। रारो गांव अंतर्गत बाघीझरिया टोला निवासी उमेश भुइयां (35 वर्ष), पिता स्व. लौटन भुइयां, कथित गलत इलाज का शिकार हो गया है और इस समय जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। शुक्रवार दोपहर 1:00 परिजनो ने जानकारी देते हुए बताया कि उमेश बाहर रहकर मजदूरी करता था। करीब दो माह पहले काम के दौरान उसके गाल में एक छोटी सी फुंसी हो गई थी, जिसमें हल्की सूजन थी। इलाज के लिए वह घर लौटा, लेकिन बेहतर अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाने के बजाय गांव के लोगों की सलाह पर लवाही कला गांव में स्थित कथित झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र रजक के पास चला गया। आरोप है कि बिना किसी जांच के डॉक्टर ने फुंसी को सामान्य सूजन बताकर पकने देने की सलाह दी। बाद में फुंसी पकने पर गाल को चीरकर मवाद निकाला गया, वहां बाती लगाई गई और लगातार इंजेक्शन दिए जाने लगे। कई दिनों तक इलाज चलने के बावजूद न तो मरीज की हालत सुधरी और न ही दर्द में कोई कमी आई। उल्टे जख्म बढ़ता चला गया और पीड़ा असहनीय होती गई। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने मरीज को बाहर किसी बड़े अस्पताल में दिखाने की बात कही, तो कथित डॉक्टर ने यह कहकर रोक दिया कि वही इलाज कर देगा और कहीं ले जाने की जरूरत नहीं है। इस दौरान इलाज के नाम पर करीब 7 हजार रुपये खर्च कराए गए। वर्तमान में उमेश के गाल का जख्म काफी बड़ा और गंभीर हो चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार जख्म की स्थिति बेहद चिंताजनक है और किसी गंभीर बीमारी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अब तक किसी विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा इसकी पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों का यह भी आरोप है कि हालत बिगड़ने के बावजूद कथित डॉक्टर अब भी इलाज के नाम पर 4500 रुपये की मांग कर रहा है और जड़ी-बूटी देने की बात कह रहा है। मरीज की पत्नी सुनीता देवी और मां सानती कुंवर ने बताया कि अब उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं बचे हैं। उमेश ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला था। उसके दो छोटे बच्चे—एक बेटी और एक बेटा—हैं। परिजनों का कहना है कि यदि कथित डॉक्टर को सही इलाज की जानकारी नहीं थी, तो समय रहते मरीज को किसी बड़े अस्पताल भेजने की सलाह देनी चाहिए थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर झोलाछाप चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कथित डॉक्टर राजेंद्र रजक ने स्वीकार किया है कि मरीज के गाल में फुंसी थी। उसने बताया कि फुंसी को चीरकर मवाद निकाला गया और करीब आठ दिनों तक सुबह-शाम कुल 16 इंजेक्शन (डेक्सोना सहित) लगाए गए। वहीं मामलेमें पूछे जाने पर सिविल सर्जन जॉन एफ. केनेडी ने स्पष्ट कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं है, तो उसे इलाज करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज को तत्काल डंडई अस्पताल या गढ़वा सदर अस्पताल रेफर किया जाना चाहिए था। झोलाछाप द्वारा इस तरह इलाज करना नियमों के विरुद्ध है और मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1
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- Post by The Update Abtak1