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महावीर नगर थाना क्षेत्र में कैफे पर बड़ी कार्रवाई, पुलिस व नगर निगम की संयुक्त टीम का औचक निरीक्षण न्यूज़ स्क्रिप्ट: कोटा शहर में अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए महावीर नगर थाना पुलिस और नगर निगम कोटा की संयुक्त टीम ने क्षेत्र में संचालित कैफे पर औचक निरीक्षण अभियान चलाया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कोटा शहर के निर्देश पर की गई। अभियान के दौरान विश्वकर्मा नगर, लव बर्ड कैफे रंगबाड़ी और मोयो-मोयो कैफे केशवपुरा मेन रोड सहित कई स्थानों पर जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कैफे में लगाए गए अवैध बॉक्स और केबिन को हटाया गया और कैफे संचालकों को भविष्य में इस तरह की अवैध गतिविधियां नहीं करने के सख्त निर्देश दिए गए। पुलिस और नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि जिला कलेक्टर की मासिक समीक्षा बैठक में इस विषय पर चर्चा के बाद यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

15 hrs ago
user_VKH NEWS
VKH NEWS
लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
15 hrs ago

महावीर नगर थाना क्षेत्र में कैफे पर बड़ी कार्रवाई, पुलिस व नगर निगम की संयुक्त टीम का औचक निरीक्षण न्यूज़ स्क्रिप्ट: कोटा शहर में अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए महावीर नगर थाना पुलिस और नगर निगम कोटा की संयुक्त टीम ने क्षेत्र में संचालित कैफे पर औचक निरीक्षण अभियान चलाया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कोटा शहर के निर्देश पर की गई। अभियान के दौरान विश्वकर्मा नगर, लव बर्ड कैफे रंगबाड़ी और मोयो-मोयो कैफे केशवपुरा मेन रोड सहित कई स्थानों पर जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कैफे में लगाए गए अवैध बॉक्स और केबिन को हटाया गया और कैफे संचालकों को भविष्य में इस तरह की अवैध गतिविधियां नहीं करने के सख्त निर्देश दिए गए। पुलिस और नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि जिला कलेक्टर की मासिक समीक्षा बैठक में इस विषय पर चर्चा के बाद यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

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  • भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावा पूरी बिहार राज्य में यहां जाने का मौका मिला
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    भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावा पूरी बिहार राज्य में यहां जाने का मौका मिला
    user_Lokesh
    Lokesh
    Loan agency लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    55 min ago
  • कोटा के रेलवे कॉलोनी थाना क्षेत्र में एक 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा द्वारा आत्महत्या करने का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के समय छात्रा घर पर थी, तभी उसकी मां ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया और परिजनों की मदद से उसे तत्काल एमबीएस अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल छात्रा का अस्पताल में उपचार जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
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    कोटा के रेलवे कॉलोनी थाना क्षेत्र में एक 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा द्वारा आत्महत्या करने का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के समय छात्रा घर पर थी, तभी उसकी मां ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया और परिजनों की मदद से उसे तत्काल एमबीएस अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल छात्रा का अस्पताल में उपचार जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
    user_Anubhav Mittal Journalist
    Anubhav Mittal Journalist
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    55 min ago
  • बकाया भुगतान की मांग को लेकर 18 फरवरी से कोटा कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे जेके फैक्ट्री के मजदूरों के आंदोलन को गुरूवार को को 353 दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच 13 मजदूरों की मौत हो चुकी है। लेकिन सरकार की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हो रही...मंगलवार को धरने के 351 वें दिन तीनों संचालकों से बातचीत...
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    बकाया भुगतान की मांग को लेकर 18 फरवरी से कोटा कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे जेके फैक्ट्री के मजदूरों के आंदोलन को गुरूवार को को 353 दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच 13 मजदूरों की मौत हो चुकी है। लेकिन सरकार की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हो रही...मंगलवार को धरने के 351 वें दिन तीनों संचालकों से बातचीत...
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • सोशल मीडिया फ्रेंड ने जन्मदिन का बहाना बनाकर सूरत बुलाया, नशा देकर दुष्कर्म का आरोप, दो गिरफ्तार जिले की 21 वर्षीय युवती के साथ गुजरात के सूरत में दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि उसे जन्मदिन मनाने के बहाने सूरत बुलाया गया और करीब 20 दिनों तक अलग-अलग होटलों में रखकर उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। इस दौरान उसके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और नशे के इंजेक्शन लगाने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका पुलिस रिमांड लिया है।
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    सोशल मीडिया फ्रेंड ने जन्मदिन का बहाना बनाकर सूरत बुलाया, नशा देकर दुष्कर्म का आरोप, दो गिरफ्तार
जिले की 21 वर्षीय युवती के साथ गुजरात के सूरत में दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि उसे जन्मदिन मनाने के बहाने सूरत बुलाया गया और करीब 20 दिनों तक अलग-अलग होटलों में रखकर उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। इस दौरान उसके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और नशे के इंजेक्शन लगाने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका पुलिस रिमांड लिया है।
    user_बलदेव सिंह
    बलदेव सिंह
    Ladpura, Kota•
    2 hrs ago
  • आज हम बात कर रहे हैं UGC के नए नियमों की, जिन्हें कई संगठन और छात्र “काला कानून” बता रहे हैं। आखिर इन नियमों में ऐसा क्या है, जिससे विरोध हो रहा है? और क्या ये नियम छात्रों के हित में हैं या नुकसानदायक? इन्हीं सवालों पर आज हम विशेषज्ञ से खास बातचीत कर रहे हैं।
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    आज हम बात कर रहे हैं UGC के नए नियमों की, जिन्हें कई संगठन और छात्र “काला कानून” बता रहे हैं।
आखिर इन नियमों में ऐसा क्या है, जिससे विरोध हो रहा है?
और क्या ये नियम छात्रों के हित में हैं या नुकसानदायक?
इन्हीं सवालों पर आज हम विशेषज्ञ से खास बातचीत कर रहे हैं।
    user_Mayur times news
    Mayur times news
    पत्रकार Ladpura, Kota•
    5 hrs ago
  • राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था। लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है अपने क्षेत्र की सभी वायरल विडियोज के लिए डाउनलोड करें शुरू ऐप (Shuru App) 👇🏻
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    राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था।
लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है
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    user_MHR News
    MHR News
    Media house लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • Post by VKH NEWS
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    Post by VKH NEWS
    user_VKH NEWS
    VKH NEWS
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है।
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    राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है।
    user_MHR News
    MHR News
    Media house लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    10 hrs ago
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