चंबलांचल, जो अपनी देशभक्ति और प्रथम विश्व युद्ध से लेकर हाल के वर्षों तक हुए युद्धों में सेवा देने वाले पराक्रमी वीरों की भूमि के रूप में जाना जाता है, वहीं लंबे समय से यहाँ के पुलिस प्रशासन का ढुलमुल रवैया सदैव लोगों के लिए हास्य और घोर निंदा का विषय रहा है। इसी असंवेदनशील कार्यशैली की 'भीमसेन सिंह तोमर' ने कटु शब्दों में निंदा की है। इस क्षेत्र से आने वाले कारगिल युद्ध के जांबाज सपूत हरिदास देवपुरिया जी, जिन्होंने युद्ध में अपना दमखम दिखाया था, आज अपनी 70 वर्ष की उम्र में पुलिस और सिस्टम के सामने लाचार व मजबूर खड़े हैं, क्योंकि उन्हें अपनी पत्नी के हत्यारों के लिए न्याय नहीं मिल पा रहा है। लगभग डेढ़ वर्ष पहले भिंड जिले में उनके घर में कुछ लुटेरों और डकैतों ने घुसकर लाखों रुपये के गहने और नकदी चुरा ली थी। जब हरिदास देवपुरिया जी की पत्नी जागीं, तो लुटेरों ने सबूत मिटाने के उद्देश्य से उनकी हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध के लगभग डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं हुई है, और पूर्व सैनिक हरिदास देवपुरिया जी अपनी पत्नी के हत्यारों को फाँसी दिलाने और न्याय के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं। इसी क्रम में, सोमवार 1 जून 2026 को चंबल और ग्वालियर अंचल के भूतपूर्व सैनिकों ने एक संयुक्त दल के रूप में भिंड के नवागत एसपी से मुलाकात की। लहार रोड स्थित एसपी कार्यालय पर हुई इस मुलाकात के दौरान अमर शहीद सम्मान सेवा संघ, आई.व्ही.ओ. भिंड, समाजसेवी और अन्य क्षेत्रीय लोगों सहित पीड़ित परिवार की महिलाएँ और हरिदास देवपुरिया जी स्वयं मौजूद थे। सभी ने विगत थाना प्रभारी और विवेचकों की नाकामी की घोर निंदा करते हुए न्याय की मांग की। नवागत एसपी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आश्वासन दिया कि वे निश्चित रूप से इस प्रकरण में अपना 100% कार्य करेंगे और 15 दिन के भीतर हत्यारों को खोज निकालने की पूरी कोशिश करेंगे।
चंबलांचल, जो अपनी देशभक्ति और प्रथम विश्व युद्ध से लेकर हाल के वर्षों तक हुए युद्धों में सेवा देने वाले पराक्रमी वीरों की भूमि के रूप में जाना जाता है, वहीं लंबे समय से यहाँ के पुलिस प्रशासन का ढुलमुल रवैया सदैव लोगों के लिए हास्य और घोर निंदा का विषय रहा है। इसी असंवेदनशील कार्यशैली की 'भीमसेन सिंह तोमर' ने कटु शब्दों में निंदा की है। इस क्षेत्र से आने वाले कारगिल युद्ध के जांबाज सपूत हरिदास देवपुरिया जी,
जिन्होंने युद्ध में अपना दमखम दिखाया था, आज अपनी 70 वर्ष की उम्र में पुलिस और सिस्टम के सामने लाचार व मजबूर खड़े हैं, क्योंकि उन्हें अपनी पत्नी के हत्यारों के लिए न्याय नहीं मिल पा रहा है। लगभग डेढ़ वर्ष पहले भिंड जिले में उनके घर में कुछ लुटेरों और डकैतों ने घुसकर लाखों रुपये के गहने और नकदी चुरा ली थी। जब हरिदास देवपुरिया जी की पत्नी जागीं, तो लुटेरों ने सबूत मिटाने के उद्देश्य से उनकी हत्या कर
दी। इस जघन्य अपराध के लगभग डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं हुई है, और पूर्व सैनिक हरिदास देवपुरिया जी अपनी पत्नी के हत्यारों को फाँसी दिलाने और न्याय के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं। इसी क्रम में, सोमवार 1 जून 2026 को चंबल और ग्वालियर अंचल के भूतपूर्व सैनिकों ने एक संयुक्त दल के रूप में भिंड के नवागत एसपी से मुलाकात की। लहार रोड स्थित एसपी कार्यालय पर हुई इस मुलाकात के
दौरान अमर शहीद सम्मान सेवा संघ, आई.व्ही.ओ. भिंड, समाजसेवी और अन्य क्षेत्रीय लोगों सहित पीड़ित परिवार की महिलाएँ और हरिदास देवपुरिया जी स्वयं मौजूद थे। सभी ने विगत थाना प्रभारी और विवेचकों की नाकामी की घोर निंदा करते हुए न्याय की मांग की। नवागत एसपी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आश्वासन दिया कि वे निश्चित रूप से इस प्रकरण में अपना 100% कार्य करेंगे और 15 दिन के भीतर हत्यारों को खोज निकालने की पूरी कोशिश करेंगे।
- चंबलांचल, जो अपनी देशभक्ति और प्रथम विश्व युद्ध से लेकर हाल के वर्षों तक हुए युद्धों में सेवा देने वाले पराक्रमी वीरों की भूमि के रूप में जाना जाता है, वहीं लंबे समय से यहाँ के पुलिस प्रशासन का ढुलमुल रवैया सदैव लोगों के लिए हास्य और घोर निंदा का विषय रहा है। इसी असंवेदनशील कार्यशैली की 'भीमसेन सिंह तोमर' ने कटु शब्दों में निंदा की है। इस क्षेत्र से आने वाले कारगिल युद्ध के जांबाज सपूत हरिदास देवपुरिया जी, जिन्होंने युद्ध में अपना दमखम दिखाया था, आज अपनी 70 वर्ष की उम्र में पुलिस और सिस्टम के सामने लाचार व मजबूर खड़े हैं, क्योंकि उन्हें अपनी पत्नी के हत्यारों के लिए न्याय नहीं मिल पा रहा है। लगभग डेढ़ वर्ष पहले भिंड जिले में उनके घर में कुछ लुटेरों और डकैतों ने घुसकर लाखों रुपये के गहने और नकदी चुरा ली थी। जब हरिदास देवपुरिया जी की पत्नी जागीं, तो लुटेरों ने सबूत मिटाने के उद्देश्य से उनकी हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध के लगभग डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं हुई है, और पूर्व सैनिक हरिदास देवपुरिया जी अपनी पत्नी के हत्यारों को फाँसी दिलाने और न्याय के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं। इसी क्रम में, सोमवार 1 जून 2026 को चंबल और ग्वालियर अंचल के भूतपूर्व सैनिकों ने एक संयुक्त दल के रूप में भिंड के नवागत एसपी से मुलाकात की। लहार रोड स्थित एसपी कार्यालय पर हुई इस मुलाकात के दौरान अमर शहीद सम्मान सेवा संघ, आई.व्ही.ओ. भिंड, समाजसेवी और अन्य क्षेत्रीय लोगों सहित पीड़ित परिवार की महिलाएँ और हरिदास देवपुरिया जी स्वयं मौजूद थे। सभी ने विगत थाना प्रभारी और विवेचकों की नाकामी की घोर निंदा करते हुए न्याय की मांग की। नवागत एसपी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आश्वासन दिया कि वे निश्चित रूप से इस प्रकरण में अपना 100% कार्य करेंगे और 15 दिन के भीतर हत्यारों को खोज निकालने की पूरी कोशिश करेंगे।4
- भिंड जिले में कारगिल युद्ध के अनुभवी सैनिक हरिदास दैवपुरिया अपनी पत्नी की हत्या के डेढ़ साल बाद भी न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। भीमसेन सिंह तोमर की लेखनी के माध्यम से पुलिस की असंवेदनशील कार्यशैली की कटु शब्दों में निंदा की गई है, जो चंबल की उस भूमि के वीर सपूतों की गाथाओं के विपरीत है, जहां देशभक्ति और पराक्रम सर्वोपरि माना जाता है। लगभग डेढ़ वर्ष पहले, कुछ लुटेरों और डकैतों ने हरिदास देवपुरिया के घर में घुसकर लाखों रुपये के गहने और नकदी चुरा ली थी। जब उनकी पत्नी जाग गई, तो लुटेरों ने सबूत मिटाने के लिए उनकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद से, चंबल अंचल में पुलिस प्रशासन के ढुलमुल रवैये को लेकर सदैव ही आलोचना होती रही है, और इस मामले में भी विगत थाना प्रभारी व जांच अधिकारियों की नाकामी को घोर निंदा का विषय बताया गया है। सोमवार, 1 जून 2026 को, 70 वर्षीय हरिदास दैवपुरिया अपनी पत्नी के हत्यारों को फांसी दिलाने और न्याय की मांग को लेकर एक बार फिर सामने आए। इस क्रम में, चंबल और ग्वालियर अंचल के सैकड़ों भूतपूर्व सैनिकों का एक जत्था, पीड़ित परिवारों की महिलाओं और स्वयं हरिदास देवपुरिया के साथ लहार रोड स्थित एसपी कार्यालय पर नवागत एसपी भिंड से मिला। उन्होंने पुलिस की पिछली निष्क्रियता पर नाराजगी व्यक्त की, जिसके जवाब में नवागत एसपी ने निश्चित रूप से इस प्रकरण में गंभीरता दिखाने, 100% कार्य करने और 15 दिन के भीतर हत्यारों को खोज निकालने की कोशिश करने का आश्वासन दिया। इस दौरान अमर शहीद सम्मान सेवा संघ, आई.वी.ओ भिंड, समाजसेवी और अन्य क्षेत्रीय लोगों ने भी न्याय की मांग की।4
- चंबल की वह धरती, जहाँ के वीर सपूतों की देशभक्ति और शौर्य की गाथाएँ देश भर में गूँजती हैं, आज वहीं के एक जाँबाज कारगिल युद्ध योद्धा हरिदास देवपुरिया अपनी पत्नी के हत्यारों को न्याय दिलाने के लिए लगभग डेढ़ साल से पुलिस और सिस्टम के सामने लाचार व मजबूर महसूस कर रहे हैं। भीमसेन सिंह तोमर ने पुलिस की असंवेदनशील कार्यशैली की कड़ी निंदा की है, क्योंकि चंबल अंचल में लंबे समय से पुलिस प्रशासन का ढुलमुल रवैया सदैव निंदा का विषय रहा है। ताज़ा मामले के अनुसार, भिंड जिले के हरिदास देवपुरिया, जिन्होंने कारगिल युद्ध में अपना पराक्रम दिखाया था, उनकी पत्नी की लगभग डेढ़ वर्ष पहले कुछ लुटेरों और डकैतों ने घर में घुसकर लाखों रुपये के गहने और नगदी चुराई थी। जब वीरांगना जागीं तो सबूत मिटाने के लिए उनकी हत्या कर दी गई। सोमवार, 1 जून 2026 को, 70 वर्षीय बुजुर्ग हरिदास अपनी पत्नी के हत्यारों को फाँसी दिलाने और न्याय के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं। इसी क्रम में, चंबल और ग्वालियर अंचल के भूतपूर्व सैनिकों ने संयुक्त रूप से नवागत एसपी भिंड को मामले से अवगत कराया और विगत थाना प्रभारी व विवेचकों की घोर नाकामी की निंदा की। नवागत एसपी ने गंभीरता दिखाते हुए अपना 100% कार्य करने और 15 दिन के भीतर हत्यारों को खोज निकालने का प्रयास करने का आश्वासन दिया है। लहार रोड स्थित एसपी कार्यालय पर पीड़ित परिवार की महिलाएँ, पीड़ित पति और अमर शहीद सम्मान सेवा संघ, आई.वी.ओ भिंड, समाजसेवी तथा अन्य क्षेत्रीय लोगों सहित सैकड़ों की संख्या में भूतपूर्व सैनिकों का जत्था न्याय की माँग करते हुए मौजूद रहा। पूर्व सैनिक हरिदास देवपुरिया को पत्नी की हत्या के लगभग डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं हुई है।4
- भिंड देहात पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे दो स्थायी वारंटियों को गिरफ्तार कर एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। यह कार्रवाई भिंड के पुलिस अधीक्षक श्री सूरज कुमार वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री संजीव पाठक और नगर पुलिस अधीक्षक श्री निरंजन सिंह राजपूत के निर्देशन में की गई। जानकारी के अनुसार, देहात थाना प्रभारी निरीक्षक शिवप्रताप सिंह राजावत के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने एक मुखबिर से मिली सूचना पर त्वरित कार्रवाई की। टीम ने सुरपुरा रोड फूप क्षेत्र में दबिश देकर उन दोनों स्थायी वारंटियों को दबोच लिया, जो पिछले छह वर्षों से पुलिस को चकमा दे रहे थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। पुलिस को यह सटीक सूचना मिली थी कि दोनों वारंटी सुरपुरा रोड फूप पर मौजूद हैं, जिसके बाद मौके पर घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को अब न्यायालय में पेश किया जा रहा है। इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक शिवप्रताप सिंह राजावत, उपनिरीक्षक अजय यादव, उपनिरीक्षक प्रमोद तोमर, तथा प्रधान आरक्षक रवि जादौन, शैलेन्द्र भदौरिया, दिलीप शाक्य, महेन्द्र यादव, धर्मेन्द्र यादव, ज्ञानेन्द्र मिश्रा, पंकज जयंत एवं मनीष जादौन की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। भिंड देहात पुलिस की इस कार्रवाई से एक बार फिर यह साबित हुआ है कि पुलिस की सतर्कता और उसके मुखबिर तंत्र की सक्रियता लंबे समय से फरार अपराधियों को पकड़ने में बेहद प्रभावी है।2
- धौलपुर के सैंपऊ रोड पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मचकुंड प्रसंग, सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर संवाद और शुकदेव पूजन के साथ आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। अंतिम दिन की कथा में उमड़े जनसैलाब से पूरा हॉल भक्तिमय माहौल में सराबोर नज़र आया, जिससे श्रद्धालुओं में गहरा आध्यात्मिक उत्साह देखने को मिला। कथा के सातवें और अंतिम दिन, पूज्य महाराज सर्वेश प्रपन्नाचार्य ने धौलपुर स्थित मचकुंड तीर्थराज को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने राजा मुचुकुन्द और कालयवन वध प्रसंग का अत्यंत रसपूर्ण एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए समझाया कि कैसे कालयवन द्वारा मथुरा पर आक्रमण करने पर भगवान श्रीकृष्ण रणभूमि छोड़कर भागे और 'रणछोड़' कहलाए। यह भगवान की एक अद्भुत लीला थी, जिसके तहत कालयवन उनका पीछा करते हुए धौलपुर के मौनी सिद्ध पहाड़ पर स्थित एक गुफा में जा पहुँचा। गुफा के भीतर त्रेतायुग के प्रतापी सूर्यवंशी राजा मुचुकुन्द गहरी नींद में सो रहे थे, जिन्हें इंद्र देव से यह वरदान प्राप्त था कि जो भी उन्हें नींद से जगाएगा, वह उनकी पहली दृष्टि पड़ते ही भस्म हो जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी चतुराई से अपना पीतांबर सो रहे राजा मुचुकुन्द पर डाल दिया। अहंकार में अंधे कालयवन ने मुचुकुन्द को ही श्रीकृष्ण समझकर उन्हें लात मार दी, जिससे राजा मुचुकुन्द की आंखें खुल गईं और कालयवन जलकर भस्म हो गया। इस घटना के बाद, राजा मुचुकुन्द ने सम्मुख खड़े साक्षात भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और राजपाठ तथा सांसारिक मोह त्यागकर प्रभु के चरणों में शरणागति ले ली। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि कालयवन वास्तव में मनुष्य के भीतर का 'अहंकार और वासना' है, जिसका अंत केवल ईश्वर की शरण में जाने पर ही संभव है। महाराज श्री ने भगवान कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता का भी मार्मिक चित्रण किया, यह बताते हुए कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी की कोई दीवार नहीं होती। उन्होंने भावुकता से बताया कि कैसे सुदामा जी जब द्वारिका पहुँचे, तो प्रभु श्री कृष्ण ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया, जिसे सुनकर पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा को आगे बढ़ाते हुए नव योगेश्वर संवाद पर उन्होंने कहा कि राजा निमि और नौ योगेश्वरों के बीच का संवाद भागवत महापुराण का हृदय है, जिसमें योगेश्वरों ने बताया कि भगवान की भक्ति ही शाश्वत है। शुकदेव पूजन में कथाव्यास ने शुकदेव जी महाराज को साक्षात वैराग्य का प्रतीक बताया और कहा कि उनके आगमन और पूजन से जीवन के सारे अंधकार दूर हो जाते हैं। महाराज श्री ने सात दिनों के सार को समेटते हुए कहा कि भागवत श्रवण से केवल मोक्ष ही नहीं मिलता, बल्कि यह हमें जीवन जीने की सही कला सिखाता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से व्यसन मुक्ति, माता-पिता की सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। कथा के परीक्षित महाराम शर्मा और उमा शर्मा सहित कमल, विमल, मनीष, यज्ञपति सूतैल, सियाराम शर्मा, गिरीश ब्रह्मा, पवन शर्मा, श्याम, रामू, मुकेश सूतैल और अन्य अनेक श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर कथा पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया।3
- ब्रज भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की जोरदार मांग की गई है। इस मांग के पीछे प्रमुख तर्क यह दिया गया है कि यदि ब्रज भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया, तो इस क्षेत्र के युवा शिक्षा और रोजगार के अवसरों में पिछड़ जाएंगे। यह चिंता व्यक्त की गई है कि ब्रज भाषा को उसका उचित स्थान न मिलने से युवाओं के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।1
- धौलपुर के सैंपऊ रोड स्थित सिंगारा पैलेस में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का मचकुंड प्रसंग, सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर संवाद और शुकदेव पूजन के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन की कथा में उमड़े जनसैलाब से पूरा हॉल भक्तिमय माहौल में सराबोर नज़र आया। कथा व्यास पूज्य महाराज सर्वेश प्रपन्नाचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। कथा के सातवें दिन, महाराज सर्वेश प्रपन्नाचार्य ने धौलपुर स्थित मचकुंड तीर्थराज के महत्व को उजागर करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने राजा मुचुकुन्द और कालयवन वध के प्रसंग को अत्यंत भावपूर्ण तरीके से सुनाया, जिसमें कालयवन के मथुरा पर आक्रमण करने पर भगवान श्रीकृष्ण को 'रणछोड़' कहा गया। यह भगवान की एक अनूठी लीला थी। कालयवन भगवान का पीछा करते हुए धौलपुर में मौनी सिद्ध के पहाड़ पर एक गुफा में पहुंचा, जहां त्रेतायुग के प्रतापी सूर्यवंशी राजा मुचुकुन्द विश्राम कर रहे थे। इंद्र देव से वरदान प्राप्त मुचुकुन्द की पहली दृष्टि से कालयवन जलकर भस्म हो गया, जब उसने अहंकारवश उन्हें श्रीकृष्ण समझकर लात मारी। इस घटना के बाद, राजा मुचुकुन्द ने साक्षात भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर राजपाठ और सांसारिक मोह त्यागकर प्रभु के चरणों में शरणागति ले ली। कथा व्यास ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि कालयवन वास्तव में मनुष्य के भीतर का अहंकार और वासना है, जिसका अंत केवल ईश्वर की शरण में जाने पर ही संभव है। महाराज ने भगवान कृष्ण और सुदामा की निश्छल मित्रता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी की कोई दीवार नहीं होती। उन्होंने बताया कि जब सुदामा जी द्वारिका पहुंचे, तो प्रभु श्रीकृष्ण ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया। इस मर्मस्पर्शी प्रसंग को भजनों के माध्यम से सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा को समापन की ओर ले जाते हुए, कथाव्यास ने नव योगेश्वर संवाद पर भी चर्चा की, जिसे भागवत महापुराण का हृदय बताया गया, जिसमें योगेश्वरों ने राजा निमि के प्रश्नों का उत्तर देते हुए भगवान की भक्ति को शाश्वत बताया। शुकदेव पूजन में कथाव्यास ने शुकदेव जी महाराज को साक्षात वैराग्य का प्रतीक बताया और कहा कि उनके आगमन और पूजन से जीवन के सारे अंधकार दूर हो जाते हैं। कथा के परीक्षित महाराम शर्मा और उमा शर्मा सहित कमल, विमल, मनीष, यज्ञपति सूतैल, सियाराम शर्मा, गिरीश ब्रह्मा, पवन शर्मा, श्याम, रामू, मुकेश सूतैल और अन्य श्रद्धालुओं ने कथा पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। महाराज श्री ने सात दिनों के सार को समेटते हुए कहा कि भागवत श्रवण से केवल मोक्ष ही नहीं मिलता, बल्कि यह हमें जीवन जीने की सही कला सिखाता है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से व्यसन मुक्ति, माता-पिता की सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।4
- धौलपुर में श्री कृष्णा गौ सेवा समिति द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया गया। समिति ने इस पहल के तहत क्षेत्र में साफ-सफाई सुनिश्चित करने का कार्य किया।1