सांसद चंद्रशेखर- पूर्व गर्लफ्रेंड रोहिणी के समर्थक भिड़े विनोद साहनी के परिवार स लोकेशन बाराबंकी रवि रावत की रिपोर्ट बाराबंकी में सांसद चंद्रशेखर और उनकी पूर्व गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी के समर्थक भिड़ गए। हुआ यूं कि चंद्रशेखर लखनऊ से 1 हजार कार्यकर्ताओं के साथ गोंडा में कारोबारी विनोद साहनी हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे। इसका पता चलते ही पुलिस अलर्ट हो गई। रामनगर में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने बैरिकेडिंग कर चंद्रशेखर को आगे बढ़ने से रोक दिया। इससे वह और उनके कार्यकर्ता भड़क गए। पुलिस से उनकी धक्कामुक्की भी हुई। गुस्से में चंद्रशेखर ने कहा मुझे बाराबंकी में क्यों रोका जा रहा है? पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोगों ने हमारी गाड़ियों और कार्यकर्ताओं पर पत्थर-जूते फेंके। इससे लगता है कि प्रदेश में दलितों-पिछड़ों को न जीते जी न्याय मिलेगा, न मरने के बाद। इसी बीच चंद्रशेखर की पूर्व गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी के सैकड़ों समर्थक पहुंच गए। उन्होंने 'चंद्रशेखर रावण मुर्दाबाद' और 'रोहिणी घावरी को इंसाफ दो' के नारे लगाए। उन्होंने कहा- पहले यहां इंसाफ दें, फिर वहां जाएंगे। इसके बाद चंद्रशेखर और रोहिणी के समर्थकों में बहस होने लगी। देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई। दोनों पक्षों को संभालने में पुलिस के पसीने छूट गए। पुलिस ने रोहिणी के समर्थकों को किसी तरह हटाया। चंद्रशेखर को पुलिस निरीक्षण भवन के पास ले आई। वहां सांसद सड़क के बीच बैठ गए। 20-25 मिनट बाद वह कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ लौट गए। इधर, पुलिस रोहिणी और चंद्रशेखर के कार्यकर्ताओं को संभालने में लगी थी। इसी दौरान विधायक पल्लवी पटेल पुलिस को चकमा देकर वहां से निकल गईं। पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने कहा-
सांसद चंद्रशेखर- पूर्व गर्लफ्रेंड रोहिणी के समर्थक भिड़े विनोद साहनी के परिवार स लोकेशन बाराबंकी रवि रावत की रिपोर्ट बाराबंकी में सांसद चंद्रशेखर और उनकी पूर्व गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी के समर्थक भिड़ गए। हुआ यूं कि चंद्रशेखर लखनऊ से 1 हजार कार्यकर्ताओं के साथ गोंडा में कारोबारी विनोद साहनी हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे। इसका पता चलते ही पुलिस अलर्ट हो गई। रामनगर में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने बैरिकेडिंग कर चंद्रशेखर को आगे बढ़ने से रोक दिया। इससे वह और उनके कार्यकर्ता भड़क गए। पुलिस से उनकी धक्कामुक्की भी हुई। गुस्से में चंद्रशेखर ने कहा मुझे बाराबंकी में क्यों रोका जा रहा है? पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोगों ने हमारी गाड़ियों और कार्यकर्ताओं पर पत्थर-जूते फेंके। इससे लगता है कि प्रदेश में दलितों-पिछड़ों को न जीते जी न्याय मिलेगा, न मरने के बाद। इसी बीच चंद्रशेखर की पूर्व गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी के सैकड़ों समर्थक पहुंच गए। उन्होंने 'चंद्रशेखर रावण मुर्दाबाद' और 'रोहिणी घावरी को इंसाफ दो' के नारे लगाए। उन्होंने कहा- पहले यहां इंसाफ दें, फिर वहां जाएंगे। इसके बाद चंद्रशेखर और रोहिणी के समर्थकों में बहस होने लगी। देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई। दोनों पक्षों को संभालने में पुलिस के पसीने छूट गए। पुलिस ने रोहिणी के समर्थकों को किसी तरह हटाया। चंद्रशेखर को पुलिस निरीक्षण भवन के पास ले आई। वहां सांसद सड़क के बीच बैठ गए। 20-25 मिनट बाद वह कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ लौट गए। इधर, पुलिस रोहिणी और चंद्रशेखर के कार्यकर्ताओं को संभालने में लगी थी। इसी दौरान विधायक पल्लवी पटेल पुलिस को चकमा देकर वहां से निकल गईं। पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने कहा-
- थाने के अंदर ही भिड़ गए दो सिपाही! कुर्सी से उठाकर जमीन पर पटका, जमकर हुई मारपीट; VIDEO वायरल होते ही दोनों लाइन हाजिर बाराबंकी। अनुशासन के लिए पहचाने जाने वाले पुलिस विभाग से जुड़ा एक सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। बड्डूपुर थाने के कार्यालय के अंदर दो सिपाहियों के बीच जमकर मारपीट हुई। मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा तो दोनों सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया। साथ ही विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक, सामने आया सीसीटीवी फुटेज करीब 20 दिन पुराना बताया जा रहा है। वीडियो बड्डूपुर थाना कार्यालय के अंदर का है। फुटेज में दिखाई दे रहा है कि एक सिपाही कार्यालय में कुर्सी पर बैठे दूसरे सिपाही के पास पहुंचता है और अचानक उसे जमीन पर गिराकर मारपीट शुरू कर देता है। देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई होने लगती है। थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने किसी तरह दोनों को अलग कराया। घटना की जानकारी पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय तक पहुंचने के बाद दोनों सिपाहियों हरि बाबू और अमरीश कुमार को लाइन हाजिर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि दोनों सिपाहियों का पहले ही बड्डूपुर थाने से अन्यत्र स्थानांतरण किया जा चुका था। वहीं, थानाध्यक्ष मनोज सोनकर ने बताया कि दोनों सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है और मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।1
- बाढ़ पीड़ितों के दर्द में मरहम लगाने पहुंचे समाजसेवी सूफियान हनफी, बांटी राहत सामग्री सूरतगंज बाराबंकी बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ग्रामीणों का हाल जानने और उनकी मदद के लिए समाजसेवी सूफियान हनफी हेतमापुर गांव पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने बाढ़ प्रभावितों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना और जरूरतमंदों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया। सूफियान हनफी ने ग्रामीणों को ढांढस बंधाते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। मातृभूमि से गहरा जुड़ाव विशेष बात यह है कि समाजसेवी सूफियान हनफी का इस क्षेत्र से गहरा और पुराना पारिवारिक रिश्ता है। वह इसी गांव हेतमापुर के मूल निवासी हैं। उनके दादा स्वर्गीय मोहम्मद असलम का जन्म भी इसी मिट्टी में हुआ था। अपनी जड़ों से जुड़े होने के कारण गांव पर आई इस प्राकृतिक आपदा के समय उन्होंने तुरंत अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए राहत कार्य शुरू किया। हर संभव सहायता का आश्वासन पीड़ितों से बातचीत के दौरान सूफियान ने कहा कि इस कठिन समय में वह और उनकी टीम ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भोजन, पानी और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और संकट की इस घड़ी में हर स्तर पर सहायता जारी रहेगी। इस मौके पर उनके साथ वरिष्ठ पत्रकार शाहरुख, नावेद गाजी, अशफाक गाजी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति और सहयोगी मौजूद रहे, जिन्होंने राहत सामग्री वितरण में अपना योगदान दिया।4
- चंद्रशेखर रावण को रामनगर में रोकने पर हंगामा, दोनों पक्षों में नारेबाजी बाराबंकी में पुलिस की मौजूदगी में पथराव और जूते फेंकने का आरोप, निरीक्षण भवन के पास सड़क पर बैठे नगीना सांसद कृष्ण कुमार शुक्ल बाराबंकी। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद रविवार को विनोद साहनी के परिजनों से मिलने गोंडा जा रहे थे। रामनगर पहुंचने पर बाराबंकी और रामनगर पुलिस ने उन्हें बुढ़वल मोड़ के पास रोक दिया। इस दौरान मौके पर दोनों पक्षों के सैकड़ों समर्थक आमने-सामने आ गए और काफी देर तक नारेबाजी तथा बहस होती रही। एक तरफ चंद्रशेखर आजाद के समर्थक थे, जबकि दूसरी ओर अमित सिंह, आजाद राघवेंद्र सिंह सहित सैकड़ों लोगों ने ‘चंद्रशेखर आजाद मुर्दाबाद’ और ‘रोहिणी घावड़ी को इंसाफ दो’ जैसे नारे लगाए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को अलग किया। चंद्रशेखर आजाद को निरीक्षण भवन के पास ले जाया गया, जहां उन्होंने सड़क के बीच बैठकर अपना विरोध जताया। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात प्रभावित रहा। बाराबंकी में रोके जाने पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जब बाराबंकी में कोई विवाद नहीं था तो उन्हें क्यों रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोगों ने उनकी गाड़ियों और कार्यकर्ताओं पर पत्थर व जूते फेंके। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से यह महसूस होता है कि प्रदेश में दलितों और पिछड़ों को न जीते जी न्याय मिल रहा है और न मरने के बाद। आजाद ने कहा कि वह विनोद साहनी से करीब दो महीने पहले मिले थे। उन्होंने बताया कि विनोद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे और उन्होंने उन्हें मेहनत से तैयारी करने की सलाह दी थी। विनोद की हत्या के मामले में उन्होंने सीबीआई जांच, परिवार की सुरक्षा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की। उन्होंने कहा कि तीन आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन छह-सात अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई। उनकी मांग है कि निष्पक्ष जांच हो, जिसमें कोई निर्दोष न फंसे और कोई दोषी बचने न पाए। आजाद ने कहा कि वह गेस्ट हाउस में बैठकर राजनीति नहीं करना चाहते, बल्कि पीड़ित परिवार से मिलना उनका फर्ज है। उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है और आलोचना करने पर किसी की हत्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने परिवार को न्याय मिलने तक आवाज उठाते रहने की बात कही। करीब 1 घंटे तक पीडब्ल्यूडी के सामने डामर सड़क मार्ग के बीच चंद्रशेखर बैठे रहे उसके बाद उनको बैक फुट होना पड़ा और वह लखनऊ की तरफ लौट गए अपने कार्यकर्ताओं के साथ। इस दौरान सीओ गरिमा पंत,सहित दर्जनों पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।1
- बाराबंकी में विजय यज्ञ और भव्य शोभायात्रा | श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का लिया संकल्प बाराबंकी में विजय यज्ञ और भव्य शोभायात्रा | श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का लिया संकल्प1
- इंडिया लाइव न्यूज़:- अंकित कुमार, के साथ देखें ताजा अपडेट लखनऊ विश्वविद्यालय में सुरक्षा कर्मियों पर संकट, नौकरी जाने से महिला गार्ड का छलका दर्द लखनऊ विश्वविद्यालय में सुरक्षा कर्मियों पर संकट, नौकरी जाने से महिला गार्ड का छलका दर्द बिना पूर्व सूचना हटाए जाने का आरोप, परिवार चलाने की चिंता में रो पड़ी महिला सुरक्षाकर्मी; न्याय की गुहार इंडिया लाइव न्यूज़ | क्राइम डेस्क | लखनऊ रिपोर्ट: अंकित कुमार लखनऊ विश्वविद्यालय से सुरक्षा कर्मियों की नौकरी जाने का मामला अब तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में वर्षों से सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे कई कर्मचारियों को अचानक ड्यूटी से हटाए जाने का मामला सामने आया है। कर्मचारियों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में करीब 40 से लेकर लगभग 100 सुरक्षाकर्मियों के प्रभावित होने की बात कही गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व लिखित सूचना या नोटिस के अचानक काम से हटा दिया गया, जिसके बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कैमरे के सामने छलका महिला सुरक्षाकर्मी का दर्द मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में नौकरी से हटाई गई एक महिला सुरक्षाकर्मी भावुक होकर अपनी पीड़ा बताती नजर आ रही हैं। महिला का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक विश्वविद्यालय में पूरी जिम्मेदारी के साथ काम किया, लेकिन अचानक नौकरी चले जाने से परिवार की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ेगा। उनका सवाल है कि नौकरी नहीं रही तो घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई कैसे चलेगी? महिला सुरक्षाकर्मी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ-साथ कुलसचिव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है।1
- राजधानी लखनऊ सिर्फ एलडीए ही नहीं पुलिस भी करा रही है अवैध निर्माण. बिल्डिंग बनने के समय महीनों पहले जेई ने तहरीर, जब बिल्डिंग की दुकानें बन गईं, बिक गईं... उच्च स्तर पर फोटो समेत शिकायत हुई तब अमीनाबाद थाने में दर्ज कर ली गई एफआईआर... पुलिस ने खूब लिया लाभ... मामला अमीनाबाद थाने के लाटूश रोड पर विद्यांत कॉलेज के सामने एलडीए द्वारा सील करके पुलिस अभिरक्षा में सौंपी गई बिल्डिंग का है ... अब सील की गई बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है... जब काम चल रहा था तब एलडीए के जेई, पुलिस को तहरी देते रहे, फोन करते रहेलेकिन....काम चलता रहा.. जब आपसी बंदरबांट से बिल्डिंग बन गई, दुकानें बन गईं तब जनता अदालत और अधिकारियों से शिकायत हुई तब बीती 12 सितंबर को बिल्डर फैज़ान के खिलाफ je की शिक़ायत पर एफआईआर दर्ज कर ली/1
- “चंद्रशेखर के काफिले पर हमला! पुलिस पर संगीन आरोप... CBI जांच की मांग, कल तक कार्रवाई नहीं तो आंदोलन” बाराबंकी। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के काफिले पर कथित हमले का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। चंद्रशेखर आजाद ने पुलिस-प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि काफिले पर हमला पुलिस की मौजूदगी में हुआ और इसके बावजूद मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। चंद्रशेखर आजाद ने मामले को लेकर अपर पुलिस अधीक्षक को दो अलग-अलग तहरीरें दी हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर कल तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो आजाद समाज पार्टी उग्र आंदोलन करेगी। बुढ़वल में रोके जाने का आरोप चंद्रशेखर आजाद के मुताबिक, वह गोंडा में विनोद साहनी के परिवार से मुलाकात करने जा रहे थे। इसी दौरान बाराबंकी के बुढ़वल में पुलिस ने उनके काफिले को रोक लिया। उनका आरोप है कि पुलिस ने धार्मिक आयोजन का हवाला देते हुए उन्हें दूसरी तरफ से निकलने के लिए कहा। चंद्रशेखर का दावा है कि इसी दौरान उनकी नजर कुछ ऐसे लोगों पर पड़ी, जो कथित तौर पर तख्तियों के पीछे पत्थर लेकर खड़े थे। ‘एसआई ने इशारा किया और शुरू हो गया पथराव’ चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि गोंडा पुलिस के एक एसआई ने उनकी तरफ इशारा किया, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने उनके काफिले पर पथराव शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान एक पत्थर उनकी गाड़ी पर भी लगा। चंद्रशेखर के मुताबिक, उन्होंने गाड़ी से उतरकर मौके पर मौजूद लोगों से सवाल किया कि आखिर उन पर हमला क्यों किया गया। इसके बाद उन्होंने सीओ को मौके पर बुलवाया, लेकिन आरोप है कि सीओ की ओर से मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ‘पुलिस से मदद नहीं मिली तो वापस लौटे’ चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि जब उन्हें पुलिस से मदद मिलती नहीं दिखाई दी तो उन्होंने वहां से वापस लौटने का फैसला किया। लेकिन उनका आरोप है कि वापसी के दौरान पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने उनके काफिले को निशाना बनाया। इस कथित हमले में एक वाहन के क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई है। चंद्रशेखर ने कई अन्य गाड़ियों में भी तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि हमले में उनके एक कार्यकर्ता की आंख में नुकीली चीज लगी, जबकि एक अन्य कार्यकर्ता के सिर में चोट आई है। पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल पूरे मामले में चंद्रशेखर आजाद ने पुलिस की भूमिका को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर पुलिस मौके पर मौजूद थी, तो फिर उनके काफिले पर हमला कैसे हुआ? उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस के पीछे कथित तौर पर कौन लोग खड़े थे और उन्हें वहां किसने खड़ा किया था? चंद्रशेखर ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह सामने आ सके कि काफिले पर हमला करने वाले लोग कौन थे और घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका क्या रही। CBI जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी चंद्रशेखर आजाद ने मामले की जांच स्थानीय पुलिस के बजाय सीबीआई से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने विनोद साहनी और राम नयन को न्याय दिलाने की भी मांग की है। साथ ही पुलिस-प्रशासन को चेतावनी देते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा है कि अगर कल तक इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो आजाद समाज पार्टी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी। अब बड़ा सवाल यही है कि चंद्रशेखर आजाद के लगाए आरोपों पर पुलिस प्रशासन क्या कार्रवाई करता है? क्या कथित हमले की निष्पक्ष जांच होगी? और क्या इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका की भी जांच की जाएगी? फिलहाल, इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आ रहा है।1
- सुशांत गोल्फ सिटी के खुर्दही बाजार के पास 14 चक्का ट्रक समेत नकदी लूट ले जाने का आरोप सुशांत गोल्फ सिटी के खुर्दही बाजार के पास 14 चक्का ट्रक समेत नकदी लूट ले जाने का आरोप*। *बुधवार देर रात ट्रक चालक फूलचंद पाठक ट्रांसपोर्टनगर से हैदरगढ़ जा रहे थे* *खुर्दही पहुंचते ही दो गाड़ियों से आए बदमाशों ने उन्हें घेर लिया।* *मारपीट कर ट्रक और रुपये लूटकर ले जाने का आरोप।* *पीड़ित पक्ष एचसीएल चौकी पहुंचा, आरोप है दिनभर बैठाए रखा गया, कार्रवाई नहीं हुई।* *ट्रांसपोर्ट की ओर से चंद्रप्रकाश दीक्षित ने एसीपी गोसाईंगंज ऋषभ यादव से की शिकायत*1
- कजरी तीज पर शिवमय हुआ सफदरगंज, धूमधाम से निकली शिव की बारात ब्यूरो चीफ बाराबंकी सफदरगंज कजरी तीज के पावन पर्व पर सफदरगंज कस्बा पूरी तरह शिवमय हो गया। सोमवार को परंपरा के अनुसार सफदरगंज के प्राचीन शिव मंदिर से शाम करीब 4 बजे भगवान भोलेनाथ की भव्य शिव बारात बड़ी धूमधाम से चिलौकी गांव के लिए रवाना हुई। शिव बारात में उमड़ा आस्था का सैलाब - शिव बारात में भगवान शंकर के गणों के रूप में श्रद्धालु सजे-धजे ऊंट, घोड़ा और बग्घियों पर सवार होकर चल रहे थे। बारात में हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों सहित दूर-दराज से आए श्रद्धालु मौजूद रहे। अबीर-गुलाल उड़ाते, गोला-तमाशा छुड़ाते और डीजे की धुन पर डांस करते श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मार्ग में कई श्रद्धालु शरबत और भांग की चुस्की का आनंद लेते भी नजर आए। कल्याणी नदी पर बैरियर लगाकर पुलिस रही मुस्तैद - विशाल बारात को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सफदरगंज थानाध्यक्ष अमर कुमार चौरसिया अपनी पूरी टीम के साथ सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रहे। कल्याणी नदी के पास पुलिस ने बैरियर लगाकर वाहनों का प्रवेश रोका, ताकि बारात सकुशल निकल सके। पुलिस की मुस्तैदी से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। चिलौकी में हुआ भव्य स्वागत - चिलौकी गांव पहुंचने पर ग्राम प्रधान सोमनाथ राजपूत व ग्रामवासियों ने फूल-मालाओं से बारातियों का जोरदार स्वागत किया। ग्रामीणों ने बताया कि कजरी तीज के उपलक्ष्य में शिव बारात निकालने की यह वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसे हर वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।1