डाला डेरा, दौड़ाए पंपसेट; तीसरे दिन भी जलभराव से जंग लड़ते रहे तीन गांव फतेहाबाद : मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के निरीक्षण के तीसरे दिन भी ग्राम पंचायत धिमश्री के उपग्राम बांसबले, नगला मुक्ता और झारपुरा में जलभराव की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। गुरुवार को एडीओ पंचायत नरेंद्र पाल सिंह ने तीनों गांवों में सचिव और ग्राम प्रधान के साथ डेरा डालकर राहत कार्यों की निगरानी की। उनकी देखरेख में ट्रैक्टर पर पंपसेट लगाकर लगातार पानी की निकासी कराई गई। ग्रामीणों ने बताया कि बीच-बीच में हो रही बारिश के बावजूद पंपसेट से पानी निकालने के कारण कई स्थानों पर जलभराव कम हुआ है, लेकिन अनेक गलियां और संपर्क मार्ग अब भी पानी में डूबे हैं। सबसे अधिक परेशानी बांसबले में देखने को मिली, जहां तालाब लबालब होने से आवागमन प्रभावित रहा। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि तालाबों पर अतिक्रमण, वर्षों से सफाई नहीं होने और बरसात के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण हर साल यही हालात बन जाते हैं। फिलहाल प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है और पंपसेट के माध्यम से लगातार पानी की निकासी कर जलभराव कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
डाला डेरा, दौड़ाए पंपसेट; तीसरे दिन भी जलभराव से जंग लड़ते रहे तीन गांव फतेहाबाद : मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के निरीक्षण के तीसरे दिन भी ग्राम पंचायत धिमश्री के उपग्राम बांसबले, नगला मुक्ता और झारपुरा में जलभराव की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। गुरुवार को एडीओ पंचायत नरेंद्र पाल सिंह ने तीनों गांवों में सचिव और ग्राम प्रधान के साथ डेरा डालकर राहत कार्यों की निगरानी की। उनकी देखरेख में ट्रैक्टर पर पंपसेट लगाकर लगातार पानी की निकासी कराई गई। ग्रामीणों ने बताया कि बीच-बीच में हो रही बारिश के बावजूद पंपसेट से पानी निकालने के कारण कई स्थानों पर जलभराव कम हुआ है, लेकिन अनेक गलियां और संपर्क मार्ग अब भी पानी में डूबे हैं। सबसे अधिक परेशानी बांसबले में देखने को मिली, जहां तालाब लबालब होने से आवागमन प्रभावित रहा। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि तालाबों पर अतिक्रमण, वर्षों से सफाई नहीं होने और बरसात के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण हर साल यही हालात बन जाते हैं। फिलहाल प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है और पंपसेट के माध्यम से लगातार पानी की निकासी कर जलभराव कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
- डाला डेरा, दौड़ाए पंपसेट; तीसरे दिन भी जलभराव से जंग लड़ते रहे तीन गांव फतेहाबाद : मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के निरीक्षण के तीसरे दिन भी ग्राम पंचायत धिमश्री के उपग्राम बांसबले, नगला मुक्ता और झारपुरा में जलभराव की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। गुरुवार को एडीओ पंचायत नरेंद्र पाल सिंह ने तीनों गांवों में सचिव और ग्राम प्रधान के साथ डेरा डालकर राहत कार्यों की निगरानी की। उनकी देखरेख में ट्रैक्टर पर पंपसेट लगाकर लगातार पानी की निकासी कराई गई। ग्रामीणों ने बताया कि बीच-बीच में हो रही बारिश के बावजूद पंपसेट से पानी निकालने के कारण कई स्थानों पर जलभराव कम हुआ है, लेकिन अनेक गलियां और संपर्क मार्ग अब भी पानी में डूबे हैं। सबसे अधिक परेशानी बांसबले में देखने को मिली, जहां तालाब लबालब होने से आवागमन प्रभावित रहा। स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि तालाबों पर अतिक्रमण, वर्षों से सफाई नहीं होने और बरसात के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण हर साल यही हालात बन जाते हैं। फिलहाल प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है और पंपसेट के माध्यम से लगातार पानी की निकासी कर जलभराव कम करने का प्रयास किया जा रहा है।1
- आगरा ब्रेकिंग!!! मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहुंचे आगरा,,, नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स यूपी के 78वें स्थापना दिवस में हुए शामिल। बोले- भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और चुनाव आयोग सबसे बड़ी चुनाव प्रबंधन संस्था। 95 करोड़ से अधिक मतदाताओं के निष्पक्ष चुनाव का निभाया जाता है दायित्व। आगरा के उद्योगपतियों और सामाजिक संगठनों की भूमिका की जमकर सराहना। कहा- लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जागरूक मतदाता होता है। एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाना बताया। नागरिकों से मतदान करने और तथ्यात्मक जानकारी पर भरोसा करने की अपील। चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह संविधान और निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत होने की बात कही। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर पात्र नागरिक से मतदान का आह्वान। बाइट .ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार...1
- फिरोजाबाद RTO में अचानक निरीक्षण, खामियां मिलने पर दिए दिशा निर्देश1
- धौलपुर जिले की ग्राम पंचायत नुनहेरा में प्रशासनिक अनदेखी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का गुस्सा अब एक बड़े जन-आंदोलन में बदल चुका है। धौलपुर जिले की ग्राम पंचायत नुनहेरा में प्रशासनिक अनदेखी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का गुस्सा अब एक बड़े जन-आंदोलन में बदल चुका है। धौलपुर पिछले 10 वर्षों से बुनियादी नागरिक सुविधाओं और बदहाल व्यवस्था से पीड़ित नुनहेरा के ग्रामीणों की आवाज को जब शासन-प्रशासन ने अनसुना कर दिया, तो आज राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नुनहेरा के छात्र-छात्राओं ने एक अनोखा और ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन कर पूरे जिले को हिला कर रख दिया।"अंधे कानून" के खिलाफ बच्चों का ऐतिहासिक शंखनादआज नुनहेरा स्कूल के छोटे-छोटे मासूम बच्चों ने अपनी आंखों पर काली पट्टी बांधी और हाथों में राष्ट्रध्वज तिरंगा लेकर बीच सड़क पर प्रदर्शन किया। बच्चों की आंखों पर बंधी यह काली पट्टी इस बात का सीधा प्रतीक थी कि धौलपुर का प्रशासन और यहाँ का सिस्टम पूरी तरह अंधा हो चुका है, जबकि हाथों में लहराता तिरंगा यह दिखा रहा था कि देश के भविष्य लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। बच्चों का यह रूप देखकर पूरा क्षेत्र दहल उठा और ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। करन परमार इस भ्रष्टाचार को 1 साल से जारी रखा है लिखित संघर्षइस आंदोलन की अगुवाई कर रहे युवायो ने धौलपुर प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि पिछले 10 सालों से यहाँ की जनता नारकीय जीवन जी रही है। वे खुद पिछले 1 वर्ष से लगातार ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर लिखित और मौखिक रूप से प्रशासन, शासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अवगत करा रहे हैं, लेकिन हर बार उनके ज्ञापनों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।🔥 जनप्रतिनिधियों की दबंगई और दादागिरी के कारण रुके विकास कार्यकरन परमार ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर सीधे और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि "यहाँ के जनप्रतिनिधियों की दबंगई, तानाशाही और दादागिरी के कारण आज तक जनता का कोई भी काम नहीं हो सका है।" जब भी ग्रामीण अपने हक की आवाज उठाते हैं, तो जनप्रतिनिधियों की दादागिरी के बल पर उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है। सरपंच और सेक्रेटरी के पास जनता के विकास कार्य के पैसों का कोई हिसाब नहीं है। निष्पक्ष जांच हो, वरना अधिकारियों की मिलीभगत साफकरन परमार ने धौलपुर उच्चाधिकारियों से बेहद कड़े शब्दों में आग्रह किया है कि पूरे मामले की तुरंत और निष्पक्ष जांच की जाए। परमार ने सीधे तौर पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए चेतावनी दी है कि "यदि यहाँ के दबंग जनप्रतिनिधियों, सरपंच और सेक्रेटरी के खिलाफ किसी निष्पक्ष एजेंसी से पारदर्शी जांच नहीं कराई गई, तो यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि इस महाभ्रष्टाचार में धौलपुर प्रशासन के उच्च अधिकारियों की भी पूरी मिलीभगत और सांठगांठ है।" 7 तारीख को महा-बहिष्कार: स्कूल पर होगी तालाबंदी ग्रामीणों ने प्रशासन को 3 दिन का दिया था अल्टीमेटम खत्म होने के बाद अब आगामी 7 तारीख को नुनहेरा स्कूल पर ऐतिहासिक तालाबंदी की तैयारी पूरी हो चुकी है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक इस भ्रष्ट तंत्र की जांच नहीं होती और समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक स्कूल, अस्पताल और मुख्य रास्ते का पूर्ण रूप से बहिष्कार जारी रहेगा। इस उग्र आंदोलन और चक्काजाम के दौरान यदि कोई भी कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ धौलपुर प्रशासन और लापरवाह अधिकारियों की होगी।4
- फिरोजाबाद: जब से @mayorkamini जी ने @NagarFirozabad की कमान संभाली है। तब से भ्रष्टाचार, अनिमियता, कमीशनखोरी, लापरवाही चरम पर है। 2 माह पहले बनी सड़क ध्वस्त, चहते ठेकेदारों को कार्य देने वाली महापौर सिर्फ लीपापोती कर भ्रष्टाचार को दबाने का कार्य करेगी। जिम्मेदार फिर बच निकलेंगे1
- बारिश में पक्के मकान की दीवार ढही, बाल-बाल बचा परिवार तहसीलदार ने जर्जर मकानों में रहने वालों से बरतने को कहा सतर्कता फतेहाबाद : लगातार हो रही बारिश के बीच गुरुवार को थाना क्षेत्र के गांव खण्डेर टिकटपुरा में एक बड़ा हादसा टल गया। गांव निवासी जनवेद सिंह पुत्र केवल सिंह के पक्के मकान की एक दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। घटना के समय परिवार के सदस्य सुरक्षित स्थान पर थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। गनीमत रही कि हादसे के समय दीवार के आसपास कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों के अनुसार लगातार बारिश के कारण दीवार कमजोर हो गई थी, जिसके चलते यह हादसा हुआ। लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र में जर्जर और पुराने मकानों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। तहसीलदार शेखर मिश्रा ने लोगों से अपील की है कि जिन मकानों की दीवारों में दरारें हैं या जो जर्जर स्थिति में हैं, उनमें रहने से बचें और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल राजस्व विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें, ताकि समय रहते आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।1
- राजाखेड़ा के धोबटी मोहल्ले की पोखर पर अतिक्रमण, पक्के निर्माण से पानी की निकासी अवरुद्ध मानसून की पहली बारिश के साथ ही राजाखेड़ा के धोबटी मोहल्ले में जलभराव की समस्या सामने आ गई है। आरोप है कि मोहल्ले वाली ऐतिहासिक पोखर पर अतिक्रमण कर पक्के मकान और दुकानें बना दी गई हैं, जिससे पानी की निकासी पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है। धोबटी मोहल्ले में स्थित पोखर बरसात का पानी इकट्ठा करने का प्राकृतिक स्रोत थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में पोखर की जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण हुआ और अब वहां पक्के निर्माण खड़े हो गए हैं। बारिश का पानी निकासी नहीं होने के कारण मोहल्ले की गलियों और घरों में भर रहा है। इससे मच्छर, गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासी विष्णु सिंह ने कहा, "पहले पोखर में पानी भरकर निकल जाता था। अब अतिक्रमण की वजह से पानी वापस घरों में आ जाता है। 2 दिन की बारिश में ही पूरे मोहल्ले में 1-1 फीट पानी भर गया था। लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण के दौरान नगर पालिका और राजस्व विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। गरीब लोगों को कुछ पट्टे जारी किए गए थे लेकिन उन पट्टों के आधार पर ही उन लोगों ने 100-100 फीट तक अतिक्रमण कर लिया, जिससे पोखर का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बदल गया , शिकायत करने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। अब बारिश में दिक्कत बढ़ गई है। नगर पालिका अधिशासी अधिकारी ने कहा, हमें शिकायत मिली है। टीम भेजकर अतिक्रमण का सर्वे कराया जाएगा। जो भी अवैध निर्माण पोखर की जमीन पर पाया गया उसे नियमानुसार हटाया जाएगा। तहसीलदार दीप्ति देव ने कहा, "पोखर की जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। राजस्व टीम से नपती करवाई जाएगी। अतिक्रमण पाए जाने पर धारा 91 के तहत कार्रवाई की जाएगी। मोहल्लेवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पोखर की नपती कराकर अवैध निर्माण तुरंत हटाए जाएं, नालों की सफाई करवाई जाए और भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए पक्की चारदीवारी बनाई जाए। राजाखेड़ा के धोबटी मोहल्ले की पोखर पर अतिक्रमण, पक्के निर्माण से पानी की निकासी अवरुद्ध मानसून की पहली बारिश के साथ ही राजाखेड़ा के धोबटी मोहल्ले में जलभराव की समस्या सामने आ गई है। आरोप है कि मोहल्ले वाली ऐतिहासिक पोखर पर अतिक्रमण कर पक्के मकान और दुकानें बना दी गई हैं, जिससे पानी की निकासी पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है। धोबटी मोहल्ले में स्थित पोखर बरसात का पानी इकट्ठा करने का प्राकृतिक स्रोत थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में पोखर की जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण हुआ और अब वहां पक्के निर्माण खड़े हो गए हैं। बारिश का पानी निकासी नहीं होने के कारण मोहल्ले की गलियों और घरों में भर रहा है। इससे मच्छर, गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासी विष्णु सिंह ने कहा, "पहले पोखर में पानी भरकर निकल जाता था। अब अतिक्रमण की वजह से पानी वापस घरों में आ जाता है। 2 दिन की बारिश में ही पूरे मोहल्ले में 1-1 फीट पानी भर गया था। लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण के दौरान नगर पालिका और राजस्व विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। गरीब लोगों को कुछ पट्टे जारी किए गए थे लेकिन उन पट्टों के आधार पर ही उन लोगों ने 100-100 फीट तक अतिक्रमण कर लिया, जिससे पोखर का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बदल गया , शिकायत करने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। अब बारिश में दिक्कत बढ़ गई है। नगर पालिका अधिशासी अधिकारी ने कहा, हमें शिकायत मिली है। टीम भेजकर अतिक्रमण का सर्वे कराया जाएगा। जो भी अवैध निर्माण पोखर की जमीन पर पाया गया उसे नियमानुसार हटाया जाएगा। तहसीलदार दीप्ति देव ने कहा, "पोखर की जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। राजस्व टीम से नपती करवाई जाएगी। अतिक्रमण पाए जाने पर धारा 91 के तहत कार्रवाई की जाएगी। मोहल्लेवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पोखर की नपती कराकर अवैध निर्माण तुरंत हटाए जाएं, नालों की सफाई करवाई जाए और भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए पक्की चारदीवारी बनाई जाए।1