Shuru
Apke Nagar Ki App…
“ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ी राहतकाम जल्द शुरू होगा।” “ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ी घोषणा। नई ग्रामीण सड़क विकास योजना के तहत गांवों में पक्की सड़कें बनाई जाएंगी। काम जल्द शुरू होगा।”
Dilip Kumar Bharti
“ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ी राहतकाम जल्द शुरू होगा।” “ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ी घोषणा। नई ग्रामीण सड़क विकास योजना के तहत गांवों में पक्की सड़कें बनाई जाएंगी। काम जल्द शुरू होगा।”
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- जय बागेश्वर धाम! 🙏 बाबा बागेश्वर धाम और श्री हनुमान जी की कृपा आप पर बनी रहे।1
- “ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ी घोषणा। नई ग्रामीण सड़क विकास योजना के तहत गांवों में पक्की सड़कें बनाई जाएंगी। काम जल्द शुरू होगा।”1
- प्रकृति का नियम है - उसके बच्चे को मत छुओ ❤️🙏1
- बांदा महुआ ब्लॉक के अंतर्गत पिथोराबाद में रसद दुकानों का निर्माण में ग्राम प्रधान व सदस्य ने मिलकर जिलाधिकारी जे.रिभा से सचिव शशि प्रकाश के ऊपर दबंगई के बल पर कार्य करने के लगाए आरोप1
- माँ कलेही धाम पवई। पन्ना आज के दिव्य दर्शन 🚩👏1
- #Apkiawajdigital बांदा/चित्रकूट | विशेष संवाददाता इंसानियत को शर्मसार करने वाले देश के सबसे बड़े 'चाइल्ड एब्यूज' कांड में शुक्रवार को न्याय का वह हथौड़ा चला, जिसकी गूँज पूरे देश में सुनाई दी। बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने 34 मासूम बच्चों के साथ कुकर्म करने, उनके अश्लील वीडियो बनाकर विदेशी पोर्न साइट्स को बेचने वाले मुख्य आरोपी रामभवन और साक्ष्यों को मिटाने में उसकी मददगार पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को 'जघन्यतम' श्रेणी में रखते हुए स्पष्ट किया कि मासूमों के बचपन को नीलाम करने वालों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। CBI की चार्जशीट ने खोली दरिंदगी की परतें चित्रकूट में सिंचाई विभाग में तैनात रहा कनिष्ठ सहायक रामभवन (निलंबित) वर्षों से मासूमों को अपनी हवस का शिकार बना रहा था। मामला तब खुला जब 2020 में सीबीआई ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। जांच में सामने आया कि रामभवन न केवल बच्चों का शारीरिक शोषण करता था, बल्कि डार्क वेब और पोर्न साइट्स के जरिए उनकी अस्मत का सौदा भी करता था। उसकी पत्नी दुर्गावती पर गवाहों को धमकाने और सबूतों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप सिद्ध हुए, जिसके चलते कोर्ट ने उसे भी मृत्युदंड का भागीदार माना। न्याय की जीत: पीड़ितों को 10-10 लाख का मरहम विशेष न्यायाधीश ने फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि सभी 34 पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल प्रदान की जाए। अधिवक्ताओं के अनुसार, गवाहों के टूटने और डराने-धमकाने के बावजूद सीबीआई की ठोस पैरवी ने दोषियों को फंदे तक पहुँचाया है। निष्कर्ष: "यह फैसला केवल एक सजा नहीं, बल्कि उन 34 परिवारों के घावों पर मरहम है, जिनका बचपन इस दरिंदे ने उजाड़ दिया था। बांदा कोर्ट का यह निर्णय देश भर के चाइल्ड एब्यूज मामलों में नजीर बनेगा।"1
- Post by Mamta chaurasiya1
- #Apkiawajdigital बांदा/चित्रकूट | इंसानियत को शर्मसार करने वाले बांदा के बहुचर्चित 'चाइल्ड एब्यूज' मामले में शुक्रवार को विशेष पॉक्सो अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 34 मासूम बच्चों का यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो पोर्न साइट्स पर बेचने के दोषी मुख्य अभियुक्त रामभवन और उसकी सहयोगी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों के लिए कानून में कोई माफी नहीं है। साक्ष्यों से छेड़छाड़ पर पत्नी को भी सजा-ए-मौत चित्रकूट में सिंचाई विभाग में तैनात रहा रामभवन पिछले कुछ वर्षों से निलंबित चल रहा था। सीबीआई ने 2020 में इस मामले की कमान संभाली थी और चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में पाया गया कि रामभवन मासूमों को अपनी हवस का शिकार बनाता था, वहीं उसकी पत्नी दुर्गावती साक्ष्यों को मिटाने और गवाहों को धमकाने में बराबर की साझीदार थी। अदालत ने दोनों की भूमिका को अक्षम्य मानते हुए फांसी के फंदे तक पहुँचाया। प्रमुख बिंदु: एक नजर में दोषी: रामभवन (निलंबित कनिष्ठ सहायक, सिंचाई विभाग) और उसकी पत्नी दुर्गावती। जुर्म: 34 मासूमों से कुकर्म, अश्लील वीडियो बनाना और उन्हें डार्क वेब/पोर्न साइट्स पर बेचना। मुआवजा: माननीय न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए। CBI की भूमिका: दिल्ली से आई सीबीआई टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था। न्यायालय की टिप्पणी मामले की गंभीरता और दरिंदगी की सीमा को देखते हुए, पॉक्सो कोर्ट ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी के करीब माना। अधिवक्ताओं के अनुसार, ट्रायल के दौरान पेश किए गए साक्ष्य इतने पुख्ता थे कि बचाव पक्ष के पास कोई ठोस दलील नहीं बची थी।1