साभार – हिन्दी समाचार पत्र दैनिक भारतीय बस्ती 🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️ बोर्ड पर जुर्माने की चेतावनी और रवई तट की हकीकत अमहट से रवई तट तक कानून की दो तस्वीरें जनपद मुख्यालय बस्ती में प्रवेश का एक प्रमुख मार्ग अमहट पुल से होकर गुजरता है। यह पुल कुआनो नदी के ऊपर बना है और शहर की देहरी पर कदम रखते ही प्रशासनिक उपस्थिति का अहसास कराता है। पुल पार करते ही बाईं ओर हाल ही में स्थापित अमहट पुलिस चौकी और दाईं तरफ नव-निर्मित सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति उद्यान का भव्य प्रवेशद्वार दिखाई देता है। सुसज्जित हरियाली, सलीके से बने पथ और उद्घाटन का ताजा शिलापट्ट—यह सब मिलकर एक ऐसे शहर की छवि गढ़ते हैं जो विकास, अनुशासन और स्वच्छता के दावों के साथ आगे बढ़ रहा है। उद्यान से सटे एक प्राचीन शिव मंदिर और सामने बनी धर्मशाला की दीवार पर टंगा बड़ा फ्लैक्स बोर्ड इस छवि को कानूनी मजबूती देता है। बोर्ड पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय कार्यालय बस्ती की "आवश्यक सूचना" अंकित है। इसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली में योजित ओ०ए० नं० 613/2022 (एम०ए० सं० 57/2025) राम मिलन साहनी बनाम स्टेट ऑफ यू०पी० व अन्य में 26 जुलाई 2024 को पारित आदेश का हवाला है। आदेश स्पष्ट करता है कि सड़क किनारे, नदियों, जलमार्गों, आर्द्रभूमि, झीलों, नालों, पंचायत या राज्य भूमि तथा विभिन्न प्राधिकरणों के स्वामित्व वाली भूमि पर ठोस अपशिष्ट डालना पूर्णतः प्रतिबंधित है। प्रथम उल्लंघन पर 5,000 रुपये और पुनरावृत्ति पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना; बल्क अपशिष्ट उत्पादकों—होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, मैरिज हॉल, गेस्ट हाउस, संस्थान—पर 25,000 से 50,000 रुपये तक का पर्यावरणीय दंड। भुगतान न होने पर भू-राजस्व की भांति वसूली का प्रावधान भी दर्ज है। भाषा कठोर है, चेतावनी साफ है और संदेश निर्विवाद—नदी और सार्वजनिक भूमि पर कचरा डालना अब अपराध है। लेकिन शहर की कहानी इस फ्लैक्स पर समाप्त नहीं होती। अमहट से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर, बस्ती सदर विकासखंड के पग्राम पंचायत कोइलपुरा की उत्तरी सीमा पर बहती रवई नदी एक दूसरी तस्वीर सामने रखती है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार यह नदी रामायण काल से जुड़ी है; कहा जाता है कि इसके जल का उद्गम श्रवण कुमार के माता-पिता के अश्रुओं से हुआ। आस्था की यह कथा नदी को केवल जलधारा नहीं, बल्कि भावनात्मक धरोहर का दर्जा देती है। नदी तट के आसपास राज्य सरकार द्वारा संचालित एक वृहद गौशाला है, उसके बगल समय माता मंदिर और ठीक सामने नगर पालिका परिषद बस्ती द्वारा स्थापित एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर। कागजों में यह केंद्र ठोस अपशिष्ट के पृथक्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निस्तारण की आधुनिक व्यवस्था का प्रतीक है। परंतु जमीनी हकीकत में यहां खुले में पड़ा मिश्रित कचरा, प्लास्टिक की उड़ती थैलियां, सड़ांध और बिखरे अवशेष दिखाई देते हैं। नदी के किनारे और धार्मिक स्थल की छाया में कूड़े का यह अंबार उस फ्लैक्स पर लिखे हर शब्द से प्रश्न करता है। यह विरोधाभास केवल सौंदर्य या नैतिकता का प्रश्न नहीं, बल्कि कानून और क्रियान्वयन की खाई का संकेत है। जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण का आदेश पूरे उत्तर प्रदेश में लागू है, तो क्या नदी तट पर खुले में कचरा जमा होना उसी आदेश का उल्लंघन नहीं है? यदि नियम सड़क किनारे कूड़ा डालने पर प्रतिबंध लगाते हैं, तो क्या एमआरएफ सेंटर के नाम पर अनियंत्रित ढेर लगाना नियमों की भावना के विरुद्ध नहीं? यहां प्रश्न किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि जवाबदेही की समूची शृंखला का है—निगरानी किसकी, कार्रवाई किसकी और जवाबदेही किसकी? ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वे स्रोत पर कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करें, डोर-टू-डोर कलेक्शन की व्यवस्था करें और एमआरएफ केंद्रों को वैज्ञानिक ढंग से संचालित करें। वैज्ञानिक संचालन का अर्थ है—ढंके हुए शेड, रिसाव (लीचेट) नियंत्रण, नियमित परिवहन, सूखे-गीले कचरे का पृथक्करण और आसपास के पर्यावरण की सुरक्षा। यदि नदी तट पर मिश्रित कचरा खुले में पड़ा है, तो यह न केवल नियमों की भावना के विरुद्ध है, बल्कि जल (प्रदूषण निवारण) अधिनियम, 1974 की मूल अवधारणा—जल स्रोतों की रक्षा—के भी विपरीत है। पर्यावरणीय दृष्टि से देखें तो स्थिति चिंताजनक है। खुले में पड़ा ठोस अपशिष्ट वर्षा के दौरान रिसाव उत्पन्न करता है, जो भूजल में मिल सकता है। प्लास्टिक और हल्का कचरा हवा या पानी के बहाव से सीधे नदी में पहुंच सकता है। गौशाला की निकटता पशुओं के स्वास्थ्य पर जोखिम बढ़ाती है; कई बार पशु प्लास्टिक या विषाक्त पदार्थ निगल लेते हैं। धार्मिक स्थल के आसपास सड़ांध और मच्छरों का प्रकोप सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। नदी, जो लोककथा में करुणा और त्याग का प्रतीक है, आधुनिक लापरवाही की साक्षी बन जाती है। यहां प्रशासनिक विरोधाभास और तीखा हो उठता है। अमहट पुल के पास लगे फ्लैक्स पर जुर्माने की चेतावनी है—संदेश यह कि सार्वजनिक भूमि और नदी तट पर कूड़ा डालना अस्वीकार्य है। दूसरी ओर रवई तट पर, उसी प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत, कूड़े का ढेर दिखाई देता है। क्या नियम केवल नागरिकों और निजी संस्थानों के लिए हैं? यदि स्थानीय निकाय स्वयं संचालन में चूक करे, तो दंड का प्रावधान किस पर लागू होगा? जांच और जुर्माने का अधिकार जिस संस्था के पास है, यदि वही संस्था संचालन में विफल हो, तो निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी? यह प्रश्न केवल बस्ती का नहीं, बल्कि शहरी शासन की विश्वसनीयता का है। आंकड़ों की भाषा में बात करें तो नगर क्षेत्रों में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले ठोस अपशिष्ट की मात्रा लगातार बढ़ रही है। यदि स्रोत-स्तर पर पृथक्करण प्रभावी न हो, तो एमआरएफ सेंटर पर दबाव बढ़ता है और कचरा खुले में जमा होने लगता है। ऐसे में जुर्माने की चेतावनी से अधिक आवश्यक है प्रणालीगत सुधार। पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है—पिछले एक वर्ष में कितने जुर्माने लगाए गए, कितनी राशि वसूल हुई, एमआरएफ सेंटर की क्षमता क्या है और प्रतिदिन कितना कचरा वहां आता है—ये सूचनाएं सार्वजनिक डोमेन में हों तो नागरिक विश्वास बढ़ेगा। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियां यदि नियमित रूप से प्रकाशित हों, तो निगरानी स्वतः सुदृढ़ होगी। स्थानीय निवासियों की आवाज भी इस बहस का हिस्सा है। कोइलपुरा के आसपास रहने वाले लोग बरसात में बदबू और मच्छरों की शिकायत करते हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालु स्वच्छता की अपेक्षा रखते हैं। गौशाला से जुड़े लोग पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ये आवाजें बताती हैं कि मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है। जब आस्था-स्थल और नदी-तट के बीच कूड़े का ढेर खड़ा हो, तो यह केवल नियमों का नहीं, सामूहिक संवेदना का भी उल्लंघन है। समाधान की दिशा स्पष्ट है, यदि इच्छाशक्ति हो। एमआरएफ सेंटर को वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप विकसित करना, ढंके हुए प्लेटफॉर्म और लीचेट प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना, नियमित परिवहन सुनिश्चित करना और स्रोत पर पृथक्करण को कड़ाई से लागू करना—ये बुनियादी कदम हैं। नदी तट पर सीसीटीवी और संयुक्त निरीक्षण टीम—जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और नागरिक प्रतिनिधि शामिल हों—नियमित निगरानी कर सकती है। निरीक्षण रिपोर्ट और की गई कार्रवाई को सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड करने से पारदर्शिता बढ़ेगी। स्कूलों, स्वयंसेवी संगठनों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाकर नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा सकता है। अंततः प्रश्न यह नहीं कि नियम मौजूद हैं या नहीं; प्रश्न यह है कि नियमों की आत्मा कितनी जीवित है। अमहट के फ्लैक्स पर अंकित जुर्माना और रवई तट पर पड़ा कूड़ा—इन दोनों के बीच की दूरी केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और नैतिक भी है। यदि नदी की धारा को स्वच्छ रखना है, यदि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा बचानी है, यदि नागरिकों का कानून पर विश्वास कायम रखना है, तो बोर्ड पर लिखी चेतावनी को जमीन पर उतारना होगा। अन्यथा जुर्माने की स्याही सूखती रहेगी और नदी का जल प्रश्न पूछता रहेगा—क्या आदेश केवल फ्लैक्स तक सीमित हैं, या वे सचमुच हमारे शहर की दिशा तय करेंगे? ✍️ अखिल कुमार यादव
साभार – हिन्दी समाचार पत्र दैनिक भारतीय बस्ती 🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️🗞️ बोर्ड पर जुर्माने की चेतावनी और रवई तट की हकीकत अमहट से रवई तट तक कानून की दो तस्वीरें जनपद मुख्यालय बस्ती में प्रवेश का एक प्रमुख मार्ग अमहट पुल से होकर गुजरता है। यह पुल कुआनो नदी के ऊपर बना है और शहर की देहरी पर कदम रखते ही प्रशासनिक उपस्थिति का अहसास कराता है। पुल पार करते ही बाईं ओर हाल ही में स्थापित अमहट पुलिस चौकी और दाईं तरफ नव-निर्मित सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति उद्यान का भव्य प्रवेशद्वार दिखाई देता है। सुसज्जित हरियाली, सलीके से बने पथ और उद्घाटन का ताजा शिलापट्ट—यह सब मिलकर एक ऐसे शहर की छवि गढ़ते हैं जो विकास, अनुशासन और स्वच्छता के दावों के साथ आगे बढ़ रहा है। उद्यान से सटे एक प्राचीन शिव मंदिर और सामने बनी धर्मशाला की दीवार पर टंगा बड़ा फ्लैक्स बोर्ड इस छवि को कानूनी मजबूती देता है। बोर्ड पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय कार्यालय बस्ती की "आवश्यक सूचना" अंकित है। इसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली में योजित ओ०ए० नं० 613/2022 (एम०ए० सं० 57/2025) राम मिलन साहनी बनाम स्टेट ऑफ यू०पी० व अन्य में 26 जुलाई 2024 को पारित आदेश का हवाला है। आदेश स्पष्ट करता है कि सड़क किनारे, नदियों, जलमार्गों, आर्द्रभूमि, झीलों, नालों, पंचायत या राज्य भूमि तथा विभिन्न प्राधिकरणों के स्वामित्व वाली भूमि पर ठोस अपशिष्ट डालना पूर्णतः प्रतिबंधित है। प्रथम उल्लंघन पर 5,000 रुपये और पुनरावृत्ति पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना; बल्क अपशिष्ट उत्पादकों—होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, मैरिज हॉल, गेस्ट हाउस, संस्थान—पर 25,000 से 50,000 रुपये तक का पर्यावरणीय दंड। भुगतान न होने पर भू-राजस्व की भांति वसूली का प्रावधान भी दर्ज है। भाषा कठोर है, चेतावनी साफ है और संदेश निर्विवाद—नदी और सार्वजनिक भूमि पर कचरा डालना अब अपराध है। लेकिन शहर की कहानी इस फ्लैक्स पर समाप्त नहीं होती। अमहट से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर, बस्ती सदर विकासखंड के पग्राम पंचायत कोइलपुरा की उत्तरी सीमा पर बहती रवई नदी एक दूसरी तस्वीर सामने रखती है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार यह नदी रामायण काल से जुड़ी है; कहा जाता है कि इसके जल का उद्गम श्रवण कुमार के माता-पिता के अश्रुओं से हुआ। आस्था की यह कथा नदी को केवल जलधारा नहीं, बल्कि भावनात्मक धरोहर का दर्जा देती है। नदी तट के आसपास राज्य सरकार द्वारा संचालित एक वृहद गौशाला है, उसके बगल समय माता मंदिर और ठीक सामने नगर पालिका परिषद बस्ती द्वारा स्थापित एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर। कागजों में यह केंद्र ठोस अपशिष्ट के पृथक्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निस्तारण की आधुनिक व्यवस्था का प्रतीक है। परंतु जमीनी हकीकत में यहां खुले में पड़ा मिश्रित कचरा, प्लास्टिक की उड़ती थैलियां, सड़ांध और बिखरे अवशेष दिखाई देते हैं। नदी के किनारे और धार्मिक स्थल की छाया में कूड़े का यह अंबार उस फ्लैक्स पर लिखे हर शब्द से प्रश्न करता है। यह विरोधाभास केवल सौंदर्य या नैतिकता का प्रश्न नहीं, बल्कि कानून और क्रियान्वयन की खाई का संकेत है। जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण का आदेश पूरे उत्तर प्रदेश में लागू है, तो क्या नदी तट पर खुले में कचरा जमा होना उसी आदेश का उल्लंघन नहीं है? यदि नियम सड़क किनारे कूड़ा डालने पर प्रतिबंध लगाते हैं, तो क्या एमआरएफ सेंटर के नाम पर अनियंत्रित ढेर लगाना नियमों की भावना के विरुद्ध नहीं? यहां प्रश्न किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि जवाबदेही की समूची शृंखला का है—निगरानी किसकी, कार्रवाई किसकी और जवाबदेही किसकी? ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वे स्रोत पर कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करें, डोर-टू-डोर कलेक्शन की व्यवस्था करें और एमआरएफ केंद्रों को वैज्ञानिक ढंग से संचालित करें। वैज्ञानिक संचालन का अर्थ है—ढंके हुए शेड, रिसाव (लीचेट) नियंत्रण, नियमित परिवहन, सूखे-गीले कचरे का पृथक्करण और आसपास के पर्यावरण की सुरक्षा। यदि नदी तट पर मिश्रित कचरा खुले में पड़ा है, तो यह न केवल नियमों की भावना के विरुद्ध है, बल्कि जल (प्रदूषण निवारण) अधिनियम, 1974 की मूल अवधारणा—जल स्रोतों की रक्षा—के भी विपरीत है। पर्यावरणीय दृष्टि से देखें तो स्थिति चिंताजनक है। खुले में पड़ा ठोस अपशिष्ट वर्षा के दौरान रिसाव उत्पन्न करता है, जो भूजल में मिल सकता है। प्लास्टिक और हल्का कचरा हवा या पानी के बहाव से सीधे नदी में पहुंच सकता है। गौशाला की निकटता पशुओं के स्वास्थ्य पर जोखिम बढ़ाती है; कई बार पशु प्लास्टिक या विषाक्त पदार्थ निगल लेते हैं। धार्मिक स्थल के आसपास सड़ांध और मच्छरों का प्रकोप सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। नदी, जो लोककथा में करुणा और त्याग का प्रतीक है, आधुनिक लापरवाही की साक्षी बन जाती है। यहां प्रशासनिक विरोधाभास और तीखा हो उठता है। अमहट पुल के पास लगे फ्लैक्स पर जुर्माने की चेतावनी है—संदेश यह कि सार्वजनिक भूमि और नदी तट पर कूड़ा डालना अस्वीकार्य है। दूसरी ओर रवई तट पर, उसी प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत, कूड़े का ढेर दिखाई देता है। क्या नियम केवल नागरिकों और निजी संस्थानों के लिए हैं? यदि स्थानीय निकाय स्वयं संचालन में चूक करे, तो दंड का प्रावधान किस पर लागू होगा? जांच और जुर्माने का अधिकार जिस संस्था के पास है, यदि वही संस्था संचालन में विफल हो, तो निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी? यह प्रश्न केवल बस्ती का नहीं, बल्कि शहरी शासन की विश्वसनीयता का है। आंकड़ों की भाषा में बात करें तो नगर क्षेत्रों में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले ठोस अपशिष्ट की मात्रा लगातार बढ़ रही है। यदि स्रोत-स्तर पर पृथक्करण प्रभावी न हो, तो एमआरएफ सेंटर पर दबाव बढ़ता है और कचरा खुले में जमा होने लगता है। ऐसे में जुर्माने की चेतावनी से अधिक आवश्यक है प्रणालीगत सुधार। पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है—पिछले एक वर्ष में कितने जुर्माने लगाए गए, कितनी राशि वसूल हुई, एमआरएफ सेंटर की क्षमता क्या है और प्रतिदिन कितना कचरा वहां आता है—ये सूचनाएं सार्वजनिक डोमेन में हों तो नागरिक विश्वास बढ़ेगा। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियां यदि नियमित रूप से प्रकाशित हों, तो निगरानी स्वतः सुदृढ़ होगी। स्थानीय निवासियों की आवाज भी इस बहस का हिस्सा है। कोइलपुरा के आसपास रहने वाले लोग बरसात में बदबू और मच्छरों की शिकायत करते हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालु स्वच्छता की अपेक्षा रखते हैं। गौशाला से जुड़े लोग पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ये आवाजें बताती हैं कि मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है। जब आस्था-स्थल और नदी-तट के बीच कूड़े का ढेर खड़ा हो, तो यह केवल नियमों का नहीं, सामूहिक संवेदना का भी उल्लंघन है। समाधान की दिशा स्पष्ट है, यदि इच्छाशक्ति हो। एमआरएफ सेंटर को वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप विकसित करना, ढंके हुए प्लेटफॉर्म और लीचेट प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना, नियमित परिवहन सुनिश्चित करना और स्रोत पर पृथक्करण को कड़ाई से लागू करना—ये बुनियादी कदम हैं। नदी तट पर सीसीटीवी और संयुक्त निरीक्षण टीम—जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और नागरिक प्रतिनिधि शामिल हों—नियमित निगरानी कर सकती है। निरीक्षण रिपोर्ट और की गई कार्रवाई को सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड करने से पारदर्शिता बढ़ेगी। स्कूलों, स्वयंसेवी संगठनों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाकर नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा सकता है। अंततः प्रश्न यह नहीं कि नियम मौजूद हैं या नहीं; प्रश्न यह है कि नियमों की आत्मा कितनी जीवित है। अमहट के फ्लैक्स पर अंकित जुर्माना और रवई तट पर पड़ा कूड़ा—इन दोनों के बीच की दूरी केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और नैतिक भी है। यदि नदी की धारा को स्वच्छ रखना है, यदि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा बचानी है, यदि नागरिकों का कानून पर विश्वास कायम रखना है, तो बोर्ड पर लिखी चेतावनी को जमीन पर उतारना होगा। अन्यथा जुर्माने की स्याही सूखती रहेगी और नदी का जल प्रश्न पूछता रहेगा—क्या आदेश केवल फ्लैक्स तक सीमित हैं, या वे सचमुच हमारे शहर की दिशा तय करेंगे? ✍️ अखिल कुमार यादव
- संत कबीर नगर । जिले के खलीलाबाद स्थित बाजार में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर में दिनभर रौनक देखने को मिली। शुभ मुहूर्त के चलते लोगों ने जमकर खरीदारी की, जिससे सर्राफा बाजार में विशेष चहल-पहल बनी रही। हालांकि सोने-चांदी के बढ़ते दामों का असर भी देखने को मिला, लेकिन इसके बावजूद खरीदारों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। गोला बाजार स्थित स्वर्गीय सीताराम सर्राफ की पुरानी प्रतिष्ठित दुकान रजनीश कुमार अश्वनी कुमार सर्राफ पर ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ रही। दुकान के प्रोपराइटर रजनीश कुमार वर्मा (प्रिंस वर्मा) ने बताया कि इस बार अक्षय तृतीया पर ग्राहकों ने जरूरत और बजट को ध्यान में रखते हुए खरीदारी की। महंगाई के चलते बड़े और भारी आभूषणों की अपेक्षा छोटे, हल्के और किफायती गहनों की मांग अधिक रही। उन्होंने बताया कि विवाह (लग्न) का सीजन शुरू होने के कारण भी लोगों ने खरीदारी में रुचि दिखाई। जिन लोगों को गहनों की तत्काल आवश्यकता थी, उन्होंने ही ज्यादा खरीदारी की। सोने के लगातार बढ़ते दामों के कारण बाजार पर दबाव जरूर है, लेकिन फिर भी त्योहार का असर बाजार में साफ नजर आया। उनके के अनुसार सोने-चांदी के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव से कारोबार प्रभावित हो रहा है। कीमतों की अनिश्चितता के कारण व्यापारियों को भी असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, अक्षय तृतीया के अवसर पर पूरे बाजार में मेले जैसा माहौल रहा और लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार खरीदारी कर त्योहार को उत्साहपूर्वक मनाया। #AkshayaTritiya #अक्षयतृतीया #GoldShopping #Jewellery #SantKabirNagar #Khalilabad #UPNews #FestivalVibes #GoldPrice #TrendingNews #BreakingNews #MarketUpdate #WeddingSeason #ShoppingTime #FestiveSeason #GoldDemand #HindiNews #NewsUpdate #liveuponenews1
- यह चित्र रेलवे क्रॉसिंग रोड का है। यह क्रॉसिंग रोड , ग्राम पंचायत भगवानपुर के गांव करमयनी के पश्चिम दिशा में बनाया जा रहा है। ग्राम पंचायत भगवानपुर, ब्लॉक बघौली तहसील खलीलाबाद जनपद संत कबीर नगर उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आता है । मुख्य मार्ग पर रेलवे ब्रिज बनाने के कारण रास्ते को डाइवर्ट कर दिया गया है । डाइवर्ट किए गए रास्ते के ऊपर इतनी धूल मिट्टी जमा हो गया है की गाड़ियों को पता ही नहीं चलता है कि कहां पर गड्ढा है कहां पर अच्छा है? गाड़ियां पलटने का डर रहता है। धूल उड़ाने के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है। आसपास के लोग परेशान रहते हैं। शासन प्रशासन को संज्ञान में लेना चाहिए और इस रास्ते के ऊपर कंक्रीट डालकर पानी का फुहारा मारना चाहिए। जिससे कंक्रीट और धूल बैठ जाए अथवा अन्य विकल्प की तलाश करना अति आवश्यक है । ग्राम पंचायत के इस रास्ते का सुधार किया जाए । ग्राम पंचायत भगवानपुर के जनता की यही मांग है।1
- धनघटा। पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा अभय नाथ मिश्र द्वारा थाना महुली पर समस्त विवेचकों एवं पुलिस कर्मियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। बैठक में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पांडेय, समस्त चौकी प्रभारी, हल्का प्रभारी, एसएसआई एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे। बैठक के दौरान लंबित विवेचनाओं के निस्तारण की समीक्षा करते हुए उन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आईजीआरएस (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों, जनसुनवाई, ई-समन, साक्ष्य ऐप (Sakshya App) तथा यक्ष ऐप (Yaksh App) के उपयोग एवं प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। क्षेत्राधिकारी द्वारा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि सभी प्रकरणों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करें तथा शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान करें। बैठक के दौरान थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।4
- पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर श्री संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा द्वारा थाना महुली पर समीक्षा बैठक आयोजित* पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर *श्री संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा श्री अभय नाथ मिश्र द्वारा थाना महुली पर समस्त विवेचकों एवं पुलिस कर्मियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। बैठक में थानाध्यक्ष महुली श्री दुर्गेश कुमार पांडेय, समस्त चौकी प्रभारी, हल्का प्रभारी, एसएसआई एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।* बैठक के दौरान लंबित विवेचनाओं के निस्तारण की समीक्षा करते हुए उन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आईजीआरएस (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों, जनसुनवाई, ई-समन, साक्ष्य ऐप (Sakshya App) तथा यक्ष ऐप (Yaksh App) के उपयोग एवं प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। क्षेत्राधिकारी महोदय द्वारा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि सभी प्रकरणों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करें तथा शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान करें। बैठक के दौरान थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।2
- भजन कीर्तन कार्यक्रम का हुआ आयोजन, झूमे भक्तगण मेंहदावल, संत कबीर नगर। रविवार को मेंहदावल विधानसभा के विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी के आवास पर भगवान परशुराम की जयंती को बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी द्वारा विगत चार वर्षो से अपने निज निवास करमा कला में परशुराम जयंती का आयोजन किया जा रहा हैं। विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी द्वारा अक्षय तृतीया के पावन काल पर विप्र समाज की उपस्थिति में भगवान परशुराम जी के चित्र का पूजन अर्चन कर जन्मजयंती मनाई गयी। ब्राह्मण शिरोमणि भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर विधायक आवास पर पूजन अर्चन, भजन कीर्तन व प्रसाद वितरण कार्यक्रम दोपहर से ही चलता रहा। विधायक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि भगवान परशुराम मानवता को बचाने के लिए सदैव आगे रहे। उन्होंने पापियों के सर्वनाश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।भगवान शिव व भगवान विष्णु के संयुक्त अवतार माने जाते हैं। शिव जी से उन्होंने संहार लिया व विष्णु जी उन्होंने पालक के गुण प्राप्त किए। शिव जी से कई अद्वितीय शस्त्र प्राप्त हुए, इन्ही में से एक भगवान शिव का परशु जिन्हे फरसा या कुल्हाड़ी भी कहते हैं। इस दौरान आये बाल रूप में वटुक के मनमोहक रूप को देखकर उपस्थित जनसमुदाय हर्षित रहा। गुरुकुल के आये वटुक बच्चो को विधायक द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन भूपेंद्र त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी, चन्द्रशेखर बर्नवाल, विंध्याचल सिंह, हेमंत मिश्रा, हेमन्त चौधरी, दीपक शुक्ला, सुभाष राय, दिवाकर त्रिपाठी, संगम पाण्डेय, रविशंकर मिश्र, शैलेंद्र पांडेय, मनोज जायसवाल, गुड्डू शर्मा, प्रशांत मिश्रा आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।4
- Post by BALRAM1
- खाकी वर्दी में एक पुलिसकर्मी द्वारा एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को सरेआम पीटना और अपमानित करना कानून की किताब के मुताबिक सही है? रसूख वालों के लिये अलग कानून और शोषितों के लिए अलग कानून? क्या जवाबदेही तय होगी? हमारी मांग है कि इस पुलिसकर्मी पर न सिर्फ FIR होना चाहिये बल्कि अनुशासनात्मक कार्यवाही भी होना चाहिए।1
- संतकबीरनगर। पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा अभय नाथ मिश्र द्वारा थाना महुली पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पांडेय सहित समस्त विवेचक, चौकी प्रभारी, हल्का प्रभारी, एसएसआई एवं अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान क्षेत्राधिकारी ने लंबित विवेचनाओं की गहन समीक्षा करते हुए उनके शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। साथ ही आईजीआरएस (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों, जनसुनवाई, ई-समन, साक्ष्य ऐप (Sakshya App) तथा यक्ष ऐप (Yaksh App) के उपयोग एवं प्रगति का भी विस्तार से मूल्यांकन किया गया। क्षेत्राधिकारी ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान करने पर विशेष जोर दिया। इसके अतिरिक्त थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। #SantKabirNagar #MahuliThana #PoliceMeeting #ReviewMeeting #UPPolice #LawAndOrder #IGRS #SakshyaApp #YakshApp #PublicGrievance #CrimeControl #PoliceUpdate #BreakingNews #HindiNews #liveuponenews1
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “मिशन शक्ति फेज-5.0” के अंतर्गत पु पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन में महिला सशक्तिकरण, एंटी रोमियो अभियान तथा महिलाओं/बालिकाओं की सुरक्षा एवं जागरूकता के संबंध में दिए गए निर्देशों के क्रम में थाना मेंहदावल अन्तर्गत थाना मेंहदावल व मेंहदावल कस्बा तथा थाना बेलहरकला अन्तर्गत सांथा बाजार में नुक्कड़ नाटक आयोजित कर जागरूकता कार्यक्रम किया गया । नुक्कड़ नाटक के माध्यम से “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” एवं वूमेन पावर लाइन 1090 के संबंध में संदेश देकर बालिकाओं एवं महिलाओं को मिशन शक्ति फेज-5.0 के तहत जागरूक किया गया तथा साइबर सुरक्षा एवं विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों के बारे में जानकारी दी गई । कार्यक्रम के दौरान महिलाओं व बालिकाओं को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, निराश्रित महिला पेंशन योजना तथा मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आदि के बारे में जानकारी देते हुए उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया । साथ ही महिलाओं एवं बालिकाओं को विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों जैसे वूमेन पावर लाइन-1090, पुलिस आपातकालीन सेवा-112, एम्बुलेंस सेवा-108, चाइल्ड लाइन-1098, स्वास्थ्य सेवा-102, महिला हेल्पलाइन-181, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 तथा साइबर हेल्पलाइन-1930 के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान गुड टच-बैड टच, घरेलू हिंसा तथा साइबर अपराधों से बचाव के संबंध में भी जागरूक किया गया तथा पम्पलेट वितरित किए गए ।4